कक्षा 6 गणित अध्याय 8 एनसीईआरटी समाधान – दशमलव
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 गणित अध्याय 8 दशमलव की प्रश्नावली (एक्सरसाइज) 8.1, 8.2, 8.3 और 8.4 के हल हिन्दी माध्यम तथा अंग्रेजी मीडियम में यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। विद्यार्थी कक्षा 6 गणित से सभी अध्यायों के हल को वर्ग 6 गणित ऐप में भी पीडीएफ़ के रूप से प्राप्त कर सकते हैं। यहाँ 6वीं कक्षा गणित पाठ 8 की प्रत्येक प्रश्नावली को शैक्षणिक सत्र के लिए संशोधित रूप में दिया गया है। प्रश्नों के हल सरल भाषा में बनाए गए हैं। प्रत्येक प्रश्न की चरण दर चरण व्याख्या दी गई है ताकि कोई भी इसे आसानी से समझ सके।
कक्षा 6 गणित अध्याय 8 के लिए एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 6 गणित अध्याय 8 के लिए एनसीईआरटी समाधान नीचे दिए गए हैं:
कक्षा 6 गणित अध्याय 8 पर बहुविकल्पीय (MCQ) प्रश्न उत्तर
दशमलव से आप क्या समझते हैं?
दशमलव: वह बिंदु जो संख्या ’10’ पर आधारित संख्या-पद्धति में पूर्णांक के पश्चात और ‘1’ के छोटे अंश के पहले लगाया जाता है।
दशमलव संबंधी कुछ नियम:
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- हरों 10, 100 इत्यादि वाली भिन्नों को दशमलव बिंदु का प्रयोग करके एक विशेष रूप में लिखा जा सकता है। इस रूप में ये दशमलव संख्याएँ कहलाती हैं।
- दशमलव बिन्दु के ठीक बाद वाले स्थान (अर्थात् दशांश के स्थान) का स्थानीय मान 1/10 होता है, उससे अगले स्थान (अर्थात् शतांश के स्थान) का स्थानीय मान 1/100 होता है, इत्यादि।
- भिन्नों को हरों 10, 100 इत्यादि वाले रूप में लिखकर दशमलवों में बदला जा सकता है। इसी प्रकार, दशमलवों के दशमलव बिंदुओं को हटाकर तथा उन दशमलवों में निहित दशमलव स्थानों के आधार पर हरों में 10, 100 इत्यादि लिखकर उन्हें भिन्नों में बदला जा सकता है।
- दशमलव संख्याओं की तुलना स्थानीय मान की धारणा का प्रयोग करते हुए की जा सकती है और फिर उन्हें आरोही या अवरोही क्रम में व्यवस्थित किया जा सकता है।
- दशमलवों को, बराबर दशमलव स्थानों के रूप में लिखकर जोड़ा (या घटाया) जा सकता है।
- मापनों के विभिन्न मात्रकों, जैसे मुद्रा (या धन राशि), लंबाई, भार, इत्यादि को दशमलव रूप में बदल कर, फिर उन्हें जोड़कर (या घटाकर) दैनिक जीवन की अनेक समस्याओं को हल किया जा सकता है।
दशमलवों का जोड़ किस प्रकार करते हैं?
दशमलवों का जोड़ करने की प्रक्रिया:
दोनों संख्याओं के दशमलव बिन्दु एक ही पंक्ति में होने चाहिए। अब अगर किसी संख्या में दशमलव बिंदु के बाद दूसरी संख्या से कम अंक हैं तो हम कम अंक वाली संख्या में शून्य लगा देंगे ताकि वह दूसरी संख्या के बराबर हो जाए। इससे हमें योग करने में आसानी होगी।
उदाहरण: (i) 0.29 + 0.36 (ii) 0.7 + 0.08
- (i) 0.29 + 0.36
= 0.29
+ 0.36
= 0.55 - (ii) 0.7 + 0.08
= 0.70
+ 0.08
= 0.78
