एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 गणित अध्याय 7

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कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 7.1 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 7.2 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 7.3 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 7.4 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित विविध प्रश्नावली 7 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 11 गणित के लिए एनसीईआरटी समाधान

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 गणित अध्याय 7

कक्षा 11 गणित पाठ 7 क्रमचय और संचय

क्रमचय का अर्थ हैं सजाना अर्थात दी हुई वस्तुओं से कुछ या सभी वस्तुओं को सजाने के भिन्न-भिन्न कर्मों को क्रमचय कहते हैं। तथा n विभिन्न वस्तुओं में से एक समय में r वस्तुओं को लेकर बनने वाले संचयों की संख्या, जिसे प्रतीक ⁿCᵣ से प्रकट करते हैं।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

भारत में क्रमचय और संचय की संकल्पना की अवधारणा जैन धर्म के अभ्युदय और संभवतः और पहले हुई है। तथापि इसका श्रेय जैनियों को ही प्राप्त है, जिन्होंने ‘विकल्प’ शीर्षक के अंतर्गत इस विषय को गणित के स्वसंपन्न प्रकरण के रूप में विकसित किया। जैनियों में महावीर (सन् 850 ई० के लगभग) संभवतः विश्व के प्रथम गणितज्ञ हैं, जिन्होंने क्रमचय और संचय के सूत्रें को देकर श्रेयस्कर कार्य किया। ईसा के पूर्व छठी शताव्दी में सुश्रुत ने अपने औषधि विज्ञान की सुप्रसिद्ध पुस्तक सुश्रुत-संहिता में उद्घोषित किया कि 6 विभिन्न रसों से एक साथ एक, दो, —, आदि लेकर 63 संचय बनाए जा सकते हैं।

प्रथम ग्रंथ जिसमें क्रमचय और संचय विषय पर पूर्ण और क्रमबद्ध कार्य आर्श कांजेक्टंडी है जिसका लेखन स्विस गणितज्ञ जैकब बरनौली (1654-1705 ई०) ने किया। इसका प्रकाशन उनके मरणोपरांत 1713 ई० में हुआ। इस पुस्तक में मुख्यतः क्रमचय और संचय के सिद्धांतों का ठीक उसी प्रकार वर्णन है जैसा कि हम आजकल करते हैं।

कक्षा 11 गणित पाठ 7 का परिचय

प्रस्तुत अध्याय में क्रमचय और संचय के बारे में वर्णन किया गया है। अध्याय में कुल 4 प्रश्नावलियां है तथा एक विविध प्रश्नावली हैं। शुरू की तीन प्रश्नावलियों में क्रमचय के विभिन्न स्वरूपों के बारे में बताया गया है तथा प्रश्नावली 7.4 में संचय के बारे में वर्णित किया गया है।

प्रश्नावली 7.1 पर आधारित अनुच्छेद

प्रश्नावली से सम्बंधित अनुच्छेद में गणना का आधारभूत सिद्धांत, संख्याओं या अक्षरों का विन्यास कितने प्रकार से किया जा सकता है।

प्रश्नावली 7.2 पर आधारित अनुच्छेद

इस प्रश्नावली और इस पर आधारित अनुच्छेद में क्रमचय, क्रमगुणित संकेतन का वर्णन किया गया है तथा उदहारण के द्वारा समझाया गया है।

प्रश्नावली 7.3 पर आधारित अनुच्छेद

इस अनुच्छेद में क्रमचय के लिए सूत्र की व्युत्पत्ति ⁿPᵣ के रूप में की गई है। विभिन्न प्रमेयों के माध्यम से क्रमचय के बनने वाले विभिन्न विन्यासो का वर्णन है।

प्रश्नावली 7.4 पर आधारित अनुच्छेद

इस अनुच्छेद में संचय के बारे वर्णन किया गया है तथा संचय और क्रमचय के बीच के सम्बंध को परिभाषित किया गया है।