एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 11 विद्रोह और राज

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 11 विद्रोह और राज पुस्तक भारतीय इतिहास के कुछ विषय भाग 3 के उत्तर सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड सत्र 2023-24 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 12 इतिहास पाठ 11 के सवाल जवाब अभ्यास के प्रश्नों के हल छात्र यहाँ से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 11

बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व सँभालने के लिए पुराने शासकों से क्या आग्रह किया?

बहुत सारे स्थानों पर विद्रोही सिपाहियों ने नेतृत्व सँभालने के लिए पुराने शासकों से निम्न आग्रह किए:

    • विद्रोही सिपाहियों ने पुराने शासकों से नेतृत्व सँभालने के लिए इसलिए कहा क्योंकि उन्हें युद्ध करने तथा शासन करने का काफ़ी अनुभव था।
    • वे जन आंदोलन को और सजक्त बनाना चाहते थे।
    • सर्वप्रथम मेरठ के विद्रोही सिपाही दिल्ली गए तथा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफ़र से नेतृत्व का आग्रह किया।
    • कानपुर में सिपाहियों तथा शहर के लोगों ने पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी नाना साहेब को विद्रोह सँभालने के लिए विवश किया।
    • अवध में नवाब वाजिद अली शाह जैसे प्रसिद्ध शासक को गद्दी से हटा देने तथा उनके राज्य पर अधिकार करने की यादें लोगों के मन में अभी भी जिंदा थी। अतः लखनऊ में ब्रिटिश सत्ता के ढहने के समाचार पर लोगों ने नवाब के युवा पुत्र विरजिस को अपना नेता घोषित किया।
    • जनसाधारण को अपने पुराने शासकों से बहुत लगाव था। अतः उन्हें लगा कि ब्रिटिश शासकों ने अनुचित रूप उन्हें उनकी सत्ता से हटा दिया था। ऐसे शासकों के नेतृत्व में उनका विद्रोह अधिक लोकप्रिय तथा शक्तिशाली बन सकता था।

उन साक्ष्यों के बारे में चर्चा कीजिए जिनसे पता चलता है कि विद्रोही योजनाबद्ध और समन्वित ढंग से काम कर रहे थे?

विद्रोहयों के योजनाबद्ध तथा समन्वित ढगं से काम करने के कई साक्ष्य हैं:

    1. विद्रोह के सुनियोजित होने के विषय में इतिहासकार चार्ल्स बाल लिखते हैं कि सिपाहयों की पंचायतें कानपुर सिपाही लाइन में जुटती थी। तथा कुछ निश्चित फ़ैसले लिए जाते थे।
    2. विद्रोह के समय अवध मिलिट्री पुलिस के कैप्टन हियर्से की सुरक्षा का दायित्व भारतीय सिपाहियों पर था। जहाँ कैप्टन हियर्से तैनात था वहीं 41वीं नेटिव इन्फ़ेंट्री भी तैनात थी। इन्फ़ेंट्र का विचार था कि क्योंकि वे अपने सभी गोरे अफ़सरों को खत्म कर चुके थे इसलिए अवध मिलिट्र का यह दायित्व है कि या तो वे हियर्से की हत्या कर दे या फि़र उसे गिरफ्तार कर ले।
    3. वास्तव में सिपाही लाइनों में रहते थे तथा सभी की जीवन-शैली एक समान थी। इसके अतिरिक्त उनमें से अधिकांश सिपाही एक ही जाति के होते थे।

1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों की किस हद तक भूमिका थी?

1857 के घटनाक्रम को निर्धारित करने में धार्मिक विश्वासों ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई:

    • बैरकपुर छावनी की एक घटना ऐसी थी जिसका संबंध गाय तथा सुंअर की चर्बी वाले कारतूस से था। जब मेरठ छावनी में अँग्रेज अधिकारियों ने भारतीय सैनिकों को चर्बी वाले कारतूस मुँह से खोलने के लिए विवश किया गया। तब मेरठ के सिपाहियों ने सभी अंग्रेज अधिकारियों को मार दिया। हिंदू तथा मुसलमान सभी सैनिक अपने धर्म को भ्रष्ट होने से बचाने के विचार के साथ दिल्ली आ गए।
    • लार्ड विलियम बैंटिक ने एक नियम पास किया जिसके अनुसार ईसाई धर्म को अपनाने पर ही हिंदू पिता की संपत्ति पर पुत्र को अधिकार मिल सकता था।
    • कई स्थानों पर विद्रोह का संदेश आम लोगों के द्वारा तथा धार्मिक लोगों के द्वारा भी फ़ैलाया गया।
    • अँग्रेजों का उद्देश्य भारत में धर्म प्रचार करना नहीं था बल्कि धन प्राप्त करना था परंतु व्यापारियों के साथ धर्म प्रचारक भी भारत आए। धर्मप्रचारकों ने ईसाई बनने वाले व्यक्तियों को पद प्रदान करने में प्राथमिकता मिलती थी।

विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए क्या तरीके अपनाए गए?

विद्रोहियों के बीच एकता स्थापित करने के लिए निम्न तरीके अपनाए:

    • इस विद्रोह को एक ऐसे युद्ध के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था जिसमें हिंदू तथा मुसलमान दोनों का लाभ- हानि बराबर था।
    • विद्रोह के समय लोगों की जाति तथा धर्म को स्थान नहीं दिया गया। विद्रोहियों ने जो घोषणाएँ की थी उनमें जाति तथा धर्म का भेदभाव किए बिना समाज के सभी वर्गों का आह्वान किया था।
    • बहादुर शाह के नाम से जारी की गई घोषणा में मुहम्मद तथा महावीर दोनों की दुहाई देते हुए जनता से इस विद्रोह में सम्मिलित होने की अपील की जाती थी।
    • इस विद्रोह में विद्रोहियों ने मिलकर अपने शत्रु फि़रंगियों का सामना किया। उन्होंने दोनों समुदायों में लोकप्रिय तीन भाषाओं हिंदी, फ़ारसी तथा उर्दू में अपीलें की।
    • विद्रोहियों ने कई संचार माध्यमों का उपयोग किया। सिपाही एक स्थान से दूसरे स्थान पर जा रहे थे। विद्रोहियों ने कार्यवाही को समरूपता, एक जैसी योजना तथा समन्वय स्थापित किया ताकि लोगों में एकता की भावना जागृत हो सके।
    • कई स्थानों पर सिपाही अपनी लाइनों में रात के समय पंचायतें करते थे, जहाँ सामूहिक रूप से कई फ़ैसले लिए जाते थे।
अंग्रेज़ों ने विद्रोह को कुचलने के लिए क्या कदम उठए?

अंग्रेजों ने विद्रोह को कुचलने के लिए नि-लि- कदम उठाए:

    1. अँगेजों ने विद्रोह का दमन बहुत क्रूरतापूर्वक किया।
    2. अँग्रेजों ने सैनिक टुकड़ियाँ लगाने के पहले उनकी मदद के लिए कुछ कानून तथा मुकदमों की घोषणा की
    3. अँग्रेजों ने सम्पूर्ण उत्तर भारत में मार्शल लॉ लागू कर दिया। फ़ौजी अफ़सरों को आदेश दिया कि विद्रोह में भाग लेने वालों पर मुकदमा चलाया जाए।
    4. गंगा घाटी में सैनिक टुकड़ियों ने गाँव-गाँव जाकर विद्रोह का दमन किया।
    5. अँग्रेजों ने ʻफ़ूट डालो और राज करों की नीति अपनाई।
    6. विद्रोह के दमन के लिए ब्रिटेन से आई सेना को कलकत्ता तथा पंजाब में लगा दिया गया। जून 1857 से सितम्बर 1857 के बीच उन्होंने दिल्ली पर अधिकार कर लिया। दोनों पक्षों की बहुत हानि हुई।
    7. अँग्रेजों ने कूटनीति का सहारा लिया। शिक्षित तथा जमींदारों को विद्रोह से दूर रखा।

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अवध में विद्रोह इतना व्यापक क्यों था? किसान, ताल्लुकदार और जमींदार उसमें क्यों शामिल हुए?

1851 ई. में गवर्नर जनरल लॉर्ड डलहौजी ने अवध की रियासत के बारे में कहा था कि ʻये गिलास फ़ल एक दिन हमारे ही मुँह में आकर गिरेगा।ʼ पाँच साल बाद, 1856 ई. में इस रियासत को औपचारिक रूप से ब्रिटिश साम्राज्य का अंग घोषित कर दिया गया। रियासत पर कब्जे़ का यह सिलसिला काफ़ी लम्बा चला। 1801 ई. से अवध में सहायक संधि थोप दी गई। इस संधि में शर्त थी कि नवाब अपनी सेना ख़त्म कर दे, रियासत में अँग्रेज टुकड़ियों की तैनाती की इजाज़त दे तथा दरबार में मौजूद ब्रिटिज रेज़ीडेंट की सलाह पर काम करें। अपनी सैनिक ताकत से वंचित हो जाने के बाद नवाब अपनी रियासत में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए लगातार अंग्रेजों पर निर्भर होता जा रहा था। इसके बाद विद्रोही मुखयाओं तथा ताल्लुकदारों पर उसका कोई नियंत्रण नहीं था। अवध पर क़ब्ज़े में अँग्रेजों की दिलचस्पी बढ़ती जा रही थी। उन्हें लगता था कि वहाँ की जमीन नील और कपास की खेती के लिए उपयुक्त है तथा इस इलाके को उत्तरी भारत के एक बड़े बाजार के रूप में विकसित किया जा सकता है। 1850 के दशक की शुरूआत तक वे देश के अधिकतर बड़े हिस्सों को जीत चुके थे। कर्नाटक, मराठा भूमि, दोआब, बंगाल तथा पंजाब सभी अँग्रेजों के पास थे।

अवध में विद्रोह का बहुत प्रसार हुआ। किसानों, जमींदारों, ताल्लुकदारों सभी ने भाग लिया। अवध में विद्रोह का नेत्तत्व लखनऊ से बेगम हजरत महल ने किया। अवध के जमींदारों ने बेगम की मदद की। बेगम ने 4 जून 1857 ई. में अपने अल्पव्यस्क पुत्र बिरजिस कादर को अवध का नवाब घोषित किया तथा अँग्रेजों के विरूद्ध क्रांति शुरू की। अवध में ब्रिटिज शासन के जाने से वहाँ के लोगों ने बहुत कुछ सहन किया तथा उन पर बहुत अत्याचार हुआ। यही कारण था कि 1857 ई. का विद्रोह उनकी सभी भावनाओं, परंपराओं तथा मुद्दों, निष्ठांओं की अभिव्यक्ति का स्रोत्र बन गया था। अवध के अधिग्रहण से नवाब की गद्दी समाप्ति के साथ ताल्लुकदार भी तबाह हो गये। उनकी सेना तथा सम्पत्ति दोनों खत्म हो गए। ताल्लुकदारों से सत्ता हस्तांतरित कर दी गई। तालुक्कदार किसानों से बहुत सारा धन तथा राजस्व वसूल करते थे परंतु वे किसानों के हितैषी थे। फ़लस्वरूप ताल्लुकदार तथा किसान अँग्रेजों के विरूद्ध थे तथा क्रोधित थे। किसान फ़ौजी बैरकों जाकर सिपाहियों से मिल गये। इस प्रकार किसान भी सिपाहियों के विद्रोही कार्यों में सम्मिलित हो गए।

विद्रोही क्या चाहते थे? विभिन्न सामाजिक समूहों की दृष्टि में कितना फ़र्क था?

विद्रोही भारत से ब्रिटिश शासन को पूर्णतः समाप्त करना चाहते थे। विभिन्न सामाजिक समूहों का एक ही उद्देश्य था -ʻभारत से ब्रिटिश शासन को भारत से उखाड़ फ़ैंकना।ʼ जब से ब्रिटिश शासन आया था भारत के प्रत्येक वर्ग को हानि का सामना करना पड़ा था। सभी लोगों में ब्रिटिज शासन के विरूद्ध असंतोष का भाव था। इसलिए विभिन्न वर्गों ने विद्रोह किया। विभिन्न सामाजिक समूह अपने-अपने हितों की रक्षा के लिए विद्रोह करना चाहते थे और उन सभी का सामान्य उद्देश्य एक ही था। मुगल सम्राट बहादुरजाह जफ़र, झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई, नाना साहब, पेशवा बाजीराव द्वितीय, जाट नेता शाहमत, राजा कुँवरसिंह, अवध की बेगम हजरत महल, बड़े-बड़े जागीरदाार तथा ताल्लूकदार ये सभी ब्रिटिज सत्ता को समाप्त करना चाहते थे। अँग्रेजों ने भारतीय राज्यों तथा रियासतों का विलय अपने साम्राज्य में कर लिया तथा जमींदारी बंदोबस्त के अंतर्गत भू-राजस्व के रूप में विशाल धनराशि जमींदारों को दे दी। सरकारी की व्यापारी चुंगी, कर और परिवहन संबंधी नीतियाँ भारतीय व्यापारियों के हितों के विरूद्ध थी।

देश के आंतरिक एवं बाह्य व्यापार पर विदेशी उद्योगपतियों का नियत्रण था। 1857 के विद्रोहियों में एकता के विचार दिखते थे तथा उनकी घोषणाएँ भी जाति व धर्म से ऊपर होती थीं। देश में एकता स्थापित करने के लिए विद्रोह को हिंदू तथा मुसलमान दोनों के लिए समान लाभ के रूप में प्रस्तुत किया जा रहा था। विद्रोही चाहते थे कि अँग्रेजों के स्थान पर किसी भारतीय सत्ता का शासन हो जिससे उनके कष्ट कम हो सके। विद्रोही अँग्रजों से छुटकारा पाना चाहते थे। दिल्ली, कानपुर, लखनऊ आदि स्थानों पर ब्रिटिश सत्ता ध्वस्त हो जाने के पश्चात् विद्रोहियों ने एक समान सत्ता तथा शासन स्थापित करने की कोशिश की।

कक्षा 12 इतिहास अध्याय 11 विद्रोह और राज
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एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 इतिहास अध्याय 11 के प्रश्न उत्तर
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