एनसीईआरटी समाधन कक्षा 11 गणित अध्याय 12

एनसीईआरटी समाधन कक्षा 11 गणित अध्याय 12 त्रिविमीय ज्यामिति का परिचय हिंदी मीडियम में सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ से प्राप्त करें। कक्षा 11 गणित पाठ 12 के हल पीडीएफ और विडियो के रूप में विद्यार्थी निशुल्क डाउनलोड कर सकते हैं।

कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 12.1 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 12.2 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 12.3 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित विविध प्रश्नावली 12 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित के लिए एनसीईआरटी समाधान

एनसीईआरटी समाधन कक्षा 11 गणित अध्याय 12

त्रिविमीय ज्यामिति

त्रिविमीय ज्यामिति को निम्नलिखित बिंदुओं से समझ सकते हैं:

    • (i) त्रिविमीय ज्यामिति में, समकोणिक कार्तीय निर्देशांक निकाय में निर्देशांक अक्ष तीन परस्पर लंबवत रेखाएँ होती हैं। अक्षों को x, y और z-अक्ष कहा जाता है।
    • (ii) अक्षों के युग्म द्वारा निर्धारित तीन निर्देशांक तल होते हैं। इन तलों को xy, yz और zx तल कहा जाता है तथा ये त्रिविमीय आकाश को आठ भागों में बाँटते हैं जिन्हें अष्टांश कहते हैं।
    • (iii) अंतरिक्ष में किसी बिंदु P के निर्देशांक क्रमशः तीन परस्पर लंबवत निर्देशांक तलों xy, yz और zx पर P से लंबवत दूरियाँ हैं। बिंदु P के निर्देशांकों को त्रिक x, y, z के रूप में लिखा जाता है।
    • (iv) किसी बिंदु के निर्देशांक संबंधित निर्देशांक अक्षों पर बिंदु से लंबों के पाद की मूलबिंदु से दूरी भी हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

1637 ई॰ में वैश्लेषिक ज्यामिति के जनक रेने डेस्कार्टस (1596 -1650 A. D.) ने तलीय ज्यामिति के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किया, इनके सहआविष्कारक पिअर्रे फेर्मट (1601 – 1665 A. D.) और ला हिरे (1640 – 1718 A. D.) ने भी इस क्षेत्र में कार्य किया। यद्यपि इन लोगों के कार्यों में त्रिविमीय ज्यामिति के संबंध में सुझाव है, परंतु विशद विवेचन नहीं है। 1715 ई० में जे. बेर्नौल्ली (1667 – 1748 A. D.) ने लिएब्नित्ज़ को लिखे पत्र में तीन निर्देशांक तलों का परिचय उल्लेखित है जिसे हम आज प्रयोग कर रहे हैं।

सर्वप्रथम सन 1700 ई० में फ्रेंच ऐकेडमी को प्रस्तुत किए गए अन्तोइन्ने पैरेंट (1666 – 1716 A. D.) के लेख में वैश्लेषिक ठोस ज्यामिति के विषय में विस्तृत विवेचन है। एल. यूलेर, (1707 – 1783 A. D.) ने सन् 1748 में प्रकाशित अपनी पुस्तक ‘ज्यामिति का परिचय’ के दूसरे खंड के परिशिष्ट के 5वें अध्याय में त्रिविमीय निर्देशांक ज्यामिति का सुव्यवस्थित एंव क्रमबद्ध वर्णन प्रस्तुत किया। उन्नीसवीं शताब्दी के मध्य के बाद ही ज्यामिति का तीन से अधिक आयामों में विस्तार किया गया, जिसका सर्वोत्तम प्रयोग आइंस्टीन के सापेक्षवाद के सिद्धांत में स्थान-समय अनुक्रमण में द्रष्टव्य है।

कक्षा 11 गणित पाठ 12 का परिचय

प्रस्तुत अध्याय में त्रिविमीय ज्यामिति पर आधारित तीन प्रश्नावलियां तथा एक विविध प्रश्नावली दी गई है। प्रश्नावली 12.1 में कुल 4 प्रश्न हैं तथा इससे सम्बंधित अनुच्छेदों में त्रिविमीय अंतरिक्ष में निर्देशांक्ष और निर्देशांक-तल, अंतरिक्ष में एक बिंदु के निर्देशांक, साथ में विषय को अच्छी तरह से समझने के लिए उदाहरण भी दिए गए हैं।

प्रश्नावली 12.2 में 5 प्रश्न हैं जो कि निम्नलिखित अनुच्छेद दो बिंदुओं के बीच की दूरी पर आधारित हैं। इसी प्रकार प्रश्नावली 12.3 में विभाजन सूत्र पर आधारित 5 प्रश्न पूछे गए हैं। प्रश्नावलियों में दिए गए प्रश्नों को हल करने से पहले उदाहरणों को समझना अत्यंत आवश्यक है।