एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 ईवीएस अध्याय 5

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 ईवीएस अध्याय 5 अनीता की मधुमक्खियाँ (कक्षा 4 पर्यावरण पाठ 5) पर्यावरण अध्ययन (आस पास) हिंदी मीडियम में पीडीएफ और विडियो के लिए यहाँ देखें। कक्षा 4 ईवीएस के सभी समाधान सीबीएसई और राजकीय बोर्ड सत्र 2022-2023 के अनुसार संशोधित किए गए हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 ईवीएस अध्याय 5

अनीता की मधुमक्खियाँ

प्रस्तुत पाठ में बिहार के मुजफ्फरपुर ज़िले के बोचाहा गाँव में रहने वाली अनीता खुशवाहा के बारे में बताया गया है। उसके घर में माँ, पिताजी और दो छोटे भाई हैं। अनीता कॉलेज में पढ़ने के साथ साथ स्कूल के बच्चों को भी पढ़ाती हैं। अनीता ने मधुमक्खी पालने का काम भी कर रहीं हैं। इतना सब काम करना उसके लिए आसान नहीं था।

अनीता का बचपन

जब अनीता छोटी थी, तब वह दिन भर बकरियाँ चराती थी। उसका मन स्कूल जाने को करता था। उसके माता-पिता को लड़कियों का स्कूल जाना पसंद नहीं था। एक दिन अनीता ने स्कूल के अंदर जाकर देख ही लिया। वह खुद को रोक नहीं पाई और बच्चों की कतार में पीछे जाकर चुपचाप बैठ गई। उसे स्कूल बहुत अच्छा लगा। घर जाते ही अनीता ने हिम्मत करके माँ-पिता को स्कूल के बारे में बताया।

लेकिन उन्होंने अनीता को स्कूल जाने के लिए मना कर दिया। उस दिन अनीता बहुत रोई। पर कुछ दिनों के बाद गाँव के एक अध्यापक ने अनीता के माता-पिता को समझाया कि पढ़ाई करना कितना ज़रूरी है। अध्यापक ने बताया कि आठवीं कक्षा तक की पढाई पर कोई खर्च भी नहीं होता है और पढ़ना सब बच्चों का अधिकार हैं। कुछ दिनों के बाद अनीता भी स्कूल जाने लगी थी। अनीता के परीक्षा में बहुत अच्छे अंक तो नहीं आते थे पर वह अध्यापक से सवाल बहुत पूछती थी।

अनीता की पढ़ाई में रूचि और ख़र्च

पाँचवी कक्षा पास के बाद अनीता को पता चला कि छठी कक्षा से पढ़ाई का खर्चा बढ़ जाएगा। माँ-पिताजी ने स्कूल छोड़ने को कहा। फिर अनीता ने इसका हाल ढूँढ़ ही लिया था। उसने अपने छोटे भाइयों के साथ गाँव के कुछ बच्चों को पढ़ाना शुरू कर दिया था। इससे उसे जो पैसे मिलते थे, उन पैसों से वह आगे की पढ़ाई कर पाई।

गाँव के कुछ बड़े लड़के भी बच्चों को पढ़ाते थे। उन्हें अनीता का बच्चों को पढ़ाना पसंद नहीं आया। इसलिए अनीता के पास पढ़ने वाले बच्चों को डराना, धमकाना शुरू कर दिया। दो बच्चों को छोड़कर सभी बच्चों ने आना बंद कर दिया था। कुछ दिनों बाद बाकी बच्चे भी पढ़ने के लिए वापिस लौट आए क्योंकि अनीता उन्हें प्यार से पढ़ाती थी।
विशेषनोट:
आर.टी.ई. अधिनियम के अनुसार 2009 से छ: से चौदह साल के सभी बच्चों को मुफ्त एवं अनिवार्य शिक्षा का अधिकार प्राप्त हुआ था।

गाँव की लड़कियों को स्कूल शिक्षा दिलाने पर ज़ोर

इस अधिनियम के चलते अनीता ने गांव वालों को समझाया कि सभी लड़कियों को स्कूल भेजें। अब घर पर अनीता के माँ-बाप ने भी उसकी मदद करनी शुरू कर दी थी। घर का सारा काम अनीता की माँ ने संभाल लिया था। जिससे अनीता को पढ़ने का समय और अधिक मिलने लगा था। उसने घर में किसी को बताए बिना ही मोटर-बाइक चलाना भी सीख लिया था। अनीता के गाँव में लोग मधुमक्खियों को पालकर शहद बनाने का काम करते थे।

तब उसने भी यह काम करने की सोची। उसने गाँव में मधुमक्खी पालन के एक सरकारी कोर्स में भाग लिया। कोर्स में भाग लेने वाली वह अकेली लड़की थी। ट्रेंनिग में अनीता को पता चला कि अक्तूबर से दिसम्बर तक का समय मधुमक्खी पालन के लिए सबसे अच्छा होता है, क्योंकि यह समय मधुमक्खियों के अंडे देने का समय होता हैं।

अनीता का कोर्स और उसका व्यवसाय

अनीता ने कोर्स तो पूरा कर लिया लेकिन अपना काम शुरू करने के लिए उसके पास रूपये नहीं थे। कुछ समय इंतजार करने और बच्चों को पढ़ाकर उसने 5000 रूपये बचाए। इन रुपयों से उसने मधुमक्खी पालने के दो बक्से ख़रीदे। एक बक्से की कीमत 2000 रूपये थी। बाकी बचे 1000 रूपये से मीठा घोल बनाने के लिए चीनी और छते को साफ़ करने के लिए दवाइयाँ खरीदी थीं।

सितम्बर से दिसम्बर तक आते-आते अनीता के पास बहुत अधिक मधुमक्खियाँ हो गई। अब दो बक्से कम पड़ने लगे थे। उसे दो बक्से और खरीदने पड़े। अनुभव कम होने के कारण शुरू में मधुमक्खियों ने उसे काटा। उसका हाथ और चेहरा बुरी तरह सूज गया था। पर वह किसी पर दोष भी नहीं लगा सकती थी, क्योंकि यह काम भी तो खुद उसी ने चुना था।

शहद बनाने की विधि

लीची के फूल फरवरी में खिलते हैं। इसलिए अनीता ने अपने चारों बक्सों को लीची के बगीचे में रखा। उसे हर बक्से से 12 किलो शहद मिला। जिसे उसने बाजार में बेचा और यह उसकी पहली कमाई थी। आज उसके पास 20 बक्से हैं।

अनीता रोज़ाना साइकिल से 5 किलोमीटर की दूरी तय करके शहर में कॉलेज जाती और कॉलेज से आने के बाद अपनी मधुमक्खियों को देखती। माँ मधुमक्खियों के लिए चीनी का घोल तैयार करती हैं और पिताजी मधुमक्खियों की देख-रेख करते और बक्सों से शहद निकालते हैं।

गाँव में अनीता की अलग पहचान

आज सभी गाँव के लोग अनीता को पहचानते हैं। वह गाँव की सभी बैठकों में जाती है और पढ़ाई के बारे में समझती है। कुछ लोग उस पर हँसते हैं। पर अनीता उनकी परवाह करे बगैर अपना काम करती है। अनीता थोक विक्रेता बनना चाहती है। जिससे वह मधुमक्खी पालने वालों को शहद की सही कीमत दिलाने में मदद कर सके। ताकि वे सब जल्दी तरक्की कर सकें।

मधुमखियों की कहानी

हर छत्ते में एक रानी मक्खी होती है, जो अंडे देती है। छत्ते में कुछ नर-मक्खी भी होते हैं और बहुत सारी काम करने वाली मक्खियाँ भी होती हैं। ये दिन-भर काम करती हैं। शहद के लिए फूलों का रस ढूँढती हैं। जब किसी मक्खी को रस मिल जाता है, तो वह एक विशेष प्रकार का नाच करती है। उससे दूसरी मक्खियों को पता चल जाता है कि रस कहाँ है।

वे रस से शहद बनाती हैं। छत्ता बनाने का काम भी इन्हीं का होता है और बच्चों को पालने का भी। ये सब न हो तो न छत्ता बने और न ही शहद इकट्ठा हो। नर-मक्खी छत्ते के लिए कुछ खास काम नहीं करती हैं। मधुमक्खियों की तरह चीटियाँ, दीमक और ततैया भी इसी तरह समूह में रह कर अपना काम करते हैं।

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