कक्षा 10 हिंदी एनसीईआरटी समाधान स्पर्श अध्याय 5 सुमित्रानंदन पंत – पर्वत प्रदेश में पावस

कक्षा 10 हिंदी एनसीईआरटी समाधान स्पर्श भाग 2 पद्य खंड अध्याय 5 सुमित्रानंदन पंत – पर्वत प्रदेश में पावस के सभी प्रश्न उत्तर तथा प्रश्न अभ्यास के लिखित प्रश्नों के उत्तर विस्तार से यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 10 हिंदी पाठ 5 के सभी प्रश्न उत्तर शैक्षणिक सत्र 2022-2023 के अनुसार संशोधित किए गए हैं। सरल तथा आसान शब्दों के तालमेल से उत्तरों को आसान बनाया गया है ताकि सभी को समझ आ सके। कक्षा 10 के सभी विषयों के लिए 10वीं कक्षा समाधान ऐप डाउनलोड करें।

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श पद्य खंड अध्याय 5 सुमित्रानंदन पंत – पर्वत प्रदेश में पावस

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श अध्याय 5 के अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

पर्वत प्रदेश में पावस ऋतु के आने से क्या प्रभाव पड़ता है?

पर्वत प्रदेश में पावस ऋतु के आने से अनेकों प्रभाव पड़ते है, मौसम पल-पल बदलता है, कभी धूप कभी छाया, कभी तेज़ हवा का बहना, कभी बादलों का गर्जना और तेज़ वर्षा का आंगमन चलता रहता हैं। पूरा प्रदेश हरा-भरा हो जाता है और प्रकृति नए परिवेश में आ जाती है।

कवि के अनुसार पर्वत ने अपने चरणों में किसे पाल रखा है और वह उसका उपयोग किस रूप में करता है?

कवि के अनुसार पर्वत ने अपने चरणों में तालाब को पाल रखा है जिसमें वह अपना प्रतिबिंब देखता है मानों जैसे की वह तालाब न हो कर आईना हो जिसमें पर्वत अपने विशालकाय शरीर को निहारता रहता हैं।

सुमित्रानंदन पंत का जन्म कब और कहाँ हुआ था?

सुमित्रानंदन पंत का जन्म 20 मई 1900 को उतराखंड के कौसानी-अलमोड़ा में हुआ था।

कवि ने झरनों की सौंदर्यता का वर्णन किस प्रकार किया है?

कवि कहता है कि झरने पहाड़ों व पर्वतों का गुणगान कर रहे हैं। मोतियों की लड़ियों के समान सुंदर झरने झर-झर की आवाज़ करते हुए बह रहे हैं। ऐसा लग रहा है जैसे वे पहाड़ों के सम्मान में गा रहे है। उनकी करतल ध्वनि नस-नस में उत्साह का संचार अर्थात प्रसन्नता भर देती हैं।

कविता में तरुवर गिरिवर के उर से उठ-उठ कर क्या संदेश देते हैं?
कविता में पहाड़ों के हृदय से उठ-उठ कर अनेकों पेड़ ऊँचा उठने के लिए एक टक दृष्टि से स्थिर हो कर शांत आकाश को इस तरह देख रहे है मानों वे किसी चिंता में ढुबे हुए हो, अर्थात वे हमें निरंतर ऊँचा उठने की प्रेरणा देते रहते हैं।

उड़ गया, अचानक लो, भूधर पद्ध की व्याख्या कीजिए।

कवि कहता है कि तेज़ बारिश के बाद मौसम ऐसा हो गया है कि घनी धुंध के कारण लग रहा है मानों पहाड़ कहीं उड़ गए हों अर्थात गायब हो गए हों। ऐसा लग रहा है कि पूरा आकाश ही धरती पर आ गया हो। केवल झरने की आवाज़ ही सुनाई दे रही है। प्रकृति का ऐसा भयानक रूप देख कर शाल के पेड़ डर कर धरती के अंदर धंस गए है। चारों ओर धुआँ होने के कारण लग रहा है कि तालाब में आग लग गई है। ऐसा लग रहा है कि ऐसे मौसम में इंद्र भी अपना बादल रूपी विमान लेकर इधर-उधर जादू का खेल दिखाते हुए घूम रहें हैं।

किन कारणों के कारण कवि ने इंद्र खेलता इंद्र्जाल का उपयोग किया है?

धुंध के कारण पहाड़ों का गायब हो जाना, पूरे आकाश का धरती पर आना, केवल झरनों की आवाज़ सुनाई देना, शाल के पेड़ों का धरती में धंस जाना और चारों तरफ धुआँ होने के कारण ऐसा लगना कि तालाब में आग लगी हुई है किसी जादू से कम नहीं है कवि ने बादलों को इंद्र की उपाधि दे कर उनके द्वारा हुए प्रकृति में परिवर्तन को देखते हुए इंद्र्जाल का उपयोग किया हैं।

कक्षा 10 हिंदी स्पर्श अध्याय 5 के प्रश्न उत्तर