एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 सिकतासेतु:

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 सिकतासेतु: शेमुषी भाग एक के अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर शैक्षणिक सत्र 2022-2023 में निशुल्क प्रयोग के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 9 संस्कृत के विद्यार्थी यहाँ दिए गए प्रश्नों के उत्तर तथा पाठ 9 के हिंदी अनुवाद की मदद से पूरे पाठ के सार को अच्छी तरह समझ सकते हैं और परीक्षा की तैयारी कर सकते हैं। कक्षा 9 संस्कृत के समाधान तिवारी अकादमी ऐप पर भी मुफ़्त उपलब्ध हैं।

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 के लिए एनसीईआरटी समाधान

एनसीईआरटी कक्षा 9 समाधान

iconicon
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(तत: प्रविशति तपस्यारत: तपोदत्त:)(इसके बाद तपस्या करता हुआ तपोदत्त प्रवेश करता है)
तपोदत्त: – अहमस्मि तपोदत्त:। तपोदत्त – मैं तपोदत्त हूँ।
बाल्ये पितृचरणै: क्लेश्यमानोऽपि विद्यां नाऽधीतवानस्मि।बचपन में पूज्य पिताजी के द्वारा क्लेश किए जाने पर भी मैने विद्या नहीं पढ़ी।
तस्मात्‌ सर्वै: कुटुम्बिभि: मित्रै: ज्ञातिजनैश्च गर्हितोऽभवम्‌।इसीलिए परिवार के सब सदस्यों, मित्रों और सम्बन्धियों के द्वारा मेरा अपमान किया गया।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(ऊर्ध्वं नि: श्वस्य)(ऊपर की ओर साँस छोड़कर)
हा विधे! किम्‌ इदं मया कृतम्‌? कीदृशी दुर्बुद्धि: आसीत्‌ तदा। हे प्रभो! मैंने यह क्या किया? उस समय मेरी कैसी दुष्ट बुद्धि हो गई थी।
एतदपि न चिन्तितं यत्‌- परिधानैरलङ्रैर्भूषितोऽपि न शोभते।मैने यह भी नहीं सोचा कि वस्त्रों तथा आभूषणों से सुशोभित
नरो निर्मणिभोगीव सभायां यदि वा गृहे॥1॥किन्तु विद्याहीन मनुष्य घर पर या सभा में उसी प्रकार सुशोभित नहीं होता है जिस प्रकार मणि से रहित साँप
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(किञ्चिद्‌ विमृश्य)(कुछ सोचकर)
भवतु, किम्‌ एतेन?अच्छा, इससे क्या?
दिवसे मार्गभ्रान्त: सन्ध्यां यावद्‌ यदि गृहमुपैति तदपि वरम्‌।दिन में रास्ता भूला हुआ मनुष्य यदि शाम तक घर आ जाए तो भी ठीक है।
नाऽसौ भ्रान्तो मन्यते। तब वह भूला हुआ नहीं माना जाता।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अतोऽहम्‌ इदानीं तपश्चर्यया विद्यामवाप्तुं प्रवृत्तोऽस्मि।अब मैं तपस्या के द्वारा विद्या प्राप्ति में लग जाता हूँ।
(जलोच्छलनध्वनि: श्रूयते)(पानी के उछलने की आवाज़ सुनी जाती है)
अये कुतोऽयं कल्लोलोच्छलनध्वनि:?तपोदत्त – अरे! यह लहरों के उछलने की आवाज़ कहाँ से आ रही है?
महामत्स्यो मकरो वा भवेत्‌। शायद बड़ी मछली या मगरमच्छ हो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
पश्यामि तावत्‌।चलो मैं देखता हूँ।
(पुरुषमेकं सिकताभि: सेतुनिर्माण-प्रयासं कुर्वाणं दृष्ट्‌वा सहासम्‌)(एक पुरुष को रेत से पुल बनाने का प्रयास करते हुए देखकर हँसते हुए)
हन्त! नास्त्यभावो जगति मूर्खाणाम्‌! हाय ! इस संसार में मूर्खों की कमी नहीं है।
तीव्रप्रवाहायां नद्यां मूढोऽयं सिकताभि: सेतुं निर्मातुं प्रयतते!तेज़ प्रवाह (बहाव) वाली नदी में यह मूर्ख रेत से पुल बनाने का प्रयत्न कर रहा है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(साट्‌टहासं पार्श्वमुपेत्य)(जोर-जोर से हँसकर पास जाकर)
भो महाशय! किमिदं विधीयते! अलमलं तव श्रमेण।हे महाशय! यह क्या कर रहे हो आप? बस-बस मेहनत मत करो।
पश्य, रामो बबन्ध यं सेतुं शिलाभिर्मकरालये।देखो- श्रीराम ने समुद्र पर जिस पुल को शिलाओं से बनाया था,
विदधद्‌ बालुकाभिस्तं यासि त्वमतिरामताम्‌॥2॥उस पुल को (इस प्रकार) रेत से बनाते हुए तुम उनके पुरुषार्थ का अतिक्रमण कर रहे हो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
चिन्तय तावत्‌। सिकताभि: क्वचित्सेतु: कर्तुं युज्यते?जरा सोचो! कहीं रेत से पुल बनाया जा सकता है?
पुरुष: – भोस्तपस्विन्‌! कथं माम्‌ अवरोधं करोषि। पुरुष – हे तपस्विन्! तुम मुझे क्यों रोकते हो?
प्रयत्नेन किं न सिद्धं भवति? प्रयत्न करने से क्या सिद्ध नहीं होता?
कावश्यकता शिलानाम्‌? शिलाओं की क्या आवश्यकता?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सिकताभिरेव सेतुं करिष्यामि स्वसंकल्पदृढतया।मैं रेत से ही पुल बनाने के लिए संकल्पबद्ध हूँ।
तपोदत्त: – आश्चर्यम्‌! किम्‌ सिकताभिरेव सेतुं करिष्यसि? तपोदत्त – आश्चर्य है! रेत से ही पुल बनाओगे?
सिकता: जलप्रवाहे स्थास्यन्ति किम्‌? भवता चिन्तितं न वा?क्या तुमने यह सोचा है कि रेत पानी के बहाव पर कैसे ठहर पाएगी?
पुरुष: – (सोत्प्रासम्‌) चिन्तितं चिन्तितम्‌। पुरुष – (उसकी बात का खण्डन करते हुए) सोचा है, सोचा है
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सम्यक्‌ चिन्तितम्‌। अच्छी प्रकार सोचा है।
नाहं सोपानसहायतया अधि- रोढुं विश्वसिमि। मैं सीढ़ियों के मार्ग से (परम्परागत तरीके से) अटारी पर चढ़ने में विश्वास नहीं करता।
समुत्प्लुत्यैव गन्तुं क्षमोऽस्मि।मुझमें छलाँग मारकर जाने की क्षमता है।
तपोदत्त: – (सव्यङ्‌ग्यम्‌)तपोदत्त (व्यंग्यपूर्वक)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
साधु साधु! आञ्जनेयमप्यतिक्रामसि!शाबाश, शाबाश! तुम तो अञ्जनिपुत्र हनुमान का भी अतिक्रमण कर रहे हो।
पुरुष: – (सविमर्शम्‌) कोऽत्र सन्देह:? पुरुष – (सोच-विचार कर)
किञ्च, विना लिप्यक्षरज्ञानं तपोभिरेव केवलम्‌।और क्या? इसमें क्या सन्देह है। लिपि तथा अक्षर-ज्ञान के बिना जिस प्रकार केवल तपस्या से
यदि विद्या वशे स्युस्ते, सेतुरेष तथा मम॥3॥विद्या तुम्हारे वश में हो जाएगी, उसी प्रकार मेरा यह पुल भी। (केवल रेत से बन जाएगा)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
तपोदत्त: – (सवैलक्ष्यम्‌ आत्मगतम्‌) अये! मामेवोद्दिश्य भद्रपुरुषोऽयम्‌ अधिक्षिपति! नूनं सत्यमत्र पश्यामि। तपोदत्त – (लज्जापूर्वक अपने मन में) अरे! यह सज्जन मुझे ही लक्ष्य करके आक्षेप लगा रहा है।
नूनं सत्यमत्र पश्यामि। निश्चय ही यहाँ मैं सच्चाई देख रहा हूँ।
अक्षरज्ञानं विनैव वैदुष्यमवाप्तुम्‌ अभिलषामि! तदियं भगवत्या: शारदाया अवमानना।मैं बिना अक्षर ज्ञान के ही विद्वता प्राप्त करना चाहता हूँ। यह तो देवी सरस्वती का अपमान है।
गुरुगृहं गत्वैव विद्याभ्यासो मया करणीय:। मुझे गुरुकुल जाकर ही विद्या का अध्ययन करना चाहिए।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
पुरुषार्थैरेव लक्ष्यं प्राप्यते। (प्रकाशम्‌)पुरुषार्थ (मेहनत) से ही लक्ष्य की प्राप्ति सम्भव है।
भो नरोत्तम! नाऽहं जाने यत्‌ कोऽस्ति भवान्‌। हे श्रेष्ठ पुरुष! मैं नहीं जानता कि आप कौन हैं?
परन्तु भवदि्‌भ: उन्मीलितं मे नयनयुगलम्‌। किन्तु आपने मेरे नेत्र खोल दिए।
तपोमात्रेण विद्यामवाप्तुं प्रयतमान: अहमपि सिकताभिरेव सेतुनिर्माणप्रयासं करोमि। तपस्या मात्र से हो विद्या को प्राप्त करने का प्रयत्न करता हुआ मैं भी रेत से ही पुल बनाने का प्रयास कर रहा था,
तदिदानीं विद्याध्ययनाय गुरुकुलमेव गच्छामि। (सप्रणामं गच्छति)तो अब मैं विद्या प्राप्त करने के लिए गुरुकुल जाता हूँ। (प्रणाम करता हुआ चला जाता है)
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 सिकतासेतु:
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 के प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 के हल
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9 के लिए गाइड
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 9
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत पाठ 9 सिकतासेतु: