एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1 मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1 मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र भाग 1 मानव भूगोल के मूल सिद्धांत के सवाल जवाब सत्र 2024-25 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 12 भूगोल पाठ 1 के प्रश्न उत्तर हिंदी और अंग्रेजी में यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं।
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1
कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1 मानव भूगोल प्रकृति एवं विषय क्षेत्र के प्रश्न उत्तर
मानव भूगोल को परिभाषित कीजिए।
मानव भूगोल की परिभाषा
मानव भूगोल वह शाखा है जिसके अंतर्गत मानव की उत्पत्ति से लेकर वर्तमान समय तक उसके पर्यावरण के साथ संबंधों का अध्ययन किया जाता है।
अनेक विद्वानों ने मानव भूगोल को इस प्रकार से परिभाषित किया है:
- मानव भूगोल अस्थिर पृथ्वी और क्रियाशील मानव के बीच परिवर्तनशील संबंधों का अध्ययन है। – एलन सी- सेंपल
- मानव भूगोल मानव समाजों और धरातल के बीच संबंधों का सश्लेषित अध्ययन है। – रैट ज़ेल
- हमारी पृथ्वी को नियंत्रित करने वाले भौतिक नियमों तथा इस पर रहने वाले जीवों के मध्य संबंधों के अधिक सश्लेषित ज्ञान से उत्पन्न संकल्पना। – पॉल विडाल. डी. ला ब्लाश
कक्षा 12 भूगोल अध्याय 1 बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न
निम्नलिखित कथनों में से कौन-सा एक भूगोल का वर्णन नहीं करता?
निम्नलिखित में से कौन- सा एक भौगोलिक सूचना का स्त्रोत नहीं है?
निम्नलिखित में कौन-सा एक लोगों और पर्यावरण के बीच अन्योन्यक्रिया का सर्वाधिक महत्त्वपूर्ण कारक है?
निम्नलिखित में से कौन-सा एक मानव भूगोल का उपगमन नहीं है?
मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम बताइए।
मानव भूगोल के कुछ उप-क्षेत्रों के नाम
व्यवहारवादी भूगोल, अवकाश भूगोल, सामाजिक कल्याण को भूगोल, लिंग भूगोल, सांस्कृतिक भूगोल, ऐतिहासिक भूगोल, चिकित्सा भूगोल, निर्वाचन भूगोल, सैन्य भूगोल, संसाधन भूगोल, उद्योग भूगोल, कृषि भूगोल, विपणन भूगोल, पर्यटन भूगोल, अंर्तराष्ट्रीय व्यापार का भूगोल।
मानव के प्राकृतिक कारण व्याख्या कीजिए।
प्राकृतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया की आरंभिक अवस्था में मानव प्रकृति से बहुत प्रभावित हुआ था। मानव के प्राकृतिकरण से आशय है कि प्रकृति के क्रियाकलापों पर अपना प्रभाव डालती है अर्थात् मानव प्रकृति का दास बनकर रह जाता है। उसके सभी क्रियाकलाप प्रकृति के द्वारा नियंत्रित होते हैं। मानव के सभी क्रियाकलाप उसके पर्यावरण द्वारा नियंत्रित होते हैं, जैसे- मानव के रहन-सहन और कार्य, जलवायु, उच्चावच आदि द्वारा प्रभावित होते हैं। मनुष्य अपनी सांस्कृतिक विरासत से प्राप्त तकनीक तथा प्रौद्योगिकी की सहायता से अपने भौतिक पर्यावरण से अन्योन्यक्रिया करता है।
प्रौद्योगिकी से किसी समाज के सांस्कृतिक विकास की जानकारी मिलती है। मनुष्य प्रकृति के नियमों को अच्छे ढंग से जानने के बाद ही प्रौद्योगिकी का विकास कर पाया है। उदाहरण- घर्षण तथा ऊष्मा की संकल्पना ने ʻआग के अविष्कारʼ में हमारी सहायता की। सभी विज्ञानों का जन्म प्रकृति से हुआ है। सभी उपकरणों की कार्यविधि तथा तकनीकों को हमने प्रकृति से सीखा है। अतः प्रकृति का ज्ञान प्रौद्योगिकी को विकसित करने के लिए महत्वपूर्ण है। आंरभिक मानव ने स्वयं को प्रकृति के आदेशों के अनुसार ढाल लिया था क्योंकि उस दौरान मानव का सामाजिक-सांस्कृतिक विकास आंरभिक अवस्था में था और प्रौद्योगिकी न के बराबर थी। विश्व में आज भी ऐसे समाज हैं जो प्राकृतिक पर्यावरण के साथ पूर्णतः सामंजस्य बनाए हुए हैं तथा प्रकृति एक शक्तिशाली बल है, पूज्य तथा सत्कार योग्य बनी हुई है। अपने सतत पोषण के लिए मनुष्य प्राकृतिक संसाधनों पर प्रत्यक्ष रूप से निर्भर है। ऐसे समाजों में भौतिक पर्यावरण माता-प्रकृति का रूप धारण किए हुए है। समय के साथ-साथ लोग अपने पर्यावरण तथा प्राकृतिक बलों को समझने लगते हैं। इस प्रकार सामाजिक तथा सांस्कृतिक विकास के साथ लोग तथा अधिक सक्षम प्रौद्योगिकी का विकास करते हैं। वे अभाव की अवस्था से स्वतंत्रता की ओर अग्रसर होते हैं। पर्यावरण से प्राप्त संसाधन ही संभावनाओं को उत्पन्न करते हैं। अत: इस प्रकार प्रकृति का मानवीकरण होने लगता है।
मानव भूगोल किस प्रकार अन्य सामाजिक विज्ञानों से संबंधित है?
मानव भूगोल की प्रकृति बहुत-ही अंतर-विषयक है क्योंकि इसमें मानव तथा प्राकृतिक पर्यावरण के मध्य अंतर्संबंधों का अध्ययन किया जाता है। इस प्रकार अनेक सामाजिक विज्ञानों से मानव भूगोल का गहरा संबंध है।
उदाहरण: मानव विज्ञान, जनांकिकी, मनोविज्ञान, सामाजिक विज्ञान, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र, राजनीति विज्ञान, इतिहास आदि।