एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 3 व्यायाम: सर्वदा पथ्य:

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 3 – तृतीय: पाठ: व्यायाम: सर्वदा पथ्य: शेमुषी भाग 2 अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए मुफ़्त दिए गए हैं। कक्षा 10 संस्कृत पाठ 3 में हम सीखेंगे कि किस प्रकार व्यायाम हमारे जीवन में लाभकारी होता है। पाठ में व्यायाम के बारे में दिए गए आचार्यों के मार्गदर्शन से हम अपने जीवन को स्वस्थ बना सकते हैं। पाठ के उत्तर के साथ हिंदी अनुवाद भी दिए गए हैं।

कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 3 के लिए एनसीईआरटी समाधान

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संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
शरीरायासजननं कर्म व्यायामसंज्ञितम्‌ ।शरीर के परिश्रम का काम व्यायाम नाम वाला होता है।
तत्कृत्वा तु सुखं देहं विमृद्‌नीयात्‌ समन्तत: ॥1॥उसे करके देह का सुख प्राप्त होता है। अतः सब तरफ से शरीर की मालिश करनी चाहिए।
शरीरोपचय: कान्तिर्गात्राणां सुविभक्तता ।व्यायाम करने से शरीर की वृद्धि, शारीरिक अंगों की सुन्दरता, सम्पूर्ण शरीर का सौन्दर्य है।
दीप्ताग्नित्वमनालस्यं स्थिरत्वं लाघवं मृजा ॥2॥जठराग्नि में प्रकाश (भूख लगना), आलस्य की समाप्ति, स्थिरता, हल्कापन तथा शरीर की स्वच्छता भी व्यायाम से ही होती है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
श्रमक्लमपिपासोष्ण-शीतादीनां सहिष्णुता ।शारीरिक परिश्रम, थकान, प्यास, गर्मी और ठण्डियों की सहनशीलता
आरोग्यं चापि परमं व्यायामादुपजायते ॥3॥और उत्तम स्वास्थ्य व्यायाम से उत्पन्न (प्राप्त) होते हैं।
न चास्ति सदृशं तेन किञ्चित्स्थौल्यापकर्षणम्‌ ।और उसके (व्यायाम के) समान कोई (कुछ) भी मोटापे को दूर (कम) करने वाला नहीं है।
न च व्यायामिनं मर्त्यमर्दयन्त्यरयो बलात्‌ ॥4॥और ना ही व्यायाम करने वाले व्यक्ति को बलपूर्वक शत्रु कुचल पाते हैं।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
न चैनं सहसाक्रम्य जरा समधिरोहति ।और इस (व्यायामशील) व्यक्ति को अचानक बुढ़ापा नहीं आता मनुष्य का मांस परिपक्व होता जाता है।
स्थिरीभवति मांसं च व्यायामाभिरतस्य च ॥5॥और व्यायाम में तल्लीन (लोग) रहने वाले मनुष्य का मांस परिपक्व होता जाता है।
व्यायामस्विन्नगात्रस्य पद्‌भ्यामुद्‌वर्तितं व नरम्‌ ।व्यायाम के कारण पसीने से लथपथ शरीर वाले के और दोनों पैरों से ऊपर उठने वाले व्यायाम करने वाले
व्याधयो नोपसर्पन्ति वैनतेयमिवोरगा: वयोरूपगुणैर्हीनमपि कुर्यात्सुदर्शनम्‌ ॥6॥के पास रोग वैसे ही नहीं आते हैं जैसे गरुड़ के पास साँप। व्यायाम से आयु, रूप तथा गुणों से हीन व्यक्ति भी सुन्दर दिखाई देने लगता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
व्यायामं कुर्वतो नित्यं विरुद्धमपि भोजनम्‌ ।प्रतिदिन व्यायाम करते हुए व्यक्ति का विरुद्ध (अनुपयोगी) भोजन
विदग्धमविदग्धं वा निर्दोषं परिपच्यते ॥7॥भली प्रकार से पका हुआ अथवा न पका हुआ भोजन भी बिना कष्ट के पच जाता है।
व्यायामो हि सदा पथ्यो बलिनां स्निग्धभोजिनाम्‌ ।निश्चय से व्यायाम सदा ही बलशालियों का और चिकनाई युक्त भोजन रखने वालों की दवा है।
स च शीते वसन्ते च तेषां पथ्यतम: स्मृत: ॥8॥और वह शीतकाल में और वसन्त ऋतु में उसके लिए अतीव लाभदायक कहा गया है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सर्वेष्वृतुष्वहरह: पुम्भिरात्महितैषिभि: ।आत्मा का (अपना) हित चाहने वाले पुरुषों के द्वारा सभी ऋतुओं में प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए।
बलस्यार्धेन कर्त्तव्यो व्यायामो हन्त्यतोऽन्यथा ॥9॥इससे बल की वृद्धि होती है नहीं तो (अन्यथा) हानि हो सकती है।
हृदिस्थानस्थितो वायुर्यदा वक्त्रं प्रपद्यते ।जब हृदय स्थान में स्थित वायु (हवा) मुँह तक पहुँचती है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
व्यायामं कुर्वतो जन्तोस्तद्‌बलार्धस्य लक्षणम्‌ ॥10॥व्यायाम को व्यायाम को करते हुए व्यक्ति के वह आधे बल का लक्षण होता है।
वयोबलशरीराणि देशकालाशनानि च ।आयु, बल, शरीर, देश (स्थान), समय और भोजन को देखकर ही व्यायाम को करना चाहिए
समीक्ष्य कुर्याद्‌ व्यायाममन्यथा रोगमाप्नुयात्‌ ॥11॥अन्यथा (नहीं तो) रोग प्राप्त करेगा (रोगी हो जाएगा)।
कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 3 एनसीईआरटी समाधान
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कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 3 एनसीईआरटी के प्रश्न उत्तर
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