एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 ईवीएस अध्याय 3

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 ईवीएस अध्याय 3 नंदू हाथी (कक्षा 4 पर्यावरण पाठ 3) पर्यावरण अध्ययन (आस पास) हिंदी मीडियम और अंग्रेजी में सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ दिए गए हैं। विडियो के माध्यम से भी कक्षा 4 ईवीएस के पाठ 3 के सभी प्रश्नों को समझाया गया है। छात्र विडियो समाधान की मदद से भी पूरे पाठ को आसानी से समझ सकते हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 4 ईवीएस अध्याय 3

नन्दू हाथी का परिचय

प्रस्तुत पाठ में नन्दू हाथी के बारे में बताया गया है जो सिर्फ़ तीन महीने का है, और उसका वज़न 200 किलोग्राम हैं। नन्दू का इतना वजन तो आज नो साल के आठ बच्चों के बराबर हैं। नन्दू की नानी जिसे सब अम्मा बुलाते थे, दिन की गर्मी तेज होते ही चिंघाड़ कर जंगल की तरफ़ चलने लगी।

बाकि सब हथिनियां अपने बच्चों के साथ अम्मा के पीछे-पीछे चलने लगी। नन्दू भी अपनी माँ के साथ झुंड में चलने लगा। जंगल पहुँचते ही झुंड बिखर गया, और वे सभी अपने मनपसंद पत्तों और झाड़ियों को खाने में लग गए।

हाथी की दिनचर्या

एक बड़ा हाथी एक दिन में 100 किलोग्राम से ज्यादा पत्ते और झाड़ियाँ खा लेता है। हाथी पूरे दिन में दो से चार घंटे ही सोता है। हाथियों को पानी और कीचड़ में खेलना बहुत पसंद होता है। इससे उनके शरीर को बहुत ठंडक मिलती है। हाथी गर्मी लगने पर कान हिलाकर हवा करता रहता है उसके बड़े कान उसके लिए पंखे का काम करते हैं।

नन्दू हाथी और उसका परिवार

नन्दू ने अपने साथियों को एक-दूसरे की पूंछ खींचते हुए देखा। नन्दू ने सोचा अभी मैं बहुत छोटा हूँ, कहीं ये सब मेरे ऊपर न गिर जाए। इसी डर के मारे वह अपनी माँ के पास खड़ा हो गया। माँ ने उसे पानी की तरफ़ धकेला। नन्दू समझ गया कि माँ उसे पानी के साथ खेलने को कह रही हैं। वह धीरे से पानी की तरफ़ चल दिया।

नन्दू को भी पानी के साथ खेलना बहुत पसंद था। नन्दू के कुछ दोस्त भी पानी में खेल रहे थे। तभी पानी का एक फ़व्वारा नन्दू के सिर पर गिरा। नन्दू पूरा भीग गया और वह समझ गया था कि यह शरारत उसके दोस्तों की है। सूरज डूबने से पहले ही झुंड फिर से जंगल की तरफ़ चल दिया। जंगल पहुँचते-पहुँचते नन्दू बहुत थक गया था। नन्दू दूध पीते-पीते अपनी माँ के पैरों के बीच में सो गया।

हथिनी द्वारा अपने बच्चों की देखभाल

नन्दू हाथी अपने झुंड के साथ रहता है। हाथियों के झुंड में केवल हथिनी और उनके बच्चे होते हैं। झुंड की सबसे बुजुर्ग हथिनी ही पूरे झुंड की मुखिया होती है। एक झुंड में 10 से 12 हथिनियाँ और उनके बच्चे होते हैं। हाथी 14-15 साल तक ही इस झुंड में रह सकता है।

बाद में उसे इस झुंड को छोड़ कर अकेला रहना पड़ता है। झुंड में रहने वाले सभी हाथी मुसीबत में एक-दुसरे की मदद करते हैं। ये सभी अपने बच्चों की सुरक्षा के लिए एक-दुसरे का साथ देते हैं। नन्दू भी जब 14-15 साल का होगा तो उसे भी इस झुंड को छोड़ना पड़ेगा।

हाथियों का रहन-सहन

हाथियों के आलावा और भी ऐसे जानवर है जिन्हें झुंड में रहना पसंद हैं। जैसे बंदर, लकडबग्घे, भेडिये, जंगली कुत्ते, जंगली भैसें, और हिरण आदि हैं। सभी जानवर बिना किसी बंधन के रहना पसंद करते हैं। मनुष्य कुछ जानवरों को अपने काम में इस्तेमाल करते हैं। मनुष्य इन सभी जानवरों को बोझा ढ़ोने, सवारी करने के लिए उपयोग करता हैं। उदाहरण के लिए हाथी, ऊँट, घोड़ा, गधा, बैल आदि जानवर हैं।

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