एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 नवम: पाठ: अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि के अभ्यास में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर विस्तार से यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 7 संस्कृत के सभी समाधान सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड के लिए शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के अनुसार संशोधित किए गए हैं। पाठ का हिंदी अनुवाद यहाँ पंक्ति दर पंक्ति दिया है, ताकि एक एक संस्कृत शब्द का अर्थ आसानी से समझा जा सके। पाठ 9 पर आधारित अतिरिक्त प्रश्न उत्तर भी यहाँ दिए गए हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत नवम: पाठ: अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि

कक्षा 7 एनसीईआरटी समाधान

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कक्षा 7 संस्कृत अध्याय 9 अहमपि विद्यालयं गमिष्यामि का हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
मालिनी – (प्रतिवेशिनीं प्रति) गिरिजे! मम पुत्र: मातुलगृहं प्रति प्रस्थित: काचिद्‌ अन्यां कामपि महिलां कार्यार्थं जानासि तर्हि प्रेषय।मालिनी – (पड़ोसिनी से) हे गिरिजा! मेरा पुत्र मामा के घर गया है, किसी दूसरी महिला (औरत) को काम के लिए जानती हो तो भेजो।
गिरिजा – आम्‌ सखि! अद्य प्रात: एव मम सहायिका स्वसुताया: कृते कर्माथर्ं पृच्छति स्म। गिरिजा – हाँ सखी! आज सुबह ही मेरी नौकरानी (सहायिका) अपनी बेटी के लिए काम हेतु पूछरही थी।
श्व: प्रात: एव तया सह वातार्ं करिष्यामि।कल सुबह ही उसके साथ बात करूँगी।
(अग्रिमदिने प्रात: काले षट्‌वादने एव मालिन्या: गृहघण्टिका आगन्तारं कमपि सूचयति मालिनी द्वारमुदघाटयति पश्यति यत्‌ गिरिजाया: सेविकया दर्शनया सह एका अष्टवर्षदेशीय, बालिका तिष्ठति)(अगले दिन सुबह छह बजे ही मालिनी के घर की घंटी किसी आने वाले की सूचना देती है, मालिनी दरवाजा खोलती है कि गिरिजा की नौकरानी दर्शना के साथ एक आठ वर्ष की, लड़की खड़ी है)
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
दर्शना – महोदये! भवती कार्यार्थं गिरिजामहोदयां पृच्छति स्म कृपया मम सुतायै अवसरं प्रदाय अनुगृह्णातु भवती।दर्शना – महोदया (मैडम)! आप काम के लिए गिरिजा जी (देवी) से पूछ रही थीं कृपया मेरी बेटी को मौका देकर आप उपकार करें।
मालिनी – परमेषा तु अल्पवयस्का प्रतीयते। किं कार्यं करिष्यत्येषा?मालिनी – परंतु यह तो कम उम्र की दिखाई देती है। क्या काम करेगी यह?
अयं तु अस्या: अध्ययनस्य क्रीडनस्य च काल:।यह तो इसके पढ़ने और खेलने का समय है।
दर्शना – एषा एकस्य गृहस्य संपूर्ण कार्यं करोति स्म। स: परिवार: अधुना विदेशं प्रति प्रस्थित:।दर्शना – यह एक घर का सारा काम करती थी। वह परिवार इस समय विदेश चला गया है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
कार्याभावे अहमेतस्यै कार्यमेवान्वेषयामि स्म येन भवत्सदृशानां कार्यं प्रचलेत्‌ अस्मद्‌सदृशानां गृहसञ्चालनाय च धनस्य व्यवस्था भवेत्‌।काम की कमी के कारण मैं इसके लिए काम ढूँढ रही थी जिससे आप जैसों का काम चले और हमारे जैसों के घर को चलाने के लिए धन की व्यवस्था हो जाए।
मालिनी – परमेतत्तु सर्वथाऽनुचितम्‌। मालिनी – परन्तु यह तो पूरी तरह से अनुचित (ठीक नहीं) है।
किं न जानासि यत्‌ शिक्षा तु सर्वेषां बालकानां सर्वासां बालिकानां च मौलिक: अधिकार:।क्या तुम नहीं जानती हो कि शिक्षा तो सभी लड़कों और सभी लड़कियों का मूलभूत (स्वाभाविक) अधिकार है।
दर्शना – महोदये! अस्मद्‌ सदृशानां तु मौलिका: अधिकारा: केवलं स्वोदरपूर्त्ति- रेवास्ति। दर्शना – देवी (मैडम)! हमारे जैसों का तो मूलभूत अधिकार केवल अपना पेट भरना ही है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
एतस्य व्यवस्थायै एव अहं सर्वस्मिन्‌ दिने पञ्च-षड्‌गृहाणां कार्यं करोमि। इसकी व्यवस्था के लिए ही मैं सब दिन (पूरे दिन) में पाँच-छह घरों का काम करती हूँ।
मम रुग्ण: पति: तु किञ्चिदपि कार्यं न करोति। मेरे बीमार पति तो कुछ भी काम नहीं करते हैं।
अत: अहं मम पुत्री च मिलित्वा परिवारस्य भरण-पोषणं कुर्व:। इसलिए मैं और मेरी बेटी मिलकर परिवार का भरण-पोषण (का काम) करते हैं।
अस्मिन्‌ महार्घताकाले मूलभूतावश्यकतानां कृते एव धनं पर्याप्तं न भवति तर्हि कथं विद्यालयशुल्कं, गणवेषं पुस्तकान्यादीनि क्रेतुं धनमानेष्यामि।इस मँहगाई के समय में मूलभूत जरूरतों के लिए ही धन काफी नहीं होता है तो कैसे विद्यालय की फ़ीस, वेशभूषा, पुस्तकें आदि को खरीदने के लिए धन लाएँगे।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
मालिनी – अहो! अज्ञानं भवत्या:। मालिनी- अरे यह आपकी मूर्खता (नासमझी) है।
किं न जानासि यत्‌ नवोत्तर-द्वि-सहस्र (2009) तमे वर्षे सर्वकारेण सर्वेषां बालकानां, सर्वासां बालानां कृते शिक्षाया: मौलिकाधिकारस्य घोषणा कृता। क्या नहीं जानती हो कि सन् 2001 ई० वर्ष में सरकार ने सब बच्चों, सभी बच्चियों के लिए शिक्षा के मौलिक (स्वाभाविक) अधिकार की घोषणा की है।
यदनुसारं षड्‌वर्षेभ्य: आरभ्य चतुदर्शवर्षपर्यन्तं सर्वे बाला: समीपस्थं सर्वकारीयं विद्यालयं प्राप्य न केवलं नि:शुल्कं शिक्षामेव प्राप्स्यन्ति अपितु नि:शुल्कं गणवेषं पुस्तकानि, पुस्तकस्यूतम्‌, पादत्राणम्‌, माध्याह्नभोजनम्‌, छात्रवृत्तिम्‌ इत्यादिकं सर्वमेव प्राप्स्यन्ति।जिसके अनुसार छह वर्षों से लेकर चौदह वर्ष तक के सारे बच्चे पास के (पास स्थित) सरकारी स्कूल में जाकर न सिर्फ निशुल्क पढ़ाई ही करेंगे बल्कि बिना फीस वर्दी , पुस्तकें, बस्ते, जूते, दोपहर का भोजन और वज़ीफा आदि सभी कुछ पाएँगे।
दर्शना – अप्येवम्‌ (आश्चर्येण मालिनीं पश्यति)दर्शना – ऐसा भी है (आश्चर्य से मालिनी को देखती है)
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
मालिनी – आम्‌। वस्तुत: एवमेव।मालिनी – हाँ! वास्तव में यही है।
दर्शना – (कृतार्थतां प्रकटयन्ती) अनुगृहीताऽस्मि महोदये! एतद्‌ बोधनाय।दर्शना – (कृतार्थता) (धन्यवाद) को प्रकट करती हुई) मैडम! मैं आभारी हूँ। यह बताने के लिए।
अहम्‌ अद्यैवास्या: प्रवेशं समीपस्थे विद्यालये कारयिष्यामि।मैं आज ही इसका प्रवेश पास (निकट) स्थित विद्यालय में कराऊँगी।
दर्शनाया: पुत्री- (उल्लासेन सह) अहं विद्यालयं गमिष्यामि! अहमपि पठिष्यामि! दर्शना की बेटी – (खुशी के साथ) मैं विद्यालय जाऊँगी। मैं भी पढंगी!
(इत्युक्त्वा करतलवादनसहितं नृत्यति मालिनीं प्रति च कृतज्ञतां ज्ञापयति)(ऐसा कहकर ताली बजाकर नाचती है और मालिनी के लिए आभार व्यक्त करती है)
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