एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 3 गोदोहनम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 3 गोदोहनम्‌ शेमुषी भाग एक के सभी प्रश्नों के उत्तर विस्तार से सरल भाषा में शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 9 संस्कृत के सभी समाधान सीबीएसई के साथ साथ उन राजकीय बोर्ड के लिए भी महत्वपूर्ण हैं जो एनसीईआरटी पुस्तक को पाठ्यक्रम में प्रयोग कर रहें हैं। कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 3 के प्रश्न उत्तर और हिंदी अनुवाद यहाँ से मुफ़्त में प्राप्त करें।

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

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संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(मल्लिका मोदकानि साधयन्ती मन्दस्वरेण शिवस्तुतिं करोति)(मल्लिका लड्डुओं को बनाती हुई धीमी आवाज़ में शिव की स्तुति करती है।)
(तत: प्रविशति मोदकगन्धम्‌ अनुभवन्‌ प्रसन्नमना चन्दन: ।)उसके बाद लड्डुओं की सुगन्ध को अनुभव करते हुए प्रसन्न मन से चन्दन प्रवेश करता है।)
चन्दन: – अहा! सुगन्धस्तु मनोहर: (विलोक्य) अये मोदकानि रच्यन्ते? (प्रसन्न: भूत्वा)चन्दन – वाह! सुगन्ध तो मनोहारी है (देखकर) अरे लड्डू बनाए जा रहे हैं? (प्रसन्न होकर)
आस्वादयामि तावत्‌। (मोदकं ग्रहीतुमिच्छति)तो स्वाद लेता हूँ। (लड्डू को लेना चाहता है)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
मल्लिका – (सक्रोधम्‌) विरम। विरम। मा स्पृश एतानि मोदकानि।मल्लिका – अच्छी तरह से जानती हूँ स्वामी। परन्तु ये लड्डू पूजा के लिए हैं।
चन्दन: – किमर्थं क्रुध्यसि! तव हस्तनिर्मितानि मोदकानि दृष्ट्‌वा अहं जिह्वालोलुपतां नियन्त्रयितुम्‌ अक्षम: अस्मि, किं न जानासि त्वमिदम्‌?चन्दन – क्यों गुस्सा करती हो! तुम्हारे हाथों से बने लड्डुओं को देखकर मैं जीभ की लालच पर काबू रखने में असमर्थ हूँ, क्या तुम यह नहीं जानती हो?
मल्लिका – सम्यग्‌ जानामि नाथ! परम्‌ एतानि मोदकानि पूजानिमित्तानि सन्ति।मल्लिका – अच्छी तरह से जानती हूँ स्वामी। परन्तु ये लड्डू पूजा के लिए हैं।
चन्दन: – तर्हि, शीघ्रमेव पूजनं सम्पादय। प्रसादं च देहि।चन्दन – तो जल्दी ही पूजा करो और प्रसाद को दो
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
मल्लिका – भो:! अत्र पूजनं न भविष्यति। अहं स्वसखीभि: सह श्व: प्रात: काशीविश्वनाथमन्दिरं गमिष्यामि, तत्र गङ्स्नानं धर्मयात्राञ्च वयं करिष्याम:। मल्लिका – अरे! यहाँ पूजा नहीं होगी। मैं अपनी सखियों के साथ कल सुबह काशीविश्वनाथ मंदिर की ओर जाऊँगी, वहाँ हम गंगा स्नान और धार्मिक यात्रा करेंगी।
चन्दन: – सखिभि: सह! न मया सह! (विषादं नाटयति)चन्दन – सखियों के साथ ! मेरे साथ नहीं (दुःख का अभिनय करता है)
मल्लिका – आम्‌। चम्पा, गौरी, माया, मोहिनी, कपिलादय: सर्वा: गच्छन्ति। मल्लिका- – हाँ। चंपा, गौरी, माया, मोहिनी, कपिला आदि सब जाती हैं।
अत:, मया सह तवागमनस्य औचित्यं नास्ति। अतः मेरे साथ तुम्हारे आने का कोई औचित्य (उचित रूप) नहीं है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
वयं सप्ताहान्ते प्रत्यागमिष्याम:। हम सप्ताह के अन्त में (तक) वापस आ जाएँगी।
तावत्‌, गृह-व्यवस्थां, धेनो: दुग्धदोहनव्यवस्थाञ्च परिपालय।तब तक घर की व्यवस्था और गाय के दूध को दुहने की व्यवस्था को चलाना।
चन्दन: – अस्तु। गच्छ। चन्दन – ठीक है। जाओ।
सखीभि: सह धर्मयात्रया आनन्दिता च भव। और सखियों के साथ धर्मयात्रा से आनन्दित होओ।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अहं सर्वमपि परिपालयिष्यामि। मैं सभी को पाल लूँगा।
शिवास्ते सन्तु पन्थान:!तुम्हारे रास्ते शुभ हों।
मल्लिका – मल्लिका तु धर्मयात्रायै गता। अस्तु। तो धर्मयात्रा हेतु गई। ठीक है।
दुग्धदोहनं कृत्वा तत: स्वप्रातराशस्य प्रबन्धं करिष्यामि। गाय का दूध दुहकर उससे अपने नाश्ते (जलपान) का प्रबन्ध करूँगा।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(स्त्रीवेषं धृत्वा, दुग्धपात्रहस्त: नन्दिन्या: समीपं गच्छति)स्त्री का वेश धारण करके, दूध के हाथ में लिए नन्दिनी गाय के पास जाता है)
उमा – मातुलानि! मातुलानि!उमा – मामी! मामी
चन्दन: – उमे! अहं तु मातुल:। तव मातुलानी तु गङ्स्नानार्थं काशीं गता अस्ति। चन्दन – हे उमा! मैं तो मामा॑ हूँ। तुम्हारी मामी तो गंगा स्नान के लिए काशी गई है।
कथय! किं ते प्रियं करवाणि?कहो! क्या तुम्हारा भला करूँ?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
उमा – मातुल! पितामह: कथयति, मासानन्तरम्‌ अस्मद्‌ गृहे महोत्सव: भविष्यति। उमा – मामा ! दादाजी कहते हैं, महीने भर बाद हमारे घर में उत्सव होगा।
तत्र त्रिशत-सेटकमितं दुग्धम्‌ अपेक्ष्यते। तब तीन सौ लीटर तक दूध चाहिए।
एषा व्यवस्था भवद्भि: करणीया।यह व्यवस्था आपको ही करनी है।
चन्दन: – (प्रसन्नमनसा) त्रिशत-सेटककपरिमितं दुग्धम्‌! शोभनम्‌। चन्दन: – (प्रसन्न मन से) तीस लीटर मात्रा (माप) में दूध! सुन्दर दूध की व्यवस्था हो जाएगी ही ऐसा दादा जी को तुम कह दो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
दुग्धव्यवस्था भविष्यति एव इति पितामहं प्रति त्वया वक्तव्यम्‌।दूध की व्यवस्था हो जाएगी ही ऐसा दादा जी को तुम कह दो।
उमा – धन्यवाद: मातुल! याम्यधुना। (सा निर्गता)उमा – धन्यवाद मामा! अब जाती हूँ। (वह चली गई)
चन्दन: – (प्रसन्नो भूत्वा, अङ्गु लिषु गणयन्‌) अहो! त्रिशत-सेटकं दुग्धम्‌! अनेन तु बहुधनं लप्स्ये। चन्दन (प्रसन्न मन से) तीस लीटर मात्रा (माप) में दूध! सुन्दर दूध की व्यवस्था हो जाएगी ही ऐसा दादा जी को तुम कह दो ।
(नन्दिनीं दृष्ट्‌वा) भो नन्दिनि! तव कृपया तु अहं धनिक: भविष्यामि। (नन्दिनी को देखकर) हे नन्दिनी! तुम्हारी कृपा से तो मैं धनी हो जाऊँगा।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(प्रसन्न: स: धेनो: बहुसेवां करोति)(प्रसन्न होकर वह गाय की बहुत सेवा करता है)
चन्दन: – (चिन्तयति) मासान्ते एव दुग्धस्य आवश्यकता भवति।चन्दन- (सोचता है) मास (महीने) के अन्त में ही दूध की जरूरत है।
यदि प्रतिदिनं दोहनं करोमि तर्हि दुग्धं सुरक्षितं न तिष्ठति। यदि हर रोज़ दुहने का काम करता हूँ तो दूध सुरक्षित नहीं रहता है।
इदानीं किं करवाणि? अब क्या करूँ?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
भवतु नाम मासान्ते एव सम्पूर्णतया दुग्धदोहनं करोमि।ठीक है, महीने के अन्त में ही पूरी तरह से दूध को दुहने का काम करता हूँ (करूँगा) ।
(एवं क्रमेण सप्तदिनानि व्यतीतानि। सप्ताहान्ते मल्लिका प्रत्यागच्छति)इस प्रकार क्रमानुसार सात दिन बीत गए। सप्ताह के अन्त में मल्लिका वापस आती है)
मल्लिका – (प्रविश्य) स्वामिन्‌! प्रत्यागता अहम्‌। आस्वादय प्रसादम्‌।मल्लिका – (प्रवेश करके) स्वामी! मैं वापस आ गई। प्रसाद को खाओ।
(चन्दन: मोदकानि खादति वदति च)(चन्दन लड्डुओं को खाता है और बोलता है।)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
चन्दन: – मल्लिके! तव यात्रा तु सम्यक्‌ सफला जाता? काशीविश्वनाथस्य कृपया प्रियं निवेदयामि।चन्दन – मल्लिका! तुम्हारी यात्रा तो ठीक प्रकार से सफल हो गई? काशी विश्वनाथ की कृपा से प्रिय निवेदन करता हूँ।
मल्लिका – (सार्श्चयम्‌) एवम्‌। धर्मयात्रातिरिक्तं प्रियतरं किम्‌?मल्लिका – (आश्चर्य के साथ) ऐसा है। धर्मयात्रा के अतिरिक्त अधिक प्रिय क्या है?
चन्दन: – ग्रामप्रमुखस्य गृहे मासान्ते महोत्सव: भविष्यति। तत्र त्रिशत-सेटकमितं दुग्धम्‌ अस्माभि: दातव्यम्‌ अस्ति।चन्दन – गाँव के प्रधान के घर में महीने के अन्त में महोत्सव होगा। वहाँ तीन सौ लीटर दूध हमें देना है।
मल्लिका – किन्तु एतावन्मात्रं दुग्धं कुत: प्राप्स्याम:?मल्लिका – किन्तु इतनी मात्रा में दूध हमें कहाँ से मिलेगा?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
चन्दन: – विचारय मल्लिके! प्रतिदिनं दोहनं कृत्वा दुग्धं स्थापयाम: चेत्‌ तत्‌ सुरक्षितं न तिष्ठति।चन्दन – सोचो मल्लिका! हर रोज दुह करके हम दूध को रखते हैं यदि वह सुरक्षित न रहे तो।
अत एव दुग्धदोहनं न क्रियते। उत्सवदिने एव समग्रं दुग्धं धोक्ष्याव:।इसलिए गाय का दोहन कार्य नहीं किया जा रहा है। उत्सव के दिन ही सारा दूध दुह लेंगे।
मल्लिका – स्वामिन्‌! त्वं तु चतुरतम:। मल्लिका – हे स्वामी! तुम तो बहुत चतुर हो।
अत्युत्तम: विचार:। बहुत सुन्दर विचार है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अधुना दुग्धदोहनं विहाय केवलं नन्दिन्या: सेवाम्‌ एव करिष्याव:। अब दूध दुहना छोड़कर केवल नन्दिनी की सेवा ही करेंगे।
अनेन अधिकाधिकं दुग्धं मासान्ते प्राप्स्याव:।इससे अधिक से अधिक दूध को महीने के अन्त में प्राप्त करेंगे।
(द्वावेव धेनो: सेवायां निरतौ भवत: ।)(दोनों ही गाय की सेवा में लगे होते हैं।)
अस्मिन्‌ क्रमे घासादिकं गुडादिकं च भोजयत:।इसी तरह वे घास व गुड़ आदि खिलाते हैं।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
कदाचित्‌ विषाणयो: तैलं लेपयत: तिलकं धारयत:, रात्रौ नीराजनेनापि तोषयत:)कभी सीगों पर तेल लगाते हैं, तिलक लगाते हैं, रात में जल आदि से भी सन्तुष्ट करते हैं।)
चन्दन: – मल्लिके! आगच्छ।चन्दन – मल्लिका! आओ।
कुम्भकारं प्रति चलाव:। कुंभार के घर की ओर चलते हैं।
दुग्धार्थं पात्रप्रबन्धोऽपि करणीय:। (द्वावेव निर्गतौ)दूध के लिए बर्तन का प्रबन्ध भी करना है। (दोनों ही निकलते हैं)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
कुम्भकार: -(घटरचनायां लीन: गायति)कुंभार – (घड़े बनाने में व्यस्त है और गाता हैं)
ज्ञात्वाऽपि जीविकाहेतो: रचयामि घटानहम्‌।मैं जानकर भी जीविका (जीवन के लिए साधन) के कारण ही इन घड़ों को बनाता हूँ।
जीवनं भङु्गरं सर्वं यथायं मृत्तिकाघट:॥सारा जीवन टूटकर नष्ट होने योग्य हैं जैसे यह मिटटी का घड़ा टूटकर समाप्त होने योग्य है।
चन्दन: – नमस्करोमि तात! पञ्चदश घटान्‌ इच्छामि। किं दास्यसि?चन्दन – हे तात! नमस्कार करता हूँ। पन्द्रह घड़े चाहता हूँ। कैसे दोगे?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
देवेश – कथं न? विक्रयणाय एव एते। गृहाण घटान्‌। पञ्चाशदुत्तरैकशतं रूप्यकाणि च देहि।देवेश – क्यों नहीं? बेचने के लिए ही है ये घड़ों को ले लो और पाँच सौ रुपये दे दो।
चन्दन: – साधु। परं मूल्यं तु दुग्धं विक्रीय एव दातुं शक्यते।चन्दन – ठीक है। परन्तु मूल्य (दाम) तो दूध को बेचकर ही दिया जा सकता है।
देवेश: – क्षम्यतां पुत्र! मूल्यं विना तु एकमपि घटं न दास्यामि।देवेश – हे पुत्र क्षमा करो! बिना मूल्य (दान) के एक भी घड़ा नहीं दूंगा।
मल्लिका – (स्वाभूषणं दातुमिच्छति) तात! यदि अधुनैव मूल्यम्‌ आवश्यकं तर्हि, गृहाण एतत्‌ आभूषणम्‌।मल्लिका – (अपने आभूषणों को देना चाहती है) हे तात! यदि अभी कीमत देना आवश्यक (जरुरी) है तो यह जेवर ले लो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
देवेश: – पुत्रिके! नाहं पापकर्म करोमि। कथमपि नेच्छामि त्वाम्‌ आभूषणविहीनां कर्तुम्‌। देवेश – बेटी मैं पाप का काम नहीं करता हूँ। तुम्हें आभूषण विहीन कभी भी नहीं करना चाहता हूँ
नयतु यथाभिलषितं घटान्‌। दुग्धं विक्रीय एव घटमूल्यम्‌ ददातु।इच्छानुसार घड़ों को ले जाओ। दूध को बेचकर ही बड़ों की कीमत दे देना।
उभौ – धन्योऽसि तात! धन्योऽसि।दोनों – तात! आप धन्य हो। धन्य हो
(मासानन्तरं सन्ध्याकाल: । एकत्र रिक्ता: नूतनघटा: सन्ति। दुग्धक्रेतार: अन्ये च ग्रामवासिन: अपरत्र आसीना:)महीने भर बाद का सायंकाल। इकट्ठे ही खाली नये घड़े हैं। दूध खरीदने वाले और दूसरे गाँववासी दूसरी ओर खड़े हैं।)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
चन्दन: – (धेनुं प्रणम्य, मङ्गलाचरणं विधाय, मल्लिकाम्‌ आह्वयति) मल्लिके! सत्वरम्‌ आगच्छ।चन्दन – (गाय को प्रणाम करके, मंगलाचरण (पूजा) करके, मल्लिका को बुलाता है) हे मल्लिका! जल्दी आओ।
मल्लिका – आयामि नाथ! दोहनम्‌ आरभस्व तावत्‌।मल्लिका – आती हूँ स्वामी! तब तक दुहना शुरू करो।
चन्दन: – (यदा धेनो: समीपं गत्वा दोग्धुम्‌ इच्छति, तदा धेनु: पृष्ठपादेन प्रहरति।चन्दन – (जब गाय के पास जाकर दुहना चाहता है, तब गाय पिछले पैर से मारती है
चन्दनश्च पात्रेण सह पतति) नन्दिनि! दुग्धं देहि। चन्दन बर्तन के साथ गिरता है) हे नन्दिनी! दूध दो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
किं जातं ते? (पुन: प्रयासं करोति) तुम्हें क्या हो गया? (फिर से कोशिश करता है)
(नन्दिनी च पुन: पुन: पादप्रहारेण ताडयित्वा चन्दनं रक्तरञ्ज्तिं करोति) (और नन्दिनी बार-बार पैर की चोट से मारकर चन्दन को लहुलुहान कर देती है)
हा! हतोऽस्मि। (चीत्कारं कुर्वन्‌ पतति) (सर्वे आर्श्चयेण चन्दनम्‌ अन्योन्यं च पश्यन्ति)हाय! मैं मार दिया गया। (चीखते हुए गिरता है) (सभी आश्चर्य से चन्दन और एक-दूसरे को देखते हैं)
मल्लिका – (चीत्कारं श्रुत्वा, झटिति प्रविश्य) नाथ! किं जातम्‌? मल्लिका – (चीख को सुनकर, जल्दी प्रवेश करके) स्वामी! क्या हुआ?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
कथं त्वं रक्तरञ्ज्ति:?कैसे तुम लहुलुहान हो गए?
चन्दन: – धेनु: दोग्धुम्‌ अनुमतिम्‌ एव न ददाति। दोहनप्रक्रियाम्‌ आरभमाणम्‌ एव ताडयति माम्‌।चन्दन – गाय दूध दुहने की अनुमति ही नहीं दे रही है। दुहने का काम शुरू करते ही मुझे मारती है।
(मल्लिका धेनुं स्नेहेन वात्सल्येन च आकार्य दोग्धुं प्रयतते। किन्तु, धेनु: दुग्धहीना एव इति अवगच्छति।)मल्लिका गाय को प्यार और पुचकार से बुलाकर दुहने की कोशिश करती है किन्तु गाय तो दुधविहीन है यह समझ जाती है।)
मल्लिका – (चन्दनं प्रति) नाथ! अत्यनुचितं कृतम्‌ आवाभ्याम्‌ यत्‌, मासपर्यन्तं धेनो: दोहनं न कृतम्‌। मल्लिका – (चन्दन की ओर) हे स्वामी! हम दोनों ने बहुत अनुचित किया कि महीने भर तक गाय का दोहन नहीं किया।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सा पीडा अनुभवति। वह पीड़ा (दर्द) को अनुभव कर रही है।
अत एव ताडयति।इसलिए मारती है।
चन्दन: – देवि! मयापि ज्ञातं यत्‌, अस्माभि: सर्वथा अनुचितमेव कृतं यत्‌, पूर्णमासपर्यन्तं दोहनं न कृतम्‌। चन्दन – हे देवी! मुझे भी लगा कि हमने पूरी तरह से अनुचित ही किया कि पूरे महीने तक दोहन नहीं किया।
अत एव, इयं दुग्धहीना जाता। इसीलिए दूध सूख गया।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सत्यमेव उक्तम्‌- कार्यमद्यतनीयं यत्‌ तदद्यैव विधीयताम्‌।सत्य ही कहा गया है-आज का जो काम है, उसे आज ही करना चाहिए।
विपरीता गतिर्यस्य स कष्टं लभते ध्रुवम्‌॥जिसकी गति (काम करने का तरीका) उल्टी होती है, वह निश्चय ही कष्ट पाता है।
मल्लिका – आम्‌ भर्त:! सत्यमेव। मल्लिका – हाँ स्वामी! सच ही।
मयापि पठितं यत्‌- सुविचार्य विधातव्यं कार्यं कल्याणकाव्म्णिा।मैंने भी पढ़ा है यत्-कल्याण चाहने वाले मनुष्य के द्वारा अच्छी तरह से सोच-विचार है कर काम को करना चाहिए।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
य: करोत्यविचार्यैतत्‌ स विषीदति मानव:॥जो व्यक्ति बिना विचार किए काम करता है, वह दुखी होता है। किन्तु प्रत्यक्ष रूप से आज ही यह अनुभव किया।
सर्वे, – दिनस्य कार्यं तस्मिन्नेव दिने कर्तव्यम्। सभी- – हमें दिन का काम उसी दिन ही करना चाहिए।
यः एवं न करोति सः कष्टं लभते ध्रुवम्।जो ऐसा नहीं करता है वह निश्चित कष्ट को अनुभव करता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(सर्वे मिलित्वा गायन्ति) (सभी मिलकर गाते हैं)
आदानस्य प्रदानस्य कर्तव्यस्य च कर्मणः।लेने के, देने के और कहने योग्य (अन्य) कर्म के,
क्षिप्रमक्रियमाणस्य कालः पिबति तद्रसम्॥शीघ्र न किए जाने पर समय उसका रस (आनन्द) पी जाता।
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