एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 11 समवायो हि दुर्जय

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 11 एकादश: पाठ: समवायो हि दुर्जय: के सभी प्रश्नों के उत्तर विस्तार से यहाँ से दिए गए हैं। 7वीं संस्कृत के ये सभी समाधान सीबीएसई सत्र 2022-2023 के अनुसार संशोधित किए गए हैं। अभ्यास के प्रश्न उत्तरों के साथ साथ, संपूर्ण पाठ का संस्कृत से हिंदी अनुवाद भी दिया गया है जिसकी मदद विद्यार्थी पाठ को समझने में आसानी से ले सकते हैं। एनसीईआरटी समाधान और तथा अन्य पठन सामग्री सभी प्रयोग के लिए निशुल्क है।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत एकादश: पाठ: समवायो हि दुर्जय:

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 11 समवायो हि दुर्जय के हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
पुरा एकस्मिन्‌ वृक्षे एका चटका प्रतिवसति स्म। कालेन तस्या: सन्तति: जाता।प्राचीन काल में एक पेड़ पर एक चिड़िया रहती थी। समय से उसके बच्चे हुए।
एकदा कश्चित्‌ प्रमत्त: गज: तस्य वृक्षस्य अध: आगत्य तस्य शाखां शुण्डेन अत्रोटयत्‌।एक बार किसी मतवाले हाथी ने उस पेड़ के नीचे आकर उसकी शाखा को तोड़ दिया।
चटकाया: नीडं भुवि अपतत्‌।चिड़िया का घोंसला भूमि पर गिर गया।
तेन अण्डानि विशीर्णानि। उससे अण्डे नष्ट हो गए।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
अथ सा चटका व्यलपत्‌। अब वह चिड़िया रो रही थी।
तस्या: विलापं श्रुत्वा काष्ठकूट: नाम खग: दु:खेन ताम्‌ अपृच्छत्‌-‘‘भद्रे, किमर्थं विलपसि?’’ इति।उसका रोना सुनकर काष्ठकूट नामक पक्षी ने दुःख उससे पूछा–“भली (चिड़िया) किसलिए रो रही हो?”
चटकावदत्‌-‘‘दुष्टेनैकेन गजेन मम सन्तति: नाशिता।चिड़िया बोली–“एक दुष्ट हाथी के द्वारा मेरे बच्चे नष्ट किए गए।
तस्य गजस्य वधेनैव मम दु:खम्‌ अपसरेत्‌।’’उस हाथी की हत्या से ही मेरा दुःख दूर होगा।”
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तत: काष्ठकूट: तां वीणारवा-नाम्न्या: मक्षिकाया: समीपम्‌ अनयत्‌।तब काष्ठकूट उसको वीणारवा नामक मक्खी के पास ले गया।
तयो: वार्तां श्रुत्वा मक्षिकावदत्‌-‘‘ममापि मित्रं मण्डूक: मेघनाद: अस्ति। उन दोनों की बात को सुनकर मक्खी बोली–“मेरा भी मेघनाद नामक मेढक मित्र है।
शीघ्रं तमुपेत्य यथोचितं करिष्याम:।’’जल्दी ही उसके समीप जाकर जैसा ठीक है, करेंगे।”
तदानीं तौ मक्षिकया सह गत्वा मेघनादस्य पुर: सर्वं वृत्तान्तं न्यवेदयताम्‌।तब उन दोनों ने मक्खी के साथ जाकर मेघनाद के सामने सारा समाचार बताया।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
मेघनाद: अवदत्‌- ‘‘यथाहं कथयामि तथा कुरुतम्‌।मेघनाद बोला–“जैसा मैं कहता हूँ, (तुम दोनों) वैसा करो।
मक्षिके! प्रथमं त्वं मध्याह्ने तस्य गजस्य कर्णे शब्दं कुरु, येन स: नयने निमील्य स्थास्यति।मक्खी! पहले तुम दोपहर में उस हाथी के कान में आवाज़ करना, जिससे वह आँखें बन्द करके बैठेगा।
तदा काष्ठकूट: चञ्च्वा तस्य नयने स्फोटयिष्यति।तब काष्ठकूट चोंच से उसकी दोनों आँखें फोड़ देगा।
एवं स: गज: अन्ध: भविष्यति।इस प्रकार वह हाथी अन्धा (नेत्रहीन) हो जाएगा।”
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तृषार्त: स: जलाशयं गमिष्यति। मार्गे महान्‌ गर्त्त: अस्ति। प्यास से पीड़ित वह तालाब पर जाएगा। रास्ते में बड़ा गड्ढा है।
तस्य अन्तिके अहं स्थास्यामि शब्दं च करिष्यामि।उसके पास मैं बैढूँगा और आवाज़ करूँगा।
मम शब्देन तं गर्तं जलाशयं मत्वा स तस्मिन्नेव गर्ते पतिष्यति मरिष्यति च।’’ मेरी आवाज़ से उस गड्ढे को तालाब मान कर वह उसी गड्ढे में गिर जाएगा और मर जाएगा।
अथ तथा कृते स: गज: मध्याह्ने मण्डूकस्य शब्दम्‌ अनुसृत्य महत: गर्तस्य अन्त: पतित: मृत: च। अब वैसा करने पर वह हाथी दोपहर में मेढक की आवाज़ का अनुसरण (पीछा) करके बड़े गड्ढे के अन्दर गिर गया और मर गया।
तथा चोक्तम्‌- ‘बहूनामप्यसाराणां समवायो हि दुर्जय:’।और वैसा कहा गया है निश्चय से अनेक निर्बलों का समूह कठिनाई से जीतने योग्य होता है।
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 11 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 11 एनसीईआरटी के प्रश्न उत्तर
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