एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 7 प्रत्यभिज्ञानम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 7 प्रत्यभिज्ञानम्‌ शेमुषी भाग एक में पाठ के अंत में दिए गए पाठ्यपुस्तक के सभी प्रश्नों के हल यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 9 संस्कृत पाठ 7 के प्रश्न उत्तर सीबीएसई और राजकीय बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार सत्र 2022-2023 के लिए संशोधित किए गए हैं ताकि विद्यार्थी नए कोर्स के अनुसार पढ़ाई कर सकें। छात्र पाठ को अच्छी तरह से समझने के लिए संस्कृत से हिंदी अनुवाद की मदद ले कर तैयारी करें।

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 7 के लिए एनसीईआरटी समाधान

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संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
भट: – जयतु महाराज:!भट – महाराज की जय हो।
राजा – अपूर्व इव ते हर्षो ब्रूहि, केनासि विस्मित:?राजा – तुम्हारी प्रसन्नता अद्भुत-सी लग रही है, बताओ किस कारण इतने प्रसन्न हो?
भट: – अश्रद्धेयं प्रियं प्राप्तं सौभद्रो ग्रहणं गत:॥भट – अविश्वसनीय प्रिय प्राप्त हो गया है, अभिमन्यु पकड़ लिया गया।
राजा – कथमिदानीं गृहीत:?राजा – अब वह किस प्रकार पकड़ लिया गया है?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
भट: – रथमासाद्य निश्शहू बाहुभ्यामवतारित:।भट – रथ पर पहुँचकर निश्शङ्क भाव से हाथों द्वारा उतार लिया गया है।
राजा – केन?राजा – कैसे?
भट: – य: किल एष नरेन्द्रेण विनियुक्तो महानसे। (अभिमन्युमुद्दिश्य) इत इत: कुमार:।भट – निश्चय से जो यह महाराज के द्वारा रसोई में नियुक्त किया गया है (अभिमन्यु को संकेत करके) कुमार! इधर से इधर से (आओ)।
अभिमन्यु: – भो: को नु खल्वेष:? येन भुजैकनियन्त्रितो बलाधिकेनापि न पीडित: अस्मि।अभिमन्युः – अरे! यह कौन?, जिसने एक हाथ से पकड़कर अधिक बलशाली होकर भी मुझे पीड़ित नहीं किया।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
बृहन्नला – इत इत: कुमार:।बृहन्नला – कुमार, इधर चलें।
अभिमन्यु: – अये! अयमपर: क: विभात्युमावेषमिवाश्रितो हर:।अभिमन्यु – अरे! यह दूसरा कौन है, ऐसा लग रहा है जैसे महादेव ने उमा का वेष ग्रहण किया हो।
बृहन्नला – आर्य, अभिभाषणकौतूहलं मे महत्‌। वाचालयत्वेनमार्य:।बृहन्नला – आर्य! मुझे इससे बात करने की बहुत उत्सुकता हो रही है। आप इसे बोलने के लिए प्रेरित करें।
वल्लभ: – (अपवार्य) बाढम्‌ (प्रकाशम्‌) अभिमन्यो!बल्लभः – (एक ओर को) अच्छा (प्रकट रूप से) अभिमन्यु।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अभिमन्यु: – अभिमन्युर्नाम?अभिमन्यु – अभिमन्यु?
वल्लभ: – रुष्यत्येष मया, त्वमेवैनमभिभाषय।बल्लभः – यह मुझसे चिढ़ता है, तुम्हीं इसे बात करने के लिए प्रेरित करो।
बृहन्नला – अभिमन्यो!बृहन्नला – अभिमन्यु!
अभिमन्यु: – कथं कथम्‌। अभिमन्युर्नामाहम्‌। अभिमन्यु – क्यों, मेरा नाम अभिमन्यु है!
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
भो:! किमत्र विराटनगरे क्षत्रियवंशोद्‌भूता: नीचै: अपि नामभि: अभिभाष्यन्ते अथवा अहं शत्रुवशं गत:। अरे! क्या यहाँ विराट नगर में क्षत्रिय कुमारों को नीच लोग भी नाम लेकर पुकारते हैं, अथवा मैं शत्रुओं के अधीन हो गया
अत एव तिरस्क्रियते।इसलिए अपमानित किया जा रहा है मुझे।
बृहन्नला – अभिमन्यो! सुखमास्ते ते जननी?बृहन्नला – अभिमन्यु! तुम्हारी माता सकुशल?
अभिमन्यु: – कथं कथम्‌? जननी नाम? किं भवान्‌ मे पिता अथवा पितृव्य:?अभिमन्यु – क्या, क्या? मेरी माता का नाम? क्या आप मेरे पिता या पिता के सामान हैं
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
कथं मां पितृवदाक्रम्य स्त्रीगतां कथां पृच्छति?आप क्यों मुझ पर पिता समान अधिकार दिखाकर माता सम्बन्ध में प्रश्न कर रहे?
बृहन्नला – अभिमन्यो! अपि कुशली देवकीपुत्र: केशव:?बृहन्नला – अभिमन्यु! देवकीपुत्र केशव सकुशल हैं?
अभिमन्यु: – कथं कथम्‌? तत्र भवन्तमपि नाम्ना। अथ किम्‌ अथ किम्‌?अभिमन्यु – क्या आदरणीय कृष्ण को भी नाम से…? और क्या, और क्या! (कुशल हैं)
(बृहन्नलावल्लभौ परस्परमवलोकयत:)(बृहन्नला और बल्लभ एक-दूसरे की ओर देखते हैं)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अभिमन्यु: – कथमिदानीं सावज्ञमिव मां हस्यते?अभिमन्यु – ये मेरे ऊपर अज्ञानी की तरह क्यों हँस रहे हैं?
बृहन्नला – न खलु किञ्चित्‌।बृहन्नला – क्या कुछ ऐसा ही नहीं है?
पार्थं पितरमुद्दिश्य मातुलं च जनार्दनम्‌।पिता पार्थ तथा मामा श्री कृष्ण वाला
तरुणस्य कृतास्त्रस्य युक्तो युद्धपराजय:॥युवक युद्ध में निपुण होकर भी युद्ध में परास्त हो जाता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अभिमन्यु: – अलं स्वच्छन्दप्रलापेन! अस्माकं कुले आत्मस्तवं कर्तुमनुचितम्‌। अभिमन्युः – स्वच्छन्द प्रलाप करना बन्द करो। हमारे कुल में आत्मप्रशंसा करना अनुचित है।
रणभूमौ हतेषु शरान्‌ पश्य, मदृते अन्यत्‌ नाम न भविष्यति।युद्ध क्षेत्र में मेरे बाणों से अतिरिक्त दूसरा नाम नहीं होगा।
बृहन्नला – एवं वाक्यशौण्डीर्यम्‌। किमर्थं तेन पदातिना गृहीत:?बृहन्नला – अरे वाणी की ऐसी वीरता! फिर उन्होंने तुम्हें पैदल ही क्यों पकड़ लिया?
अभिमन्यु: – अशस्त्रं मामभिगत:। अभिमन्युः – वे अशास्त्र (शस्त्रहीन) होकर मेरे सामने आए।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
पितरम्‌ अर्जुनं स्मरन्‌ अहं कथं हन्याम्‌। पिता अर्जुन को याद करके मैं उन्हें कैसे मारता?
अशस्त्रेषु मादृशा: न प्रहरन्ति। मुझ जैसे लोग शस्त्रहीन पर प्रहार नहीं करते।
अत: अशस्त्रोऽयं मां वञ्चयित्वा गृहीतवान्‌।अतः इस शस्त्रहीन ने मुझे धोखा देकर पकड़ लिया।
राजा – त्वर्यतां त्वर्यतामभिमन्यु:।राजा – अभिमन्यु को शीघ्र बुला लाओ।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
बृहन्नला – इत इत: कुमार:। एष महाराज:। उपसर्पतु कुमार:।बृहन्नला – कुमार इधर आएँ। यह महाराज हैं। आप समीप जाएँ।
अभिमन्यु: – आ:। कस्य महाराज:?अभिमन्यु – आह! किसके महाराज?
राजा – एह्येहि पुत्र! कथं न मामभिवादयसि? (आत्मगतम्‌) अहो! उत्सिक्त: खल्वयं क्षत्रियकुमार:। राजा – आओ, आओ पुत्र। तुम मुझे प्रणाम क्यों नहीं करते (मन में) अरे! यह क्षत्रिय कुमार बहुत घमण्डी है।
अहमस्य दर्पप्रशमनं करोमि। (प्रकाशम्‌) अथ केनायं गृहीत:?मैं इसका घमण्ड शान्त करता हूँ। (प्रकट रूप से) तो इसे किसने पकड़ा?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
भीमसेन: – महाराज! मया।भीमसेनः – महाराज! मैंने।
अभिमन्यु: – अशस्त्रेणेत्यभिधीयताम्‌।अभिमन्यु – शस्त्रहीन होकर पकड़ा- ऐसा कहिए।
भीमसेन: – शान्तं पापम्‌। धनुस्तु दुर्बलै: एव गृह्यते। मम तु भुजौ एव प्रहरणम्‌।भीमसेन – शान्त हो जाइए। धनुष तो दुर्बलों के द्वारा उठाया जाता है। मेरी तो भुजाएँ ही शस्त्र हैं।
अभिमन्यु: – मा तावद्‌ भो:! किं भवान्‌ मध्यम: तात: य: तस्य सदृशं वच: वदति।अभिमन्यु – अरे नहीं! क्या आप हमारे मध्यम तात हैं, जो उनके समान वचन बोल रहे हैं।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
भगवान्‌ – पुत्र! कोऽयं मध्यमो नाम?भीमसेन – पुत्र! यह मध्यम तात कौन हैं?
अभिमन्यु: – योक्त्रयित्वा जरासन्धं कण्ठश्लिष्टेन बाहुना।अभिमन्यु – सुनिए-जिसने अपनी भुजाओं से जरासन्ध का कण्ठावरोध करके
असह्यं कर्म तत्‌ कृत्वा नीत: कृष्णोऽतदर्हताम्‌॥कृष्ण के लिए जो असाध्य कार्य था, उसको साध्य बना दिया था।
राजा – न ते क्षेपेण रुष्यामि, रुष्यता भवता रमे।राजा – तुम्हारे निन्दापूर्ण वचनों से मैं चिढ़ता नहीं हूँ। तुम्हारे चिढ़ने से मुझे आनन्द प्राप्त होता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
किमुक्त्वा नापराद्धोऽहं, कथं तिष्ठति यात्विति॥तुम यहाँ क्यों खड़े हो जाओ यहाँ से यदि मैं ऐसा कहूँ तो क्या मैं अपराधी नहीं होऊँगा?
अभिमन्यु: – यद्यहमनुग्राह्य: –अभिमन्यु – यदि आप मुझ पर कृपा करना चाहते हो तो
पादयो: समुदाचार: क्रियतां निग्रहोचित:।मेरे पैर बाँधकर मुझे उचित दण्ड दीजिए।
बाहुभ्यामाहृतं भीम: बाहुभ्यामेव नेष्यति॥मेरे मध्यम तात भीम मुझे हाथों से ही छुड़वाकर ले जाएँगे।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
(तत: प्रविशत्युत्तर:)(तब उत्तर का प्रवेश)
उत्तर: – तात! अभिवादये!उत्तर: – भगवन्! मैं प्रणाम करता हूँ।
राजा – आयुष्मान्‌ भव पुत्र। पूजिता: कृतकर्माणो योधपुरुषा:।राजा – दीर्घायु हो पुत्र! क्या युद्ध में वीरता दिखाने वाले वीरों का सत्कार कर दिया गया है?
उत्तर: – पूज्यतमस्य क्रियतां पूजा।उत्तर – अब सबसे अधिक पूज्य की पूजा कीजिए।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
राजा – पुत्र! कस्मै?राजा – किसकी पूजा पुत्र?
उत्तर: – इहात्रभवते धनञ्जयाय।उत्तर – यहीं मौजूद अर्जुन की।
राजा – कथं धनञ्जयायेति?राजा – क्या अर्जुन यहाँ आए हैं?
उत्तर: – अथ किम्‌उत्तर – और क्या?
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
श्मशानाद्धनुरादाय तूणीराक्षयसायके। पूज्य अर्जुन ने श्मशान से अपना धनुष तथा अक्षय तरकश लेकर
नृपा भीष्मादयो भग्ना वयं च परिरक्षिता:॥भीष्म आदि राजाओं को परास्त कर दिया तथा हम लोगों की रक्षा की।
राजा – एवमेतत्‌।राजा – ऐसी बात है?
उत्तर: – व्यपनयतु भवाञ्छङ्म्‌। अयमेव अस्ति धनुर्धर: धनञ्जय:।उत्तर – आप अपना सन्देह दूर करें। धनुर्विद्या में प्रवीण अर्जुन यही हैं।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
बृहन्नला – यद्यहं अर्जुन: तर्हि अयं भीमसेन: अयं च राजा युधिष्ठिर:।बृहन्नला – यदि मैं अर्जुन हूँ तो यह भीमसेन है और यह राजा युधिष्ठिर हैं।
अभिमन्यु: – इहात्रभवन्तो मे पितर:। अभिमन्यु – ये मेरे पूज्य पितागण हैं,
तेन खलु …न रुष्यन्ति मया क्षिप्ता हसन्तश्च क्षिपन्ति माम्‌।इसीलिए….. मेरे निन्दापूर्ण वचनों से ये क्रुद्ध नहीं होते और हँसते हुए मुझे चिढ़ाते हैं।
दिष्ट्‌या गोग्रहणं स्वन्तं पितरो येन दर्शिता:॥गौ-अपहरण की यह घटना सौभाग्य से सुखान्त हुई। इसी के कारण मुझे अपने सभी पिताओं के दर्शन हो गए।
(इति क्रमेण सर्वान्‌ प्रणमति, सर्वे च तम्‌ आलिङ्‌गन्ति।) (ऐसा कहकर क्रम से सबको प्रणाम करता है और सब उसका आलिंगन करते हैं)
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