एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें

एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें समाधान – अभ्यास प्रश्न उत्तर तथा परीक्षा की तैयारी के लिए प्रश्न-उत्तर यहाँ से मुफ्त में प्राप्त किए जा सकते हैं। एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 विज्ञान पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” (सत्र 2026-27) का अध्याय 7 “कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें” भौतिकी की उन आधारभूत अवधारणाओं पर केंद्रित है जो हमारे दैनिक जीवन की लगभग सभी गतिविधियों से जुड़ी हैं। इस अध्याय में विद्यार्थी सीखते हैं कि वैज्ञानिक दृष्टिकोण से “कार्य” कैसे परिभाषित होता है, कार्य कब धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य होता है, और कार्य-ऊर्जा प्रमेय क्या कहता है। इसके साथ ही गतिज ऊर्जा, स्थितिज ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम, शक्ति तथा घिरनी, आनत तल और उत्तोलक जैसी सरल मशीनों का विस्तृत अध्ययन कराया गया है। क्रिकेट की गेंद, रॉकेट, फिसलपट्टी, सी-सॉ झूला और बचाव ढलान जैसे रोचक उदाहरणों के माध्यम से इन अवधारणाओं को सरल बनाया गया है। यह अध्याय कक्षा 9 की बोर्ड परीक्षा के साथ-साथ आगामी कक्षाओं की भौतिकी और इंजीनियरिंग अध्ययन की मजबूत नींव तैयार करता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 7 अभ्यास प्रश्न उत्तर

एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 समाधान

1. बताइए कि निम्नलिखित कथन सत्य हैं या असत्य –

(i) कार्य तब होता है जब कोई बल लगाया जाता है भले ही वस्तु गति न करे।
(ii) बाल्टी को ऊर्ध्वाधरतः ऊपर उठाने से बाल्टी पर धनात्मक कार्य होता है।
(iii) कार्य और ऊर्जा दोनों का SI मात्रक जूल (J) है।
(iv) एक स्थिर तनी हुई रबड़ की पट्टी में गतिज ऊर्जा होती है।
(v) ऊर्जा एक रूप से दूसरे रूप में परिवर्तित हो सकती है।
उत्तर देखें(i) असत्य — कार्य तब होता है जब बल के कारण वस्तु में विस्थापन हो; बिना विस्थापन के कार्य शून्य होता है।
(ii) सत्य — बाल्टी पर लगाया गया बल और विस्थापन दोनों ऊपर की दिशा में होते हैं, अतः कार्य धनात्मक है।
(iii) सत्य
(iv) असत्य — स्थिर तनी हुई पट्टी में गतिज ऊर्जा नहीं, बल्कि स्थितिज (प्रत्यास्थ) ऊर्जा होती है, क्योंकि वह गतिमान नहीं है।
(v) सत्य

2. रिक्त स्थान भरिए –

(i) किया गया कार्य = …………… × …………… (बल की दिशा में)
(ii) किसी वस्तु पर …………… न्यूटन बल लगाने से वस्तु 1 m विस्थापित होती है तो 1 जूल कार्य संपन्न होता है।
(iii) m द्रव्यमान और v वेग वाले पिंड की गतिज ऊर्जा का व्यंजक …………… होगा।
(iv) पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की स्थितिज ऊर्जा …………… होती है।
(v) कार्य करने की …………… को शक्ति कहते हैं।
उत्तर देखें
(i) किया गया कार्य = बल × विस्थापन (बल की दिशा में)
(ii) किसी वस्तु पर 1 न्यूटन बल लगाने से वस्तु 1 m विस्थापित होती है तो 1 जूल कार्य संपन्न होता है।
(iii) m द्रव्यमान और v वेग वाले पिंड की गतिज ऊर्जा का व्यंजक (1/2)mv² होगा।
(iv) पृथ्वी की सतह से h ऊँचाई पर स्थित m द्रव्यमान की वस्तु की स्थितिज ऊर्जा mgh होती है।
(v) कार्य करने की दर को शक्ति कहते हैं।

3. जब ऊपर की ओर फेंकी गई गेंद अपने उच्चतम बिंदु पर पहुँचती है तो निम्नलिखित में से कौन-सा/ से कथन सही है/हैं?

(i) गेंद पर लगने वाला बल शून्य है।
(ii) गेंद का त्वरण शून्य है।
(iii) इसकी गतिज ऊर्जा शून्य है।
(iv) इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम है।
उत्तर देखें(ii) और (iv)
जब गेंद उच्चतम बिंदु पर पहुँचती है तो उसका वेग शून्य होता है (अतः गतिज ऊर्जा शून्य — यह भी सही है, तो (ii), (iii), (iv) तीनों सही हैं)। परंतु गुरुत्व बल शून्य नहीं होता (यह सदैव कार्य करता है), इसलिए त्वरण भी शून्य नहीं होता। सही कथन: (iii) इसकी गतिज ऊर्जा शून्य है और (iv) इसकी स्थितिज ऊर्जा अधिकतम है।

4. निम्नलिखित में से प्रत्येक स्थिति में होने वाले ऊर्जा रूपांतरण की पहचान कीजिए।

(i) एक ट्रक का पहाड़ी पर ऊपर की ओर चढ़ना
(ii) घड़ी की स्प्रिंग का खुलना
(iii) हरे पत्तों द्वारा प्रकाश संश्लेषण
(iv) बाँध से बहता हुआ जल
(v) माचिस की तीली का जलना
(vi) एक पटाखे में विस्फोट होना
(vii) माइक्रोफोन में बोलना
(viii) एक दीप्त विद्युत बल्ब
(ix) सौर-पैनल
उत्तर देखें(i) गतिज ऊर्जा → स्थितिज ऊर्जा (ट्रक की ईंधन/रासायनिक ऊर्जा से यांत्रिक ऊर्जा में भी रूपांतरण होता है)
(ii) स्थितिज (प्रत्यास्थ) ऊर्जा → गतिज ऊर्जा
(iii) प्रकाश ऊर्जा → रासायनिक ऊर्जा
(iv) स्थितिज ऊर्जा → गतिज ऊर्जा
(v) रासायनिक ऊर्जा → ऊष्मीय व प्रकाश ऊर्जा
(vi) रासायनिक ऊर्जा → ऊष्मीय, प्रकाश व ध्वनि ऊर्जा
(vii) ध्वनि ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा
(viii) विद्युत ऊर्जा → प्रकाश व ऊष्मीय ऊर्जा
(ix) सौर (प्रकाश) ऊर्जा → विद्युत ऊर्जा

5. एक विद्यार्थी को एक लिफ्ट द्वारा धीरे-धीरे भूतल से भवन के सबसे ऊपरी तल तक ले जाया जाता है, तत्पश्चात वही विद्यार्थी सीढ़ियों से चढ़कर सबसे ऊपरी तल तक पहुँचता है। यदि भवन की ऊँचाई h = 72.5 m, गुरुत्वीय त्वरण g = 10 m s⁻² और विद्यार्थी का द्रव्यमान m = 50 kg है तो –

(i) यदि विद्यार्थी को लिफ्ट द्वारा सीधे सबसे ऊपरी तल तक ले जाया जाता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में हुई वृद्धि ज्ञात कीजिए।
(ii) जब विद्यार्थी सीढ़ियों से चढ़कर सबसे ऊपरी तल पर पहुँचता है तो उसकी स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि ज्ञात कीजिए।
(iii) आप तय किए रास्ते पर स्थितिज ऊर्जा की निर्भरता के संबंध में क्या निष्कर्ष निकालेंगे?
उत्तर देखें(i) स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि = mgh = 50 × 10 × 72.5 = 36250 J
(ii) सीढ़ियों से चढ़ने पर भी स्थितिज ऊर्जा में वृद्धि समान होगी = 36250 J (क्योंकि ऊँचाई समान है)
(iii) स्थितिज ऊर्जा केवल आरंभिक और अंतिम ऊँचाई पर निर्भर करती है, तय किए गए रास्ते पर निर्भर नहीं करती।

6. एक क्रेन m द्रव्यमान को एक निश्चित समय में किसी भवन के 10वें तल तक उठाती है। इसके पश्चात यह उसी द्रव्यमान को उसी भवन के 20वें तल तक दोगुने समय में उठाती है। इसके लिए उसे कितनी और अधिक ऊर्जा एवं शक्ति चाहिए? यह मान लीजिए कि सभी तलों की ऊँचाई समान है।

उत्तर देखेंचूँकि सभी तलों की ऊँचाई समान है, 20वें तल तक द्रव्यमान m को उठाने में ऊँचाई और अतः आवश्यक ऊर्जा 10वें तल की तुलना में दोगुनी होगी — अर्थात एक गुना अधिक ऊर्जा चाहिए। परंतु समय भी दोगुना लगता है (P = W/t), इसलिए आवश्यक शक्ति में कोई वृद्धि नहीं होगी — शक्ति समान ही रहेगी (क्योंकि कार्य और समय दोनों दोगुने हो जाते हैं)।

7. घिरनी की सहायता से किसी झंडे को भूमि से एक ऊँचे ध्वजदंड के शीर्ष तक उठाने के लिए आवश्यक ऊर्जा किन कारकों पर निर्भर करती है? क्या झंडे को धीरे-धीरे या शीघ्रता से ऊपर उठाने पर किए गए कार्य के परिमाण में अंतर होगा? यदि झंडे को उठाने की गति दोगुनी कर दी जाए तो शक्ति की आवश्यकता किस प्रकार परिवर्तित होगी? अपने उत्तरों की व्याख्या कीजिए।

उत्तर देखेंआवश्यक ऊर्जा केवल झंडे के भार (mg) और उसे उठाई गई ऊँचाई (h) पर निर्भर करती है (ऊर्जा = mgh); गति की दर पर निर्भर नहीं करती। अतः धीरे-धीरे या शीघ्रता से उठाने पर किए गए कार्य के परिमाण में कोई अंतर नहीं होगा। परंतु गति दोगुनी करने पर समय आधा हो जाएगा, इसलिए आवश्यक शक्ति (P = W/t) दोगुनी हो जाएगी।

8. 60 kg द्रव्यमान का कोई व्यक्ति 100 kg के स्कूटर पर सवारी करता है, वह स्कूटर को v वेग तक त्वरित करता है। दूसरे दिन उसका 40 kg द्रव्यमान का पुत्र उसके साथ यात्री के रूप में बैठता है, यदि उक्त दोनों दिनों में स्कूटर समान समय में समान चाल प्राप्त करता है। तो बताइए दोनों दिनों में उपयोग किए गए ईंधन का अनुपात कितना होगा? यह मान लीजिए कि स्कूटर में ऊर्जा का स्थानांतरण पूर्णतया ईंधन के कारण होता है और वायु प्रतिरोध या घर्षण के कारण कोई अन्य हानि नहीं होती है।

उत्तर देखेंपहले दिन: कुल द्रव्यमान = 60 + 100 = 160 kg
दूसरे दिन: कुल द्रव्यमान = 60 + 100 + 40 = 200 kg
समान समय में समान वेग v प्राप्त करने के लिए ऊर्जा = गतिज ऊर्जा (1/2)mv²
अनुपात = द्रव्यमानों का अनुपात = 160 : 200 = 4 : 5

9. सरकने वाली कुर्सियों वाले सी-सॉ प्रकार के एक झूले पर एक तरफ एक बच्चा बैठा है और दूसरी ओर एक वयस्क। वयस्क का भार बच्चे के भार से दोगुना है। इसके पश्चात भी सी-सॉ संतुलित है। ऐसी स्थिति को दर्शाता हुआ एक चित्र बनाइए जिसमें आलंब से बच्चे और वयस्क की दूरी दर्शाई गई हों।

उत्तर देखेंचूँकि वयस्क का भार बच्चे के भार से दोगुना है (मान लीजिए बच्चे का भार = W, वयस्क का भार = 2W), संतुलन के लिए भार × भुजा समान होनी चाहिए:
W × L₁ = 2W × L₂
⇒ L₁ = 2L₂
अर्थात बच्चे की आलंब से दूरी, वयस्क की आलंब से दूरी की दोगुनी होनी चाहिए।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 अभ्यास प्रश्न 9 के उत्तर का चित्र

10. एक गेंद को 20 m s⁻¹ की गति से ऊपर की ओर फेंका जाता है।

(i) गेंद की ऊपर की ओर गति और नीचे की ओर गति के समय इस पर गुरुत्व के अधीन किए गए कार्य के चिह्न की पहचान कीजिए।
(ii) यदि गेंद 19.4 m की ऊँचाई तक पहुँचती है तो वायु प्रतिरोध द्वारा कितना कार्य किया जाता है? (मान लीजिए g = 10 m s⁻²)
उत्तर देखें(i) ऊपर जाते समय — गुरुत्व बल विस्थापन की विपरीत दिशा में कार्य करता है → कार्य ऋणात्मक।
नीचे आते समय — गुरुत्व बल विस्थापन की दिशा में कार्य करता है → कार्य धनात्मक।
(ii) प्रारंभिक गतिज ऊर्जा = (1/2)mv² (यहाँ द्रव्यमान अज्ञात है, इसलिए प्रति kg गणना करते हैं)
प्रारंभिक वेग = 20 m/s, u² = 400 m²/s²
यदि केवल गुरुत्व कार्य करे तो अधिकतम ऊँचाई h = u²/2g = 400/20 = 20 m
परंतु वास्तविक ऊँचाई = 19.4 m
ऊर्जा हानि (प्रति kg) = g(h_अधिकतम − h_वास्तविक) = 10 × (20 − 19.4) = 6 J/kg
अतः वायु प्रतिरोध द्वारा किया गया कार्य = −6m J (जहाँ m द्रव्यमान kg में है; प्रति किलोग्राम −6 J)

11. एक 10.0 kg का गुटका नगण्य घर्षण वाले क्षैतिज फर्श पर गतिमान है। चित्र 7.37 में दर्शाए अनुसार गुटके पर उसकी गति की दिशा में 0 m से 4 m तक के विस्थापन के समय अंतराल में एक परिवर्ती बल (variable force) लगाया जाता है। यदि गुटके की 0 m की स्थिति पर गतिज ऊर्जा 180 J थी तो गुटके की चाल ज्ञात कीजिए। (i) 0 m पर और (ii) 4 m पर क्या गुटके की गति के किसी भाग में गुटके का त्वरण ऋणात्मक है?

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 अभ्यास प्रश्न 11 का चित्र

उत्तर देखेंदिया है: प्रारंभिक गतिज ऊर्जा (0 m पर) = 180 J
(i) 0 m पर चाल: (1/2)mv² = 180
⇒ v² = 360/10 = 36
⇒ v = 6 m/s
ग्राफ से (चित्र 7.37): 0 m से 1 m तक बल 0 से 50 N तक बढ़ता है, 1 m से 3 m तक बल स्थिर 50 N रहता है, 3 m से 4 m तक बल 50 N से 0 तक घटता है।
कार्य = बल-विस्थापन ग्राफ के अंतर्गत क्षेत्रफल
= (1/2×1×50) + (2×50) + (1/2×1×50)
= 25 + 100 + 25
= 150 J
(ii) 4 m पर गतिज ऊर्जा = 180 + 150 = 330 J
330 = (1/2)(10)v²
⇒ v² = 66
⇒ v ≈ 8.12 m/s
चूँकि बल सदैव धनात्मक दिशा में कार्य करता है (गति की दिशा में), अतः वेग निरंतर बढ़ता है और गति के किसी भी भाग में त्वरण ऋणात्मक नहीं होता।

12. चंद्रमा की सतह (चंद्रतल) पर गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी की सतह के गुरुत्वाकर्षण का लगभग 1/6 भाग है। एक अंतरिक्ष यात्री पृथ्वी की सतह से किसी गेंद को 8 m की ऊँचाई तक फेंक सकता है। यदि उसी गेंद को उतने ही ऊर्ध्व वेग से चंद्रमा की सतह से ऊपर की ओर फेंका जाए तो गेंद चंद्रमा की सतह पर कितनी ऊँचाई तक जाएगी?

उत्तर देखेंपृथ्वी पर: h_पृथ्वी = u²/2g = 8 m
चंद्रमा पर गुरुत्वाकर्षण = g/6
समान u के लिए, ऊँचाई गुरुत्वाकर्षण के व्युत्क्रमानुपाती होती है:
h_चंद्रमा = u²/(2×g/6) = 6 × h_पृथ्वी = 6 × 8 = 48 m

13. एक 1000 kg द्रव्यमान की एक कार सड़क पर नियत चाल से गतिमान है। अचानक चालक को आगे कोई बाधा दिखाई देती है। वह कार को पूरी तरह रोकने के लिए ब्रेक लगाता है। चालक द्वारा आगे बाधा को देखने के क्षण से कार की गति का आलेखी निरूपण चित्र 7.38 में दर्शाया गया है।

(i) बताइए कि स्थिति A और B के बीच कार की गति किस प्रकार की है?
(ii) स्थिति A पर कार की गतिज ऊर्जा का परिकलन कीजिए।
(iii) बताइए कि B और C के बीच कार को रोकने के लिए ब्रेक द्वारा कितना कार्य करना होगा?
(iv) कार की गतिज ऊर्जा किस ऊर्जा में परिवर्तित हो जाती है?

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 अभ्यास प्रश्न 13 का चित्र

उत्तर देखें(i) A और B के बीच कार नियत चाल (एकसमान वेग) से गतिमान है (चालक की प्रतिक्रिया समय के दौरान, ब्रेक अभी नहीं लगा)।
(ii) स्थिति A पर चाल = 35 m/s (ग्राफ से)
गतिज ऊर्जा = (1/2)(1000)(35)² = (1/2)(1000)(1225) = 612500 J
(iii) B और C के बीच कार रुक जाती है (चाल 0 हो जाती है), अतः ब्रेक द्वारा किया गया कार्य = अंतिम गतिज ऊर्जा − प्रारंभिक (B पर) गतिज ऊर्जा = 0 − 612500 = −612500 J (ऋणात्मक कार्य, परिमाण 612500 J)
(iv) कार की गतिज ऊर्जा ऊष्मीय ऊर्जा (एवं ध्वनि ऊर्जा) में परिवर्तित हो जाती है (ब्रेक और सड़क के घर्षण के कारण)।

14. एक घर्षण रहित (frictionless) पथ पर गतिमान 0.5 kg गेंद का स्थितिज ऊर्जा-विस्थापन ग्राफ चित्र 7.39 में दर्शाया गया है। बिंदु O पर गेंद का वेग 0 m s⁻¹ और स्थितिज ऊर्जा 30 J है। P, Q और R पर बल के वेग की गणना कीजिए।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 अभ्यास प्रश्न 14 का चित्र

उत्तर देखेंदिया है: बिंदु O पर वेग = 0, स्थितिज ऊर्जा = 30 J
चूँकि पथ घर्षण रहित है, कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत रहेगी = 30 + 0 = 30 J (सभी बिंदुओं पर)
ग्राफ से (चित्र 7.39):
P पर स्थितिज ऊर्जा ≈ 20 J
⇒ गतिज ऊर्जा = 30 − 20 = 10 J
(1/2)(0.5)v² = 10
⇒ v² = 40
⇒ v ≈ 6.32 m/s
Q पर स्थितिज ऊर्जा ≈ 30 J
⇒ गतिज ऊर्जा = 30 − 30 = 0 J
⇒ v = 0 m/s
R पर स्थितिज ऊर्जा ≈ 40 J — यह कुल यांत्रिक ऊर्जा (30 J) से अधिक है, अतः गेंद वहाँ तक नहीं पहुँच सकती (गतिज ऊर्जा ऋणात्मक नहीं हो सकती); गेंद R तक नहीं पहुँचती, अतः वहाँ वेग परिभाषित नहीं है।

15. 1.5 kg द्रव्यमान का एक नारियल, 10 m ऊँचाई वाले एक नारियल के वृक्ष के शिखर से समुद्र तट की गीली रेत पर गिरता है। तट से टकराने पर नारियल रेत में एक गड्ढा बनाकर स्थिर हो जाता है।

(i) रेत से टकराने से ठीक पहले नारियल के वेग की गणना कीजिए।
(ii) मान लीजिए कि रेत का औसत प्रतिरोधी बल 3000 N है और नारियल की संपूर्ण ऊर्जा का उपयोग रेत में गड्ढा बनाने में किया गया है। नारियल द्वारा रेत में बनाए गए गड्ढे की गहराई का परिकलन कीजिए (g = 10 m s⁻² लीजिए)।
उत्तर देखें(i) रेत से टकराने से पहले वेग:
v² = u² + 2gh = 0 + 2×10×10 = 200
v = √200 ≈ 14.14 m/s
(ii) नारियल की कुल गतिज ऊर्जा टकराने के समय = (1/2)(1.5)(200) = 150 J
रेत का प्रतिरोधी बल कार्य करता है: कार्य = बल × गहराई (d)
घर्षण द्वारा किया गया कार्य = नारियल की गतिज ऊर्जा (कार्य-ऊर्जा प्रमेय से)
3000 × d = 150
d = 150/3000 = 0.05 m = 5 cm

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 से परीक्षा के लिए प्रश्न उत्तर

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 7 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

1. कार्य का SI मात्रक क्या है और इसे कैसे परिभाषित किया जाता है?
उत्तर देखेंकार्य का SI मात्रक जूल (J) है। यदि 1 न्यूटन बल लगाने पर वस्तु बल की दिशा में 1 मीटर विस्थापित हो, तो 1 जूल कार्य संपन्न होता है।

2. गतिज ऊर्जा का सूत्र लिखिए।
उत्तर देखेंगतिज ऊर्जा का सूत्र K = ½mv² है, जहाँ m वस्तु का द्रव्यमान और v उसका वेग दर्शाता है।

3. गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र क्या है?
उत्तर देखेंगुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा का सूत्र U = mgh है, जहाँ h वस्तु की पृथ्वी की सतह से ऊँचाई है।

4. शक्ति की परिभाषा दीजिए।
उत्तर देखेंशक्ति को कार्य करने की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है; गणितीय रूप से P = W/t होता है।

5. शक्ति का SI मात्रक क्या है?
उत्तर देखेंशक्ति का SI मात्रक वाट (W) है। एक वाट शक्ति 1 जूल कार्य प्रति सेकंड के बराबर होती है (1 W = 1 J s⁻¹)।

6. कार्य कब शून्य होता है, इसके दो कारण बताइए।
उत्तर देखेंकार्य शून्य होता है जब वस्तु पर लगने वाला बल शून्य हो (F=0) या जब बल लगने पर भी विस्थापन शून्य हो (s=0)।

7. यांत्रिक ऊर्जा किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंकिसी वस्तु की गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा के योग को उसकी यांत्रिक ऊर्जा कहते हैं।

8. घिरनी किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंघिरनी एक पहिया होता है जिसमें खाँचा बना होता है जो रस्सी को दिशा देता है और आयास की दिशा बदलने में सहायक है।

9. यांत्रिक लाभ का सूत्र लिखिए।
उत्तर देखेंयांत्रिक लाभ = भार/आयास होता है; यह बताता है कि मशीन द्वारा बल के परिमाण में कैसा परिवर्तन किया जाता है।

10. उत्तोलक के तीन मुख्य भाग कौन-कौन से हैं?
उत्तर देखेंउत्तोलक के तीन मुख्य भाग हैं – आलंब, भार और आयास, जो कार्य को सरल बनाते हैं।

11. आनत तल का यांत्रिक लाभ 1 से अधिक क्यों होता है?
उत्तर देखेंआनत तल में लंबाई (L), ऊँचाई (h) से अधिक होने के कारण आवश्यक बल कम हो जाता है, जिससे यांत्रिक लाभ 1 से अधिक होता है।

12. कार्य-ऊर्जा प्रमेय का कथन लिखिए।
उत्तर देखेंवस्तु पर किया गया कार्य = वस्तु की ऊर्जा में परिवर्तन। यह प्रमेय निकाय के लिए भी और परिवर्ती बल के लिए भी लागू होता है।

13. 1 न्यूटन बल किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंवह बल जो 1 kg द्रव्यमान की वस्तु में 1 m s⁻² का त्वरण उत्पन्न करता है, उसे 1 न्यूटन बल कहते हैं।

14. नींबू निष्कर्षणी और सी-सॉ झूला किस श्रेणी के उत्तोलक हैं?
उत्तर देखेंनींबू निष्कर्षणी द्वितीय श्रेणी का उत्तोलक है, जबकि सी-सॉ प्रकार का झूला प्रथम श्रेणी का उत्तोलक होता है।

15. 1 अश्वशक्ति कितने वाट के बराबर होती है?
उत्तर देखें1 अश्वशक्ति लगभग 746 वाट के बराबर होती है; इसका उपयोग विशेष रूप से कार के इंजन की शक्ति मापने में होता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 7 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

1. क्रिकेट की गेंद और गमले के उदाहरण से ऊर्जावान वस्तु की अवधारणा समझाइए।
उत्तर देखेंजब क्षेत्ररक्षक गेंद को विकेट की ओर फेंकता है, तो गतिशील गेंद विकेट से टकराकर उसे गिरा देती है। इसी प्रकार ऊँचाई से गिरता गमला उस वस्तु को क्षतिग्रस्त कर देता है जिस पर वह गिरता है। इन दोनों प्रकरणों में वस्तु में कार्य करने की क्षमता होती है, अतः इन्हें ऊर्जावान वस्तु कहा जाता है।

2. गोलरक्षक द्वारा फुटबॉल रोकने में किया गया कार्य ऋणात्मक क्यों होता है?
उत्तर देखेंजब गोलरक्षक फुटबॉल की गति की विपरीत दिशा में बल लगाता है, तो बल और विस्थापन विपरीत दिशाओं में होने के कारण बल द्वारा किया गया कार्य ऋणात्मक होता है। इससे फुटबॉल की गतिज ऊर्जा कम हो जाती है, जबकि न्यूटन के तृतीय नियमानुसार फुटबॉल गोलरक्षक पर धनात्मक कार्य करती है।

3. दीवार को धकेलने में वैज्ञानिक दृष्टिकोण से कार्य शून्य क्यों होता है, फिर भी थकान क्यों होती है?
उत्तर देखेंयदि दृढ़ दीवार पर बल लगाने पर भी वह विस्थापित नहीं होती, तो विस्थापन शून्य होने के कारण किया गया कार्य वैज्ञानिक दृष्टिकोण से शून्य होता है। थकान का अनुभव शरीर की मांसपेशियों के निरंतर सिकुड़न-फैलाव में आंतरिक ऊर्जा के व्यय होने के कारण होता है, जो वैज्ञानिक कार्य से भिन्न है।

4. सरल लोलक के प्रयोग से यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण नियम कैसे सिद्ध होता है?
उत्तर देखेंजब लोलक के गोलक को बिंदु P तक ले जाकर छोड़ा जाता है, तो वहाँ उसकी संपूर्ण ऊर्जा स्थितिज होती है। मध्य बिंदु Q पर स्थितिज ऊर्जा शून्य होकर संपूर्ण ऊर्जा गतिज हो जाती है, तथा अंत में बिंदु R पर वह लगभग उसी ऊँचाई तक पहुँचता है। इस प्रकार लोलक की कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत बनी रहती है।

5. चल घिरनी निकाय का यांत्रिक लाभ 1 से अधिक क्यों होता है?
उत्तर देखेंचल घिरनी निकाय में भार को चलायमान घिरनी से बाँधा जाता है, जबकि रस्सी का एक सिरा स्थिर बिंदु से बँधा रहता है और दूसरा सिरा आयास लगाने के लिए स्वतंत्र रहता है। इस व्यवस्था के कारण हम कम आयास से बहुत अधिक भार उठा सकते हैं, जिससे यांत्रिक लाभ 1 से अधिक हो जाता है।

6. आनत तल के झुकाव कोण को कम करने पर आवश्यक बल में क्या परिवर्तन आता है?
उत्तर देखेंक्रियाकलाप 7.3 से पता चलता है कि जैसे-जैसे आनत तल का झुकाव कोण कम होता जाता है, वैसे-वैसे किसी वस्तु को समान ऊँचाई तक खींचने के लिए आवश्यक बल भी कम होता जाता है। तथापि, उतनी ही ऊँचाई तक पहुँचाने के लिए यह बल अधिक दूरी तक लगाना पड़ता है।

7. उत्तोलक किसी कार्य को करने में आवश्यक बल को कैसे कम करता है?
उत्तर देखेंउत्तोलक का वह सिरा जहाँ कम बल (F₁) लगाया जाता है, वह अधिक दूरी (d₁) तक विस्थापित होता है, जबकि भारी वस्तु को उठाने वाला सिरा जिस पर अधिक बल (F₂) चाहिए, वह कम दूरी (d₂) तक विस्थापित होता है। इस प्रकार F₁ × d₁ = F₂ × d₂ के सिद्धांत से बल कम करना संभव होता है।

8. बचाव ढलान किस सिद्धांत पर कार्य करता है?
उत्तर देखेंबचाव ढलान रेत या बजरी से भरे आनत पथ होते हैं जो ब्रेक फेल हो जाने पर वाहनों को रोकने में सहायक होते हैं। जब वाहन ढलान पर चढ़ता है, तो कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार उसकी गतिज ऊर्जा रेत के प्रतिरोधी बल के विरुद्ध कार्य में परिवर्तित होकर धीरे-धीरे शून्य हो जाती है, जिससे वाहन रुक जाता है।

9. पनचक्की (घराट) में ऊर्जा का रूपांतरण किस प्रकार होता है?
उत्तर देखेंपहाड़ी क्षेत्रों में ऊपर स्थित जल में स्थितिज ऊर्जा होती है। पाइप से नीचे आते समय यह स्थितिज ऊर्जा गतिज ऊर्जा में परिवर्तित होती जाती है। जल की गतिज ऊर्जा पहिए को घुमाती है, जो ऊपर स्थित चक्की के पत्थर से जुड़ा होता है और अनाज पीसने का कार्य करता है।

10. गतिज ऊर्जा और स्थितिज ऊर्जा में मुख्य अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंकिसी वस्तु की गति के कारण उसमें विद्यमान ऊर्जा को गतिज ऊर्जा कहते हैं (जैसे चलती साइकिल), जबकि किसी वस्तु के विरूपण अथवा वस्तुओं के निकाय में उनकी सापेक्ष स्थिति के कारण संचित ऊर्जा को स्थितिज ऊर्जा कहते हैं (जैसे ऊँचाई पर रखी गेंद या तनी हुई स्प्रिंग)।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 7 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

1. कार्य-ऊर्जा प्रमेय की सहायता से गतिज ऊर्जा का व्यंजक (K = ½mv²) व्युत्पन्न कीजिए।
उत्तर देखेंमान लीजिए m द्रव्यमान की कोई वस्तु प्रारंभिक वेग u से चलकर s विस्थापन के पश्चात अंतिम वेग v प्राप्त करती है। गति के समीकरण v² = u² + 2as से s = (v²-u²)/2a प्राप्त होता है। न्यूटन के द्वितीय नियम F = ma के अनुसार किया गया कार्य W = ma × s = ma × (v²-u²)/2a = ½m(v²-u²) होता है। यदि प्रारंभिक वेग u = 0 हो, तो कार्य-ऊर्जा प्रमेय के अनुसार यह कार्य ही वस्तु की अंतिम गतिज ऊर्जा के बराबर होगा, अतः K = ½mv² प्राप्त होता है, जो m द्रव्यमान की v वेग से गतिमान वस्तु की गतिज ऊर्जा है।

2. यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण के नियम को गुरुत्वीय बल क्षेत्र में स्वतंत्रतापूर्वक गिरती हुई वस्तु के उदाहरण से सिद्ध कीजिए।
उत्तर देखेंमान लीजिए m द्रव्यमान की वस्तु h ऊँचाई पर स्थित बिंदु A से छोड़ी जाती है। बिंदु A पर स्थितिज ऊर्जा mgh, गतिज ऊर्जा शून्य, और कुल यांत्रिक ऊर्जा mgh होगी। t समय पश्चात वस्तु h’ ऊँचाई पर स्थित बिंदु B तक पहुँचती है, जहाँ उसका वेग v = gt होता है। शुद्ध गतिक समीकरणों से h’ = h – ½gt² प्राप्त होता है, अतः बिंदु B पर स्थितिज ऊर्जा = mgh – ½mg²t² और गतिज ऊर्जा = ½mg²t² होगी। दोनों को जोड़ने पर यांत्रिक ऊर्जा पुनः mgh प्राप्त होती है, जो सिद्ध करता है कि गिरती वस्तु की कुल यांत्रिक ऊर्जा नियत बनी रहती है, यद्यपि स्थितिज और गतिज ऊर्जा में परस्पर परिवर्तन होता रहता है।

3. आनत तल के यांत्रिक लाभ की गणना कार्य-ऊर्जा प्रमेय के आधार पर कीजिए और स्पष्ट कीजिए कि यह भार उठाने में किस प्रकार सहायक है।
उत्तर देखेंमान लीजिए m द्रव्यमान की वस्तु को h ऊँचाई तक उठाने के लिए आनत तल की लंबाई L है और आवश्यक आयास F’ है। वस्तु को आनत तल पर नियत चाल से ऊपर ले जाने पर किया गया कुल कार्य = F’ × L होगा, और वस्तु द्वारा अर्जित स्थितिज ऊर्जा mgh होगी। घर्षण की उपेक्षा करते हुए कार्य-ऊर्जा प्रमेय से F’ × L = mgh, अर्थात यांत्रिक लाभ = भार/आयास = mg/F’ = L/h प्राप्त होता है। चूँकि L का मान h से अधिक होता है, इसलिए F’ का मान mg से कम होता है और यांत्रिक लाभ 1 से अधिक होता है। इसी कारण झुकाव कोण कम करके लंबाई बढ़ाने पर भारी वस्तु को कम बल से ऊपर चढ़ाया जा सकता है, जैसा पहाड़ी सड़कों और आनत सीढ़ियों में देखा जाता है।

4. उत्तोलकों को उनकी तीन श्रेणियों में वर्गीकृत करते हुए प्रत्येक का एक-एक उदाहरण दीजिए और यांत्रिक लाभ के सूत्र की व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखेंउत्तोलक तीन प्रकार के होते हैं — प्रथम श्रेणी में आलंब बीच में होता है (जैसे संडासी, कैंची, दंड-तुला); द्वितीय श्रेणी में भार बीच में होता है (जैसे नींबू निष्कर्षणी, बोतल खोलने की मशीन, हथठेला); तृतीय श्रेणी में आयास बीच में होता है (जैसे चिमटा, झाड़ू, हथौड़ी, चिमटी)। दंड-तुला के क्रियाकलाप से यह सिद्ध होता है कि दंड क्षैतिज रहता है जब आयास × आयास भुजा = भार × भार भुजा (n₁×L₁ = n₂×L₂)। इससे यांत्रिक लाभ = भार/आयास = आयास भुजा/भार भुजा प्राप्त होता है, जिससे आयास भुजा बढ़ाकर कम बल से अधिक भार उठाया जा सकता है, यद्यपि उसे अधिक दूरी तय करनी पड़ती है ताकि कुल किया गया कार्य समान रहे।

5. शक्ति की अवधारणा को उदाहरण सहित समझाइए और इसका SI मात्रक बताते हुए किसी संख्यात्मक उदाहरण से इसकी गणना कीजिए।
उत्तर देखेंशक्ति को कार्य करने की दर के रूप में परिभाषित किया जाता है, गणितीय रूप से P = W/t। समान कार्य को कम समय में करने के लिए अधिक शक्ति की आवश्यकता होती है — जैसे सीढ़ियों पर दौड़कर चढ़ना और धीरे-धीरे चलकर चढ़ना दोनों में समान कार्य होता है, परंतु समय भिन्न होने से शक्ति भिन्न-भिन्न होती है। शक्ति का SI मात्रक वाट (W) है, जहाँ 1 W = 1 J s⁻¹। उदाहरण के लिए, यदि कोई भारोत्तोलक 5 सेकंड में 75 kg द्रव्यमान को 2 m ऊपर उठाता है, तो किया गया कार्य mgh = 75 × 10 × 2 = 1500 J होगा, और आवश्यक शक्ति = 1500J/5s = 300 W होगी। इस प्रकार शक्ति हमें बताती है कि कोई कार्य कितनी तीव्रता से किया जा रहा है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 “कार्य, ऊर्जा एवं सरल मशीनें” में किन-किन प्रमुख अवधारणाओं को कवर किया गया है?

इस अध्याय में कार्य की वैज्ञानिक परिभाषा (W = F × s), धनात्मक-ऋणात्मक-शून्य कार्य, कार्य-ऊर्जा प्रमेय, गतिज ऊर्जा (K = ½mv²), गुरुत्वीय स्थितिज ऊर्जा (U = mgh), यांत्रिक ऊर्जा संरक्षण का नियम, शक्ति (P = W/t) और तीन सरल मशीनों — घिरनी, आनत तल तथा उत्तोलक — का अध्ययन कराया गया है। साथ ही यांत्रिक लाभ की गणना और विभिन्न श्रेणी के उत्तोलकों का वर्गीकरण भी शामिल है, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है।

सरल मशीनें क्या होती हैं और उनके कौन-कौन से मुख्य प्रकार कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 में पढ़ाए गए हैं?

सरल मशीनें वे उपकरण हैं जो किसी कार्य को करने में आवश्यक बल के परिमाण या दिशा को बदलकर कार्य को सुगम बनाती हैं, यद्यपि वे कुल किए गए कार्य के परिमाण को परिवर्तित नहीं करतीं। इस अध्याय में तीन सरल मशीनों — घिरनी (जो बल की दिशा बदलती है), आनत तल (जो भारी वस्तुओं को कम बल से ऊपर चढ़ाने में सहायक है), और उत्तोलक (जो आलंब, भार व आयास के आधार पर तीन श्रेणियों में विभाजित है) — का विस्तृत अध्ययन कराया गया है।

छात्रों को कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 के संख्यात्मक प्रश्न हल करने में सबसे ज्यादा कठिनाई कहाँ होती है?

छात्रों को सामान्यतः कार्य-ऊर्जा प्रमेय आधारित प्रश्नों (जैसे ट्रक रोकना, बचाव ढलान), गतिज व स्थितिज ऊर्जा के परस्पर रूपांतरण वाले ग्राफ-आधारित प्रश्नों, तथा उत्तोलक व आनत तल के यांत्रिक लाभ की गणना में सबसे अधिक कठिनाई होती है। इसके अलावा धनात्मक-ऋणात्मक कार्य की दिशा को सही ढंग से पहचानना भी चुनौतीपूर्ण रहता है। सुझाव है कि छात्र प्रत्येक उदाहरण को चरणबद्ध तरीके से हल करने का अभ्यास करें।

क्या कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 7 सत्र 2026-27 के नए एनसीईआरटी पाठ्यक्रम “अन्वेषण” के अनुसार अद्यतन है और आगामी कक्षाओं के लिए कितना महत्वपूर्ण है?

हाँ, यह अध्याय एनसीईआरटी द्वारा सत्र 2026-27 के लिए जारी नई पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” का भाग है, जिसमें “आइए और चिंतन करें”, “विज्ञान एवं समाज”, तथा “क्या होगा यदि…” जैसे नए और रोचक खंड शामिल किए गए हैं। यह अध्याय कक्षा 11 भौतिकी के अध्याय की सीधी नींव है, इसलिए इसकी ठोस समझ विद्यार्थियों के लिए दीर्घकालिक दृष्टि से अत्यंत लाभदायक सिद्ध होती है।