एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 शुचिपर्यावरणम्‌

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 – प्रथम: पाठ: शुचिपर्यावरणम्‌ शेमुषी भाग 2 के प्रश्न उत्तर सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए विद्यार्थी यहाँ से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 10 संस्कृत के पाठ 1 अभ्यास के सभी प्रश्न उत्तरों के साथ साथ, पूरे पाठ का हिंदी अनुवाद भी दिया गया है ताकि किसी विद्यार्थी को अध्याय समझने में कोई दिक्कत न आए। तिवारी अकादमी वेबसाइट तथा ऐप में ये सभी समाधान मुफ़्त दिए गए हैं।

कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 के लिए एनसीईआरटी समाधान

कक्षा 10 के लिए समाधान ऐप

iconicon
संस्कृत में वाक्यहिन्दी में अनुवाद
दुर्वहमत्र जीवितं जातं प्रकृतिरेव शरणम्‌।जीवित रहना (जीवन) कठिन हो गया, अब प्रकृति की ही शरण है।
शुचि-पर्यावरणम्‌॥शुद्ध पर्यावरण ही हमारा आश्रय है।
महानगरमध्ये चलदनिशं कालायसचक्रम्‌।महानगरों के बीच रात-दिन काले लोहे का पहिया (चक्का) चल रहा है।
मन: शोषयत्‌ तनू: पेषयद्‌ भ्रमति सदा वक्रम्‌॥जो मन को सुखाते हुए और शरीर को पीसते हुए सदा टेढ़ा चलता रहता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
दुर्दान्तैर्दशनैरमुना स्यान्नैव जनग्रसनम्‌। शुचि…॥1॥इसके द्वारा (इससे) अपने कठोर (भयानक) दाँतों से जनता का नाश न हो, इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारा आश्रय है।
कज्जलमलिनं धूमं मुञ्चति शतशकटीयानम्‌।आज देश में सैकड़ों मोटरगाड़ियाँ काजल की तरह मैले (काले) धुएँ को छोड़ रही हैं।
वाष्पयानमाला संधावति वितरन्ती ध्वानम्‌॥अनेकानेक रेलगाड़ियाँ चारों और शोर करती हुईं दौड़ रही हैं।
यानानां पङ्‌क्तयो ह्यनन्ता: कठिनं संसरणम्‌। शुचि…॥2॥गाड़ियों की पंक्तियाँ अनंत हैं, जिससे चलना कठिन हो गया है। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
वायुमण्डलं भृशं दूषितं न हि निर्मलं जलम्‌।आज वायुमण्डल बहुत दूषित हो गया है और जल (पानी) शुद्ध नहीं रहा।
कुत्सितवस्तुमिश्रितं भक्ष्यं समलं धरातलम्‌॥खाने योग्य सारी वस्तुएँ आज अशुद्ध (विषैली) वस्तुओं से मिलावटी हो गई हैं। तथा सारी धरती मैली (अशुद्ध) हो चुकी है।
करणीयं बहिरन्तर्जगति तु बहु शुद्धीकरणम्‌। शुचि…॥3॥इन सभी अशुद्धियों (मैल) को दूर बाहर करके अंतर्जगत अर्थात मन व बुद्धि आदि को बहुत अधिक शुद्ध करना चाहिए। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।
कञ्चित्‌ कालं नय मामस्मान्नगराद्‌ बहुदूरम्‌।कुछ समय को (के लिए) मुझे इस (प्रदूषित) नगर से बहुत दूर ले चलिए।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
प्रपश्यामि ग्रामान्ते निर्झर-नदी-पय:पूरम्‌॥जहाँ गाँव की सीमा पर जल से भरी हुई नदी और झरने को देखूँ।
एकान्ते कान्तारे क्षणमपि मे स्यात्‌ सञ्चरणम्‌। शुचि…॥4॥निर्जन जंगल में मेरा क्षण भर के लिए भी भ्रमण होवे। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।
हरिततरूणां ललितलतानां माला रमणीया।हरे- भरे वृक्षों की, सुन्दर लताओं की सुन्दर माला
कुसुमावलि: समीरचालिता स्यान्मे वरणीया॥हवा से हिलाई गई फूलों कि पंक्ति (गुच्छे) मेरे लिए सुन्दर हो।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
नवमालिका रसालं मिलिता रुचिरं संगमनम्‌। शुचि…॥5॥आम की नई पंक्ति रुचिपूर्वक (मुझे) प्राप्त रहे।
अयि चल बन्धो! खगकुलकलरवगुञ्जितवनदेशम्‌।हे मित्र (बन्धु/भाई)! पक्षियों के समूह की आवाज़ से गुंजायमान वन में चलो।
पुर-कलरवसम्भ्रमितजनेभ्यो धृतसुखसन्देशम्‌॥नगर की आवाज़ (कोलाहल) से परेशान लोगों को धैर्य के सुख का सन्देश दो
चाकचिक्यजालं नो कुर्याज्जीवितरसहरणम्‌। शुचि…॥6॥नगरों की चकाचौंध भरी दुनिया कहीं हमारे जीवन के रस का हरण न कर ले। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
प्रस्तरतले लतातरुगुल्मा नो भवन्तु पिष्टा:।पत्थर के तल (नीचे) पर लताएँ, पेड़ और झाड़ियाँ पिसें नहीं।
पाषाणी सभ्यता निसर्गे स्यान्न समाविष्टा॥प्राकृति में पथरीली सभ्यता समाविष्ट (सम्मिलित) न हो।
मानवाय जीवनं कामये नो जीवन्मरणम्‌। शुचि…॥7॥मैं मनुष्य के लिए जीवन की कामना करता हूँ, जीवित मृत्यु की नहीं। इसलिए शुद्ध पर्यावरण ही हमारी शरण है।
कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 एनसीईआरटी समाधान
कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 एनसीईआरटी के उत्तर
कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 शेमुषी के उत्तर
कक्षा 10 संस्कृत अध्याय 1 के हल