एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 12 विद्याधनम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 12 द्वादश: पाठ: विद्याधनम्‌ के प्रश्न उत्तर, रिक्त स्थानों का भरना, मिलान करना तथा अन्य प्रश्नों के उत्तर यहाँ से सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ दिए गए हैं। पाठ के प्रश्न उत्तर करने से पहले, अध्याय को अच्छी तरह से समझना आवश्यक है। पाठ का संस्कृत से हिंदी अनुवाद दिया गया है जो विद्यार्थियों को अध्याय समझने में सहायता करता है। पाठ को समझकर पहले सभी प्रश्नों को स्वयं करें दिक्कत होने पर ही समाधान देखें।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत द्वादश: पाठ: विद्याधनम्‌

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 12 विद्याधनम्‌ का हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
न चौरहार्यं न च राजहार्यं, न भ्रातृभाज्यं न च भारकारि ।न चोरों के द्वारा चुराने योग्य है और न राजा के द्वारा छीनने योग्य है, न भाइयों के द्वारा बाँटने योग्य है और न भार (बोझ) बढ़ाने वाली है।
व्यये कृते वर्धत एव नित्यं, विद्याधनं सर्वधनप्रधानम्‌ ॥ 1 ॥हमेशा खर्च करने पर बढ़ता ही है। विद्या का धन सब धनों में प्रमुख (सर्वोत्तम) है।
विद्या नाम नरस्य रूपमधिकं प्रच्छन्नगुप्तं धनम्‌, विद्या भोगकरी यश: सुखकरी विद्या गुरूणां गुरु: ।विद्या मनुष्य का अधिक (अच्छा) स्वरूप है, छुपा हुआ गोपनीय धन है, विद्या भोग का साधन उपलब्ध कराने वाली है, कीर्ति और सुख प्रदान कराने वाली है, विद्या गुरुओं की गुरु है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
विद्या बन्धुजनो विदेशगमने विद्या परा देवता, विद्या राजसु पूज्यते न हि धनं विद्या-विहीन: पशु: ॥ 2 ॥विद्या विदेश जाने पर बन्धु (मित्र) के समान होती है, विद्या सबसे बड़ी देवता है। विद्या राजाओं में पूजी जाती है, धन नहीं। विद्या से रहित (मनुष्य) पशु के समान होता है।
केयूरा: न विभूषयन्ति पुरुषं हारा न चन्द्रोज्ज्वला, न स्नानं न विलेपनं न कुसुमं नालङ्कता मूर्धजा: ।मनुष्य को न बाजूबन्द सुशोभित करते हैं, न चन्द्रमा के समान चमकदार हार, न स्नान, न शरीर पर सुगन्धित लेपन (चन्दन, केसर आदि), न बालों/चोटी में सजाए हुए फूल सुशोभित करते हैं।
वाण्येका समलङ्करोति पुरुषं या संस्कृता धार्यते, क्षीयन्तेऽखिलभूषणानि सततं वाग्भूषणं भूषणम्‌ ॥ 3 ॥मनुष्य को एकमात्र वाणी, भली प्रकार सुशोभित करती है, जो परिष्कृत (संस्कारयुक्त) रूप में धारण की जाती है (व्यवहार में लाई जाती है)। सभी (अन्य) आभूषण नष्ट होते हैं, (परन्तु) वाणी का आभूषण सदैव रहने वाला आभूषण है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
विद्या नाम नरस्य कीर्तिरतुला भाग्यक्षये चाश्रय:, धेनु: कामदुघा रतिश्च विरहे नेत्रं तृतीयं च सा ।विद्या वास्तव में (नाम) मनुष्य की अतुल्य कीर्ति है, भाग्यक्षय (बदकिस्मती) होने पर एक आश्रय/सहारा है। कामनापूर्ति करने वाली गाय अर्थात् कामधेनु है।
सत्कारायतनं कुलस्य महिमा रत्नैर्विना भूषणम्‌, तस्मादन्यमुपेक्ष्य सर्वविषयं विद्याधिकारं कुरु॥ 4 ॥कुल की महिमा है (बहुमूल्य) रत्नों के बिना आभूषण है। अतः अन्य सब बातों को छोड़ विद्या पर अपना प्रभुत्व कर लो।
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 12 एनसीईआरटी के उत्तर
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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 12 के प्रश्न उत्तर