एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्‌ – चतुर्थ: पाठ: हास्यबालकविसम्मेलनम्‌ के सभी प्रश्नों के उत्तर शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के लिए संशोधित किए गए हैं। ये समाधान सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड के उन सभी छात्रों के लिए उपयोगी हैं जो एनसीईआरटी संस्कृत पाठ्यपुस्तक का प्रयोग करते हैं। वाक्य दर वाक्य पूरे पाठ का हिंदी अनुवाद भी यहाँ से प्राप्त किया जा सकता है ताकि अध्याय को समझने में आसानी हो।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत चतुर्थ: पाठ: हास्यबालकविसम्मेलनम्‌

कक्षा 7 के लिए एनसीईआरटी समाधान

iconicon

कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 हास्यबालकविसम्मेलनम्‌ का हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
सञ्चालक: – अलं कोलाहलेन।सञ्चालक-शोर करने से बस करो (शोर मत करो)।
अद्य परं हर्षस्य अवसर: यत्‌ अस्मिन्‌ कविसम्मेलने काव्यहन्तार: कालयापकाश्च भारतस्य हास्यकविधुरन्धरा: समागता: सन्ति। आज बहुत प्रसन्नता का अवसर है कि इस कवि सम्मेलन में काव्यहन्ता (काव्य को नष्ट करनेवाले) और कालयापक (समय बर्बाद करनेवाले) श्रेष्ठ हास्य कवि आए हुए हैं।
एहि, करतलध्वनिना वयम्‌ एतेषां स्वागतं कुर्म:।आओ! हम सब तालियों से इन सबका स्वागत करें।
गजाधर: – सर्वेभ्योऽरसिकेभ्यो नमो नम:।गजाधर- सब नीरस जनों को नमस्कार।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
प्रथमं तावद्‌ अहम्‌ आधुनिकं वैद्यम्‌ उद्दिश्य स्वकीयं काव्यं श्रावयामि-तब तक पहले मैं आधुनिक वैद्यों को लक्ष्य करके अपनी कविता सुनाता हूँ:
वैद्यराज! नमस्तुभ्यं यमराजसहोदरः।वैद्यराज! यमराज के भाई, आपको नमस्कार है।
यमस्तु हरति प्राणान्‌ वैद्य: प्राणान्‌ धनानि च॥ (सर्वे उच्चै: हसन्ति)यमराज तो प्राणों को ले जाता है, वैद्य प्राणों को और धन को ले जाता है। (सब जोर से हँसते हैं)
कालान्तक: – अरे! वैद्यास्तु सर्वत्र परन्तु न ते मादृशा: कुशला: जनसंख्यानिवारणे।कालान्तक–अरे! वैद्य तो सब जगह हैं, परन्तु वे जनसंख्या कम करने में मेरे जैसे निपुण नहीं हैं।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
ममापि काव्यम्‌ इदंशृण्वन्तु भवन्त:आप सब भी मेरे इस काव्य को सुनिए।
चितां प्रज्वलितां दृष्ट्‌वा वैद्यो विस्मयमागत:।चिता को जलती हुई देखकर वैद्य ने आश्चर्य किया।
नाहं गतो न मे भ्राता कस्येदं हस्तलाघवम्‌ ॥ (सर्वे पुन: हसन्ति)कि न मैं गया, न मेरा भाई, यह किसके हाथ की सफाई हैं। (सब फिर हँसते हैं)
तुन्दिल: – (तुन्दस्य उपरि हस्तम्‌ आवर्तयन्‌) तुन्दिलोऽहं भो:। तुन्दिल – (तोंद के ऊपर हाथ फेरते हुए) मैं तुन्दिल हूँ।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
ममापि इदं काव्यं श्रूयताम्‌, जीवने धार्यतां च- परान्नं प्राप्य दुर्बुद्धे! मा शरीरे दयां कुरु।अरे! मेरी भी इस कविता को सुनो और जीवन में अपनाओ-दुष्टबुद्धिवाले! दूसरे का अन्न प्राप्त करके शरीर पर दया मत करो।
परान्नं दुर्लभं लोके शरीराणि पुन: पुन: ॥ (सर्वे पुन: अट्‌टहासं कुर्वन्ति)संसार में दूसरे का अन्न दुर्लभ है। शरीर बार-बार मिलता रहता है। (सब फिर जोर से हँसते हैं)
चार्वाक: – आम्‌, आम्‌। शरीरस्य पोषणं सर्वथा उचितमेव। चावार्क–हाँ, हाँ। शरीर का पोषण हमेशा ही ठीक रहता है।
यदि धनं नास्ति, तदा ऋणं कृत्वापि पौष्टिक: पदार्थ: एव भोक्तव्य:। अगर धन नहीं (व्यक्ति के पास) कर्ज लेकर भी पौष्टिक (शरीर को बलवान बनाने वाले) पदार्थों का ही उपभोग करना चाहिए।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तथा कथयति चार्वाककविऔर चावार्क कवित कहते हैं-
यावज्जीवेत्‌ सुखं जीवेद्‌ ऋणं कृत्वा घृतं पिबेत्‌।जब तक जियो सुख से जियो (जीना चाहिए), कर्ज (उधार) लेकर भी घी पियो (पीना चाहिए)।
श्रोतार: – तर्हि ऋणस्य प्रत्यर्पणं कथम्‌?श्रोतागण – कर्ज को कैसे चुकाया जाए?
चार्वाक: – श्रूयतां मम अवशिष्टं काव्यम्‌-चावार्क – बची हुई कविता भी सुनिए-
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
घृतं पीत्वा श्रमं कृत्वा ऋणं प्रत्यर्पयेत्‌ जन: ॥घी पीकर, परिश्रम करके लोगों को कर्ज वापस कर देना चाहिए।
(काव्यपाठश्रवणेन उत्प्रेरित: एक: बालकोऽपि आशुकवितां रचयति, हासपूर्वकं च श्रावयति)(काव्य पाठ प्रेरित होकर एक बालक भी तुरंत कविता की रचना करता और हँसते सुनाता है-)
बालक: – श्रूयताम्‌, श्रूयतां भो:! ममापि काव्यम्‌- बालक-अरे सुनिए, सुनिए! मेरी भी कविता-
गजाधरं कविं चैव तुन्दिलं भोज्यलोलुपम्‌ । कालान्तकं तथा वैद्यं चार्वाकं च नमाम्यहम्‌ ॥ गजाधर कवि और खाने के लोभी तुन्दिल, (प्राण लेने वाले कालान्तक को) तथा वैद्य चावार्क को प्रणाम करता हूँ।
(काव्यं श्रावयित्वा ‘हा हा हा’ इति कृत्वा हसति। अन्ये चाऽपि हसन्ति। सर्वे गृहं गच्छन्ति।)कविता सुनाकर (बालक) ‘हा हा हा’ ऐसा करके हँसता है। दूसरे भी हँसते और सभी जाते हैं।
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 एनसीईआरटी के प्रश्न उत्तर
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 एनसीईआरटी समाधान पीडीएफ
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 4 एनसीईआरटी समाधान डाउनलोड