एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 जीवजगत का स्वरूप: विविधता एवं वर्गीकरण समाधान – अभ्यास के प्रश्न उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नों के हल यहाँ से निशुल्क प्राप्त करें। कक्षा 9 विज्ञान (एनसीईआरटी अन्वेषण) की नई पाठ्यपुस्तक का अध्याय 12 “जीवजगत का स्वरूप – विविधता एवं वर्गीकरण” सत्र 2026-27 के लिए जारी किया गया है। इस अध्याय में विद्यार्थियों को जैव विविधता, भारत में जैव विविधता हॉटस्पॉट, जैविक वर्गीकरण की आवश्यकता, अरस्तू से लेकर व्हिटेकर तक वर्गीकरण प्रणालियों का विकास, पाँच जगत वर्गीकरण (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया), पादप जगत के पाँच वर्ग (थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म, एंजियोस्पर्म), जंतु जगत का वर्गीकरण (अकशेरुकी व कशेरुकी), द्विनाम पद्धति (वैज्ञानिक नामकरण), जीवाश्म और जैव विविधता संरक्षण के बारे में विस्तार से पढ़ाया गया है। यह अध्याय विद्यार्थियों को समझाता है कि पृथ्वी पर पाए जाने वाले करोड़ों जीवों को वैज्ञानिक किस प्रकार व्यवस्थित रूप से वर्गीकृत करते हैं ताकि जीवन की विविधता को बेहतर ढंग से समझा जा सके।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 12 के त्वरित लिंक:
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कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 12 अभ्यास प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 समाधान
1. मीना और हरी ने अपने उद्यान में एक जंतु देखा। हरी ने उसे कीट कहा जबकि मीना ने कहा कि वह केंचुआ है। उस सही विकल्प को चुनिए जो यह पुष्टि करता है कि वह एक कीट है।
(i) द्विपार्श्व सममिति की काया
(ii) संधित पाद वाली काया
(iii) बेलनाकार काया
(iv) कम खंडीभवन वाली काया
उत्तर देखें(ii) संधित पाद वाली काया
व्याख्या:
कीट आर्थ्रोपोडा संघ के सदस्य होते हैं, जिनकी सबसे प्रमुख पहचान संधित (जोड़दार) पाद होते हैं। केंचुए में संधित पाद नहीं पाए जाते। इसलिए यदि किसी जंतु में संधित पाद हों, तो वह कीट होने की पुष्टि करता है। अतः सही विकल्प (ii) है।
2. स्पंज, जंतु जगत की सबसे सरल शरीर-संरचना वाले जीवों का प्रतिनिधित्व करते हैं। उनके शरीर में वास्तविक ऊतक और अंग नहीं होते हैं। स्पंज कोशिकाओं की कौन-सी विशेषता उसे जंतु जगत के अंतर्गत वर्गीकृत करने का आधार है?
(i) माइटोकॉन्ड्रिया की अनुपस्थिति
(ii) प्रकाश संश्लेषण करने की क्षमता
(iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति
(iv) कोशिका भित्ति की उपस्थिति
उत्तर देखें(iii) कोशिका झिल्ली की उपस्थिति
व्याख्या:
स्पंज जंतु हैं, इसलिए उनकी कोशिकाओं में कोशिका झिल्ली होती है, जबकि कोशिका भित्ति नहीं होती। वे प्रकाश संश्लेषण भी नहीं करते तथा उनकी कोशिकाओं में माइटोकॉन्ड्रिया उपस्थित होते हैं। इसलिए कोशिका झिल्ली की उपस्थिति उन्हें जंतु जगत में वर्गीकृत करने का महत्वपूर्ण आधार है। अतः सही विकल्प (iii) है।
3. अपने आस-पास के वातावरण में दो अलग-अलग जीवों का अवलोकन कीजिए। उनकी कौन-सी विशेषताएँ आपको उनमें अंतर करने में सहायता करती हैं? ये विशेषताएँ किस प्रकार से उन्हें भिन्न समूहों में रखने में सहायता प्रदान करती हैं?
उत्तर देखेंउदाहरण के लिए गाय और आम के पौधे का अवलोकन किया जा सकता है।
गाय की विशेषताएँ:
• चल-फिर सकती है।
• अपना भोजन स्वयं नहीं बनाती।
• कोशिका भित्ति नहीं होती।
• बहुकोशिकीय जंतु है।
आम के पौधे की विशेषताएँ:
• एक स्थान पर स्थिर रहता है।
• प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन स्वयं बनाता है।
• कोशिका भित्ति उपस्थित होती है।
• बहुकोशिकीय पादप है।
इन विशेषताओं के आधार पर वैज्ञानिक जीवों को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत करते हैं। जैसे पोषण की विधि, कोशिका की संरचना, शरीर का संगठन तथा गमन की क्षमता के आधार पर जीवों को अलग-अलग जगतों में रखा जाता है।
4. कोई वैज्ञानिक वर्गीकरण करने के लिए जाइलम और फ्लोएम की उपस्थिति की तुलना में कोशिकीय संगठन को अधिक मौलिक आधार बनाना किस प्रकार न्यायसंगत सिद्ध करता है?
उत्तर देखेंकोशिकीय संगठन सभी जीवों की मूलभूत विशेषता है। इससे यह ज्ञात होता है कि जीव पूर्वकेंद्रकी है या सुकेंद्रकी तथा एककोशिकीय है या बहुकोशिकीय। जबकि जाइलम और फ्लोएम केवल कुछ विकसित पादपों में पाए जाते हैं। इसलिए कोशिकीय संगठन अधिक व्यापक और मौलिक आधार है तथा वैज्ञानिक वर्गीकरण के लिए अधिक उपयुक्त माना जाता है।
5. यदि आपको एक बिना नाम वाली स्लाइड पर ऐसा एककोशिकीय जीव मिले जिसमें सुस्पष्ट केंद्रक तथा अनेक पक्ष्माभ हों तो उसके किस समूह का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना है? कारण बताइए।
उत्तर देखेंवह जीव प्रोटिस्टा जगत का सदस्य होने की सर्वाधिक संभावना रखता है।
कारण:
• वह एककोशिकीय है।
• उसमें स्पष्ट केंद्रक उपस्थित है, इसलिए वह सुकेंद्रकी जीव है।
• अनेक पक्षाभ उसकी गति में सहायता करते हैं।
• ये सभी विशेषताएँ प्रोटिस्टा जगत के जीवों की प्रमुख विशेषताएँ हैं।
6. किसी पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन और स्थायित्व में जीवों की विविधता किस प्रकार योगदान देती है?
उत्तर देखेंजीवों की विविधता पारिस्थितिक तंत्र में विभिन्न प्रकार के जीवों के बीच भोजन, ऊर्जा प्रवाह तथा पोषक तत्त्वों के चक्र को संतुलित बनाए रखती है। यदि किसी एक जीव की संख्या घटती है, तो अन्य जीव उसकी भूमिका आंशिक रूप से निभा सकते हैं। इससे पारिस्थितिक तंत्र अधिक स्थिर और संतुलित बना रहता है तथा पर्यावरणीय परिवर्तनों का सामना करने की क्षमता बढ़ती है।
7. यदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रख दिया जाए तो कौन-कौन सी समस्याएँ उत्पन्न होंगी?
उत्तर देखेंयदि सभी एककोशिकीय जीवों को एक ही जगत में रख दिया जाए, तो उनके बीच उपस्थित मूलभूत भिन्नताओं की उपेक्षा हो जाएगी। कुछ जीव पूर्वकेंद्रकी होते हैं, जबकि कुछ सुकेंद्रकी होते हैं। उनके पोषण, कोशिकीय संरचना, प्रजनन तथा जीवन-क्रियाओं में भी अंतर होता है। इसलिए उनका सही अध्ययन, पहचान और वैज्ञानिक वर्गीकरण कठिन हो जाएगा।
8. विषाणुओं के विषय में आप पहले की कक्षाओं में पढ़ चुके हैं। इन्हें पाँच-जगत में से किसी के भी अंतर्गत क्यों नहीं रखा गया? कारण बताइए।
उत्तर देखेंविषाणुओं में कोशिकीय संगठन नहीं होता। वे केवल आनुवंशिक पदार्थ और प्रोटीन आवरण से बने होते हैं। वे स्वयं जीवन-क्रियाएँ नहीं कर सकते तथा केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही सक्रिय होते हैं। निर्जीव अवस्था में वे किसी प्रकार की जैविक क्रिया नहीं करते। इसलिए उन्हें पाँच-जगत प्रणाली के किसी भी जगत में नहीं रखा गया है।
9. यदि आप से पाँच वर्गीकरण में संशोधन करने के लिए कहा जाए तो क्या आप विषाणुओं को पृथक श्रेणी में रखेंगे या इस प्रणाली से बाहर रखेंगे? अपने उत्तर को उचित ठहराइए और स्पष्ट कीजिए कि यह वैज्ञानिक वर्गीकरण की विकासशील प्रकृति के संबंध में क्या संकेत देता है?
उत्तर देखेंमैं विषाणुओं को एक पृथक श्रेणी में रखना उचित समझूँगा, क्योंकि उनमें जीवित और निर्जीव दोनों प्रकार के गुण पाए जाते हैं। उनकी संरचना और जीवन-क्रियाएँ अन्य जीवों से भिन्न हैं। उन्हें अलग श्रेणी देने से उनका अध्ययन अधिक व्यवस्थित होगा। यह दर्शाता है कि वैज्ञानिक वर्गीकरण स्थिर नहीं है, बल्कि नए शोध और नई जानकारियों के आधार पर समय-समय पर उसमें परिवर्तन और सुधार किए जाते हैं।
10. विषाणुओं में सजीवों की भाँति आनुवंशिक पदार्थ होता है, परंतु इनमें कोशिकीय संगठन नहीं होता। इनकी कौन-सी विशेषताएँ इन्हें पाँच जगत प्रणाली के अंतर्गत रखे जाने से रोकती हैं? इस बात से हमें वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या ज्ञात होता है?
उत्तर देखेंविषाणुओं में कोशिका, कोशिका द्रव्य, कोशिका झिल्ली तथा अन्य कोशिकीय अंग नहीं होते। वे स्वयं भोजन नहीं बना सकते, न ही स्वतंत्र रूप से उपापचय या प्रजनन कर सकते हैं। वे केवल जीवित कोशिकाओं के भीतर ही सक्रिय होते हैं। इन विशेषताओं के कारण उन्हें पाँच-जगत प्रणाली में सम्मिलित नहीं किया जा सकता। इससे यह स्पष्ट होता है कि कोई भी वर्गीकरण प्रणाली पूर्ण नहीं होती और नई वैज्ञानिक खोजों के अनुसार उसमें संशोधन की आवश्यकता पड़ सकती है।
11. टेरिडोफाइट और ब्रायोफाइट दोनों में पुष्प और बीज नहीं पाए जाते हैं, तब भी इन्हें अलग-अलग समूहों में रखा गया है। इनकी मुख्य विशेषताओं के आधार पर इस वर्गीकरण को स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंब्रायोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ नहीं होतीं तथा इनमें जल और भोजन के संवहन के लिए विशेष ऊतक नहीं पाए जाते। ये सामान्यतः नम स्थानों पर उगते हैं।
टेरिडोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ विकसित होती हैं। इनमें जल और भोजन के संवहन के लिए विशेष ऊतक उपस्थित होते हैं, जिससे इनका शरीर अधिक विकसित होता है।
इन्हीं संरचनात्मक तथा संवहनी ऊतकों की उपस्थिति या अनुपस्थिति के आधार पर ब्रायोफाइट और टेरिडोफाइट को अलग-अलग समूहों में वर्गीकृत किया गया है।
12. वर्गीकरण पदानुक्रम में वर्ग अथवा वंश में से किस समूह में सदस्यों की संख्या कम होती है, परंतु वे अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखेंवंश में सदस्यों की संख्या वर्ग की अपेक्षा कम होती है, परंतु उसके सदस्य अधिक समान विशेषताएँ साझा करते हैं।
व्याख्या:
वर्गीकरण पदानुक्रम में जैसे-जैसे हम उच्च स्तर से निम्न स्तर की ओर बढ़ते हैं, जीवों की संख्या घटती जाती है और उनकी समानताएँ बढ़ती जाती हैं। वंश के अंतर्गत आने वाले जीव आपस में अधिक निकट संबंध रखते हैं तथा उनकी संरचना, विकास और अन्य लक्षणों में अधिक समानता होती है। इसलिए वंश में सदस्यों की संख्या कम होती है, परंतु वे अधिक विशेषताएँ साझा करते हैं।
13. एक वैज्ञानिक एक नए जीव की खोज करता है जिसमें चलन की क्षमता तथा स्वपोषी पोषण का गुण पाया जाता है। पाँच जगत वर्गीकरण के अनुसार कौन-सी विशेषताएँ वैज्ञानिक को इस जीव को प्रोटिस्टा कुल में रखने में सहायता करेंगी?
उत्तर देखेंयदि वह जीव एककोशिकीय तथा सुकेंद्रकी हो, उसमें स्पष्ट केंद्रक उपस्थित हो, वह जल अथवा आर्द्र स्थानों में रहता हो तथा चलन के साथ-साथ स्वपोषी पोषण करने की क्षमता रखता हो, तो उसे प्रोटिस्टा जगत में रखा जाएगा।
व्याख्या:
प्रोटिस्टा जगत में ऐसे अनेक एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव पाए जाते हैं जिनमें चलन की क्षमता होती है तथा कुछ जीव प्रकाश संश्लेषण द्वारा अपना भोजन भी बनाते हैं। इसलिए एककोशिकीय सुकेंद्रकी संगठन तथा स्वपोषी पोषण के साथ चलन की क्षमता इस जीव को प्रोटिस्टा जगत में रखने का आधार बनेगी।
14. एक शोधकर्ता ने एक एककोशिकीय सुकेंद्रकी जीव की पहचान कवक के रूप में की है। पाँच जगत वर्गीकरण के अनुसार किसी एककोशिकीय जीव को जगत फंजाई में रखने के लिए आप कौन-सी पहचान कुंजी को सुझाएँगे?
उत्तर देखेंकिसी एककोशिकीय जीव को फंजाई जगत में रखने के लिए निम्नलिखित पहचान कुंजी अपनाई जा सकती है –
• जीव एककोशिकीय तथा सुकेंद्रकी हो।
• उसमें कोशिका भित्ति उपस्थित हो।
• वह प्रकाश संश्लेषण न करता हो।
• वह परपोषी हो तथा मृत एवं सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करता हो।
• उसका पोषण अवशोषण विधि द्वारा होता हो।
• उसमें हरितलवक उपस्थित न हो।
• उसका प्रजनन सामान्यतः बीजाणुओं अथवा कलिकाजनन जैसी विधियों से होता हो।
यदि कोई एककोशिकीय जीव इन विशेषताओं को प्रदर्शित करता है, तो उसे फंजाई जगत में वर्गीकृत किया जा सकता है।
15. एक दीर्घकालिक पारिस्थितिकीय अध्ययन के दौरान विद्यार्थियों ने तीन अलग-अलग पर्यावरणों— एक अलवणीय जल के तालाब, सड़ी-गली लकड़ियों के आस-पास की नमी युक्त मिट्टी तथा जंतुओं के पाचन तंत्र से एकत्रित किए गए जीवों का परीक्षण किया। वैज्ञानिकों ने जीवों का प्रत्यक्ष नामकरण करने के स्थान पर केवल उनकी संरचनात्मक, कोशिकीय तथा पोषण संबंधी विशेषताओं को नीचे दी गई तालिका के अनुसार अभिलिखित किया।

उपयुक्त अध्ययन के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए—
(i) किसी एक ऐसे जीव की पहचान कीजिए जो स्पष्ट रूप से जगत फंजाई में सम्मिलित हो। अपने उत्तर के समर्थन में एक अवलोकन लिखिए।
उत्तर देखेंजीव ‘Q’ स्पष्ट रूप से जगत फंजाई में सम्मिलित है।
समर्थन में अवलोकन:
यह बहुकोशिकीय, तंतुमय काया वाला है, इसमें कोशिका भित्ति उपस्थित है, पर्णहरित अनुपस्थित है तथा यह मृत कार्बनिक पदार्थों पर वृद्धि करता है।
(ii) कौन-सा जीव जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा? इस वर्गीकरण को संगतपूर्ण ठहराने वाली एक विशेषता लिखिए।
उत्तर देखेंजीव ‘P’ को जगत मोनेरा में सम्मिलित किया जाएगा।
विशेषता:
इसमें वास्तविक केंद्रक अनुपस्थित है, अर्थात यह पूर्वकेंद्रकी जीव है।
(iii) जीव ‘R’ और ‘Q’ दोनों सुकेंद्रकी हैं, तब भी इन्हें अलग-अलग जगतों में सम्मिलित किया गया है। उन मानदंडों का विश्लेषण कीजिए जो इन्हें अलग करते हैं।
उत्तर देखेंजीव ‘R’ एककोशिकीय है, जबकि ‘Q’ बहुकोशिकीय है।
जीव ‘R’ में कशाभ द्वारा गति होती है तथा यह प्रकाश की उपस्थिति में प्रकाश-संश्लेषण और प्रकाश के अभाव में विषमपोषी पोषण करता है।
जीव ‘Q’ तंतुमय काया वाला परपोषी जीव है, इसमें पर्णहरित नहीं होता तथा यह मृत कार्बनिक पदार्थों से पोषण प्राप्त करता है।
इन्हीं विशेषताओं के आधार पर ‘R’ को प्रोटिस्टा तथा ‘Q’ को फंजाई जगत में रखा जाता है।
(iv) समझाइए कि जीव ‘S’ का वर्गीकरण केवल पोषण की विधि के आधार पर क्यों नहीं किया जा सकता।
उत्तर देखेंजीव ‘S’ का वर्गीकरण केवल पोषण के आधार पर नहीं किया जा सकता क्योंकि वर्गीकरण में शरीर की संरचना, कोशिकीय संगठन, ऊतकों की उपस्थिति, मेरुदंड की उपस्थिति तथा विकास संबंधी विशेषताओं को भी ध्यान में रखा जाता है।
जीव ‘S’ बहुकोशिकीय है, इसमें सुविभेदित ऊतक तथा मेरुदंड उपस्थित हैं। इसलिए केवल पोषण के आधार पर इसका सही वर्गीकरण संभव नहीं है।
(v) जीव ‘T’ पाँचों जगतों में से किसी में भी नहीं रखा जा सकता। वर्गीकरण में प्रयुक्त कौन-सी मूलभूत विशेषता इसमें नहीं है और इससे वर्गीकरण प्रणालियों की कमियों के विषय में क्या पता चलता है?
उत्तर देखेंजीव ‘T’ में कोशिकीय संगठन नहीं है।
यह अकोशिकीय है तथा केवल आनुवंशिक पदार्थ और प्रोटीन आवरण से बना है। यह परपोषी कोशिका के बाहर निष्क्रिय रहता है।
इससे स्पष्ट होता है कि पाँच-जगत वर्गीकरण सभी प्रकार के जैविक स्वरूपों को समाहित नहीं कर सकता तथा नई वैज्ञानिक खोजों के अनुसार वर्गीकरण प्रणालियों में संशोधन की आवश्यकता पड़ती है।
(vi) यदि वर्गीकरण केवल पर्यावास के आधार पर किया गया होता तो किन जीवों को अनुचित रूप से एक साथ समूहित किया जा सकता था? ऐसे वर्गीकरण के वैज्ञानिक परिणामों की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखेंयदि वर्गीकरण केवल पर्यावास के आधार पर किया जाता, तो समान स्थान पर रहने वाले अनेक असंबंधित जीव एक ही समूह में आ जाते। उदाहरण के लिए तालाब में रहने वाले जीव ‘R’ तथा अन्य जलीय जीवों को उनकी मूलभूत भिन्नताओं के बावजूद एक ही समूह में रखा जा सकता था।
ऐसा वर्गीकरण वैज्ञानिक दृष्टि से उचित नहीं होगा क्योंकि इससे कोशिकीय संगठन, पोषण, शरीर संरचना तथा विकास संबंधी वास्तविक संबंध स्पष्ट नहीं हो पाएँगे।
(vii) कल्पना कीजिए कि वैज्ञानिकों ने एक ऐसे नए जीव की खोज की है जो बहुकोशिकीय तथा सुकेंद्रकी है। उसमें पर्णहरित नहीं है और वह बाहर से किसी परपोषी से पोषक तत्त्व अवशोषित करता है। बताइए इसे फंजाई या एनीमेलिया में से किस जगत में सम्मिलित किया जाना चाहिए? वर्गीकरण के मानदंडों के आधार पर अपने तर्क को उचित ठहराइए।
उत्तर देखेंऐसे जीव को फंजाई जगत में सम्मिलित किया जाना चाहिए।
कारण:
वह बहुकोशिकीय तथा सुकेंद्रकी है, उसमें पर्णहरित नहीं है और वह बाहर से पोषक तत्त्वों का अवशोषण करके पोषण प्राप्त करता है। यह फंजाई जगत की प्रमुख विशेषता है।
इसके विपरीत एनीमेलिया जगत के जीव भोजन का अंतर्ग्रहण करके उसका पाचन करते हैं, जबकि फंजाई बाह्य अवशोषण द्वारा पोषण प्राप्त करते हैं। इसलिए यह जीव फंजाई जगत में रखा जाएगा।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 से परीक्षा के लिए अतिरिक्त प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 12 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न
1. जैव विविधता किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजीवजगत की असीम विविधता जो जीवन के असंख्य रूपों व पर्यावासों में पाई जाती है, जैव विविधता कहलाती है।
2. स्थानिक जातियाँ किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंवे जातियाँ जो विश्व के किसी विशेष क्षेत्र में ही पाई जाती हैं और अन्यत्र नहीं पाई जातीं, स्थानिक जातियाँ कहलाती हैं।
3. जैव विविधता हॉटस्पॉट किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंवे क्षेत्र जो बड़ी संख्या में स्थानिक जातियों को आश्रय देते हैं और जहाँ पर्यावास की अत्यधिक क्षति हुई है।
4. जैविक वर्गीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंसजीवों के समूहन की वैज्ञानिक पद्धति जिससे जीवों को उनकी समानताओं के आधार पर वर्गीकृत किया जाता है।
5. द्विजगत प्रणाली किसने और कब प्रस्तुत की?
उत्तर देखेंद्विजगत प्रणाली वैज्ञानिकों ने 18वीं शताब्दी में प्रस्तुत की, जिसमें सजीवों को प्लांटी और एनिमेलिया में बाँटा गया।
6. पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली किसने प्रस्तावित की?
उत्तर देखेंपाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने वर्ष 1969 में प्रस्तावित की।
7. मोनेरा जगत के जीव किस प्रकार के होते हैं?
उत्तर देखेंमोनेरा जगत में एककोशिकीय पूर्वकेंद्रकी जीव आते हैं, जैसे जीवाणु और नील-हरित शैवाल।
8. कवक की कोशिका भित्ति किससे बनी होती है?
उत्तर देखेंकवक की कोशिका भित्ति काइटिन नामक पदार्थ से बनी होती है।
9. थैलोफाइटा को आद्य पौधे क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखेंथैलोफाइटा सबसे सरल पादप हैं जिनका शरीर थैलस (सरल संरचना) होता है, इसलिए इन्हें आद्य पौधे कहते हैं।
10. ब्रायोफाइटा को पादप जगत का उभयचर क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखेंब्रायोफाइट को जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है, इसलिए इन्हें पादप जगत का उभयचर कहा जाता है।
11. पृष्ठरज्जु किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंपृष्ठरज्जु एक लचीली छड़ाकार संरचना है जो जंतु वर्गीकरण का मुख्य आधार है।
12. द्विनाम पद्धति किसने प्रस्तुत की?
उत्तर देखेंद्विनाम पद्धति कैरोलस लिनियस ने 18वीं शताब्दी में प्रस्तुत की।
13. बाघ का वैज्ञानिक नाम क्या है?
उत्तर देखेंबाघ का वैज्ञानिक नाम पेंथेरा टाइग्रिस है।
14. जीवाश्म किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंपादपों और जंतुओं के परिरक्षित अवशेष जो चट्टानों, रेत और मिट्टी की परतों में पाए जाते हैं, जीवाश्म कहलाते हैं।
15. कार्ल वूस ने कौन-सी नई पद्धति प्रस्तावित की?
उत्तर देखेंकार्ल वूस ने 1977 में तीन डोमेन पद्धति (बैक्टीरिया, आर्किया, यूकैरिया) प्रस्तावित की।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 12 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न
1. जैविक वर्गीकरण से हमें क्या सहायता प्राप्त होती है?
उत्तर देखेंजैविक वर्गीकरण सजीवों के अध्ययन को व्यवस्थित और क्रमबद्ध बनाता है, समानताओं-असमानताओं को समझने में सहायता करता है, नए खोजे गए जीवों की पहचान करने में सहायक है और जैव विविधता संरक्षण में उन जीवों की पहचान करने में मदद करता है जिन पर विलुप्त होने का खतरा है।
2. सजीवों को वर्गीकृत करने के कोई चार मानदंड बताइए।
उत्तर देखेंसजीवों को वर्गीकृत करने के मानदंडों में बाह्य विशेषताएँ (आकार, आमाप), पोषण की विधि (स्वपोषी/विषमपोषी), आंतरिक संरचनाएँ (कंकाल पैटर्न, अंगों की उपस्थिति) और कोशिका संरचना (एककोशिकीय/बहुकोशिकीय, पूर्वकेंद्रकी/सुकेंद्रकी) शामिल हैं।
3. अरस्तू की वर्गीकरण प्रणाली की क्या सीमाएँ थीं?
उत्तर देखेंअरस्तू ने जीवों को उनके पर्यावास (भूमि, जल, वायु) और बाहरी स्वरूप के आधार पर समूहित किया था। परंतु यह प्रणाली मुख्यतः सरलता से दिखाई देने वाली बाहरी विशेषताओं पर आधारित थी, इसलिए यह जीवों की आंतरिक जटिलता और वास्तविक संबंधों को नहीं दर्शा पाती थी।
4. द्विजगत प्रणाली में क्या समस्या उत्पन्न हुई और इसका समाधान कैसे हुआ?
उत्तर देखेंद्विजगत प्रणाली में अमीबा और पैरामीशियम जैसे जीवों को कहाँ रखा जाए, यह भ्रम उत्पन्न हुआ क्योंकि वे गतिशील परंतु एककोशिकीय व विषमपोषी थे। इस समस्या के समाधान के लिए वैज्ञानिकों ने एक तीसरा जगत ‘प्रोटिस्टा’ जोड़ा।
5. कवक (फंजाई) को पौधों से अलग जगत में क्यों रखा गया?
उत्तर देखेंकवक पौधों की तरह अचल रहते हैं परंतु इनमें विषमपोषी पोषण पाया जाता है। ये मृत या सड़े-गले पदार्थों से अवशोषण द्वारा पोषक प्राप्त करते हैं, जबकि पौधे स्वपोषी होते हैं। इसलिए कवकों को एक अलग जगत फंजाई में रखा गया।
6. टेरिडोफाइटा की विशेषताएँ बताइए और यह ब्रायोफाइटा से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर देखेंटेरिडोफाइट में वास्तविक जड़, तना और पत्तियाँ होती हैं तथा इनमें संवहनी ऊतक (जाइलम और फ्लोएम) होते हैं जो जल व भोजन का परिवहन करते हैं। ब्रायोफाइट के विपरीत, टेरिडोफाइट स्थल पर पूरी तरह अनुकूलित हैं, परंतु दोनों को जनन के लिए जल की आवश्यकता होती है।
7. जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर देखेंजिम्नोस्पर्म (जैसे चीड़) के बीज फलों में बंद नहीं होते और शंकुओं पर अनावृत रहते हैं, तथा इनमें निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती। एंजियोस्पर्म (पुष्पी पौधे) पुष्प और फल उत्पन्न करते हैं तथा इनके बीज फलों के अंदर बंद रहते हैं।
8. अकशेरुकी जीवों में पोरीफेरा और नाइडेरिया के शरीर संगठन में क्या अंतर है?
उत्तर देखेंपोरीफेरा (स्पंज) बहुकोशिकीय होते हैं परंतु इनमें ऊतक और अंग संगठन नहीं होता तथा ये जल के प्रवाह पर निर्भर रहते हैं। नाइडेरिया (हाइड्रा, जेलीफिश) में ऊतक-स्तरीय संगठन होता है और ये अपने स्पर्शकों से सक्रिय रूप से शिकार पकड़ते हैं।
9. आर्थ्रोपोडा (संधिपाद जीव) की मुख्य विशेषताएँ क्या हैं?
उत्तर देखेंआर्थ्रोपोडा में कीट, केकड़े और मकड़ियाँ सम्मिलित हैं। इनके शरीर खंडयुक्त होते हैं और इनमें कठोर बहिःकंकाल होता है जो सुरक्षा प्रदान करता है, जल की हानि को कम करता है और मांसपेशियों को अवलंब प्रदान करता है, जिससे ये शुष्क वातावरण में जीवित रह पाते हैं।
10. वैज्ञानिक नाम लिखने के तीन मुख्य नियम बताइए।
उत्तर देखेंप्रत्येक वैज्ञानिक नाम के दो भाग होते हैं – वंश और जाति। वंश का नाम पहले लिखा जाता है जिसका पहला अक्षर बड़ा होता है, जाति का नाम छोटे अक्षरों में लिखा जाता है, और पूरा नाम तिरछे अक्षरों में लिखा जाता है या हाथ से लिखते समय रेखांकित किया जाता है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 12 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न
1. समय-समय पर विकसित हुई विभिन्न जैविक वर्गीकरण प्रणालियों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंअरस्तू ने चौथी शताब्दी में जीवों को उनके पर्यावास (भूमि, जल, वायु) के आधार पर समूहित किया, परंतु यह प्रणाली केवल बाहरी विशेषताओं पर आधारित थी। 18वीं शताब्दी में वैज्ञानिकों ने द्विजगत प्रणाली प्रस्तुत की, जिसमें सजीवों को प्लांटी और एनिमेलिया में बाँटा गया, परंतु अमीबा जैसे जीवों को लेकर भ्रम उत्पन्न हुआ। इसके समाधान के लिए 1866 में अर्न्स्ट हेकेल ने तीसरा जगत प्रोटिस्टा जोड़ा, जिससे तीन जगत प्रणाली बनी। सूक्ष्मदर्शी यंत्रों में सुधार के बाद 1938 में हर्बर्ट एफ. कोपलैंड ने जीवाणुओं को अलग मोनेरा जगत में रखकर चार जगत प्रणाली बनाई। अंततः 1969 में रॉबर्ट एच. व्हिटेकर ने कवकों को अलग जगत फंजाई में रखकर पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली (मोनेरा, प्रोटिस्टा, फंजाई, प्लांटी, एनिमेलिया) प्रस्तुत की, जो वर्तमान में सर्वाधिक स्वीकृत प्रणाली है।
2. जगत प्लांटी (पादप जगत) के पाँच वर्गों का वर्णन उनकी विशिष्ट विशेषताओं सहित कीजिए।
उत्तर देखेंजगत प्लांटी को पाँच वर्गों में विभाजित किया गया है। थैलोफाइटा (शैवाल) सबसे सरल पादप हैं जिनका शरीर थैलस जैसा होता है और ये जलीय पर्यावास के लिए अनुकूलित हैं, जैसे स्पाइरोगाइरा। ब्रायोफाइटा (मॉस, लिवरवर्ट) प्रथम स्थलीय पौधे हैं जिनमें मूलाभास होते हैं परंतु जनन के लिए जल आवश्यक है, इसलिए इन्हें पादप जगत का उभयचर कहते हैं। टेरिडोफाइटा (फर्न) में वास्तविक जड़, तना, पत्तियाँ और संवहनी ऊतक होते हैं परंतु ये बीज उत्पन्न नहीं करते और जनन के लिए जल पर निर्भर रहते हैं। जिम्नोस्पर्म (चीड़, साइकैड) शुष्क क्षेत्रों के लिए अनुकूलित होते हैं, बीज उत्पन्न करते हैं परंतु निषेचन के लिए जल की आवश्यकता नहीं होती और बीज फलों में बंद नहीं होते। एंजियोस्पर्म (पुष्पी पौधे) सबसे जटिल और विविधतापूर्ण समूह हैं, जो पुष्प व फल उत्पन्न करते हैं तथा इनके बीज फलों के भीतर सुरक्षित रहते हैं।
3. अकशेरुकी जीवों (नॉन-कॉर्डेटा) के विभिन्न संघों का उनकी शारीरिक जटिलता के क्रम में वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंअकशेरुकी जीवों में शरीर संगठन की जटिलता क्रमिक रूप से बढ़ती जाती है। पोरीफेरा (स्पंज) में केवल कोशिकीय स्तर का संगठन होता है, बिना ऊतक या अंग के। नाइडेरिया (हाइड्रा, जेलीफिश) में ऊतक-स्तरीय संगठन आता है। प्लैटीहेल्मिन्थीस (चपटे कृमि) में द्विपार्श्व सममिति और अंग-स्तरीय संगठन विकसित होता है। नेमाटोडा (गोल कृमि) में दो छिद्रों वाली सुव्यवस्थित शरीर रचना पाई जाती है। ऐनेलिडा (केंचुआ) में खंडीभवन और देहगुहा के साथ अंग तंत्र स्तर का संगठन होता है। आर्थ्रोपोडा (कीट, मकड़ी) में संधित उपांग और बहिःकंकाल विकसित होता है। मोलस्का (घोंघा) में कोमल काया के साथ अंग तंत्र स्तर का संगठन होता है, और एकाइनोडर्मेटा (स्टारफिश) में पृष्ठरज्जु रहित होते हुए भी कठोर अंतःकंकाल पाया जाता है, जो कशेरुकी जीवों की ओर विकास के क्रमिक चरण को दर्शाता है।
4. वर्गीकरण की पदानुक्रमी प्रकृति को बाघ और मटर के पौधे के उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंवर्गीकरण एक क्रमबद्ध प्रक्रिया है जिसमें बड़े समूहों (जगत) से आरंभ करके छोटे और अधिक विशिष्ट समूहों (जाति) तक पहुँचा जाता है – जगत → संघ → वर्ग → गण → कुल → वंश → जाति। बाघ के उदाहरण में: जगत एनिमेलिया, संघ कॉर्डेटा, उपसंघ वर्टीब्रेटा, वर्ग मैमेलिया, गण कार्निवोरा, कुल फेलिडी, वंश पेंथेरा और जाति पी. टाइग्रिस। इसी प्रकार मटर के पौधे में: जगत प्लांटी, संघ मैग्नोलियोफाइटा, वर्ग मैग्नोलियोप्सिडा, गण फेबेलीस, कुल फेबेसी, वंश पाइसम और जाति पाइसम सेटाइवम। यह व्यवस्था एक पते की तरह कार्य करती है, जहाँ प्रत्येक निम्नतर स्तर पर जीव अधिक समान विशेषताओं को साझा करते हैं, जिससे वैज्ञानिकों को जीवों की पहचान, तुलना और उनके पारस्परिक संबंधों को समझने में सहायता मिलती है।
5. जैव विविधता पर मंडराते खतरों का वर्णन करते हुए बताइए कि जैव विविधता का संरक्षण क्यों आवश्यक है।
उत्तर देखेंप्रत्येक जाति चाहे वह बड़ी हो या छोटी, प्रकृति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है — पौधे भोजन और ऑक्सीजन का उत्पादन करते हैं, जंतु पुष्पों का परागण और बीजों का प्रकीर्णन करते हैं तथा सूक्ष्मजीव पोषक तत्वों का पुनर्चक्रण करते हैं। प्रदूषण, वनों की कटाई, संसाधनों का अत्यधिक उपयोग जैसी मानवीय गतिविधियों और जलवायु परिवर्तन के कारण जैव विविधता का ह्रास हो रहा है। पृथ्वी से जब कोई एक जाति विलुप्त हो जाती है तो उस पर निर्भर अन्य जातियाँ भी धीरे-धीरे कम हो सकती हैं और अंततः विलुप्त भी हो सकती हैं, जैसा कि मणिपुर के संगाई हिरण और उसके फुमडिस पर्यावास के उदाहरण से स्पष्ट होता है। अतः जैव विविधता संरक्षण आवश्यक है क्योंकि यह पारिस्थितिक तंत्र के संतुलन, खाद्य सुरक्षा, औषधीय संसाधनों और पृथ्वी पर जीवन की समग्र स्थिरता को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 में वर्गीकरण संबंधी क्रियाकलाप (जैसे घास फाण्ट बनाना, स्थायी स्लाइड का अवलोकन) घर पर करना कितना सुरक्षित है?
क्रियाकलाप 12.5 (घास फाण्ट/सूखी घास का घोल बनाना) में पाठ्यपुस्तक स्वयं स्पष्ट चेतावनी देती है कि घास के घोल से दुर्गंध आ सकती है, इसलिए लैब कोट, मास्क और दस्ताने पहनना आवश्यक है, तथा प्रयोग के बाद सामग्री को ऑटोक्लेव करके ही फेंकना चाहिए। अतः यह क्रियाकलाप और सूक्ष्मदर्शी से जुड़े अन्य अवलोकन विद्यालय की प्रयोगशाला में शिक्षक की देखरेख में करना ही उचित है, घर पर स्वयं करने की संस्तुति नहीं दी गई है।
क्या पाँच जगत वर्गीकरण प्रणाली अंतिम और पूर्ण है या आगे भी इसमें बदलाव संभव है?
नहीं, पाठ्यपुस्तक स्वयं स्पष्ट करती है कि पाँच जगत वर्गीकरण पद्धति पूरी तरह से जीवन की विविधता को समझाने में असमर्थ रही, विशेषकर विषाणुओं के मामले में, जिन्हें इनमें से किसी भी जगत में नहीं रखा जा सका। आनुवंशिक अनुसंधान में हुई प्रगति के बाद कार्ल वूस ने 1977 में तीन डोमेन पद्धति (बैक्टीरिया, आर्किया, यूकैरिया) प्रस्तावित की। इससे स्पष्ट होता है कि जैविक वर्गीकरण निरंतर विवेचन और परिवर्तन की एक जारी प्रक्रिया है, जो नई खोजों के साथ बदलती रहती है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 को समझने के लिए विद्यार्थियों को किन पूर्व अध्यायों या पूर्व कक्षाओं का ज्ञान होना जरूरी है?
पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट संदर्भ दिया गया है कि विद्यार्थियों को कक्षा 6 (जिज्ञासा अध्याय 2 — एंजियोस्पर्म), कक्षा 7 (जिज्ञासा अध्याय 10 — कोशिका भित्ति) तथा स्वयं इसी पुस्तक के अध्याय 3 (तने की अनुप्रस्थ काट, सूरजमुखी उदाहरण) का पूर्व ज्ञान होना चाहिए। यह क्रमिक संदर्भ विद्यार्थियों को पादप जगत के वर्गों (टेरिडोफाइट बनाम एंजियोस्पर्म) की तुलना करने में सहायक होता है।
वैज्ञानिक नाम लिखते समय विद्यार्थी सबसे ज्यादा कौन-सी गलतियाँ करते हैं और परीक्षा में सही तरीका क्या है?
सामान्य गलतियाँ हैं – वंश के नाम का पहला अक्षर छोटा लिखना, या नाम को तिरछे अक्षरों में न लिखना/रेखांकित न करना। पाठ्यपुस्तक के अनुसार सही नियम हैं: वंश का नाम पहले, बड़े अक्षर से शुरू; जाति का नाम बाद में, छोटे अक्षरों में; पूरा नाम तिरछे अक्षरों में या हाथ से लिखते समय अलग-अलग रेखांकित करना। परीक्षा में इस नियम का सही पालन अंक दिलाने में महत्वपूर्ण होता है।
यदि किसी विद्यार्थी को “मानदंड-आधारित” या “केस स्टडी” प्रश्न (जैसे पक्के बाघ अभयारण्य या तालिका 12.3 वाला प्रश्न 15) कठिन लगे तो उसे कैसे हल करना चाहिए?
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 12 में एनसीईआरटी ने पारंपरिक याद-आधारित प्रश्नों के बजाय विश्लेषणात्मक प्रश्न शामिल किए हैं, जहाँ विद्यार्थी को दी गई जानकारी (जैसे किसी अज्ञात जीव P, Q, R, S, T की विशेषताएँ) के आधार पर स्वयं वर्गीकरण करना होता है। ऐसे प्रश्नों को हल करने के लिए विद्यार्थियों को पाँच जगत वर्गीकरण के मानदंडों (कोशिका प्रकार, कोशिका भित्ति, पोषण विधि, संगठन स्तर) को क्रमबद्ध रूप से लागू करना चाहिए, ठीक वैसे ही जैसे पाठ्यपुस्तक के संकल्पना मानचित्र (चित्र 12.5) में दर्शाया गया है, न कि उत्तर को रटने का प्रयास करना चाहिए।
