कक्षा 4 हिंदी व्याकरण अध्याय 20 पत्र लेखन

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी व्याकरण पाठ 20 पत्र लेखन तथा पत्र लेखन के समय याद रखने वाली बातों को छात्र इस अध्याय में सीखेंगे। छात्र कक्षा 4 हिंदी व्याकरण के इस अध्याय में यह जान सकेंगे कि पत्र लेखन के समय किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए। पत्र कितने प्रकार के होते हैं और अलग-अलग तरह के पत्र को कैसे आरंभ किया जाता है।

कक्षा 4 के लिए हिंदी व्याकरण अध्याय 20 पत्र लेखन

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पत्र्-लेखन

अपने दूरस्थ संबंधियों, मित्रों आदि को अपनी कुशल-क्षेम के समाचार भेजने तथा अधिकारियों तक किसी समस्या के समाधान के लिए प्रार्थना करने या किसी घटना की जानकारी देने के लिए पत्रों का प्रयोग किया जाता है।

यद्‌यपि वर्तमान समय में संचार के नए-नए साधानों के होने के बावजूद, पत्र् आज भी संचार का एक महत्तवपूर्ण साधन है। इसके द्वारा हम दूर रहने वाले अपने मित्रों, रिश्तेदारों, प्रियजनों और अन्य लोगों तक अपनी बात पहुँचा सकते हैं।

पत्र् लिखते समय हमें इन बातों का ध्यान रखना चाहिए:

1. पता व तिथि सही लिखें।
2. पत्र् साफ अक्षरों में लिखें।
3. कम से कम शब्दों में अपनी बात कहें।
4. अभिवादन के लिए नमस्ते, सस्नेह, सादर प्रणाम आदि शब्द, जब जो ठीक हो, उसका प्रयोग करें।
5. विराम चिह्‌नों का उचित प्रयोग होना चाहिए, अन्यथा पूरे पत्र् का अर्थ बदल सकता है।
6. औपचारिक पत्रों के संबोधान के तौर पर मान्यवर, महोदय/महोदया आदि का प्रयोग होता है।

पत्र् के प्रकार

घरेलू पत्र्

इन्हें अनौपचारिक या व्यक्तिगत पत्र् भी कहते हैं। ये अपने मित्रों, प्रियजनों आदि को लिखे जाते हैं।

बाहरी पत्र्

इन्हें औपचारिक पत्र् भी कहते हैं। ये पत्र् उन लोगों को लिखे जाते हैं जिनसे हमारा कोई परिचय या जान पहचान नहीं होती। ऐसे पत्र् विद्यालय के/की प्रधाानाचार्य/प्रधाानाचार्या, संपादक, पुस्तक-विक्रेता आदि को लिखे जाते हैं।

घरेलू/अनौपचारिक पत्र् से संबंधित पता लिखने का नमूना

सेवा में,
श्री अमन वर्मा
82, तुलसीनगर,
कैंट देहरादून (उत्तराखंड)
पत्र का विवरण……….
प्रेषक
राजू भटनागर
ए-375, विकास पुरी, नई दिल्ली

औपचारिक/बाहरी पत्र् से संबंधिात पता लिखने का नमूना

सेवा में,
संपादक
नवभारत टाइम्स
बहादुरशाह जरमार्ग
नई दिल्ली-110002
पत्र का विवरण
प्रेषक
रमेश कुमार
ए-375, विकास पुरी, नई दिल्ली

उपहार के लिए मित्र् को धान्यवाद पत्र्

परीक्षा भवन
नई दिल्ली
15 सितंबर 20xx
प्रिय मित्र् दीपक
मधुर स्मृतियों
तुम्हारा भेजा जन्मदिन का उपहार मिला। चित्रकला का ज्ञान देने वाली यह पुस्तक मुझे सबसे अच्छी भेंट लगी। इससे सीखकर मैंने कुछ चित्र् भी बनाए हैं। मिलने पर वे सभी चित्र् मैं तुम्हें अवश्य दिखाऊँगा। उपहार के लिए तुम्हारा बहुत-बहुत धान्यवाद।
अंकल और आँटी जी को मेरा प्रणाम और अंशु को प्यार देना। पत्र् के उत्तर की प्रतीक्षा में।
तुम्हारा मित्र्
अमन

अवकाश के लिए प्रधाानाचार्य को पत्र्

सेवा में
प्रधाानाचार्या महोदया
दून पब्लिक स्वूळल
देहरादून
विषय: अवकाश के लिए प्रार्थना पत्र्
महोदया
सविनय निवेदन यह है कि मुझे गत दो दिन से तेज बुखार है तथा डॉक्टर ने आराम करने की सलाह दी है। इसलिए मैं स्कूल आने में असमर्थ हूँ। कृपया मुझे तीन दिन (दिनांक 5-7-20xx से 7-7-20xx तक) का अवकाश प्रदान करें।
धन्यवाद,
आपकी आज्ञाकारी शिष्या
नेहा
कक्षा चार ‘बी’
(तिथि -5 जुलाई, 20xx)

पुरस्कार मिलने पर छोटे भाई को बधााई-पत्र्

‘अमर निवास’
28 दयालपार्क
जनकपुरी
दिनांक 15 जुलाई 20xx
प्रिय भाई,
प्यार
तुम्हारा पत्र् पाकर घर में प्रसन्नता छा गयी। तुमने कहानी-लेखन प्रतियोगिता में दिल्ली क्षेत्र् के विद्यालयों में प्रथम स्थान प्राप्त किया है, यह हम लोगों के लिए गर्व की बात है। माताजी और पिताजी बहुत खुश हैं। दादाजी ने तो हम सबकों मिठाई खिलाई थी। नेहा सभी को यह समाचार सुना आई। पढ़ने के साथ-साथ इस प्रकार की गतिविधिायों में भाग लेते रहना चाहिए। बड़े-बड़े लेखक अपने बच्चपन से ही रचनाएँ करने लगे थे। तुम भी अपनी लेखन प्रतिभा को बनाए रखना।
हम सबकी ओर से तुम्हें बधााई और आशीर्वाद।
तुम्हारा भाई
प्रणव।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी व्याकरण पाठ 20
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