एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 10 विश्वबन्धुत्वम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 10 दशम: पाठ: विश्वबन्धुत्वम्‌ के प्रश्न उत्तर, अभ्यास के सभी उत्तर सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए विद्यार्थी यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। प्रत्येक प्रश्न को सरल तरीके से समझा कर लिखा गया है। कुछ प्रश्नों को चित्रों के माध्यम से भी समझाया गया है ताकि विद्यार्थी इसे अच्छी तरह समझ सकें। कक्षा 7 संस्कृत पाठ 10 का संस्कृत से हिंदी अनुवाद भी दिया गया है ताकि पूरे पाठ को विद्यार्थी आसानी से समझ सकें। संस्कृत के सभी समाधान यहाँ से मुफ़्त प्राप्त किए जा सकते हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत दशम: पाठ: विश्वबन्धुत्वम्‌

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 10 विश्वबन्धुत्वम्‌ का हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
उत्सवे, व्यसने, दुर्भिक्षे, राष्ट्रविप्लवे, दैनन्दिनव्यवहारे च य: सहायतां करोति स: बन्धु: भवति।पर्व (त्योहार) में, संकट के समय में, अकाल पड़ने पर, देश पर विपत्ति आने पर और दैनिक व्यवहार में जो सहायता करता है, वह भाई होता है।
यदि विश्वे सर्वत्र एतादृश: भाव: भवेत्‌ तदा विश्वबन्धुत्वं सम्भवति।यदि संसार में सब स्थानों पर ऐसी भावना हो, तब संसार में भाईचारा सम्भव होता है।
परन्तु अधुना निखिले संसारे कलहस्य अशान्ते: च वातावरणम्‌ अस्ति।परन्तु अब सारे विश्व में लड़ाई और अशान्ति का वातावरण है।
मानवा: परस्परं न विश्वसन्ति। मनुष्य आपस में विश्वास नहीं करते हैं।
ते परस्य कष्टं स्वकीयं कष्टं न गणयन्ति। वे (मनुष्य) दूसरे की पीड़ा को अपनी पीड़ा नहीं गिनते (समझते) हैं।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
अपि च समर्था: देशा: असमर्थान्‌ देशान्‌ प्रति उपेक्षाभावं प्रदर्शयन्ति, तेषाम्‌ उपरि स्वकीयं प्रभुत्वं स्थापयन्ति।और भी सम्पन्न देश असमर्थ (असम्पन्न) देशों के प्रति अनादर का भाव प्रदर्शित करते हैं और उनके ऊपर बड़प्पन स्थापित करते हैं (रखते हैं)
संसारे सर्वत्र विद्वेषस्य, शत्रुताया:, हिंसाया: च भावना दृश्यते। देशानां विकास: अपि अवरुद्ध: भवति।विश्व में सब स्थानों पर द्वेष की, वैर की और हिंसा की भावना दिखाई देती है। देशों की उन्नति रुक जाती है।
इयम्‌ महती आवश्यकता वर्तते यत्‌ एक: देश: अपरेण देशेन सह निर्मलेन हृदयेन बन्धुताया: व्यवहारं कुर्यात्‌।यह बड़ी आवश्यकता है कि एक देश दूसरे देश के साथ शुद्ध हृदय (मन) से बन्धुत्व का व्यवहार करे।
विश्वस्य जनेषु इयं भावना आवश्यकी।यह भावना आवश्यक है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तत: विकसिताविकसितयो: देशयो: मध्ये स्वस्था स्पर्धा भविष्यति।तब विकसित और अविकसित देशों के बीच में स्वस्थ होड़ होगी।
सर्वे देशा: ज्ञानविज्ञानयो: क्षेत्रे मैत्रीभावनया सहयोगेन च समृद्धिं प्राप्तुं समर्था: भविष्यन्ति।सभी देश ज्ञान और विज्ञान के क्षेत्र में मित्रता की भावना से और सहयोग से उन्नति प्राप्त करने के योग्य होंगे।
सूर्यस्य चन्द्रस्य च प्रकाश: सर्वत्र समानरूपेण प्रसरति।सूर्य और चन्द्र की रोशनी सब स्थानों पर समान रूप से फैल रही है।
प्रकृति: अपि सर्वेषु समत्वेन व्यवहरति।प्रकृति भी सब में समान भावना से व्यवहार करती है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तस्मात्‌ अस्माभि: सर्वै: परस्परं वैरभावम्‌ अपहाय विश्वबन्धुत्वं स्थापनीयम्‌।उसी कारण से हम सबको आपसी शत्रुता के भाव को छोड़कर संसार में भाईचारा स्थापित करना चाहिए।
अत: विश्वस्य कल्याणाय एतादृशी भावना भवेत्‌-इसलिए संसार की भलाई (हित) के लिए ऐसी भावना होनी चाहिए-
अयं निज: परो वेति गणना लघुचेतसाम्‌।यह अपना है और यह पराया है, इस प्रकार क्षुद्र (छोटे) हृदय वाले व्यक्ति गिनती करते (सोचते) हैं।
उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम्‌ ॥दयालु अर्थात् विशाल हृदय वाले व्यक्तियों के लिए तो (सारी) पृथ्वी ही एक परिवार है।
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