एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 14 अनारिकाया जिज्ञासा

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 14 चतुर्दश: पाठ: अनारिकाया: जिज्ञासा के प्रश्न उत्तर विस्तार से यहाँ से प्राप्त किए गए सकते हैं। ये समाधान सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड सभी के लिए लाभदायक हैं और शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के अनुसार संशोधित किए गए हैं। यहाँ दिए गए संस्कृत से हिंदी अनुवाद का प्रयोग करके, विद्यार्थी पूरे पाठ को आसानी से समझ कर, प्रश्न उत्तर स्वयं भी कर सकते हैं और उत्तर लिखने में कोई परेशानी हो तो संस्कृत एनसीईआरटी समाधान का प्रयोग करें।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत चतुर्दश: पाठ: अनारिकाया: जिज्ञासा

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 14 अनारिकाया: जिज्ञासा का हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
बालिकाया: अनारिकाया: मनसि सर्वदा महती जिज्ञासा भवति। बालिका अनारिका के मन में सदा बड़ा कुतूहल (जानने की इच्छा) होता है।
अत: सा बहून्‌ प्रश्नान्‌ पृच्छति। इसलिए वह बहुत प्रश्न पूछती है।
तस्या: प्रश्नै: सर्वेषां बुद्धि: चक्रवत्‌ भ्रमति।उसके प्रश्नों से सबकी बुद्धि पहिए के समान घूमती है।
प्रात: उत्थाय सा अन्वभवत्‌ यत्‌ तस्या: मन: प्रसन्नं नास्ति।सुबह उठकर उसने अनुभव किया कि उसका मन प्रसन्न (खुश) नहीं है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
मनोविनोदाय सा भ्रमितुं गृहात्‌ बहि: अगच्छत्‌।मन प्रसन्न करने के लिए वह घूमने के लिए घर से बाहर गई।
भ्रमणकाले सा अपश्यत्‌ यत्‌ मार्गा: सुसज्जिता: सन्ति।घूमने के समय में उसने देखा कि रास्ते सजे हुए हैं।
सा चिन्तयति – किमर्थम्‌ इयं सज्जा?चिंता प्रकट करते हुए यहाँ क्या कारण है?
सा अस्मरत्‌ यत्‌ अद्य तु मन्त्री आगमिष्यति।इस प्रकार सोचती हुई, उसने याद किया कि आज तो मन्त्री आएँगे।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
स: अत्र किमर्थम्‌ आगमिष्यति इति विषये तस्या: जिज्ञासा: प्रारब्धा:। वे किसलिए आएँगे इस विषय में उसका कोतूहल आरम्भ हुआ।
गृहम्‌ आगत्य सा पितरम्‌ अपृच्छत्‌- ‘‘पित:! मन्त्री किमर्थम्‌ आगच्छति?’’आकर उसने पिता जी से पूछा- “पिता जी ! मन्त्री किसलिए आ रहे हैं।”
पिता अवदत्‌-‘‘पुत्रि! नद्या: उपरि नवीन: सेतु: निर्मित:।पिता जी बोले—पुत्री ! ” नदी के उपर जो पुल बना है।
तस्य उद्‌घाटनार्थं मन्त्री आगच्छति।’’उसके उद्घाटन के लिए मन्त्री आ रहे हैं।”
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
अनारिका पुन: अपृच्छत्‌-‘‘पित:! किं मन्त्री सेतो: निर्माणम्‌ अकरोत्‌?अनारिका ने फिर पूछा–“पिता जी! क्या मन्त्री ने पुल का निर्माण किया था?”
पिता अकथयत्‌-‘‘न हि पुत्रि! सेतो: निर्माणं कर्मकरा: अकुर्वन्‌।’’पिता ने कहा – “नहीं पुत्री ! पुल का निर्माण मज़दूरों ने किया था।”
पुन: अनारिकाया: प्रश्न: आसीत्‌-‘‘यदि कर्मकरा: सेतो: निर्माणम्‌ अकुर्वन्‌, तदा मन्त्री किमर्थम्‌ आगच्छति?’’फिर अनारिका का प्रश्न था – “यदि मज़दूरों ने पुल बनाया था, तब मन्त्री किसलिए आ रहे हैं?”
पिता अवदत्‌-‘‘यतो हि स: अस्माकं देशस्य मन्त्री।’’पिता जी बोले-“क्योंकि, वे हमारे देश के मन्त्री हैं।’’
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
‘‘पित:! सेतो: निर्माणाय प्रस्तराणि कुत: आयान्ति? ‘‘पिता जी! पुल बनाने के लिए पत्थर कहाँ से आते हैं?
किं तानि मन्त्री ददाति?’’क्या वे मन्त्री देते हैं?”
विरक्तभावेन पिता उदतरत्‌-‘‘अनारिके! प्रस्तराणि जना: पर्वतेभ्य: आनयन्ति।’’पिता ने उदासीन भाव से उत्तर दिया, “अनारिका! पत्थर लोग पहाड़ों से लाते हैं।”
‘‘पित:! तर्हि किम्‌, एतदर्थं मन्त्री धनं ददाति?इसके लिए मन्त्री धन देते हैं?
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तस्य पार्श्वे धनानि कुत: आगच्छन्ति?’’उनके पास धन कहाँ से आता है ?”
एतान्‌ प्रश्नान्‌ श्रुत्वा पिताऽवदत्‌-‘‘अरे! प्रजा: धनं प्रयच्छन्ति।’’इन प्रश्नों को सुनकर पिता बोले “अरे! प्रजा सरकार को धन देती है।”
विस्मिता अनारिका पुन: अपृच्छत्‌-‘‘पित:! कर्मकरा: पर्वतेभ्य: प्रस्तराणि आनयन्ति।आश्चर्यचकित अनारिका ने फिर पूछा “पिता जी! यदि मजदूर पहाड़ों से पत्थर लाते हैं।
ते एव सेतुं निर्मान्ति। प्रजा: धनं ददति।तथापि सेतो: उद्‌घाटनार्थं मन्त्री किमर्थम्‌ आगच्छति?’’
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
पिता अवदत्‌-‘‘प्रथममेव अहम्‌ अकथयम्‌ यत्‌ स: देशस्य मन्त्री अस्ति।पिता बोले, “पहले ही मैंने कहा था कि वे ही देश के मन्त्री हैं।
स जनप्रतिनिधि: अपि अस्ति।वे जनप्रतिनिधि हैं।
जनताया: धनेन निर्मितस्य सेतो: उद्‌घाटनाय जनप्रतिनिधि: आमन्त्रित भवति।जनता के धन से निर्मित पुल के उद्घाटन के जनप्रतिनिधि को आमंत्रित किया जाता है।
चल सुसज्जिता भूत्वा विद्यालयं चल।’’चलो, तैयार होकर विद्यालय जाओ।”
अनारिकाया: मनसि इतोऽपि बहव: प्रश्ना: सन्ति।अब भी अनारिका के मन में बहुत से प्रश्न हैं।
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 14 एनसीईआरटी के प्रश्न उत्तर
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 14 के उत्तर
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