कक्षा 7 हिंदी व्याकरण अध्याय 33 अपठित गद्यांश

कक्षा 7 हिंदी व्याकरण अध्याय 33 अपठित गद्यांश पर आधारित अभ्यास और उदाहरण सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड के छात्रों के लिए सत्र 2023-24 के अनुसार संशोधित रूप में यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। जैसे-जैसे सातवीं कक्षा के छात्र सही व्याकरण का उपयोग करने में कुशल होते जाते हैं उन्हें अपनी भाषा कौशल पर अधिक भरोसा होता रहता है।

अपठित गद्यांश

अपठित का अर्थ है ‘जिसे पढ़ा न हो’। अर्थात् पठित पाठ्य-पुस्तक से बाहर के गद्यांश को समझकर उसके प्रश्नोत्तर लिखना, सार लिखना, शीर्षक देना आदि को अपठित गद्यांश कहा जाता है।
परीक्षा में अपठित गद्यांश से इसलिए प्रश्न पूछे जाते हैं ताकि विद्यार्थी के सामान्य ज्ञान एवं विवेक का परीक्षण हो सके।
अपठित गद्यांश संबंधी कुछ सावधानियां
अपठित गद्यांश के प्रश्नों के सही उत्तर देने के लिए निम्न बातों का धयान रखिए:
1. अपठित गद्यांश को दो-तीन बार धयान से पढ़कर समझिए।
2. प्रत्येक प्रश्न को ध्यान से पढि़ए।
3. प्रश्न के उत्तर गद्यांश में ढूँढिए और रेखांकित कर लीजिए।
4. उत्तर नपे-तुले शब्दों में दीजिए अधिाक लिखने का प्रयास मत कीजिए।
5. यदि गद्यांश का शीर्षक पूछा गया हो तो गद्यांश से जो मुख्य भाव उभरता हो उसके आधार पर विचार करके शीर्षक लिखें।

अभ्यास के लिए अपठित गद्यांश 1

सच्चा मित्र एक शिक्षक की भाँति होता है। जिस प्रकार शिक्षक अपने छात्र को सन्मार्ग की ही ओर अग्रसर करता है, उसी प्रकार एक सच्चा मित्र अपने मित्र को पाप की गर्त में गिरने से बचाता है। मानव-जीवन अधिक रहस्यपूर्ण है। कभी-कभी जीवन में ऐसे अवसर उपस्थित हो जाते हैं, जब मनुष्य की धार्म-बुद्धि नष्ट हो जाती है और उसका मन तेज़ गति से पाप की ओर दौड़ता है। ऐसे समय में मित्र का ही उपदेश अधिक कल्याणकारी सिद्ध होता है। मित्र के उपदेश का जितना प्रभाव हृदय पर पड़ता है, उतना और किसी का नहीं।
प्रश्न
1. उपर्युक्त का शीर्षक बताओ।
2. उपर्युक्त गद्यांश का सार लगभग एक-तिहाई शब्दों में लिखिए।
3. सच्चे मित्र और शिक्षक में क्या समानता है?
4. मनुष्य पाप की ओर कब प्रवृत्त हो जाता है?

उत्तर
1. उपर्युक्त शीर्षक- सच्चा मित्र।
2. शिक्षक की भाँति सच्चा मित्र भी अपने मित्र को सन्मार्ग की ओर प्रेरित करता है। धर्म-बुद्धि नष्ट हो जाने पर जब कभी व्यक्ति पाप की ओर दौड़ता है, तो सच्चा मित्र ही उसे पाप करने से रोकता है तथा कल्याण-पथ पर ला सकता है।
3. शिक्षक और सच्चा मित्र दोनों ही मनुष्य को पाप की गर्त में गिरने से बचाने का काम करते हैं।
4. जब मनुष्य की धार्म-बुद्धिा नष्ट हो जाती है, तभी वह पाप-कर्म की ओर प्रवृत्त होता है।

अभ्यास के लिए अपठित गद्यांश 2

स्वतंत्र भारत का संपूर्ण दायित्व आज विद्यार्थियों के ही ऊपर है, क्योंकि आज जो विद्यार्थी हैं, वे ही कल के भारत के नागरिक होंगे। भारत की उन्नति और उसका उत्थान उन्हीं की उन्नति और उत्थान पर निर्भर करता है। अतः विद्यार्थियों को चाहिए कि वे अपने भावी जीवन का निर्माण बड़ी सतर्कता और सावधाानी के साथ करें। उन्हें प्रत्येक क्षण अपने राष्ट्र, अपने समाज, अपने धार्म, अपनी संस्वृळति को अपनी आँखों के सामने रखना चाहिए ताकि उनके जीवन से राष्ट्र को कुछ बल प्राप्त हो सके। जो विद्यार्थी राष्ट्रीय दृष्टिकोण से अपने जीवन का निर्माण नहीं करते वे राष्ट्र और समाज के लिए भार-स्वरूप होते हैं।

प्रश्न
1. स्वतंत्र भारत का संपूर्ण दायित्व आज किन पर है?
2. भारत की उन्नति और उत्थान किस बात पर निर्भर करता है?
3. विद्यार्थियों को अपने भावी जीवन का निर्माण किस प्रकार करना चाहिए?
4. राष्ट्र के लिए भार-स्वरूप कौन होते हैं?
5. राष्ट्र को बल किस प्रकार प्राप्त हो सकता है?
6. कोई उपयुक्त शीर्षक लिखिए।

कक्षा 7 हिंदी व्याकरण पाठ 33 अपठित गद्यांश
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