एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 5 सूक्तिमौक्तिकम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 5 सूक्तिमौक्तिकम्‌ शेमुषी भाग एक के सभी प्रश्नों के उत्तर और हिंदी मीडियम अनुवाद सत्र 2022-2023 के लिए विद्यार्थी यहाँ से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 9 संस्कृत शेमुषी पाठ 5 का हिंदी अनुवाद भी समाधान के साथ ही दिया गया है ताकि पाठ को समझने में कोई परेशानी न हो। पाठ 5 के शब्द अर्थ, रिक्त स्थान और अन्य प्रश्नों के लिए हल भी विस्तार से दिए गए हैं।

कक्षा 9 संस्कृत अध्याय 5 के लिए एनसीईआरटी समाधान

सीबीएसई ऐप कक्षा 9

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संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
नैतिकशिक्षाणां प्रदायकरूपेण विन्यस्तोवर्तते। नीति-ग्रंथों की दृष्टि से संस्कृत साहित्य काफी समृद्ध है।
अस्मिन्‌ पाठे विविधग्रन्थेभ्य: नानानैतिकशिक्षाप्रदानिपद्यानि सं गृहीतानि सन्ति। इन ग्रंथों में सरल और सारगर्भित भाषा में नैतिक शिक्षाएँ दी गई हैं।
अत्र सदाचरणस्य महिमा, प्रियवाण्या: आवश्यकता, इसमें सत्य आचरण की महिमा, मधुर वाणी की आवश्यकता,
परोपकारिणां स्वभाव:, गुणार्जनस्य प्रेरणा, मित्रताया: स्वरूपम्‌, श्रेष्ठसङ्‌गते: प्रशंसा परोपकारी स्वभाव, गुणों का अर्जन, मित्र का क्या स्वरूप होता है, अच्छे लोगों का साथ
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
तथा च सत्सङ्‌गते: प्रभाव: इत्यादीनां विषयाणां निरूपणम्‌ अस्ति। और सत्संग का प्रभाव इत्यादि विषयों का निरूपण किया गया है।
संस्कृतसाहित्ये नीतिग्रन्थानां समृद्धा परम्परा दृश्यते। संस्कृत साहित्य में नीतिग्रंथों की समृद्ध परंपरा दिखाई देती है।
तत्र प्रतिपादितशिक्षाणाम्‌ अनुपालनं कृत्वा वयं स्व जीवनसफली कर्तुं शक्नुम:।इन सबकी शिक्षा तथा इनका पालन करके अपने जीवन को सफल सकते हैं ।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
वृत्तं यत्नेन संरक्षेद्‌ वित्तमेति च याति च।हमें अपने आचरण की प्रयत्नपूर्वक रक्षा करनी चाहिए, क्योंकि धन तो आता है और चला जाता है।
श्रूयतां धर्मसर्वस्वं श्रुत्वा चैवावधार्यताम्‌।धर्म के तत्व को सुनो और सुनकर उसको ग्रहण करो, उसका पालन करो।
आत्मन: प्रतिकूलानि परेषां न समाचरेत्‌॥2॥अपने से प्रतिकूल व्यवहार का आचरण दूसरों के प्रति कभी नहीं करना चाहिए।
विदुरनीति: अर्थात् जो व्यवहार आपको अपने लिए पसंद नहीं है, वैसा आचरण दूसरों के साथ नहीं करना चाहिए।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
प्रियवाक्यप्रदानेन सर्वे तुष्यन्ति जन्तव:।प्रिय वचन बोलने से सब प्राणी प्रसन्न होते हैं
तस्मात्‌ तदेव वक्तव्यं वचने का दरिद्रता॥3॥हमें हमेशा मीठा ही बोलना चाहिए। मीठे बोल बोलने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए।
पिबन्ति नद्य: स्वयमेव नाम्भ:नदियाँ अपना पानी स्वयं नहीं पीतीं।
स्वयं न खादन्ति फलानि वृक्षा:।पेड़ अपने फल स्वयं नहीं खाते
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
नादन्ति सस्यं खलु वारिवाहा:निश्चित ही बादल अनाज (फसल) को नहीं खाते
परोपकाराय सतां विभूतय:॥4॥इसी प्रकार) सज्जनों (श्रेष्ट लोगों) की धन सम्म्पतियाँ दूसरों के लिए होती हैं।
गुणेष्वेव हि कर्तव्य: प्रयत्न: पुरुषै: सदा।मनुष्य को सदा गुणों को ही प्राप्त करने का प्रयत्न करना चाहिए।
गुणयुक्तो दरिद्रोऽपि नेश्वरैरगुणै: सम:॥5॥गरीब होता हुआ भी वह गुणवान व्यक्ति ऐश्वर्यशाली गुनहिन के समान नहीं हो सकता (अर्थात वह उससे कहीं अधिक श्रेष्ट होता है।)
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
आरम्भगुर्वी क्षयिणी क्रमेणआरंभ में लंबी फिर धीरे-धीरे छोटी होने वाली
लघ्वी पुरा वृद्धिमती च पश्चात्‌।फिर धीरे-धीरे बढ़ने वाली पूर्वाहन तथा
दिनस्य पूर्वार्द्धपरार्द्धभिन्नाअपराहन काल की छाया की तरह
छायेव मैत्री खलसज्जनानाम्‌॥6॥दुष्टों और सज्जनों की मित्रता अलग-अलग होती हैं।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
यत्रापि कुत्रापि गता भवेयु-पृथ्वी को सुशोभित करने वाले
र्हंसा महीमण्डलमण्डनाय।हंस भूमण्डल में (इस पृथ्वी पर) जहाँ कहीं (सर्वत्र) भी प्रवेश करने में समर्थ हैं
हानिस्तु तेषां हि सरोवराणांहानि तो उन सरोवरों की ही
येषां मरालै: सह विप्रयोग:॥7॥जिनका हंसों से वियोग (अलग होना) हो जाता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
गुणा गुणज्ञेषु गुणा भवन्तिगुणवान लोगों में रहने के कारण ही गुणों को सगुण कहा जाता है।
ते निर्गुणं प्राप्य भवन्ति दोषा:।गुणहीन को प्राप्त करके वे दुर्गुण (दोष) बन जाते हैं।
आस्वाद्यतोया: प्रवहन्ति नद्य:जिस प्रकार नदियाँ स्वादयुक्त जलवाली होती हैं
समुद्रमासाद्य भवन्त्यपेया:॥8॥परंतु समुद्र को प्राप्त करके न पीने योग्य अर्थात् (कुस्वादु या नमकीन) हो जाती हैं।
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