एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 2 बगीचे का घोंघा

कक्षा 4 हिंदी वीणा का पाठ 2 बगीचे का घोंघा एक रोचक और प्रेरणादायक कहानी है, जो एक छोटे से घोंघे की जिज्ञासा, साहस और नई दुनिया को जानने की इच्छा को दर्शाती है। इस कहानी में बताया गया है कि कैसे घोंघा अपने छोटे से बगीचे से बाहर निकलकर विशाल दुनिया को देखता है और हर नई चीज़ को आश्चर्य और उत्साह के साथ अनुभव करता है। यह पाठ बच्चों को नई चीज़ों को जानने, डर पर काबू पाने और जीवन में आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

एनसीईआरटी कक्षा 4 हिंदी वीणा अध्याय 2 के प्रश्न उत्तर

बात-चीत के लिए

1. घोंघे को बगीचे (उद्यान) के एक किनारे से दुसरे किनारे तक पहुँचने में दो दिन क्यों लगते थे?

उत्तर:
पहले घोंघे की दुनिया बगीचे तक ही थी। बगीचे की दुनिया बाहर कि दुनिया से बहुत धीमी थी। इसलिए उसकी चाल शुरु से बहुत धीमी रही थी। इसलिए उसे एक किनारे से दुसरे किनारे तक पहुँचने में दो दिन लगते थे।

2. आप अपने विधालय कैसे जाते हैं और आपको कितना समय लगता है?

उत्तर:
सभी विधार्थी अपनी सुविधाओं के अनुसार ही अपने स्कूल जाते है। यदि स्कूल पास है तो वे पैदल चले जाते है। यदि स्कूल दूर है तो वह साईकिल या किसी वाहन के द्वारा स्कूल जाते है। हमारा स्कूल पास में ही है तो हम पांच मिनट में पैदल ही पहुँच जाते है।

3. घोंघा उद्यान से बाहर क्यों जाना चाहता था?

उत्तर:
घोंघा जब उद्यान की दीवार के एक छेद से बाहर झाँकता था तो उसे बाहर की दुनिया दिखाई देती थी। जिसे देखकर उसे बाहर कि दुनिया के बारे में जानने कि इच्छा होती थी इसलिए घोंघा उद्यान से बाहर जाना चाहता था।

4. आपका कहाँ-कहाँ जा ने का मन करता है?

उत्तर:
मेरा मन बहुत-सी सुंदर जगहों पर जाने का करता है। मुझे पहाड़ों पर जाना बहुत अच्छा लगता है, क्योंकि वहाँ की ठंडी हवा और हरियाली मन को खुशी देती है। इसके अलावा मुझे समुद्र तट पर भी जाना पसंद है, जहाँ लहरों को देखना और रेत में खेलना अच्छा लगता है।

5. आप घूमने के लिए कहाँ-कहाँ जाते हैं और किसके साथ जाते हैं?

उत्तर:
हम सभी अपने माता-पिता और परिजनों के साथ बाहर घूमने जाते है, जैसे पौराणिक मंदिर, ताजमहल, हरीद्वार, पुराने किले और दार्शनिक स्थल आदि। इसके आलावा छुट्टियों में हम बाहर अपने रिश्तेदारों के यहाँ भी जाते है।

पाठ के भीतर

नीचे दिए गए प्रश्नों के सटीक उत्तर चुने –

1. घोंघा उद्यान से बहार क्यों जाना चाहता था?

(क) उसे उद्यान में अच्छा नहीं लगता था।
(ख) वह बाहर का जीवन देखना चाहता था।
(ग) उसे उद्यान सुंदर नहीं लगता था।
(घ) उसे उद्यान बहुत छोटा लगता था।
उत्तर:
(ख) वह बाहर का जीवन देखना चाहता था।

2. घोंघे को बड़ा-सा पत्थर पहाड़ जैसा क्यों लगा होगा?

(क) पत्थर पहाड़ की तरह बहुत बड़ा था।
(ख) घोंघे ने उद्यान में पत्थर जैसी बड़ी वस्तु कभी नहीं देखी थी।
(ग) घोंघे को पत्थर पर चढ़कर दूर-दूर तक दिखाई दे रहा था।
(घ) पत्थर की आकृति पहाड़ जैसी थी।
उत्तर:
(ख) घोंघे ने उद्यान में पत्थर जैसी बड़ी वस्तु कभी नहीं देखी थी।

3. घोंघे ने अपने जीवन में पहली बार क्या देखा?

(क) अपने लंबे-पतले पांवों से आ-जा रहे लाल चींटे
(ख) अपना शंख
(ग) पीपल का पेड़
(घ) हरी-हरी घास
उत्तर:
(क) अपने लंबे-पतले पांवों से आ-जा रहे लाल चींटे

4. घोंघे की आँखें आश्चर्य से क्यों खुली रह गई?

(क) उसके ऊपर एक बड़ा पता गिरा।
(ख) वह उद्यान में एक नए कीट से मिला।
(ग) उसने पहली बार एक तालाब देखा था।
(घ) उसने बड़ का एक पेड़ देखा।
उत्तर:
(घ) उसने बड़ का एक पेड़ देखा।

5. छेद से बाहर निकलते ही घोंघे का जिन वस्तुओं से सामना हुआ, उनमें से कुछ वस्तुएँ छूट गई हैं। उन्‍हें पूरा कीजिए –

मैदान ……………. पत्थर
……………… गिल हरी गेंद
कुत्ता ………………. बड़ का पेड़
उत्तर:
मैदान — घास — पत्थर
झाड़ी — गिलहरी — गेंद
कुत्ता — रस्सी — बरगद का पेड़

सोचिए और लिखिए

1. उद्यान की दीवार में छेद देखकर घोंघे को कौन-सी बात याद आती थी?

उत्तर:
उद्यान की दीवार में छेद देखकर घोंघे को उसकी माँ की बताई एक बात याद आती थी, कि “वहाँ कभी मत जाना। वह दुनिया हमारी दुनिया से बहुत अलग है।”

2. छेद के दूसरी ओर जाते ही घोंघा चकित क्यों रह गया?

उत्तर:
छेद के दूसरी ओर जाते ही उसने बहुत कुछ ऐसा देखा जो उसने कभी नहीं देखा था। यह दुनिया उसकी दुनिया से बहुत अलग, तेज और बड़ी थी जैसा की उसकी माँ ने बताया था।

3. घोंघे ने ऐसा क्यों कहा होगा कि उद्यान में सब कुछ धीरे-धीरे चलता है?

उत्तर:
घोंघे ने जब उघान से बाहर की दुनिया देखी तो वहाँ सभी अपना अपना काम बड़ी तेजी से कर रहे थे। लाल चींटे अपनी पतली-पतली टांगों से तेज़ी से आ जा रहे थे, गिलहरी एक पेड़ से दुसरे पेड़ पर चल रही थी और एक कुत्ता एक गेंद के पीछे दौड़ रहा था। ये सब उसने पहली बार देखा था।

4. घोंघे की तरह आपको अपने घर, विद्यालय तथा आस-पास क्या-क्या अद्भुत लगता है और क्यों?

उत्तर:
मुझे घोंघे की तरह अपने घर, विद्यालय और आस-पास कई चीज़ें अद्भुत लगती हैं। घर में मुझे माँ का स्वादिष्ट खाना और परिवार का प्यार अद्भुत लगता है। विद्यालय में बड़ा खेल का मैदान, पुस्तकालय और शिक्षक जी की बातें बहुत अच्छी लगती हैं। आस-पास पेड़-पौधे, पक्षियों का उड़ना और इंद्रधनुष भी बहुत अद्भुत लगता है, क्योंकि ये सब प्रकृति की सुंदरता दिखाते हैं।

5. घोंघे ने उद्यान के भीतर और बाहर क्‍या-क्‍या देखा? नीचे लिखिए —

उद्यान के भीतरउद्यान के बाहर

उत्तर:

उद्यान के भीतरउद्यान के बाहर
फूलबड़ा मैदान
घाससूखा पत्ता
छोटे पेड़-पौधेलाल चींटियाँ
तितलियाँपत्थर, गिलहरी, गेंद, कुत्ता, खजूर और बरगद का पेड़

घोंघे ने उद्यान के अंदर छोटी-छोटी और सुंदर चीज़ें देखीं, जबकि बाहर आकर उसने बड़ी और नई-नई चीज़ें देखीं, जो उसे बहुत अद्भुत लगीं।

भाषा की बात

1. कहानी में आए निम्न शब्दों के आधार पर वाक्य बनाकर लिखिए –

आश्चर्य – ………………………………
अद्भुत – ……………………………..
अचानक – …………………………….
छोर – ……………………………….
उत्तर:
आश्चर्य – उस बड़े पेड़ को देखकर मुझे बहुत आश्चर्य हुआ।
अद्भुत – पहाड़ों का सुंदर दृश्य बहुत अद्भुत लगता है।
अचानक – मैं खेल रहा था, तभी अचानक बारिश शुरू हो गई।
छोर – नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में समय लगता है।

2. जब घोंघे के ऊपर सूखा पत्ता गिरा, तब उसने ‘वाह!’ न कहकर ‘उई!’ कहा। आपके मुँह से कब ‘वाह’ और ‘उई’ जैसे शब्द निकलते हैं?

…………………………………………………………..
…………………………………………………………..
उत्तर:
जब मैं कोई बहुत सुंदर चीज़ देखता हूँ, जैसे इंद्रधनुष या सुंदर फूल, तब मेरे मुँह से “वाह!” निकलता है। जब मुझे अचानक चोट लगती है या कोई चीज़ गिर जाती है, तब मेरे मुँह से “उई!” निकलता है।

3. घोंघे ने अपने शंख में कौन-कौन सा सामान बाँधा होगा?

फल , पत्ता, …………………………………….
उत्तर:
फल, पत्ता, थोड़ा पानी, खाने का सामान और छोटी-छोटी जरूरी चीजें उसने अपने शंख में बाँधी होंगी।

4. नीचे लिखी बातें घोंघे ने कब-कब कहीं? मिलान कीजिए –

घोंघे का कथनकब कहा?
“वाह! दुनिया में सब कछ कितनी तेज़ी से चलता है।”जब उस पर सूखा पत्ता गिरा।
“वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है।”जब उसने बड़ का पेड़ देखा।
“वाह! दुनिया तो कितनी मजे़दार है।”जब उसने लुढ़कती गेंद के पीछे कुत्ते को भागते हुए देखा।
“वाह! सचमुच दुनिया कितनी अद्भुत है”जब उसने बच्चों के खेलने का स्थान देखा।

उत्तर:

घोंघे का कथनकब कहा?
“वाह! दुनिया में सब कछ कितनी तेज़ी से चलता है।”जब उसने लुढ़कती गेंद के पीछे कुत्ते को भागते हुए देखा।
“वाह! दुनिया सचमुच कितनी बड़ी है।”जब उसने बच्चों के खेलने का स्थान देखा।
“वाह! दुनिया तो कितनी मजे़दार है।”जब उस पर सूखा पत्ता गिरा।
“वाह! सचमुच दुनिया कितनी अद्भुत है”जब उसने बड़ का पेड़ देखा।

विभिन्न ध्वनियाँ

“उसी समय खड़-खड़ की ध्वनि आई।” यहाँ सूखे पत्तों के गिरने की ध्वनि ‘खड़-खड़’ जैसी है।
इनकी ध्वनियाँ कैसी होंगी —
• बादलों का गरजना • पानी का बरसना
…………………………………… ………………….
• नल से बँदूों का गिरना • मढेंक का बोलना
…………………………………… ………………….

• घंटी का बजना • हवा का बहना
…………………………………… ………………….
उत्तर:
• बादलों का गरजना — गर्र-गर्र
• पानी का बरसना — टप-टप

• नल से बूँदों का गिरना — टिप-टिप
• मेंढक का बोलना — टर्र-टर्र

• घंटी का बजना — टन-टन
• हवा का बहना — सूँ-सूँ

अपनी-अपनी विशेषताएँ

घोंघे ने उद्यान से बाहर आकर जो भी देखा, वह किसी-न-किसी रूप में विशेष था। पाठ के आधार पर उनकी विशेषताएँ लिखिए —
जो देखा उसकी विशेषता
पार्क बहुत बड़ा, लंबा-चौड़ा
उत्तर:
जो देखा | उसकी विशेषता
बच्चों का खेल का मैदान | बहुत बड़ा, लंबा-चौड़ा
पत्थर | बड़ा और पहाड़ जैसा दिखाई देने वाला
लाल चींटियाँ | छोटी-छोटी और तेज़ी से चलने वाली
बरगद का पेड़ | बहुत विशाल और फैला हुआ

अनुमान और कल्पना

इतने समय तक वहाँ रहने के का‍रण घोंघा उद्यान का कोना-कोना पहचान गया था।

1. अनुमान लगाकर बताइए कि घोंघा उद्यान में कब से रह रहा होगा।

उत्तर:
घोंघा उद्यान में बहुत लंबे समय से, शायद कई महीनों या वर्षों से रह रहा होगा, इसलिए वह हर कोना पहचान गया था।

2. घोंघे को उद्यान के एक छोर से दूसरे छोर तक जाने में दो दिन लगते थे और उसे वापस लौटने में 48 घंटे लगते थे। ऐसा क्‍यों?

उत्तर:
घोंघा बहुत धीरे चलता है, इसलिए उसे जाने और आने में ज्यादा समय लगता है। 2 दिन और 48 घंटे दोनों बराबर ही होते हैं, इसलिए समय एक जैसा है।

3. आप अपने विद्यालय में कितने वर्षों से पढ़ रहे हैं? आपने वहाँ अब तक क्या-क्या देखा है?

उत्तर:
मैं अपने विद्यालय में लगभग 3–4 वर्षों से पढ़ रहा हूँ। मैंने वहाँ कक्षाएँ, खेल का मैदान, पुस्तकालय, बगीचा और अपने दोस्तों को देखा है।

4. आपको अपनी कक्षा से पेयजल के स्थान और विद्यालय के मुख्य द्वार तक जाने में कितना समय लगता है?

उत्तर:
मुझे अपनी कक्षा से पेयजल के स्थान तक जाने में 1–2 मिनट और मुख्य द्वार तक जाने में 3–5 मिनट लगते हैं।

घोंघे से आपकी भेंट

घोंघे को सबसे पहले बच्चों के खेलने का स्थान दिखाई दिया। कल्पना कीजिए कि बच्चों ने घोंघे को देखा और उससे बातें कीं।
बच्चे – अरे! आप कौन?
घोंघा – मुझे नहीं पहचा नते! मैं घोंघा, नहीं तो और कौन?
बच्चे – ……………………………………………………………………………..
घोंघा – ……………………………………………………………………………..
बच्चे – ……………………………………………………………………………..
घोंघा – ……………………………………………………………………………..
बच्चे – ……………………………………………………………………………..
उत्तर:
बच्चे – अरे! आप कौन?
घोंघा – मुझे नहीं पहचानते! मैं घोंघा, नहीं तो और कौन?
बच्चे – अरे! आप यहाँ कैसे आए?
घोंघा – मैं बगीचे से बाहर दुनिया देखने आया हूँ।
बच्चे – क्या आपको यहाँ अच्छा लग रहा है?
घोंघा – हाँ, यहाँ सब कुछ बहुत बड़ा और मज़ेदार है।
बच्चे – क्या आप हमारे साथ खेलेंगे?

कक्षा 4 हिंदी वीणा पाठ 2 – अक्सर पूंछे जाने वाले प्रश्न

बगीचे का घोंघा कहानी का मुख्य संदेश क्या है?

इस कहानी का मुख्य संदेश यह है कि हमें नई चीज़ों को जानने के लिए साहस दिखाना चाहिए और डर के कारण अवसरों को नहीं छोड़ना चाहिए।

घोंघा बगीचे से बाहर क्यों जाना चाहता था?

घोंघा बगीचे के बाहर की दुनिया को देखने के लिए उत्सुक था। वह जानना चाहता था कि बाहर की दुनिया कैसी है।

घोंघे को बाहर की दुनिया कैसी लगी?

बाहर की दुनिया घोंघे को बहुत बड़ी, तेज़ और अद्भुत लगी। हर चीज़ उसके लिए नई और आश्चर्यजनक थी।

घोंघे को पत्थर पहाड़ जैसा क्यों लगा?

क्योंकि उसने पहले कभी इतनी बड़ी वस्तु नहीं देखी थी, इसलिए उसे पत्थर पहाड़ जैसा लगा।

कक्षा 4 हिंदी वीणा पाठ 2 से बच्चों को क्या सीख मिलती है?

इस पाठ से बच्चों को सीख मिलती है कि

  • जिज्ञासु बनें
  • नई चीज़ों को सीखें
  • डर से आगे बढ़ें
  • दुनिया को खुले मन से देखें
घोंघे के अनुभवों से क्या समझ आता है?

घोंघे के अनुभव बताते हैं कि हर व्यक्ति की दुनिया उसकी सोच और अनुभवों पर निर्भर करती है। नई जगहों पर जाने से ज्ञान और समझ बढ़ती है।

बगीचे का घोंघा पाठ बच्चों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?

यह पाठ बच्चों में कल्पनाशक्ति, जिज्ञासा और आत्मविश्वास को बढ़ाता है, जो उनके समग्र विकास के लिए आवश्यक है।