एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण घनत्व और वृद्धि

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 2 विश्व जनसंख्या वितरण, घनत्व और वृद्धि भाग 1 मानव भूगोल के मूल सिद्धांत प्रश्नों के उत्तर सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 12 भूगोल पाठ 2 के सवाल जवाब यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं जो हिंदी और अंग्रेजी में दिए गए हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 2

विश्व में उच्च जनसंख्या घनत्व वाले अनेक क्षेत्र हैं। ऐसा क्यों होता है?

विश्व में उच्च जनसंख्या घनत्व वाले अनेक क्षेत्र हैं इसके निम्नलिखित कारण हैं:

    • सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक।
    • स्थल कारक: विविध मृदा, स्वच्छ जल का आपूर्ति आदि।
    • आर्थिक कारक: नगरीकरण, खनन संपदा, समायोजन आदि।

कक्षा 12 भूगोल अध्याय 2 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न

Q1

निम्नलिखित में से किस महाद्वीप में जनसंख्या वृद्धि सर्वाधिक है?

[A]. अफ्रीका
[B]. एशिया
[C]. दक्षिण अमेरिका
[D]. उत्तर अमेरिका
Q2

निम्नलिखित में से कौन-सा एक विरल जनसंख्या वाला क्षेत्र नहीं है?

[A]. अटाकामा
[B]. भूमध्यरेखीय प्रदेश
[C]. दक्षिण-पूर्वी एशिया
[D]. धुवीय प्रदेश
Q3

निम्नलिखित में से कौन-सा एक प्रतिकर्ष कारक नहीं है?

[A]. जलाभाव
[B]. बेरोज़गारी
[C]. चिकित्सा/शैक्षणिक सुविधाएँ
[D]. महामारियाँ
Q4

निम्नलिखित में से कौन-सा एक तथ्य सही नहीं है?

[A]. विगत 500 वर्षों में मानव जनसंख्या 10 गुणा से अधिक बढ़ी है।
[B]. 5 अरब से 6 अरब तक बढ़ने में जनसंख्या को 100 वर्ष लगे।
[C]. जनांकिकीय संक्रमण की प्रथम अवस्था में जनसंख्या वृद्धि उच्च होती है।

जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाल तीन भौगोलिक कारकों का उल्लेख कीजिए।

जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करने वाले तीन भौगोलिक कारक:
प्राकृतिक कारक

    • जनसंख्या के वितरण पर मुद्रा की उर्वरा शक्ति का बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्रों में खाद्यान्न एवं अन्य फ़सलें अधिक पैदा की जाती हैं और प्रति हैक्टेयर उपज ज्यादा होती है, इसलिए नदी घाटियों की उपजाऊ मिट्टी वाले क्षेत्र अधिक घने बसे हैं।
    • लोग उन क्षेत्रों में बसने को प्राथमिकता देते हैं जहाँ जल आसानी से उपलब्ध होता है। इसी कारण नदी घाटियाँ विश्व के सर्वाधिक सघन बसे हुए क्षेत्र हैं।
    • जलवायु का जनसंख्या के वितरण पर बहुत अधिक प्रभाव पड़ता है। विश्व के मध्य अक्षांज जलवायु की दृष्टि से अनुकूल है। समशीतोष्ण तथा मानसूनी जलवायु लोगों को आकर्षित करता है, जिसके कारण लोग यहाँ अधिक संख्या में निवास करते हैं।
      सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक
    • सामाजिक एवं सांस्कृतिक कारक भी जनसंख्या वितरण को बहुत हद तक प्रभावित करते हैं।
    • विभिन्न धर्मों से संबंधित धार्मिक स्थान धीरे-धीरे नगरों में परिवर्तित हो जाते हैं। जैसे- वाराणसी, मक्का मदीना, जेरूसलम, वेटिकनसिटी आदि। इस प्रकार सांस्कृतिक कारक भी जनसंख्या के वितरण को प्रभावित करता है।

आर्थिक कारक

    1. आर्थिक कारण से जनसंख्या का स्थानांतरण बहुत अधिक मात्रा में देखने को मिलता है। यह स्थानांतरण लोगों को अपनी जीविका चलाने के लिए आवश्यक है। इस कारण से जनसंख्या वितरण, जननांकिकी संरचना में परिवर्तन होता है।
    2. नगरीकरण भी जनसंख्या वितरण को प्रभावित करता है क्योंकि नगरीय क्षेत्रों में ऐसी सुविधाएँ विकसित हो जाती है, जो लोगों को नगर की ओर आकर्षित करती है। रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, मनोरंजन, संचार आदि सुविधाओं के कारण ग्रामीण जनसंख्या स्थानांतरित होकर नगर की ओर चली जाती है।
    3. खनन संपदा से संपन्न क्षेत्र लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है।

जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक कौन-से हैं?

जनसंख्या परिवर्तन के तीन घटक निम्नलिखित हैं:

    • जन्मदर: जन्मदर को प्रति हजार इस्त्रियों पर जन्मे जीवित बच्चों की गणना के अनुसार ज्ञात करते हैं।
    • मृत्युदर: किसी क्षेत्र विशेष में किसी वर्ष विशेष के दौरान प्रति हजार जनसंख्या पर मृतकों की संख्या के अनुसार ज्ञात किया जाता है।
    • प्रवास: प्रवास मनुष्य तथा संसाधनों के मध्य बेहतर संतुलन स्थापित करने की दिशा में उठाया गया कदम है।
जन्म दर और मृत्यु दर में अंतर स्पष्ट कीजिए

जन्म दर और मृत्यु दर में अंतर:

जन्म दर

एक वर्ष में जनसंख्या के प्रति एक हजार व्यक्तियों पर किसी देश में जन्मे जीवित बच्चों की संख्या को जन्म दर कहते हैं। जन्मदर के बढ़ने से जनसंख्या बढ़ती है। जन्म-दर को प्रभावित करने वाले कारक – विवाह आयु, जीवन-स्तर, शिक्षा का स्तर, सरकारी नीतियाँ आदि। जन्म-दर को ज्ञात करने का सूत्र: N = B/t जहाँ, N = जन्मदर B = प्रति हजार व्यक्तियों द्वारा उत्पन्न बच्चों की संख्या, t = समयावधि वर्षों में

मृत्यु दर

जनसंख्या के प्रति एक हजार व्यक्तियों पर किसी देश या क्षेत्र में मरने वाले लोगों की संख्या को मृत्यु दर कहते हैं। मृत्युदर बढ़ने से जनसंख्या घटती है। मृत्यु-दर को प्रभावित करने वाले कारक – स्वास्थ्य सुविधा, शिक्षा का निम्न-स्तर तथा खाधान्नों का अभाव आदि। जब जन्म-दर मृत्यु-दर से अधिक हो तो उसे ऋणात्मक वृद्धि दर कहते हैं मृत्यु-दर को ज्ञात करने का सूत्र: M = D/t जहाँ M = मृत्युदर D = प्रति हजार व्यक्तियों में मरने वालों की संख्या t = समयावधि वर्षों में

जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाओं की विवेचना कीजिए।

जनांकिकीय संक्रमण की तीन अवस्थाएँ
प्रथम अवस्था
यह उच्च जन्मदर तथा उच्च मृत्युदर की धीमी जनसंख्या वृद्धि दर की अवस्था है। इसे जनसंख्या वृद्धि की अस्थिर अवस्था कहा जा सकता है। एडम स्मिथ ने कहा है, कि जनांकिकी उर्वरता का अनुकूलतम वातावरण दरिद्रता द्वारा निर्धारित होता है, अर्थात् जो समाज जितना गरीब होगा, जनसंख्या वृद्धि उतनी ही तेज होगी। इस अवस्था में जन्मदर तथा मृत्युदर दोनों ही प्रकृति पर आधारित होती है। अतः इसमें कभी धनात्मक तो कभी ऋणात्मक जनसंख्या वृद्धि होती है।

द्वितीय अवस्था
इसे जनसंख्या विस्फ़ोट या संक्रमण की अवस्था भी कहते हैं। विश्व के अधिकतर विकासशील देश इसी अवस्था में हैं, जहाँ चिकित्सा व्यवस्था के विस्तार से मृत्युदर में तो कमी आ गई है, किंतु सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों में विशेष अंतर नहीं होने के कारण जन्मदर में अपेक्षित कमी नहीं आ पाई है। जैसे-जैसे द्वितीय अवस्था आगे बढ़ती है, जन्म दर में धीरे-धीरे गिरावट दिखाई देने लगती है। इस अवस्था वाले देशों में बेरोजगारी, बुनियादी सेवाओं की कमी, अशिक्षा, खाद्यान्न की कमी आदि की समस्या प्रमुख होती है।

तृतीय अवस्था
यह जनसंख्या वृद्धि में कमी की प्रवृत्ति की अवस्था है। इस अवस्था में जन्मदर 20 से 30 प्रति हजार और मृत्युदर 10 से 15 प्रति हजार होता है। इस अवस्था में धीमी जनसंख्या वृद्धि होती है। यह अवस्था पूर्वी यूरोप, मध्य एशिया, चीन आदि देशों में देखने को मिलती है।

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