एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण – अभ्यास के प्रश्न उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नों के हल यहाँ से मुफ्त में प्राप्त किए जा सकते हैं। सत्र 2026-27 से लागू एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” (कक्षा 9 विज्ञान) का पाँचवाँ अध्याय “मिश्रण एवं उनके पृथक्करण का अन्वेषण” रसायन विज्ञान की एक महत्वपूर्ण कड़ी है, जिसमें विद्यार्थी समांगी व विषमांगी मिश्रणों, विलयन, निलंबन और कोलॉइड जैसी अवधारणाओं को गहराई से समझते हैं। इस अध्याय में विलयन की सांद्रता को व्यक्त करने की तीन विधियाँ (द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत, द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत, आयतन-आयतन प्रतिशत), विलेयता और विलेयता वक्र, तथा समांगी मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ जैसे क्रिस्टलीकरण, आसवन और कागज वर्णलेखिकी पढ़ाई जाती हैं। साथ ही विषमांगी मिश्रणों के पृथक्करण की विधियाँ – पृथक्कारी कीप, ऊर्ध्वपातन, अपकेंद्रण और स्कंदन तथा टिंडल प्रभाव जैसे व्यावहारिक विषयों को भी सरल भाषा में समझाया गया है। चीनी उत्पादन, इत्र निर्माण (कन्नौज की देग-भापका विधि), पेट्रोलियम शोधन और रक्तदान जैसे भारतीय व दैनिक जीवन के उदाहरणों के माध्यम से यह अध्याय विज्ञान को व्यावहारिक रूप से जोड़ता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 5 अभ्यास प्रश्न उत्तर

एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 समाधान

1. निम्नलिखित मिश्रणों में से कौन-से मिश्रण सही रूप से समांगी और विषमांगी मिश्रणों के रूप में वर्गीकृत किए गए हैं? सही विकल्प चुनिए।

(i) वायु — समांगी, दुग्ध — विषमांगी, चीनी का विलयन — समांगी, धुआँ — समांगी
(ii) पीतल — विषमांगी, कोहरा — विषमांगी, सिरका — विषमांगी, पंकिल जल — समांगी
(iii) कॉपर सल्फेट का विलयन — समांगी, नमक का विलयन — समांगी, दुग्ध — समांगी, काँसा — समांगी
(iv) पंकिल जल — विषमांगी, दुग्ध — विषमांगी, रक्त — विषमांगी, पीतल — समांगी
उत्तर देखें(iv) पंकिल जल — विषमांगी, दुग्ध — विषमांगी, रक्त — विषमांगी, पीतल — समांगी
(पीतल एक मिश्रधातु है जो समांगी मिश्रण है; पंकिल जल, दुग्ध और रक्त सभी विषमांगी/कोलॉइडी मिश्रण हैं)

2. सही विक ल्पों का चयन कीजिए तथा सही और गलत विकल्पों के कारण स्पष्ट कीजिए। निम्नलिखित में से कौन-से मिश्रण टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं?

(क) वायु और धूल के कणों का मिश्रण
(ख) कॉपर सल्फेट और जल का मिश्रण
(ग) स्टार्च और जल का मिश्रण
(घ) ऐसीटोन और जल का मिश्रण
(i) क और ख
(ii) ख और घ
(iii) क और ग
(iv) ग और घ
उत्तर देखें(iii) क और ग
(क) वायु और धूल के कणों का मिश्रण — यह एक निलंबन जैसा मिश्रण है, कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं → टिंडल प्रभाव दर्शाता है।
(ख) कॉपर सल्फेट और जल — यह एक सच्चा विलयन है (कण बहुत छोटे) → टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाता।
(ग) स्टार्च और जल — यह एक कोलॉइड है, कण प्रकाश को प्रकीर्णित करते हैं → टिंडल प्रभाव दर्शाता है।
(घ) ऐसीटोन और जल — दोनों मिश्रणीय द्रव हैं, यह एक सच्चा विलयन है → टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाता।

3. किसी मिश्रण को विलयन, निलंबन अथवा कोलॉइड के रूप में वर्गीकृत किया जा सकता है जिनमें से प्रत्येक के अपने विशिष्ट गुणधर्म होते हैं। बॉक्स में दिए गए शब्दों अथवा वाक्यांशों का उपयोग करके तालिका 5.2 को पूर्ण कीजिए। शब्दों और वाक्यांशों का एक से अधिक बार उपयोग किया जा सकता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. निम्नलिखित प्रश्नों को हल कीजिए –

(i) केक बनाने की किसी विधि में 420 g मैदा, 75 g चीनी और 5 g सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का उपयोग सूखी सामग्री के रूप में किया जाता है। उपयुक्त विधि के उपयोग द्वारा मिश्रण के प्रत्येक घटक की सांद्रता व्यक्त कीजिए।
(ii) किसी पीतल मिश्रधातु में द्रव्यमान के अनुसार 70% ताँबा (कॉपर) है। 120 g पीतल में उपस्थित कॉपर और जिंक की मात्रा परिकलित कीजिए।
उत्तर देखें(i) कुल मिश्रण = 420 + 75 + 5 = 500 g
• मैदा का द्रव्यमान-द्रव्यमान% = (420/500) × 100 = 84% m/m
• चीनी का द्रव्यमान-द्रव्यमान% = (75/500) × 100 = 15% m/m
• सोडियम हाइड्रोजनकार्बोनेट का % = (5/500) × 100 = 1% m/m
(ii) पीतल में कॉपर = 70%, अतः जिंक = 30%
• कॉपर की मात्रा = (70/100) × 120 g = 84 g
• जिंक की मात्रा = (30/100) × 120 g = 36 g

5. खाद्य तेल के किसी पैकेट पर एक लीटर (910 g) लिखा है। यदि इस तेल को जल के साथ मिश्रित किया जाए तो क्या यह अलग परत बनाएगा? यदि हाँ, तो कौन-सा पदार्थ ऊपर रहेगा? आप इन दो परतों को किस प्रकार पृथक करेंगे? प्रयुक्त उपकरण का चित्र भी बनाइए।

उत्तर देखेंहाँ, तेल और जल अलग परत बनाएँगे क्योंकि दोनों अमिश्रणीय द्रव हैं। तेल जल से हल्का (कम घनत्व वाला) होता है, इसलिए तेल ऊपर रहेगा और जल नीचे। इन्हें पृथक्कारी कीप द्वारा पृथक किया जा सकता है – नीचे का जल स्टॉपकॉक खोलकर निकाल लिया जाता है और तेल कीप में रह जाता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन – विलयन टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते हैं।
कारण – विलयन के कणों का आकार 100 nm से बड़ा होता है, अत: वे प्रकाश का प्रकीर्णन नहीं कर सकते।
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।
(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।
(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
उत्तर देखें(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या है।

7. तालिका 5.3 में दिए गए मिश्रणों को आप किस प्रकार पृथक करेंगे? अपनी चयनित विधि के कारण का भी उल्लेख कीजिए। यदि किसी मिश्रण को पृथक नहीं किया जा सकता है तो उसके कारण की व्याख्या कीजिए।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

8. किसी मिश्रण में दो मिश्रणीय द्रव ‘क’ तथा ‘ख’ उपस्थित हैं। ‘क’ का क्वथनांक 60°C तथा ‘ख’ का क्वथनांक 90°C है। इन्हें पृथक करने की विधि सुझाइए। सुझाई गई विधि का नामांकित चित्र भी बनाइए।

उत्तर:
द्रव ‘क’ (क्वथनांक 60°C) तथा द्रव ‘ख’ (क्वथनांक 90°C) को पृथक करने की विधि – सरल आसवन
यह विधि उन दो मिश्रणीय द्रवों को अलग करने के लिए उपयुक्त है जिनके क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर हो (यहाँ अंतर 30°C है)।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 8 के उत्तर का चित्र

विधि देखेंमिश्रण को आसवन फ्लास्क में लिया जाता है।
फ्लास्क को हीटर/बर्नर से गर्म किया जाता है।
द्रव ‘क’ (क्वथनांक 60°C) पहले वाष्पित होगा, क्योंकि उसका क्वथनांक कम है।
वाष्प ऊपर जाकर लीबिग संघनक में प्रवेश करता है, जहाँ ठंडे जल के कारण वाष्प संघनित होकर पुनः द्रव बन जाता है।
संघनित द्रव ‘क’ को अलग पात्र में एकत्र कर लिया जाता है।
जब द्रव ‘क’ पूरी तरह अलग हो जाता है, तब फ्लास्क में केवल द्रव ‘ख’ (क्वथनांक 90°C) शेष रह जाता है।

निष्कर्ष: इस प्रकार सरल आसवन द्वारा द्रव ‘क’ और ‘ख’ को पृथक किया जा सकता है।

9. वाष्पीकरण, क्रिस्टलीकरण और आसवन की तुलना कीजिए। आप किस स्थिति में एक विधि को दूसरी विधियों की अपेक्षा प्राथमिकता देंगे?

उत्तर देखेंवाष्पीकरण:
• किसी द्रव में घुले ठोस को पृथक करने के लिए उपयोग किया जाता है।
• विलायक नष्ट हो जाता है।
• उदाहरण: समुद्री जल से नमक प्राप्त करना।
• तब प्राथमिकता दी जाती है जब शुद्धता मुख्य चिंता का विषय न हो।
क्रिस्टलीकरण:
• विलयन से शुद्ध ठोस क्रिस्टल प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।
• अशुद्धियों को दूर करता है।
• उदाहरण: कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल।
• तब प्राथमिकता दी जाती है जब उच्च शुद्धता आवश्यक हो।
आसवन:
• द्रवों को पृथक करने या विलायक को पुनः प्राप्त करने के लिए उपयोग किया जाता है।
• क्वथनांकों में अंतर पर आधारित होता है।
• उदाहरण: जल और ऐसीटोन का पृथक्करण।
• तब प्राथमिकता दी जाती है जब विलेय और विलायक दोनों की आवश्यकता हो या द्रव-द्रव पृथक्करण करना हो।

10. रक्त कोलॉइडी मिश्रण का एक उदाहरण है। (i) क्या होगा यदि शरीर में रक्त एक शुद्ध निलंबन की भाँति व्यवहार करे? (ii) रक्त के किसी प्रतिदर्श में परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम की पहचान कीजिए।

उत्तर देखें(i) यदि रक्त एक शुद्ध निलंबन की भाँति व्यवहार करे, तो रक्त कोशिकाएँ रक्त वाहिकाओं में स्थिर रहने पर नीचे बैठ जाएँगी और रक्त प्रवाह असमान हो जाएगा, जिससे शरीर के विभिन्न भागों तक ऑक्सीजन व पोषक तत्वों का उचित परिवहन बाधित हो सकता है।
(ii) परिक्षिप्त प्रावस्था – रक्त कोशिकाएँ (लाल रक्त कोशिका, श्वेत रक्त कोशिका, प्लेटलेट); परिक्षेपण माध्यम – प्लाज्मा।

11. आपको रेत, साधारण नमक और नैफ्थलीन का एक मिश्रण दिया गया है (चित्र 5.25 क)। चित्र 5.25 ख इस मिश्रण के घटकों को पृथक करने के विभिन्न चरणों को दर्शा रहा है। पृथक्करण तकनीकों के सही क्रम की पहचान कीजिए और उन्हें लिखिए।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 11 का चित्र

उत्तर देखें1. छनन/चालन (हाथ से चयन नहीं, बल्कि प्रथम चरण) – सबसे पहले मिश्रण को गर्म कर नैफ्थलीन का ऊर्ध्वपातन (चित्र 1 – कीप उलटी करके गर्म करना) करके नैफ्थलीन को पृथक करते हैं।
2. शेष मिश्रण (रेत + नमक) को जल में घोलकर निस्यंदन (चित्र 2 – गर्म करना/घोलना और छानना) द्वारा अघुलनशील रेत को पृथक करते हैं।
3. निस्यंद (नमक का विलयन) को निस्यंदन द्वारा एकत्रित करना/वाष्पीकरण (चित्र 3 – कीप से छानकर बीकर में एकत्रित करना) कर नमक प्राप्त करते हैं।

12. जल और ऐसीटोन के मिश्रण को पृथक करने के लिए आसवन एक प्रभावी विधि क्यों है?

उत्तर देखेंजल (क्वथनांक 100°C) और ऐसीटोन (क्वथनांक 56°C) के क्वथनांकों में अंतर 44°C है, जो 25°C से अधिक है। इसलिए आसवन एक प्रभावी विधि है – गर्म करने पर पहले ऐसीटोन वाष्पित होकर संघनित हो जाता है और जल फ्लास्क में शेष रह जाता है, जिससे दोनों को शुद्ध रूप में पृथक किया जा सकता है।

13. तालिका 5.4 में दिए गए आँकड़ों की सहायता से निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 13 का चित्र

(i) 40°C पर 50 g जल में पोटैशियम नाइट्रेट का संतृप्त विलयन बनाने के लिए उसके कितने द्रव्यमान की आवश्यकता होगी?
(ii) एक विद्यार्थी 80°C पर पोटैशियम क्लोराइड का जल में संतृप्त विलयन बनाता है और विलयन को कक्ष के तापमान (25°C) पर ठंडा होने के लिए छोड़ देता है। जैसे-जैसे विलयन ठंडा होगा वह क्या अवलोकन करेगा? व्याख्या कीजिए।
(iii) लवणों की विलेयता पर तापमान के परिवर्तन का क्या प्रभाव पड़ता है? 10°C से 80°C तक तापमान में वृद्धि करने पर दिए गए चार लवणों की विलेयता में होने वाले परिवर्तनों की तुलना भी कीजिए।
उत्तर देखें(i) 40°C पर 100 g जल में पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता = 62 g
50 g जल के लिए आवश्यक मात्रा = (62/100) × 50 = 31 g
(ii) जैसे-जैसे विलयन 80°C से 25°C तक ठंडा होगा, पोटैशियम क्लोराइड की विलेयता घटती जाएगी (80°C पर 54 g से घटकर लगभग 35°C के आसपास)। चूँकि विलयन में विलेय की मात्रा नियत रहती है परंतु तापमान घटने पर विलेयता कम हो जाती है, अतिरिक्त पोटैशियम क्लोराइड विलयन में नहीं रह पाएगा और ठोस क्रिस्टल के रूप में पृथक (क्रिस्टलीकृत) हो जाएगा।
(iii) सामान्यतः तापमान बढ़ने से लवणों की विलेयता बढ़ती है। तुलना:
• पोटैशियम नाइट्रेट की विलेयता में सबसे अधिक वृद्धि होती है (21 से 167 g, अर्थात लगभग 146 g की वृद्धि)।
• पोटैशियम क्लोराइड और अमोनियम क्लोराइड में मध्यम वृद्धि होती है (क्रमशः 35→54 और 24→66 g)।
• सोडियम क्लोराइड की विलेयता में सबसे कम वृद्धि होती है (36 से 37 g, लगभग नगण्य वृद्धि)।

14. तीन विद्यार्थी ‘क’, ‘ख’ और ‘ग’ किसी प्रयोग के लिए चीनी का विलयन बना रहे हैं –

• विद्यार्थी ‘क’ 80 g जल में 20 g चीनी घोलता है।
• विद्यार्थी ‘ख’ 100 g जल में 20 g चीनी घोलता है।
• विद्यार्थी ‘ग’ 80 g जल में 30 g चीनी घोलता है।
(i) प्रत्येक विद्यार्थी द्वारा बनाए गए विलयन में चीनी की द्रव्यमान प्रतिशत (% m/m) सांद्रता का परिकलन कीजिए।
(ii) इनमें से किस विद्यार्थी का विलयन सबसे अधिक सांद्र है? कारण सहित व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखें(i) विद्यार्थी ‘क’: विलयन का द्रव्यमान = 80 + 20 = 100 g
द्रव्यमान% = (20/100) × 100 = 20% m/m
विद्यार्थी ‘ख’: विलयन का द्रव्यमान = 100 + 20 = 120 g
द्रव्यमान% = (20/120) × 100 = 16.67% m/m
विद्यार्थी ‘ग’: विलयन का द्रव्यमान = 80 + 30 = 110 g
द्रव्यमान% = (30/110) × 100 = 27.27% m/m
(ii) विद्यार्थी ‘ग’ का विलयन सबसे अधिक सांद्र है, क्योंकि उसके विलयन में चीनी की द्रव्यमान प्रतिशत सांद्रता (27.27%) सबसे अधिक है अर्थात प्रति ग्राम विलयन में सबसे अधिक चीनी घुली हुई है।

15. चित्र 5.26 को ध्यानपूर्वक देखिए –

(i) ‘स’ द्वारा चिह्नित पृथक्करण तकनीक की पहचान कीजिए।
(ii) उपकरण क, ख और ग को नामांकित कीजिए।
(iii) निम्नलिखित में से किन मिश्रणों को उपर्युक्त पहचानी गई तकनीक द्वारा पृथक किया जा सकता है? तालिका 5.5 के आँकड़ों का उपयोग कीजिए। मिश्रण हैं –
(क) जल— ऐसीटोन
(ख) जल—नमक
(ग) ऐसीटोन—ऐल्कोहॉल
(घ) रेत—नमक
(ङ) ऐल्कोहॉल—क्लोरोफॉर्म
(च) ऐल्कोहॉल—बेंजीन

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 अभ्यास प्रश्न 15 का चित्र

उत्तर देखें(i) ‘स’ द्वारा चिह्नित तकनीक — आसवन
(ii) उपकरण नामांकन:
क — आसवन फ्लास्क (जिसमें मिश्रण गर्म किया जाता है)
ख — संघनित्र
ग — संग्रहण फ्लास्क (शंक्वाकार फ्लास्क)
(iii) तालिका 5.5 के अनुसार, आसवन विधि तभी प्रभावी है जब घटकों के क्वथनांकों में पर्याप्त अंतर (सामान्यतः 25°C या अधिक) हो:
(क) जल (100°C) — ऐसीटोन (56°C): अंतर = 44°C → आसवन द्वारा पृथक किया जा सकता है
(ख) जल — नमक: यह ठोस-द्रव मिश्रण है, आसवन द्वारा जल प्राप्त किया जा सकता है (नमक पीछे रह जाएगा) → हाँ, पृथक किया जा सकता है
(ग) ऐसीटोन (56°C) — ऐल्कोहॉल (78°C): अंतर = 22°C → पृथक करना कठिन (अपर्याप्त अंतर)
(घ) रेत — नमक: यह दो ठोसों का मिश्रण है, आसवन विधि लागू नहीं होती → नहीं किया जा सकता
(ङ) ऐल्कोहॉल (78°C) — क्लोरोफॉर्म (61°C): अंतर = 17°C → पृथक करना कठिन (अपर्याप्त अंतर)
(च) ऐल्कोहॉल (78°C) — बेंजीन (80°C): अंतर = 2°C → पृथक करना कठिन (अपर्याप्त अंतर)

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 5 से परीक्षा के लिए प्रश्न उत्तर

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 5 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

1. समांगी मिश्रण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजिस मिश्रण का संघटन पूर्णतया एकसमान होता है, उसे समांगी मिश्रण कहते हैं, जैसे चीनी और जल का मिश्रण।

2. विषमांगी मिश्रण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजो मिश्रण एकरूप नहीं होता और जिसके कण स्पष्ट दिखाई देते हैं, उसे विषमांगी मिश्रण कहते हैं, जैसे जल और रेत का मिश्रण।

3. विलेय और विलायक में अंतर बताइए।
उत्तर देखेंविलेय वह पदार्थ है जो घुलता है, जबकि विलायक वह पदार्थ है जिसमें विलेय घुलता है। चीनी-जल के मिश्रण में चीनी विलेय है और जल विलायक है।

4. विलयन की सांद्रता किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंविलेय की वह मात्रा जो किसी विलायक अथवा विलयन की मात्रा में घुली होती है, विलयन की सांद्रता कहलाती है।

5. संतृप्त विलयन क्या है?
उत्तर देखेंवह विलयन जो किसी निश्चित तापमान पर और अधिक विलेय को नहीं घोल सकता, संतृप्त विलयन कहलाता है।

6. क्रिस्टलीकरण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंप्रयोगशाला में किसी संतृप्त विलयन से क्रिस्टल बनाने की प्रक्रिया को क्रिस्टलीकरण कहा जाता है।

7. आसवन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंदो मिश्रणीय द्रवों के समांगी मिश्रण को गर्म करके, कम क्वथनांक वाले द्रव को वाष्पित कर फिर ठंडा करके पृथक करने की प्रक्रिया आसवन कहलाती है।

8. ऊर्ध्वपातन क्या है?
उत्तर देखेंठोस पदार्थ का बिना द्रव अवस्था में परिवर्तित हुए सीधे वाष्प अवस्था में परिवर्तित होने की प्रक्रिया ऊर्ध्वपातन कहलाती है, जैसे कर्पूर का उदाहरण।

9. निक्षेपण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंशीतलन पर वाष्प का बिना द्रव बने सीधे ठोस में संघनित होने की प्रक्रिया निक्षेपण कहलाती है।

10. निलंबन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंवे विषमांगी मिश्रण जिनमें ठोस कण घुलते नहीं अपितु संपूर्ण माध्यम में निलंबित रहते हैं, निलंबन कहलाते हैं, जैसे जल में रेत।

11. अपकेंद्रण क्या है?
उत्तर देखेंकिसी मिश्रण को नलिका में तीव्र गति से घुमाकर भारी कणों को बाहर की ओर पृथक करने की प्रक्रिया अपकेंद्रण कहलाती है।

12. स्कंदन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंस्कंदक मिलाकर सूक्ष्म निलंबित कणों को गुच्छों के रूप में एकत्रित करने की प्रक्रिया स्कंदन कहलाती है, जैसे फिटकरी द्वारा जल शुद्धिकरण।

13. कोलॉइड क्या है?
उत्तर देखेंवह मिश्रण जिसमें कणों का आकार विलयन से बड़ा और निलंबन से छोटा (1-1000 nm) होता है तथा जो तली पर नहीं बैठता, कोलॉइड कहलाता है, जैसे दूध।

14. टिंडल प्रभाव किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंकोलॉइड अथवा निलंबन के कणों द्वारा प्रकाश के प्रकीर्णन की घटना को टिंडल प्रभाव कहते हैं।

15. मिश्रधातु किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंदो अथवा दो से अधिक धातुओं का अथवा एक धातु और एक अधातु का समांगी मिश्रण मिश्रधातु कहलाता है, जैसे पीतल और काँसा।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 5 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर

1. द्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत (% m/m) और द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (% m/v) में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंद्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत यह बताता है कि 100 g विलयन में विलेय के कितने ग्राम विद्यमान हैं, जो समांगी ठोस मिश्रणों (जैसे दुग्ध पाउडर) के लिए उपयोगी है। द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत यह बताता है कि 100 mL विलयन में विलेय की कितनी मात्रा (ग्राम) है, जिसका उपयोग दवाइयों और प्रयोगशालाओं में होता है जहाँ द्रव का आयतन मापना अधिक सुगम होता है।

2. विलेयता तापमान से किस प्रकार प्रभावित होती है?
उत्तर देखेंठोस विलेयों की द्रव विलायक में विलेयता प्रायः तापमान में वृद्धि के साथ-साथ बढ़ती है, जैसा विलेयता वक्र से देखा जा सकता है। इसके विपरीत, गैसों को द्रवों में घोलने पर उनकी विलेयता प्रायः तापमान में वृद्धि के साथ घटती है। यह गुणधर्म पदार्थों को मिश्रणों से पृथक करने में उपयोग होता है।

3. क्रिस्टलीकरण, वाष्पीकरण से किस प्रकार भिन्न है?
उत्तर देखेंवाष्पीकरण में विलायक को वाष्पित होने दिया जाता है जिससे विलेय अवशेष के रूप में रह जाता है और विलायक विलुप्त हो जाता है। क्रिस्टलीकरण में संतृप्त विलयन को धीरे-धीरे ठंडा किया जाता है जिससे अतिरिक्त विलेय शुद्ध क्रिस्टलों के रूप में पृथक होता है, जबकि विलायक की मुख्य मात्रा सुरक्षित रहती है।

4. पृथक्कारी कीप का उपयोग किस प्रकार के मिश्रणों को पृथक करने के लिए किया जाता है?
उत्तर देखेंपृथक्कारी कीप का उपयोग दो अमिश्रणीय द्रवों (जैसे सरसों का तेल और जल) के मिश्रण को पृथक करने के लिए किया जाता है। दोनों द्रव अपने भिन्न घनत्व के कारण अलग-अलग परतें बनाते हैं, और स्टॉपकॉक को धीरे-धीरे खोलकर निचली परत को अलग पात्र में एकत्रित कर लिया जाता है।

5. कागज वर्णलेखिकी की विधि और उपयोग समझाइए।
उत्तर देखेंकागज वर्णलेखिकी में मिश्रण के घटकों को पृथक करने के लिए उनकी विलायक तथा कागज के साथ अंतर्क्रिया में अंतर का उपयोग किया जाता है। जल कागज पर ऊपर चढ़ते हुए स्याही जैसे मिश्रण के विभिन्न रंगीन घटकों को उनकी गति के अंतर के आधार पर अलग कर देता है। इसका उपयोग रंजकों, स्याहियों व वर्णकों के पृथक्करण में होता है।

6. ऊर्ध्वपातन विधि से किन मिश्रणों को पृथक किया जा सकता है, उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंऊर्ध्वपातन विधि उन मिश्रणों को पृथक करने के लिए उपयुक्त है जिनमें एक घटक ऊर्ध्वपातित हो जाता है (जैसे कर्पूर, नैप्थलीन) जबकि दूसरा घटक (जैसे रेत) ऊर्ध्वपातित नहीं होता। गर्म करने पर ऊर्ध्वपातित होने वाला पदार्थ ठोस से सीधे वाष्प में बदलकर ठंडी सतह पर पुनः ठोस के रूप में जमा हो जाता है, जिससे यह शेष मिश्रण से पृथक हो जाता है।

7. रक्त को कोलॉइड क्यों माना जाता है, विलयन या निलंबन क्यों नहीं?
उत्तर देखेंरक्त न तो एक विलयन है क्योंकि इसके घटक (रक्त कोशिकाएँ) नग्न आँखों से नहीं दिखते फिर भी वे तली पर नहीं बैठते, और न ही यह वास्तविक निलंबन है क्योंकि इसके कण विलयन से बड़े हैं। इसके कणों का आकार कोलॉइडी परास (1-1000 nm) में होने के कारण यह संपूर्ण माध्यम में समान रूप से फैला रहता है, इसलिए इसे कोलॉइड माना जाता है।

8. फिटकरी द्वारा जल शुद्धिकरण की प्रक्रिया को स्कंदन क्यों कहा जाता है?
उत्तर देखेंपंकिल जल में फिटकरी मिलाने पर यह एक स्कंदक के रूप में कार्य करती है और सूक्ष्म निलंबित अशुद्धि कणों को आपस में चिपकाकर गुच्छों के रूप में एकत्रित कर देती है। ये गुच्छे गुरुत्वाकर्षण के कारण तली पर बैठ जाते हैं (अवसादन), जिन्हें बाद में निस्तारण या निस्यंदन द्वारा पृथक किया जा सकता है।

9. परिक्षिप्त प्रावस्था और परिक्षेपण माध्यम में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंकोलॉइड में विलेय जैसे घटक अथवा परिक्षिप्त कणों को परिक्षिप्त प्रावस्था कहते हैं, जबकि जिस माध्यम में यह परिक्षिप्त प्रावस्था निलंबित रहती है, उसे परिक्षेपण माध्यम कहा जाता है। उदाहरण के लिए दूध में वसा के कण परिक्षिप्त प्रावस्था हैं और जल परिक्षेपण माध्यम है।

10. पेट्रोलियम शोधनशाला में प्रभाजी आसवन का क्या महत्व है?
उत्तर देखेंप्रभाजी आसवन वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा मिश्रण के ऐसे घटकों को पृथक किया जाता है जिनके क्वथनांकों में अपेक्षाकृत कम अंतर (25°C से कम) होता है। पेट्रोलियम शोधनशाला में अपरिष्कृत तेल को इस विधि द्वारा पेट्रोल, डीजल, किरोसीन, LPG आदि विभिन्न उपयोगी प्रभाजों में पृथक किया जाता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 5 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर

1. विलयन की सांद्रता व्यक्त करने की तीन विधियों (% m/m, % m/v, % v/v) को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंद्रव्यमान-द्रव्यमान प्रतिशत (% m/m) समांगी मिश्रणों की सांद्रता व्यक्त करता है और बताता है कि 100 g विलयन में विलेय के कितने ग्राम हैं, जैसे दुग्ध पाउडर या मसालों के मिश्रण में। द्रव्यमान-आयतन प्रतिशत (% m/v) का उपयोग तब किया जाता है जब द्रव को तोलने की तुलना में आयतन मापना सुगम हो, जैसे 5% ग्लूकोस का विलयन जो 100 mL विलयन में 5 g ग्लूकोस दर्शाता है। आयतन-आयतन प्रतिशत (% v/v) दो मिश्रणीय द्रवों को मिश्रित करते समय प्रयुक्त होता है, जैसे सिरके में 5% v/v ऐसीटिक अम्ल। तीनों विधियों का चयन पदार्थ की प्रकृति (ठोस/द्रव) और मापने की सुविधा पर निर्भर करता है।

2. क्रिस्टलीकरण की प्रक्रिया को क्रियाकलाप 5.3 (कॉपर सल्फेट के क्रिस्टल बनाना) के आधार पर चरणबद्ध रूप से समझाइए।
उत्तर देखेंसबसे पहले कॉपर सल्फेट को जल में गर्म करके एक संतृप्त विलयन तैयार किया जाता है, जिसमें सल्फ्यूरिक अम्ल की एक बूँद अवांछित अभिक्रियाओं को रोकने के लिए डाली जाती है। इसके पश्चात अघुलनशील अशुद्धियों को हटाने के लिए गर्म विलयन का निस्यंदन किया जाता है और निस्यंद को एक स्वच्छ बीकर में एकत्रित कर वॉच ग्लास से ढक दिया जाता है। इसे स्थिर रखकर धीरे-धीरे ठंडा होने दिया जाता है, जिससे विलयन में विद्यमान कणों को संगठित होकर नीले रंग के, चमकदार और सुरूपित क्रिस्टल बनने के लिए पर्याप्त समय मिलता है। अंत में क्रिस्टलों को निस्यंदित कर, ठंडे जल से धोकर सुखाया जाता है।

3. विलयन, निलंबन और कोलॉइड में कण के आकार, दृश्यता, टिंडल प्रभाव और स्थिरता के आधार पर विस्तृत तुलना कीजिए।
उत्तर देखेंविलयन में कणों का आकार सबसे छोटा (1 nm से कम) होता है, कण अदृश्य होते हैं, टिंडल प्रभाव नहीं दर्शाते और स्थिर रहते हैं (तली पर नहीं बैठते)। कोलॉइड में कणों का आकार मध्यम (1-1000 nm) होता है, नग्न आँखों से दिखाई नहीं देते लेकिन प्रकाश का प्रकीर्णन करते हुए टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं, और ये भी तली पर नहीं बैठते बल्कि माध्यम में समान रूप से फैले रहते हैं। निलंबन में कणों का आकार सबसे बड़ा (1000 nm से अधिक) होता है, कण नग्न आँखों से दिखाई देते हैं, टिंडल प्रभाव दर्शाते हैं और कुछ समय पश्चात तली पर बैठ जाते हैं। इस प्रकार तीनों को उनके भौतिक गुणधर्मों के आधार पर स्पष्ट रूप से पहचाना जा सकता है।

4. विषमांगी मिश्रणों के पृथक्करण की विभिन्न विधियों (पृथक्कारी कीप, ऊर्ध्वपातन, अपकेंद्रण, स्कंदन) का उनके उपयोग सहित वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंपृथक्कारी कीप का उपयोग दो अमिश्रणीय द्रवों, जैसे तेल और जल, को उनके भिन्न घनत्व के आधार पर पृथक करने के लिए किया जाता है। ऊर्ध्वपातन का उपयोग उन ठोस-ठोस मिश्रणों को पृथक करने के लिए किया जाता है जिनमें एक घटक (जैसे कर्पूर) गर्म करने पर सीधे वाष्प में बदल जाता है जबकि दूसरा घटक (जैसे रेत) नहीं बदलता। अपकेंद्रण में मिश्रण को तीव्र गति से घुमाकर अपकेंद्रीय बल की सहायता से भारी कणों को हल्के द्रव से पृथक किया जाता है, जैसे रक्त के घटकों को पृथक करने में। स्कंदन में फिटकरी जैसे स्कंदक की सहायता से सूक्ष्म निलंबित कणों को गुच्छों में एकत्रित कर अवसादित किया जाता है, जैसे जल शुद्धिकरण में। प्रत्येक विधि मिश्रण के घटकों के भौतिक गुणधर्मों में अंतर पर आधारित होती है।

5. भारत में मिश्रणों के पृथक्करण से जुड़े पारंपरिक व वैज्ञानिक योगदानों (नमक क्रिस्टलीकरण, कन्नौज की इत्र विधि, ORS) का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंभारत के तटीय क्षेत्रों में नमक का क्रिस्टलीकरण एक प्राचीन प्रक्रिया रही है, जिसमें ‘पांगा’ नमक समुद्र के सांद्र खारे जल को उबालकर और ‘करकच’ नमक समुद्री जल के वाष्पीकरण द्वारा प्राप्त किया जाता था। उत्तर प्रदेश के कन्नौज शहर, जिसे भारत की इत्र राजधानी कहा जाता है, में पारंपरिक ‘देग-भापका विधि’ द्वारा आसवन के माध्यम से पुष्पों से सुगंधित पदार्थों का निष्कर्षण कर सोंधी सुगंध वाला इत्र बनाया जाता है। इसके अतिरिक्त, भारतीय शिशुरोग विशेषज्ञ दिलीप महालनोबिस ने ओरल रिहाइड्रेशन सॉल्यूशन (ORS) का सूत्रीकरण किया, जिसमें नमक और चीनी की नियत सांद्रता का उपयोग निर्जलीकरण के उपचार में क्रांतिकारी परिवर्तन लाया और विश्व भर में लाखों लोगों के जीवन की रक्षा की।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या सत्र 2026-27 में “मिश्रण एवं उनके पृथक्करण” अध्याय पुरानी पुस्तक के “इज मैटर अराउंड अस प्योर” अध्याय से अलग है?

एनसीईआरटी की नई पुस्तक “अन्वेषण” में इस अध्याय की मूल अवधारणाएँ (विलयन, निलंबन, कोलॉइड, पृथक्करण विधियाँ) समान हैं, लेकिन प्रस्तुतिकरण और उदाहरण अधिक भारतीय संदर्भ और व्यावहारिक बनाए गए हैं। इसमें “भारत का वैज्ञानिक योगदान” (कन्नौज की इत्र-निर्माण विधि, नमक का पारंपरिक क्रिस्टलीकरण), “विज्ञान एवं समाज” (रक्तदान, पेपरफ्यूज) जैसे नए खंड जोड़े गए हैं, जो पुरानी पुस्तक में इस रूप में नहीं थे।

विलयन की सांद्रता से जुड़े तीन सूत्र (% m/m, % m/v, % v/v) याद रखने का आसान तरीका क्या है?

तीनों सूत्रों में मूल विचार एक ही है – विलेय की मात्रा को विलयन की कुल मात्रा से भाग देकर 100 से गुणा करना। अंतर केवल इकाई का है: % m/m में दोनों द्रव्यमान (ग्राम) में हैं, % m/v में विलेय द्रव्यमान (ग्राम) और विलयन आयतन (mL) में है, और % v/v में दोनों आयतन (mL) में हैं। विद्यार्थी दवाइयों की बोतल या खाद्य पैकेट पर लिखी सांद्रता देखकर इसे आसानी से समझ सकते हैं।

विलयन, निलंबन और कोलॉइड में अंतर स्पष्ट करने वाला कौन-सा भाग परीक्षा में सबसे अधिक पूछा जाता है?

कण के आकार (विलयन में 1 nm से कम, कोलॉइड में 1-1000 nm, निलंबन में 1000 nm से अधिक), दृश्यता, टिंडल प्रभाव और निस्यंदन/अवसादन के आधार पर तुलना तालिका बनाना अक्सर पूछा जाता है (जैसे अभ्यास प्रश्न 3)। विद्यार्थियों को तालिका 5.1 और 5.2 के आधार पर यह तुलना अच्छी तरह याद रखनी चाहिए।

क्या यह अध्याय संख्यात्मक प्रश्नों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है?

हाँ, सांद्रता (% m/m, % m/v, % v/v) की गणना पर आधारित संख्यात्मक प्रश्न इस अध्याय में नियमित रूप से पूछे जाते हैं (जैसे उदाहरण 5.1, 5.2, 5.3 और अभ्यास प्रश्न 4, 5, 13, 14)। विद्यार्थियों को विलेय, विलायक और विलयन के द्रव्यमान/आयतन के बीच का संबंध स्पष्ट रूप से समझकर अभ्यास करना चाहिए ताकि परीक्षा में समरूप प्रश्न सरलता से हल हो सकें।

अभिभावक व शिक्षक बच्चों को मिश्रण और पृथक्करण की अवधारणाएँ रसोईघर से कैसे जोड़कर समझा सकते हैं?

घर पर चीनी या नमक को पानी में घोलकर विलयन बनाना, चाय की पत्तियों को छानकर निलंबन-निस्यंदन समझाना, या दूध और पानी के मिश्रण से इमल्शन (पायस) की अवधारणा समझाना बहुत उपयोगी है। पुस्तक में दिया गया क्रियाकलाप 5.3 (कॉपर सल्फेट या नमक के क्रिस्टल बनाना) घर पर अभिभावक की देखरेख में करवाया जा सकता है, जिससे बच्चों को क्रिस्टलीकरण प्रत्यक्ष अनुभव से समझ आता है।