कक्षा 6 इतिहास अध्याय 6 एनसीईआरटी समाधान – नए प्रश्न नए विचार

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 इतिहास अध्याय 6 नए प्रश्न नए विचार के अभ्यास में दिए गए सभी प्रश्नों के उत्तर विडियो और पीडीएफ के रूप में यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 6 इतिहास के सभी समाधान सीबीएसई सिलेबस 2024-25 के अनुसार संशोधित किए गए हैं और नई एनसीईआरटी पुस्तक के प्रश्नों पर आधारित है। कक्षा 6 इतिहास पाठ 6 के विभिन्न पहलुओं को विडियो के मध्यम से भी समझाया गया है ताकि विद्यार्थियों को पूरा पाठ आसानी से समझ आ सके।

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बुद्ध कौन था?

कपिलवस्तु के राजा शुद्धोधन थे उनके पुत्र नाम सिद्धार्थ था जो बाद में बौद्ध धर्म के संस्थापक बने जिन्हें गौतम के नाम से भी जाना जाता है। उनका जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व हुआ था। यह वह समय था जब लोगों के जीवन में तेज़ी से परिवर्तन हो रहे थे। जनपदों के कुछ राजा इस समय बहुत शक्तिशाली हो गए थे। बुद्ध क्षत्रिय थे तथा ‘शाक्य’ नामक एक छोटे से गण से संबंधित थे। युवावस्था में ही ज्ञान की खोज में उन्होंने घर के सुखों को छोड़ दिया। अनेक वर्षों तक वे भ्रमण करते रहे तथा अन्य विचारकों से मिलकर चर्चा करते रहे। अंतत: ज्ञान प्राप्ति के लिए उन्होंने स्वयं ही रास्ता ढूँढ़ने का निश्चय किया। इसके लिए उन्होंने बोध गया (बिहार) में एक पीपल के नीचे कई दिनों तक तपस्या की। अंतत: उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। इसके बाद से वे बुद्ध के रूप में जाने गए। यहाँ से वे वाराणसी के निकट स्थित सारनाथ गए, जहाँ उन्होंने पहली बार उपदेश दिया। कुशीनारा में मृत्यु से पहले का शेष जीवन उन्होंने पैदल ही एक स्थान से दूसरे स्थान की यात्रा करने और लोगों को शिक्षा देने में व्यतीत किया।

बुद्ध ने अपनी शिक्षा में क्या सन्देश दिया?

ज्ञान प्राप्ति के बाद बुद्ध ने शिक्षा दी कि यह जीवन कष्टों और दुखों से भरा हुआ है और ऐसा हमारी इच्छा और लालसाओं (जो हमेशा पूरी नहीं हो सकतीं) के कारण होता है। कभी-कभी मनुष्य जो चाहता है वह प्राप्त कर लेने के बाद भी संतुष्ट नहीं होता है एवं और अधिक (अथवा अन्य) वस्तुओं को पाने की इच्छा करने लगता हैं। बुद्ध ने इस लिप्सा को तञ्हा (तृष्णा) कहा है। बुद्ध ने शिक्षा दी कि आत्मसंयम अपनाकर हम ऐसी लालसा से मुक्ति पा सकते हैं। उन्होंने लोगों को दयालु होने तथा मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों के जीवन का भी आदर करने की शिक्षा दी। बुद्ध मानते थे कि हमारे कर्मों के परिणाम, चाहे वे अच्छे हों या बुरे, हमारे वर्तमान जीवन के साथ-साथ बाद के जीवन को भी प्रभावित करते हैं। बुद्ध ने अपने उपदेश सामान्य लोगों की भाषा प्राकृत में दी।

भारतीय दर्शन की छह पद्धतियां कौन सी थी और उनकी स्थापना किसने की?

भारतीय दर्शन की छह पद्धतियां षडदर्शन के नाम से प्रसिद्ध हैं। सदियों से, भारत द्वारा सत्य की बौद्धिक खोज का प्रतिनिधित्व दर्शन की छ: शाखाओं ने किया। इनके नाम हैं: वैशेषिक, न्याय, सांख्य, योग, पूर्व मीमांसा और वेदांत या उत्तर मीमांसा के नाम से जाने जाते हैं। दर्शन की इन छ: पद्धतियों की स्थापना क्रमश: ऋषि कणद, गौतम, कपिल, पतंजलि, जैमिनी और व्यास द्वारा की गयी मानी जाती है, जो आज भी देश में बौद्धिक चर्चा को दिशा देते हैं। जर्मन मूल के ब्रिटिश भारतविद फ्रेडरिक मैक्समूलर के अनुसार दर्शन की इन छ: शाखाओं का विकास कई पीढ़ियों के दौरान श्रेष्ठ विचारकों के योगदान से हुआ। यद्यपि ये एक दूसरे से भिन्न दिखते हैं तथापि सत्य की इनकी समझ में आधारभूत तालमेल दिखता है।

जैन धर्म के संस्थापक कौन थे?

बुद्ध के समकालीन एक और महापुरुष का आविर्भाव हुआ जिन्हें हम वर्धमान महावीर के नाम से जानते हैं। महावीर का जन्म लगभग 2500 वर्ष पूर्व जैन धर्म के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर के रूप में हुआ। वह वज्जि संघ के लिच्छवि कुल के एक क्षत्रिय राजकुमार थे। 30 वर्ष की आयु में उन्होंने घर छोड़ दिया औरजंगल में रहने लगे। बारह वर्ष तक उन्होंने कठिन व एकाकी जीवन व्यतीत किया। इसके बाद उन्हें ज्ञान प्राप्त हुआ। उनकी शिक्षा सरल थी। सत्य जानने की इच्छा रखने वाले प्रत्येक स्त्री व पुरुष को अपना घर छोड़ देना चाहिए। उन्हें अहिंसा के नियमों का कड़ाई से पालन करना चाहिए अर्थात्‌ किसी भी जीव को न तो कष्ट देना चाहिए और न ही उसकी हत्या करनी चाहिए।

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