एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 4 मानव विकास

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 4 मानव विकास भाग 1 मानव भूगोल के मूल सिद्धांत के प्रश्न उत्तर अभ्यास के सवाल जवाब सीबीएसई तथा राजकीय बोर्ड सत्र 2023-24 के लिए यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 12 भूगोल पाठ 4 के अतिरिक्त महत्वपूर्ण प्रश्नों के उत्तर भी यहाँ उपलब्ध हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 4

मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र कौन-से हैं?

मानव विकास के तीन मूलभूत क्षेत्र:

    • शिक्षा: सकल नामांकन तथा वयस्क साक्षरता दर अनुपात ज्ञान तक पहुँच का प्रतिनिधित्व करता है।
    • स्वस्थ जीवन: देश के लोगों की दीर्घायु देश में स्वास्थ्य देखभाल सेवाओं तथा सुविधाओं की उपलब्धता को इंगित करती है।
    • संसाधनों तक पहुँच: आर्थिक स्थिति तथा व्यक्तियों की अपनी माँगों का सामान खरीदने की क्षमता के संकेतक के रूप में लिया जाता है।

कक्षा 12 भूगोल अध्याय 4 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Q1

निम्नलिखित में से कौन-सा विकास का सर्वोत्तम वर्णन करता है:

[A]. आकार में वृद्धि
[B]. गुण में धनात्मक परिवर्तन
[C]. आकार में स्थिरता
[D]. गुण में साधारण परिवर्तन
Q2

मानव विकास की अवधारणा निम्नलिखित में से किस विद्वान की देने है:

[A]. प्रो. अमर्त्य सेन
[B]. डॉ. महबूब-उल-हक
[C]. एलन सी- सेम्पुल
[D]. रैटजेल

मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम लिखिए।

मानव विकास इन्हीं चार घटकों पर आधारित है। मानव विकास के चार प्रमुख घटकों के नाम:

    1. सतत पोषणीयता: सतत पोषणीयता मानव विकास के लिए जरूरी है। इसका तात्पर्य होता है संसाधनों का इस्तेमाल से करे जिससे आने वाली पीढी़ को इसमें कोई कमी ना हो। संसाधनों का गलत उपयोग रोका जाए।
    2. उत्पादकता: मानव श्रम या मानव कार्य के संदर्भ में हेलो के समर्थक: सक्षम बनाकर मानव श्रम की उत्पादकता का निरंतर बेहतर बनाना चाहिए।
    3. सशक्तिकरण: सामाजिक तथा आर्थिक रूप से पिछड़े हुए लोगों को हर तरह से सार्थक बनाना जिससे वह विकल्प चुनने के लिए स्वतंत्र हो जाए।
    4. समता: प्रत्यके व्यक्ति की उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना लोगों को उपलब्ध अवसर लिंग प्रजाति आय, जाति आदि किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए।
मानव विकास सूचकांक के आधार पर देशों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?

मानव विकास सूचकांक संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम द्वारा जारी होने वाली वार्षिक रिपोर्ट है जो जीवन प्रत्याशा, शिक्षा तथा आय के मानकों के आधार पर प्रकाशित की जाती है। प्रत्येक देश अपने मूलभूत क्षेत्रों स्वास्थ्य, संसाधनों तक पहुँच, शिक्षा के अंतर्गत हुई प्रगति के आधार पर 0 से 1 के बीच स्कोर प्राप्त करते हैं। यह स्कोर 1 के जितना पास होगा मानव विकास का स्तर उतना ही अधिक होगा। मानव विकास प्रतिवेदन 2005 के अनुसार 57 देशों का स्कोर 0.8 से ऊपर है जो उच्च वर्ग में आते हैं। 88 देशों का स्कोर 0.5 से 0.799 के मध्य मध्यम वर्ग में और 32 देशों को स्कोर 0.5 से नीचे है जो निम्न संवर्ग में रखे गए हैं।

मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता और सतत पोषणीयता से आप क्या समझते हैं?

मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत समता का अर्थ
प्रत्येक व्यक्ति की उपलब्ध अवसरों के लिए समान पहुँच की व्यवस्था करना है। लोगों को उपलब्ध अवसर लिंग प्रजाति, आय, जन्म स्थान, जाति आदि किसी प्रकार का भेदभाव न किया जाए। भारतीय संविधान में भी समानता का अधिकार प्रदान किया गया है।

मानव विकास अवधारणा के अंतर्गत सतत पोषणीयता का अर्थ
सतत पोषणीयता मानव विकास के लिए जरूरी है। इसका तात्पर्य होता है संसाधनों का इस्तेमाल से करे जिससे आने वाली पीढ़ी को इसमें कोई कमी ना हो। संसाधनों का गलत उपयोग रोका जाए। सतत पोषणीयता मानव विकास के लिए अति आवश्यक है। प्रत्येक पीढ़ी को समान अवसर मिलें, इसके लिए समस्त पर्यावरणीय, वित्तीय तथा मानव संसाधनों का उपयोग भविष्य को ध्यान में रखकर करना चाहिए। अतः सतत पोषणीय मानव विकास के लिए अवसरों की उपलब्धता में निरंतरता का होना बहुत जरूरी है।

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कक्षा 12 भूगोल अध्याय 4 हिंदी में