एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 राजा, किसान और नगर

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 राजा, किसान और नगर पुस्तक भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 1 अभ्यास के उत्तर सत्र 2024-25 के लिए यहाँ उपलब्ध हैं। कक्षा 12 इतिहास के पाठ 2 के प्रश्न उत्तर यहाँ सरल भाषा में समझाकर दिए गए हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2

आरंभिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकला के उत्पादन के प्रमाणों की चर्चा कीजिए। हड़प्पा के नगरों के प्रमाण से ये प्रमाण कितने भिन्न हैं?

आरंभिक ऐतिहासिक नगरों में शिल्पकला के उत्पादन के कई प्रमाण मिले हैं:
यहाँ के सोने, चाँदी, सीप, हाथी दाँत आदि के प्रमाण मिले हैं। इन स्थलों से मिट्टी के कटोरे तथा थालियाँ मिली हैं जिन पर चमकदार कलई चढ़ी है। इन्हें काले रंग के पॉलिश वाले मिट्टी के बर्तन (N.B.P.W.) कहा जाता है। इन नगरों में मृदभांड के साथ-साथ टेस्ट तथा बेहतर बनावट वाले मॉडल भी प्राप्त हुए हैं। नगरों में वस्त्र बुनने का कार्य , ज्वर का कार्य, औजार, आभूषण बनाने का कार्य भी होता है।
भिन्नता:

    • हड़प्पा सभ्यता के लोग लोहे के प्रयोग को नहीं जानते थे इसके विपरीत आरंभिक नगरों के लोगों को लोहे का ज्ञान था।
    • हड़प्पा सभ्यता के नगर सुनियोजित ढगं से बनाए गए थे इसके विपरीत आरंभिक नगरों में ये व्यवस्था देखने को नहीं मिलती थी।
    • हड़प्पा सभ्यता तथा आरंभिक नगरों के भवनों तथा मकानों की बनावट में भिन्नता थी।
कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 राजा, किसान और नगर

महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षणों का वर्णन कीजिए।

महाजनपदों के विशिष्ट अभिलक्षण:

    1. आरंभिक भारतीय इतिहास में छठी शताब्दी ई. पू. को एक महत्वपूर्ण परिवर्तनकारी काल माना जाता है।
    2. इस काल को प्रायः आरंभिक राज्यों, नगरों, लोहे के बढ़ते प्रयोग और सिक्कों के विकास के साथ जोड़ा जाता है।
    3. इसी काल में बौद्ध और जैन सहित विभिन्न दार्शनिक विचारधाराओं का विकास हुआ।
    4. प्रत्येक महाजनपद की एक राजधानी होती थी जिसे प्रायः किले से घेरा जाता था।
    5. किलेबंद राजधानियों के रख-रखाव तथा प्रारंभी सेनाओं और नौकरशाही के लिए भारी आर्थिक स्त्रोत की आवश्यकता होती थी।
    6. लगभग छठी शताब्दी ईसा पूर्व से संस्कृत में ब्राह्मणों ने धर्मशास्त्र नामक ग्रथों की रचना आरंभ की।
    7. शासकों का काम किसानों, व्यापारियों और शिल्पकारों से कर (टैक्स) तथा भेंट वसूलना माना जाता था।
    8. संपत्ति जुटाने का एक वैध उपाय पड़ोसी राज्यों पर आक्रमण करके धन इकट्ठा करना भी माना जाता था।
    9. धीरे-धीरे कुछ राज्यों ने अपनी स्थायी सेनाएँ और नौकरशाही तंत्र तैयार कर लिये थे।

सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार कैसे करते हैं?

सामान्य लोगों के जीवन का पुनर्निर्माण इतिहासकार निम्न प्रकार से करते है- भारतीय समाज के सामान्य लोगों के बारे में वैदिक साहित्य से जानकारी मिलती है। विभिन्न साहित्यिक स्रोतों से उत्तर भारत तथा दक्षिण भारत के कई क्षेत्रें में विकसित नगर नियोजन के बारे में जानकारी प्राप्त होती है। इतिहासकार सामान्य लोगों के बारे में जानकारी प्राप्त करने के लिए दान-संबंधी गतिविधियों तथा रिकार्डों को अधययन करते हैं।
भूमिदान के प्रचलन से किसानों के बीच के संबंधों के बारे में पता चलता है। नगरों में सामान्य लोगों में बढ़ई, लौहार, धोबी, बुनकर, छोटे व्यापारी आदि व्यक्ति रहते थे। शवों के अंतिम संस्कार के तरीकों के द्वारा भी इतिहासकार सामान्य लोगों के जीवन के बारे में जानकारी देते हैं। सामान्य लोगों के शवों के साथ विभिन्न प्रकार के लोहे के उपकरण तथा हथियारों को भी दफ़नाया जाता था। ग्रंथों के साथ ही सिक्कों, अभिलेखों तथा चित्रों जैसे ऐतिहासिक स्रोतों से भी इतिहासकार जानकारी देते है।

अभिलेख शास्त्रियों की कुछ समस्याओं की सूची बनाइए।

अभिलेख शास्त्रियों की समस्याएँ निम्न प्रकार से हैं:

    • अभिलेख शास्त्रियों को बार-बार अभिलेखों में लिखे कथनों का परीक्षण करना पड़ता है जिससे वे यह पता लगा सकें कि जो उनमें लिखा है वह सत्य है, संभव है या फि़र अतिश्योक्तिपूर्ण है।
    • अभिलेख शास्त्रियों को अभिलेखों को बड़े ध्यान से पड़ना पड़ता है जिससे कि लेखक का मूल अर्थ न बदल जाए।
    • कई बार अभिलेख शास्त्रियों को कई बार अभिलेखों को पढ़ने तथा उसका अर्थ निकालने में बहुत कठिनाई आती है क्योंकि कई अभिलेखों में एक ही राजा के लिए अलग-अलग उपाधियों तथा नामों का प्रयोग किया जाता है।
    • अभिलेखों की लिपियों को पढ़ने में काफ़ी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। उदाहरणार्थ हड़प्पा सभ्यता की मुहरों तथा अन्य वस्तुओं पर दिए गए लेखों को अभी तक नहीं पढ़ा जा सका है।
    • अभिलेखों में दिए गए वाक्यों के अर्थ को समझने में भी कठिनाई आती है। पश्चिमोत्तर से मिले अभिलेख अरमाइक तथा यूनानी भाषा में है और अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा में हैं।
मौर्य काल में विकसित राजत्व के विचारों की चर्चा कीजिए।

उत्तर मौर्यकाल में विकसित राजत्व के विचार – उत्तर मौर्य काल में राजा उच्च स्थिति प्राप्त करने के लिए स्वयं को देवी-देवताओं के साथ जोड़ने लगे। कुषाण शासकों के राजत्व के प्रमुख प्रमाण उनके सिक्के तथा मूर्तियों से मिलते हैं। कुषाण शासकों के सिक्कों पर राजा की एक भव्य मूर्ति दिखाई गई है। सिक्के के दूसरी ओर एक देवता का चित्र है। कुषाण शासकों के ये सिक्के कुषाणों को देवता तुल्य दर्शाने के लिए जारी किए गए थे। कई कुषाण शासकों ने अपने नाम के आगे देवपुत्र की उपाधि भी लगाई। गुप्त काल में भी राजत्व के विचारों का विकास हुआ है। इस काल में कुछ शक्तिशाली सामंत राजा भी बन जाते थे।
गुप्त शासकों के इतिहास के निर्माण में साहित्य, सिक्कों और अभिलेखों की सहायता ली गयी है। इसके अलावा कवियों ने अपने राजा की प्रशंसा में कई प्रशस्तियों का सहारा लिया था।
उदाहरण: इलाहाबाद का प्रयाग प्रशस्ति अभिलेख जिसमें लेखक हरिषेण ने समुद्रगुप्त को बहुत ही शक्तिशाली सम्राट बताया। ऐसी प्रशंसा के पीछे राजस्व के विचारों का ही उल्लेख हो रहा है।

वर्णित काल में कृषि के तौर-तरीकों में किस हद तक परिवर्तन हुए?

वर्णित काल में कृषि के तौर-तरीकों में आए परिवर्तन – छठी शताब्दी ई. पू. से छठी शताब्दी ई- तक किसान द्वारा कृषि उत्पादन के कई तरीकों को अपनाया गया। 600 ई. पू. से 600 ई. के समय राजाओं द्वारा करों की माँग बढ़ने लगी थी। करों की बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए किसानों कृषि के तरीकों में कई परिवर्तन करने शुरू किए:

    • उपज बढ़ाने के लिए कृत्रिम सिंचाई का प्रयोग किया। सिंचाई के लिए कुँओं, नहरों तथा तालाबों का प्रयोग किया गया है।
    • लोहे के फ़ाल वाले हल के प्रयोग से फ़सलों की उपज बढ़ने लगी। इसके बाद भी ऐसे हलों का प्रयोग कुछ भाग में ही रहा। किसान उपमहाद्वीप के पूर्वोत्तर तथा मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में रहते थे। उन्होंने खेती के लिए कुदाल का उपयोग किया।
    • उपज बढ़ाने के लिए हल का प्रयोग किया। भारी वर्षा वाले क्षेत्रों में लोहे के फाल वाले हलों द्वारा उर्वर भूमि की जुताई की जाने लगी।
    • बड़े-बड़े जमींदार और ग्राम प्रधान किसानों पर नियंत्रण रखते थे। यह संभव है कि गाँवों में रहने वाले विभिन्न वर्गों में विभिन्नता का कारण भूमि के स्वामित्व, श्रम तथा नयी प्रौद्योगिकी के उपयोग पर आधारित हो। सुदर्जन झील का उल्लेख कई अभिलेखों से मिलता है।
कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 राजा, किसान और नगर
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 के प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 के सवाल जवाब
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 2 गाइड