एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 10 जटायो: शौर्यम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 10 जटायो: शौर्यम्‌ शेमुषी भाग एक पाठ्यपुस्तक में पाठ के अंत में दिए गए सभी प्रश्नों के हल विस्तार पूर्वक शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ दिए गए हैं। विद्यार्थियों की मदद के लिए पाठ का हिंदी अनुवाद भी एनसीईआरटी संस्कृत समाधान के साथ साथ दिया गया है। विद्यार्थियों को पाठ अच्छी तरह से समझ कर सभी उत्तरों को स्वयं करने का प्रयास करना चाहिए।

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 10 के लिए एनसीईआरटी समाधान

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संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सा तदा करुणा वाचो विलपन्ती सुदु:खिता।तब करुण वाणी में रोती हुई, बहुत दुखी
वनस्पतिगतं गृध्रं ददर्शायतलोचना ॥1॥बड़ी-बड़ी आँखों वाली (सीता) ने वृक्ष पर (स्थित) बैठे हुए गिध्र (जटायु) को देखा।
जटायो पश्य मामार्य ह्रियमाणामनाथवत्‌।हे आर्य जटायु! इस पापकर्म करने वाले राक्षस राज (रावन) के द्वारा
अनेन राक्षसेन्द्रेणाकरुणं पापकर्मणा ॥2॥अनाथ की तरह हरण की जाती हुई मुझ दुखी को देखो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
तं शब्दमवसुप्तस्तु जटायुरथ शुश्रुवे।इसके बाद सोए हुए जटायु ने उस शब्द को सुना।
निरीक्ष्य रावणं क्षिप्रं वैदेहीं च ददर्श स: ॥3॥तथा रावण को देखकर और शीघ्र ही वैदेही (सीता) को देखा।
तत: पर्वतशृङ्भस्तीक्ष्णतुण्ड: खगोत्तम:।उसके बाद (तब) पर्वत शिखर की तरह शोभा वाले
वनस्पतिगत: श्रीमान्व्याजहार शुभां गिरम्‌ ॥4॥तीखे चोंच वाले, वृक्ष पर स्थित, शोभायुक्त पक्षियों में उत्तम (जटायु) ने सुंदर वाणी में कहा।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
निवर्तय मतिं नीचां परदाराभिमर्शनात्‌।पराई नारी (परस्त्री) के स्पर्शदोष से तुम अपनी नीच बुद्धि (नीच विचार) को हटा लो
न तत्समाचरेद्धीरो यत्परोऽस्य विगर्हयेत्‌ ॥5॥क्योंकि बुद्धिमान (धैर्यशाली) मनुष्य को वह आचरण नहीं करना चाहिए, जिससे कि दुसरे लोग उसकी निंदा (बुराई) करें।
वृद्धोऽहं त्वं युवा धन्वी सरथ: कवची शरी।मैं (तो) बुढा हूँ परंतु तुम युवक (जवान) हो, धनुषधारी हो, रथ से युक्त हो, कवचधारी हो
न चाप्यादाय कुशली वैदेहीं मे गमिष्यसि ॥6॥और बाण धारण किए हो। तो भी मेरे रहते सीता को लेकर नहीं जा सकोगे।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
तस्य तीक्ष्णनखाभ्यां तु चरणाभ्यां महाबल:।उस उत्तम तथा अतीव बलशाली पक्षी (राज) ने अपने तीखे नाखूनों
चकार बहुधा गात्रे व्रणान्‌ पतगसत्तम: ॥7॥तथा पैरों से उस (रावण) के शरीर पर बहुत से घाव कर दिए।
ततोऽस्य सशरं चापं मुक्तामणिविभूषितम्‌।तब टूटे हुए धनुष वाले, रथ से विहीन
चरणाभ्यां महातेजा बभञ्जा पतगेश्वर: ॥8॥मारे गए घोड़ों व सारथि वाले अत्यंत क्रोधित
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
स भग्नधन्वा विरथो हताश्वो हतसारथि:।उसने अत्यन्त क्रोधित तलवार की मूंठ से
तलेनाभिजघानाशु जटायुं क्रोधमूर्च्िछत: ॥9॥शीघ्र ही जटायु पर घातक प्रहार किया।
जटायुस्तमतिक्रम्य तुण्डेनास्य खगाधिप:।तब उस पक्षीराज जटायु ने शत्रुओं का नाश करने वाली अपनी चोंच से
वामबाहून्‌ दश तदा व्यपाहरदरिन्दम: ॥10॥झपटकर (आक्रमण करके) उसके (रावण के) बाई ओर की दसों भुजाओं को नष्ट कर दिया।
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 10
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत पाठ 10 जटायो: शौर्यम्‌
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 10 के प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 10 के उत्तर
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