एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 4 अपने परिवेश में गति का वर्णन समाधान – अभ्यास प्रश्न उत्तर तथा पाठ पर आधारित प्रश्नों के उत्तर यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। सत्र 2026-27 से लागू एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” (कक्षा 9, विज्ञान) का चौथा अध्याय “अपने परिवेश में गति का वर्णन” भौतिक विज्ञान की महत्वपूर्ण नींव है, जिसमें विद्यार्थी प्रकृति में पाई जाने वाली विविध गतियों को वैज्ञानिक रूप से समझना सीखते हैं। इस अध्याय में सरल रेखा में गति, संदर्भ बिंदु, स्थिति, चलित दूरी और विस्थापन, माध्य चाल एवं माध्य वेग, माध्य त्वरण जैसी मूलभूत अवधारणाओं के साथ-साथ गति के आलेखीय निरूपण (स्थिति-समय ग्राफ और वेग-समय ग्राफ) को विस्तार से समझाया गया है। इसके अतिरिक्त नियत त्वरण से गति के लिए तीन शुद्धगतिक समीकरण (v = u + at, s = ut + ½at², v² = u² + 2as) और एकसमान वृत्तीय गति का भी अध्ययन कराया जाता है। यह अध्याय संख्यात्मक प्रश्नों की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और आगे की कक्षाओं में भौतिकी की समझ के लिए आधारशिला का काम करता है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 4 के त्वरित लिंक:
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कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 4 अभ्यास प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 4 समाधान
1. मेरे पिताजी एक सीधी सड़क पर चल कर एक दुकान पर गए जिसकी घर से दूरी 250 m है। वहाँ पहुँच कर उन्होंने पाया कि वह कपड़े का थैला लाना भूल गए हैं। वह घर वापस लौटे, थैला लेकर दुकान पर आए, सामान खरीदा और लौट कर घर आ गए। बताइए कि उन्होंने कुल कितनी दूरी तय की? उनके घर से विस्थापन का मान कितना हुआ?
उत्तर देखेंदिया गया है –
घर से दुकान की दूरी = 250 मीटर
यात्रा का क्रम –
घर → दुकान = 250 मीटर
दुकान → घर = 250 मीटर
घर → दुकान = 250 मीटर
दुकान → घर = 250 मीटर
कुल चलित दूरी
= 250 + 250 + 250 + 250
= 1000 मीटर
चूँकि अंत में वे पुनः अपने घर लौट आए, इसलिए उनकी प्रारंभिक तथा अंतिम स्थिति एक ही है।
अतः विस्थापन = 0 मीटर
2. कोई विद्यार्थी एक पुस्तक लेने के लिए विद्यालय भवन के भूतल से चतुर्थ तल तक दौड़ते हुए जाता है और फिर उतर कर द्वितीय तल स्थित अपने कक्षा-कक्ष में लौटता है। यदि प्रत्येक तल की ऊँचाई 3 m है तो ज्ञात कीजिए –
(i) उसके द्वारा चलित ऊर्ध्वाधर दूरी, तथा
(ii) आरंभिक बिंदु से उसके ऊर्ध्वाधर विस्थापन का परिमाण
उत्तर देखेंदिया गया है –
प्रत्येक तल की ऊँचाई = 3 मीटर
भूतल से चतुर्थ तल तक ऊँचाई
= 4 × 3
= 12 मीटर
चतुर्थ तल से द्वितीय तल तक नीचे उतरना
= 2 × 3
= 6 मीटर
(i) कुल चलित ऊर्ध्वाधर दूरी
= 12 + 6
= 18 मीटर
(ii) अंतिम स्थिति द्वितीय तल पर है।
भूतल से द्वितीय तल की ऊँचाई
= 2 × 3
= 6 मीटर
अतः ऊर्ध्वाधर विस्थापन का परिमाण = 6 मीटर
3. एक लड़की अपना स्कूटर चला रही है और पाती है कि इसके गतिमापी यंत्र का पाठ्यांक स्थिर है। क्या यह संभव है कि उसका स्कूटर त्वरणशील हो? और यदि ऐसा है तो कैसे?
उत्तर देखेंहाँ, यह संभव है।
गतिमापी यंत्र केवल चाल का परिमाण बताता है। यदि चाल स्थिर हो, परन्तु स्कूटर की गति की दिशा बदल रही हो, जैसे किसी वृत्ताकार मार्ग या मोड़ पर चल रहा हो, तब वेग में परिवर्तन होता है। वेग में परिवर्तन होने के कारण त्वरण उत्पन्न होता है।
अतः चाल स्थिर होने पर भी यदि गति की दिशा बदल रही हो, तो स्कूटर त्वरणशील हो सकता है।
4. एक कार विरामावस्था से चलना आरंभ करती है और 6 सेकंड में इसका वेग 24 मीटर प्रति सेकंड हो जाता है। इन 6 सेकंड में इसका त्वरण और इसके द्वारा चलित दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखेंदिया गया है –
प्रारंभिक वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 24 मीटर प्रति सेकंड
समय = 6 सेकंड
त्वरण = वेग में परिवर्तन ÷ समय
त्वरण = (24 − 0) ÷ 6
त्वरण = 4 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
अब,
चलित दूरी = औसत वेग × समय
चलित दूरी = (प्रारंभिक वेग + अंतिम वेग) ÷ 2 × समय
चलित दूरी = (0 + 24) ÷ 2 × 6
चलित दूरी = 12 × 6
चलित दूरी = 72 मीटर
अतः कार का त्वरण 4 मीटर प्रति सेकंड वर्ग तथा उसके द्वारा चलित दूरी 72 मीटर है।
5. आरंभिक वेग 28 मीटर प्रति सेकंड एवं नियत त्वरण से गतिमान कोई मोटर साइकिल 98 मीटर चलकर रुक जाती है। मोटर साइकिल का त्वरण तथा इसे विरामावस्था में आने में लगे समय का मान ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखेंदिया गया है –
प्रारंभिक वेग = 28 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
चलित दूरी = 98 मीटर
गति के समीकरण के अनुसार –
अंतिम वेग का वर्ग = प्रारंभिक वेग का वर्ग + 2 × त्वरण × दूरी
0² = 28² + 2 × त्वरण × 98
0 = 784 + 196 × त्वरण
196 × त्वरण = −784
त्वरण = −784 ÷ 196
त्वरण = −4 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
ऋण चिह्न बताता है कि त्वरण गति की दिशा के विपरीत है।
अब,
त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) ÷ समय
⇒ −4 = (0 − 28) ÷ समय
⇒ −4 = −28 ÷ समय
⇒ समय = 28 ÷ 4
⇒ समय = 7 सेकंड
अतः मोटर साइकिल का त्वरण −4 मीटर प्रति सेकंड वर्ग है तथा उसे रुकने में 7 सेकंड का समय लगता है।
6. चित्र 4.27 दो ऐसी वस्तुओं ‘क’ एवं ‘ख’ का स्थिति–समय आलेख दर्शाता है, जो समांतर सरल रेखीय पथों पर एक ही दिशा में गतिमान हैं। क्या वस्तुओं ‘क’ एवं ‘ख’ का वेग कभी बराबर होगा? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दीजिए।

उत्तर देखेंनहीं, वस्तुओं ‘क’ और ‘ख’ का वेग कभी बराबर नहीं होगा।
स्थिति-समय आलेख की ढाल वस्तु के वेग को दर्शाती है। चित्र में दोनों वस्तुओं की रेखाओं की ढाल अलग-अलग है। वस्तु ‘क’ की रेखा की ढाल वस्तु ‘ख’ की रेखा की ढाल से अधिक है। इसलिए वस्तु ‘क’ का वेग वस्तु ‘ख’ के वेग से अधिक है।
दोनों रेखाएँ लगभग 5 सेकंड पर एक-दूसरे को काटती हैं। इसका अर्थ केवल यह है कि उस क्षण दोनों वस्तुएँ एक ही स्थिति पर हैं। इसका अर्थ यह नहीं है कि उनके वेग भी बराबर हैं।
अतः दोनों वस्तुएँ एक ही स्थिति पर पहुँच सकती हैं, परंतु उनकी रेखाओं की ढाल अलग होने के कारण उनके वेग बराबर नहीं होते।
7. चित्र 4.28 में दिया गया आलेख सरल रेखा में गतिमान दो वस्तुओं ‘क’ एवं ‘ख’ के लिए 0 से 10 सेकंड के बीच उनकी स्थितियों में समय के साथ होने वाले परिवर्तन को दर्शाता है। सही विकल्प या विकल्पों का चयन कीजिए –

(i) 10 सेकंड के समय अंतराल में दोनों का माध्य वेग बराबर है क्योंकि उनकी आरंभिक और अंतिम स्थितियाँ समान हैं।
(ii) 10 सेकंड के समय अंतराल में दोनों की माध्य चाल बराबर है क्योंकि ये दोनों समान समय में समान दूरियाँ चलती हैं।
(iii) 10 सेकंड के समय अंतराल में ‘क’ की माध्य चाल ‘ख’ की माध्य चाल से कम है क्योंकि 10 सेकंड में इसके द्वारा चलित दूरी ‘ख’ द्वारा चलित दूरी से कम है।
(iv) 10 सेकंड के समय अंतराल में ‘क’ की माध्य चाल ‘ख’ की माध्य चाल से अधिक है क्योंकि कुछ समय-अंतरालों में ‘ख’ की चाल ‘क’ की चाल से कम है।
उत्तर देखेंसही विकल्प – (i) और (ii)
दोनों वस्तुओं की आरंभिक स्थिति समान है और 10 सेकंड बाद उनकी अंतिम स्थिति भी समान है। अतः दोनों का विस्थापन तथा समय-अंतराल समान है।
माध्य वेग = विस्थापन ÷ समय-अंतराल
इसलिए दोनों का माध्य वेग बराबर है।
दोनों वस्तुएँ एक ही दिशा में चलती हैं और पीछे नहीं लौटतीं। इसलिए प्रत्येक वस्तु की चलित दूरी उसके विस्थापन के परिमाण के बराबर है। दोनों की चलित दूरी और समय-अंतराल समान होने के कारण उनकी माध्य चाल भी बराबर है।
8. 54 किलोमीटर प्रति घंटा की चाल से ट्रक चलाता हुआ एक ट्रक चालक सड़क के किनारे लगा एक यातायात निर्देश-पट्ट देखता है, जिसमें ट्रकों के लिए गति-सीमा 40 किलोमीटर प्रति घंटा सूचित की गई है। वह 36 सेकंड में अपनी चाल घटाकर 36 किलोमीटर प्रति घंटा पर ले आता है। इस समयावधि में उसके द्वारा चलित दूरी कितनी थी? यह मान लीजिए कि चाल घटाने की अवधि में उसका त्वरण अचर था।

उत्तर देखेंदिया गया है –
प्रारंभिक चाल = 54 किलोमीटर प्रति घंटा
अंतिम चाल = 36 किलोमीटर प्रति घंटा
समय = 36 सेकंड
प्रारंभिक चाल को मीटर प्रति सेकंड में बदलने पर
प्रारंभिक चाल = 54 × 5 ÷ 18
= 15 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम चाल को मीटर प्रति सेकंड में बदलने पर
अंतिम चाल = 36 × 5 ÷ 18
= 10 मीटर प्रति सेकंड
अचर त्वरण की स्थिति में
माध्य चाल = (प्रारंभिक चाल + अंतिम चाल) ÷ 2
माध्य चाल = (15 + 10) ÷ 2
= 12.5 मीटर प्रति सेकंड
चलित दूरी = माध्य चाल × समय
चलित दूरी = 12.5 × 36
= 450 मीटर
अतः ट्रक द्वारा चलित दूरी 450 मीटर थी।
9. एक कार विरामावस्था से गति आरंभ करती है और एकसमान त्वरण से 5 सेकंड में 20 मीटर प्रति सेकंड का वेग प्राप्त कर लेती है। इसके पश्चात 10 सेकंड तक यह 20 मीटर प्रति सेकंड के वेग से चलती है और अंततः ब्रेक लगाकर एकसमान त्वरण से 6 सेकंड में रुक जाती है। इसके द्वारा चलित कुल दूरी ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखेंकार की गति को तीन भागों में बाँटा जा सकता है।
पहला भाग – विरामावस्था से 20 मीटर प्रति सेकंड तक
प्रारंभिक वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 20 मीटर प्रति सेकंड
समय = 5 सेकंड
चलित दूरी = (प्रारंभिक वेग + अंतिम वेग) ÷ 2 × समय
चलित दूरी = (0 + 20) ÷ 2 × 5
= 10 × 5
= 50 मीटर
दूसरा भाग – नियत वेग से गति
वेग = 20 मीटर प्रति सेकंड
समय = 10 सेकंड
चलित दूरी = वेग × समय
चलित दूरी = 20 × 10
= 200 मीटर
तीसरा भाग— 20 मीटर प्रति सेकंड से विरामावस्था तक
प्रारंभिक वेग = 20 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
समय = 6 सेकंड
चलित दूरी = (प्रारंभिक वेग + अंतिम वेग) ÷ 2 × समय
चलित दूरी = (20 + 0) ÷ 2 × 6
= 10 × 6
= 60 मीटर
कुल चलित दूरी = 50 + 200 + 60
कुल चलित दूरी = 310 मीटर
अतः कार द्वारा चलित कुल दूरी 310 मीटर है।
10. एक बस 36 किलोमीटर प्रति घंटा के वेग से गतिमान है, तभी चालक को 30 मीटर आगे एक अवरोध दिखाई पड़ता है। ब्रेक लगाने की प्रतिक्रिया में उसे 0.5 सेकंड का समय लगता है। ब्रेक लगाने के पश्चात बस का वेग 2.5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग के नियत मंदन से कम होता है। क्या यह बस अवरोध तक पहुँचने से पहले रुकेगी?
उत्तर देखेंदिया गया है –
बस का प्रारंभिक वेग = 36 किलोमीटर प्रति घंटा
अवरोध की दूरी = 30 मीटर
प्रतिक्रिया का समय = 0.5 सेकंड
मंदन = 2.5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
वेग को मीटर प्रति सेकंड में बदलने पर
प्रारंभिक वेग = 36 × 5 ÷ 18
= 10 मीटर प्रति सेकंड
प्रतिक्रिया के समय में चली गई दूरी
दूरी = वेग × समय
दूरी = 10 × 0.5
= 5 मीटर
ब्रेक लगाने के बाद रुकने में चली गई दूरी
अंतिम वेग का वर्ग = प्रारंभिक वेग का वर्ग + 2 × त्वरण × दूरी
0² = 10² + 2 × (−2.5) × दूरी
0 = 100 − 5 × दूरी
5 × दूरी = 100
दूरी = 20 मीटर
कुल रुकने की दूरी
कुल दूरी = प्रतिक्रिया के समय चली दूरी + ब्रेक लगाने के बाद चली दूरी
कुल दूरी = 5 + 20
= 25 मीटर
अवरोध की दूरी = 30 मीटर
अवरोध से शेष दूरी = 30 − 25
= 5 मीटर
अतः बस अवरोध तक पहुँचने से पहले रुक जाएगी। वह अवरोध से 5 मीटर पहले रुक जाएगी।
11. किसी विद्यार्थी ने कहा, “पृथ्वी सूर्य के चारों ओर गति करती है।” इस संदर्भ में चर्चा कीजिए कि क्या पृथ्वी पर रखी किसी वस्तु को विरामावस्था में माना जा सकता है।
उत्तर देखेंगति और विराम संदर्भ बिंदु पर निर्भर करते हैं।
पृथ्वी पर रखी कोई वस्तु पृथ्वी के सापेक्ष विरामावस्था में मानी जा सकती है, क्योंकि पृथ्वी के किसी निश्चित बिंदु के सापेक्ष उसकी स्थिति समय के साथ नहीं बदलती।
परंतु सूर्य के सापेक्ष वह वस्तु विरामावस्था में नहीं है। पृथ्वी सूर्य के चारों ओर परिक्रमा करती है और अपने अक्ष पर भी घूमती है। इसलिए पृथ्वी पर रखी वस्तु भी पृथ्वी के साथ गति करती रहती है।
अतः कोई वस्तु पृथ्वी के सापेक्ष विरामावस्था में हो सकती है, लेकिन सूर्य के सापेक्ष वह गतिशील होती है। गति और विराम निरपेक्ष न होकर सापेक्ष होते हैं।
12. किसी साइकिल चालक के लिए 0 सेकंड से 120 सेकंड के बीच वेग-समय आलेख चित्र 4.30 में दर्शाया गया है। उन क्षेत्रफलों को छायांकित कीजिए जो इसका विस्थापन निरूपित करते हैं, जब –

(i) साइकिल चालक नियत वेग से चल रहा है।
(ii) साइकिल चालक का वेग कम हो रहा है।
0 से 120 सेकंड के समय-अंतराल में विस्थापन एवं माध्य त्वरण का परिकलन भी कीजिए।
उत्तर देखेंआलेख के अनुसार साइकिल चालक की गति को तीन भागों में बाँटा जा सकता है—
पहला भाग: 0 से 20 सेकंड तक
वेग 0 से बढ़कर 3 मीटर प्रति सेकंड हो जाता है।
दूसरा भाग: 20 से 100 सेकंड तक
वेग 3 मीटर प्रति सेकंड नियत रहता है।
तीसरा भाग: 100 से 120 सेकंड तक
वेग 3 मीटर प्रति सेकंड से घटकर 2 मीटर प्रति सेकंड हो जाता है।
(i) नियत वेग से गति के समय विस्थापन:
20 से 100 सेकंड तक आलेख के नीचे बना आयताकार क्षेत्र नियत वेग से गति के समय विस्थापन को दर्शाता है।
समय-अंतराल = 100 − 20
= 80 सेकंड
विस्थापन = वेग × समय-अंतराल
विस्थापन = 3 × 80
विस्थापन = 240 मीटर
(ii) वेग कम होने के समय विस्थापन:
100 से 120 सेकंड तक आलेख के नीचे बना समलंबाकार क्षेत्र वेग कम होने के समय विस्थापन को दर्शाता है।
विस्थापन = प्रारंभिक वेग और अंतिम वेग का औसत × समय-अंतराल
विस्थापन = (3 + 2) ÷ 2 × 20
विस्थापन = 2.5 × 20
विस्थापन = 50 मीटर
0 से 20 सेकंड के बीच विस्थापन:
इस अवधि में आलेख के नीचे त्रिभुज बनता है।
विस्थापन = 1 ÷ 2 × आधार × ऊँचाई
विस्थापन = 1 ÷ 2 × 20 × 3
विस्थापन = 30 मीटर
0 से 120 सेकंड के बीच कुल विस्थापन:
कुल विस्थापन = 30 + 240 + 50
कुल विस्थापन = 320 मीटर
माध्य त्वरण का परिकलन:
प्रारंभिक वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 2 मीटर प्रति सेकंड
कुल समय-अंतराल = 120 सेकंड
माध्य त्वरण = अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग ÷ समय-अंतराल
माध्य त्वरण = (2 − 0) ÷ 120
माध्य त्वरण = 1 ÷ 60 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
माध्य त्वरण = लगभग 0.017 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
अतः 0 से 120 सेकंड के बीच कुल विस्थापन 320 मीटर तथा माध्य त्वरण लगभग 0.017 मीटर प्रति सेकंड वर्ग है।
13. एक लड़की किसी सीधी सड़क पर दौड़ कर अपनी पहली मैराथन दौड़ प्रतियोगिता की तैयारी कर रही है। विभिन्न समयावधियों में अपनी धावन-चाल के परिकलन के लिए वह एक स्मार्टवॉच का उपयोग करती है। चित्र 4.31 में दर्शाया गया वेग–समय आलेख विभिन्न क्षणों पर उसके वेग के मान को चित्रित करता है। आलेख के आधार पर उसके द्वारा दौड़ी गई दूरी का आकलन कीजिए।

उत्तर देखेंवेग–समय आलेख के नीचे का कुल क्षेत्रफल धाविका द्वारा तय की गई दूरी को दर्शाता है।
आलेख को अलग-अलग आयतों और समलंबों में विभाजित करके उनके क्षेत्रफलों को जोड़ने पर
पहले भाग की दूरी
= 7 × 0.5
= 3.5 किलोमीटर
दूसरे भाग की दूरी
= (7 + 7.5) ÷ 2 × 1
= 7.25 किलोमीटर
तीसरे भाग की दूरी
= 7.5 × 1.5
= 11.25 किलोमीटर
चौथे भाग की दूरी
= (7.5 + 7) ÷ 2 × 1.5
= 10.875 किलोमीटर
पाँचवें भाग की दूरी
= (7 + 6.5) ÷ 2 × 1
= 6.75 किलोमीटर
छठे भाग की दूरी
= 6.5 × 1
= 6.5 किलोमीटर
कुल दूरी = 3.5 + 7.25 + 11.25 + 10.875 + 6.75 + 6.5
= 46.125 किलोमीटर
अतः आलेख के आधार पर लड़की द्वारा दौड़ी गई दूरी लगभग 46 किलोमीटर है।
14. किसी राज्य-राजमार्ग पर प्रवेश करने के पश्चात एक कार 2 मिनट तक 6 मीटर प्रति सेकंड के नियत वेग से चलती है और फिर 6 सेकंड तक 1 मीटर प्रति सेकंड वर्ग के नियत त्वरण से त्वरित होती है। इस कार की गति के लिए वेग–समय आलेख बनाकर 2 मिनट 6 सेकंड की अवधि में राज्य के राजमार्ग पर कार का विस्थापन ज्ञात कीजिए।
उत्तर देखेंकार की गति को दो भागों में विभाजित किया जा सकता है।
पहला भाग: नियत वेग से गति
वेग = 6 मीटर प्रति सेकंड
समय = 2 मिनट
= 120 सेकंड
विस्थापन = वेग × समय
विस्थापन = 6 × 120
= 720 मीटर
दूसरा भाग: नियत त्वरण से गति
प्रारंभिक वेग = 6 मीटर प्रति सेकंड
त्वरण = 1 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
समय = 6 सेकंड
अंतिम वेग = प्रारंभिक वेग + त्वरण × समय
अंतिम वेग = 6 + 1 × 6
= 12 मीटर प्रति सेकंड
इस अवधि में विस्थापन:
विस्थापन = प्रारंभिक वेग × समय + 1 ÷ 2 × त्वरण × समय का वर्ग
= 6 × 6 + 1 ÷ 2 × 1 × 6²
= 36 + 18
= 54 मीटर
कुल विस्थापन
= 720 + 54
= 774 मीटर
अतः 2 मिनट 6 सेकंड में कार का कुल विस्थापन 774 मीटर है।
वेग–समय आलेख में 0 से 120 सेकंड तक 6 मीटर प्रति सेकंड पर क्षैतिज रेखा होगी। इसके बाद 120 से 126 सेकंड तक वेग 6 मीटर प्रति सेकंड से बढ़कर 12 मीटर प्रति सेकंड होगा, इसलिए ऊपर की ओर झुकी हुई सरल रेखा बनेगी।
15. दो कारें ‘क’ एवं ‘ख’ सरल रेखा में नियत त्वरण से विरामावस्था से गति आरंभ करती हैं। कार ‘क’ 5 सेकंड में 5 मीटर प्रति सेकंड वेग प्राप्त करती है, जबकि कार ‘ख’ 10 सेकंड में 3 मीटर प्रति सेकंड वेग प्राप्त करती है। एक ही आलेख-पत्र पर दोनों कारों के वेग–समय आलेख आलेखित कीजिए। इस आलेख का उपयोग करके दी गई दोनों समयावधियों में विस्थापन के मान परिकलित कीजिए। संकेत— दोनों प्रकरणों में त्वरण परिकलित कीजिए। इसके पश्चात आलेख आलेखित करने के लिए समय के पाँच क्षणों पर वेगों का परिकलन कीजिए।
उत्तर देखेंकार ‘क’ के लिए:
प्रारंभिक वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 5 मीटर प्रति सेकंड
समय = 5 सेकंड
त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) ÷ समय
= (5 − 0) ÷ 5
= 1 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
कार ‘ख’ के लिए—
प्रारंभिक वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 3 मीटर प्रति सेकंड
समय = 10 सेकंड
त्वरण = (3 − 0) ÷ 10
= 0.3 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
आलेख के लिए कुछ वेगों के मान:
समय कार ‘क’ का वेग कार ‘ख’ का वेग
0 सेकंड 0 मीटर प्रति सेकंड 0 मीटर प्रति सेकंड
2.5 सेकंड 2.5 मीटर प्रति सेकंड 0.75 मीटर प्रति सेकंड
5 सेकंड 5 मीटर प्रति सेकंड 1.5 मीटर प्रति सेकंड
7.5 सेकंड 7.5 मीटर प्रति सेकंड 2.25 मीटर प्रति सेकंड
10 सेकंड 10 मीटर प्रति सेकंड 3 मीटर प्रति सेकंड
इन बिंदुओं को आलेख-पत्र पर अंकित करने पर दोनों कारों के लिए मूल बिंदु से आरंभ होने वाली सरल रेखाएँ प्राप्त होंगी। कार ‘क’ की रेखा की ढाल कार ‘ख’ की रेखा से अधिक होगी।
कार ‘क’ का 5 सेकंड में विस्थापन –
वेग–समय आलेख के नीचे बने त्रिभुज का क्षेत्रफल:
विस्थापन = 1 ÷ 2 × आधार × ऊँचाई
= 1 ÷ 2 × 5 × 5
= 12.5 मीटर
कार ‘ख’ का 10 सेकंड में विस्थापन
= 1 ÷ 2 × आधार × ऊँचाई
= 1 ÷ 2 × 10 × 3
= 15 मीटर
अतः कार ‘क’ का 5 सेकंड में विस्थापन 12.5 मीटर और कार ‘ख’ का 10 सेकंड में विस्थापन 15 मीटर है।
16. रोहन घर पर शाम के 6 बजे से 7:30 बजे तक विज्ञान का अध्ययन करता है। उसकी दीवार घड़ी की मिनट की सुई की लंबाई 7 सेंटीमीटर है। परिकलन कीजिए, दी गई समयावधि में इस सुई के सिरे –

(i) द्वारा चलित दूरी
(ii) का विस्थापन
(iii) की चाल तथा
(iv) का वेग
उत्तर देखेंदिया गया है:
मिनट की सुई की लंबाई = 7 सेंटीमीटर
कुल समय
= 1 घंटा 30 मिनट
= 90 मिनट
मिनट की सुई 60 मिनट में एक पूरा चक्कर लगाती है।
90 मिनट में लगाए गए चक्कर
= 90 ÷ 60
= 1.5 चक्कर
(i) सुई के सिरे द्वारा चलित दूरी:
एक चक्कर में चलित दूरी वृत्त की परिधि के बराबर होगी।
वृत्त की परिधि
= 2 × π × त्रिज्या
= 2 × 22 ÷ 7 × 7
= 44 सेंटीमीटर
1.5 चक्कर में चलित दूरी
= 1.5 × 44
= 66 सेंटीमीटर
अतः सुई के सिरे द्वारा चलित दूरी 66 सेंटीमीटर है।
(ii) सुई के सिरे का विस्थापन:
शाम 6 बजे मिनट की सुई 12 पर होती है।
शाम 7:30 बजे मिनट की सुई 6 पर होती है।
ये दोनों स्थितियाँ वृत्त के व्यास के विपरीत सिरों पर हैं।
विस्थापन का परिमाण
= वृत्त का व्यास
= 2 × त्रिज्या
= 2 × 7
= 14 सेंटीमीटर
अतः विस्थापन का परिमाण 14 सेंटीमीटर है और इसकी दिशा 12 से 6 की ओर है।
(iii) सुई के सिरे की माध्य चाल:
माध्य चाल
= कुल चलित दूरी ÷ कुल समय
= 66 ÷ 90
= 0.73 सेंटीमीटर प्रति मिनट
अतः सुई के सिरे की माध्य चाल लगभग 0.73 सेंटीमीटर प्रति मिनट है।
(iv) सुई के सिरे का माध्य वेग:
माध्य वेग का परिमाण
= विस्थापन ÷ कुल समय
= 14 ÷ 90
= 0.156 सेंटीमीटर प्रति मिनट
अतः सुई के सिरे के माध्य वेग का परिमाण लगभग 0.156 सेंटीमीटर प्रति मिनट है और इसकी दिशा घड़ी के 12 के अंक से 6 के अंक की ओर है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 4 से परीक्षा के लिए प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 4 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. संदर्भ बिंदु किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंकिसी वस्तु की स्थिति का वर्णन करने के लिए निर्दिष्ट किया गया एक नियत बिंदु संदर्भ बिंदु कहलाता है।
2. विरामावस्था में वस्तु कब कही जाती है?
उत्तर देखेंयदि समय के साथ संदर्भ बिंदु के सापेक्ष वस्तु की स्थिति परिवर्तित नहीं होती तो वस्तु विरामावस्था में है।
3. विस्थापन की परिभाषा दीजिए।
उत्तर देखेंसमय के किन्हीं दो क्षणों के बीच किसी वस्तु की स्थितियों में होने वाला सकल परिवर्तन विस्थापन कहलाता है।
4. माध्य चाल का सूत्र लिखिए।
उत्तर देखेंमाध्य चाल = कुल चलित दूरी/समय अंतराल; इसकी कोई दिशा नहीं होती, केवल आंकिक मान होता है।
5. माध्य वेग किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंदिए गए समय अंतराल में किसी वस्तु के विस्थापन को उसी समय अंतराल से विभाजित करने पर प्राप्त भागफल माध्य वेग कहलाता है।
6. तात्क्षणिक वेग क्या है?
उत्तर देखेंकिसी क्षण विशेष पर वस्तु के वेग को तात्क्षणिक वेग कहते हैं, जब समय अंतराल अत्यल्प हो जाता है।
7. माध्य त्वरण का सूत्र लिखिए।
उत्तर देखेंमाध्य त्वरण = वेग-परिवर्तन / समय अंतराल = (अंतिम वेग – प्रारंभिक वेग) / समय अंतराल।
8. त्वरण का SI मात्रक क्या है?
उत्तर देखेंत्वरण का SI मात्रक m s⁻² (मीटर प्रति सेकंड वर्ग) है।
9. गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण को किस प्रतीक से निरूपित किया जाता है और इसका मान क्या है?
उत्तर देखेंइसे प्रतीक ‘g’ से निरूपित किया जाता है और इसका मान लगभग 9.8 m s⁻² होता है।
10. स्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता क्या निरूपित करती है?
उत्तर देखेंस्थिति-समय ग्राफ की प्रवणता वस्तु के वेग को निरूपित करती है।
11. वेग-समय ग्राफ की प्रवणता क्या दर्शाती है?
उत्तर देखेंवेग-समय ग्राफ की प्रवणता वस्तु के त्वरण को दर्शाती है।
12. वेग-समय ग्राफ और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध क्षेत्रफल क्या निरूपित करता है?
उत्तर देखेंवेग-समय ग्राफ और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध क्षेत्रफल उस समय अंतराल में वस्तु का विस्थापन निरूपित करता है।
13. एकसमान वृत्तीय गति किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजब कोई वस्तु किसी वृत्ताकार पथ पर अचर (एकसमान) चाल से चलती है तो इसे एकसमान वृत्तीय गति कहते हैं।
14. वृत्त के किसी बिंदु पर वेग की दिशा किस रेखा के अनुदिश होती है?
उत्तर देखेंवृत्त के किसी बिंदु पर वेग उस बिंदु पर खींची गई स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है।
15. तीसरा शुद्धगतिक समीकरण (जिसमें समय शामिल नहीं है) लिखिए।
उत्तर देखेंतीसरा शुद्धगतिक समीकरण है — v² = u² + 2as, जहाँ v अंतिम वेग, u प्रारंभिक वेग, a त्वरण और s विस्थापन है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 4 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. चलित दूरी और विस्थापन में कोई तीन अंतर लिखिए।
उत्तर देखेंचलित दूरी अदिश राशि है जबकि विस्थापन सदिश राशि है। दूरी का मान सदैव धनात्मक होता है जबकि विस्थापन धनात्मक, ऋणात्मक या शून्य हो सकता है। विस्थापन का परिमाण सदैव दूरी से कम या बराबर होता है, कभी अधिक नहीं हो सकता।
2. एकसमान सरल रेखीय गति और असमान सरल रेखीय गति में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंयदि सरल रेखा में गतिमान वस्तु समान समय अंतराल में समान दूरियाँ चलती है तो यह एकसमान सरलरेखीय गति कहलाती है, जिसमें वस्तु अचर चाल से चलती है। यदि समान समय अंतराल में असमान दूरियाँ चलती है तो यह असमान सरल रेखीय गति कहलाती है, जिसमें चाल बढ़ती-घटती रहती है।
3. वेग और चाल में मुख्य अंतर क्या है?
उत्तर देखेंचाल एक अदिश राशि है जो केवल यह बताती है कि वस्तु कितनी तेज गति से चल रही है, इसकी कोई दिशा नहीं होती। वेग एक सदिश राशि है जिसमें परिमाण के साथ-साथ दिशा भी होती है। दोनों का SI मात्रक m s⁻¹ समान है।
4. उदाहरण सहित समझाइए कि माध्य वेग शून्य होते हुए भी माध्य चाल शून्य नहीं हो सकती।
उत्तर देखेंजब कोई तैराक तरण-ताल के एक किनारे से दूसरे किनारे तक जाकर वापस उसी स्थान पर लौट आता है, तो उसका विस्थापन शून्य होता है इसलिए माध्य वेग शून्य होगा। लेकिन उसने कुल दूरी तय की है, इसलिए माध्य चाल शून्य नहीं होगी।
5. सरल रेखीय स्थिति-समय ग्राफ और वक्ररेखीय स्थिति-समय ग्राफ में क्या अंतर है?
उत्तर देखेंकोई सरल रेखीय स्थिति-समय ग्राफ यह इंगित करता है कि वस्तु नियत वेग से गतिमान है, अर्थात त्वरण शून्य है। वक्रित स्थिति-समय ग्राफ यह इंगित करता है कि वेग नियत नहीं है और वस्तु त्वरित गति कर रही है, अर्थात इसमें त्वरण उपस्थित है।
6. गुरुत्वीय त्वरण (g) के संबंध में क्रियाकलाप 4.2 के उदाहरण से क्या निष्कर्ष निकाला गया?
उत्तर देखेंजब किसी वस्तु को ऊँचाई से गिराया जाता है तो प्रत्येक क्रमागत 1 सेकंड के समय अंतराल में माध्य त्वरण का परिमाण 9.8 m s⁻² नियत रहता है। चूँकि वेग बढ़ रहा है इसलिए त्वरण गति की दिशा में होता है, जिसे गुरुत्वीय त्वरण ‘g’ कहा जाता है।
7. सुरक्षित दूरी बनाए रखना क्यों आवश्यक है, वाहन चालक के संदर्भ में समझाइए।
उत्तर देखेंजब किसी गतिमान वाहन में ब्रेक लगाए जाते हैं तो विरामावस्था में आने से पूर्व यह कुछ दूरी तय करता है, जो वाहन के वेग, सड़क की सतह, ब्रेक क्षमता और चालक के प्रतिक्रिया काल पर निर्भर करती है। इसलिए आगे वाले वाहन से सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है ताकि टक्कर से बचा जा सके।
8. एकसमान वृत्तीय गति में वस्तु त्वरित क्यों मानी जाती है, जबकि चाल स्थिर रहती है?
उत्तर देखेंएकसमान वृत्तीय गति में चाल तो अचर रहती है किंतु वेग की दिशा प्रत्येक क्षण परिवर्तित होती रहती है, क्योंकि वेग सदैव वृत्त की स्पर्श रेखा के अनुदिश होता है। चूँकि वेग की दिशा में सतत परिवर्तन होता है, इसलिए इस गति में त्वरण होता है और यह त्वरित गति कहलाती है।
9. किसी वृत्ताकार पथ पर एक परिक्रमा पूर्ण करने में चलित दूरी और विस्थापन कैसे ज्ञात किए जाते हैं?
उत्तर देखेंएक परिक्रमा पूर्ण करने में चलित दूरी वृत्त की परिधि के बराबर होती है, अर्थात 2πR (जहाँ R त्रिज्या है)। इसके विपरीत विस्थापन शून्य होता है क्योंकि एक परिक्रमा पूर्ण करके वस्तु अपनी मूल स्थिति पर वापस लौट आती है।
10. शुद्धगतिक समीकरण किन परिस्थितियों में ही वैध होते हैं?
उत्तर देखेंशुद्धगतिक समीकरण केवल उस स्थिति में वैध होते हैं जब त्वरण नियत रहता है। एक ही दिशा में सरल रेखीय गति के लिए इनका उपयोग करते समय ध्यान रहे कि चलित दूरी व विस्थापन तथा चाल व वेग के परिमाण बराबर होते हैं।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 4 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. स्थिति-समय ग्राफ से हम कौन-कौन सी भौतिक राशियाँ ज्ञात कर सकते हैं? उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंस्थिति-समय ग्राफ से हम समय के प्रत्येक क्षण पर वस्तु की स्थिति जान सकते हैं। इसके अतिरिक्त ग्राफ की प्रवणता (ढलान) निकालकर हम वस्तु का वेग भी परिकलित कर सकते हैं – स्थिति में परिवर्तन (BC) को समय में परिवर्तन (CA) से विभाजित करने पर माध्य वेग प्राप्त होता है। यदि ग्राफ सरल रेखा है तो वेग नियत है; यदि वक्र रेखा है तो वेग परिवर्तित हो रहा है। दो वस्तुओं के ग्राफ की प्रवणता की तुलना करके यह भी बताया जा सकता है कि किसकी चाल अधिक है।
2. वेग-समय ग्राफ से त्वरण और विस्थापन कैसे ज्ञात किए जाते हैं? विस्तार से समझाइए।
उत्तर देखेंवेग-समय ग्राफ की प्रवणता (ढलान) निकालकर त्वरण ज्ञात किया जाता है – वेग में परिवर्तन को समय में परिवर्तन से विभाजित करने पर माध्य त्वरण प्राप्त होता है। यदि ग्राफ X-अक्ष के समांतर सरल रेखा है तो त्वरण शून्य है। वहीं ग्राफ रेखा और समय-अक्ष के बीच परिबद्ध क्षेत्रफल उस समय अंतराल में वस्तु का विस्थापन निरूपित करता है, जिसे आयत व त्रिभुज के क्षेत्रफल के योग से परिकलित किया जा सकता है।
3. नियत त्वरण से गति के तीनों शुद्धगतिक समीकरणों को लिखिए और प्रत्येक का उपयोग किस स्थिति में किया जाता है, स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंतीन शुद्धगतिक समीकरण हैं – (i) v = u + at, जिसका उपयोग जब आरंभिक वेग व त्वरण ज्ञात हों और किसी क्षण पर वेग निकालना हो; (ii) s = ut + ½at², जिसका उपयोग विस्थापन ज्ञात करने के लिए जब आरंभिक वेग, त्वरण व समय ज्ञात हों; (iii) v² = u² + 2as, जिसका उपयोग तब किया जाता है जब समय ज्ञात न हो लेकिन वेग व विस्थापन के बीच संबंध चाहिए। ये समीकरण केवल नियत त्वरण की स्थिति में ही वैध होते हैं।
4. उदाहरण सहित स्पष्ट कीजिए कि एकसमान वृत्तीय गति वास्तविक जगत का एक आदर्श प्रतिरूपण क्यों है?
उत्तर देखेंव्यावहारिक जगत में एकसमान वृत्तीय गति के प्रतिबंध, जैसे अचर चाल और पूर्ण वृत्ताकार पथ, प्रायः अनुभव में नहीं आते। उदाहरण के लिए किसी धावक द्वारा वृत्ताकार पथ पर दौड़ना वास्तव में एक बहुभुजाकार पथ (जैसे आयताकार या षट्भुजाकार) का सीमांत रूप है, जिसमें भुजाओं की संख्या अनंत होने पर पथ वृत्ताकार बन जाता है। तथापि यह एक उपयोगी प्रतिरूपण है क्योंकि यह सूर्य के चारों ओर घूमते ग्रहों की गति या वाहन के वृत्तीय मोड़ पर मुड़ने जैसी वास्तविक जटिल स्थितियों के लिए आधार प्रदान करता है।
5. क्रियाकलाप 4.5 (छल्ले के भीतर गतिमान कंचा) के आधार पर स्पष्ट कीजिए कि वृत्तीय गति में वेग की दिशा किस प्रकार निर्धारित होती है?
उत्तर देखेंजब कंचे को छल्ले के भीतर गति में रखा जाता है तो यह वृत्ताकार पथ पर घूमता है, लेकिन जैसे ही छल्ले को हटाकर कंचे को मुक्त किया जाता है, यह सरल रेखा में चलने लगता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि मुक्त होने के क्षण कंचा अपनी गति उसी दिशा में बनाए रखता है जिस दिशा में वह छल्ला हटाने के समय गतिमान था अर्थात उस बिंदु पर वृत्त की स्पर्श रेखा के अनुदिश। इससे सिद्ध होता है कि वृत्त के किसी भी बिंदु पर वेग की दिशा सदैव स्पर्श रेखा के अनुदिश होती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या सत्र 2026-27 में कक्षा 9 विज्ञान की गति अध्याय का नाम या क्रमांक बदल गया है?
हाँ, एनसीईआरटी की नई पुस्तक “अन्वेषण” में पुराने “गति” अध्याय (जो पहले अध्याय 8 था) का नाम अब “अपने परिवेश में गति का वर्णन” कर दिया गया है और यह नई पुस्तक में अध्याय 4 के रूप में आता है। भौतिक विज्ञान की मूल अवधारणाएँ लगभग समान हैं, लेकिन अध्याय का क्रम, प्रस्तुतिकरण और कुछ भारतीय संदर्भ (जैसे आर्यभटीय के उदाहरण) नए जोड़े गए हैं।
कक्षा 9 की परीक्षा में इस अध्याय से कितने अंकों के प्रश्न आने की संभावना है?
भौतिक विज्ञान खंड में गति से जुड़ा यह अध्याय संख्यात्मक आधारित होने के कारण सामान्यतः अधिक वेटेज पाता है। स्कूलों में यह प्रायः 8-10 अंकों तक के प्रश्न (सूत्र आधारित गणना, ग्राफ व्याख्या, अवधारणात्मक प्रश्न) देता है। सटीक अंक-विभाजन विद्यालय द्वारा जारी नवीनतम पाठ्यक्रम विभाजन से ही पुष्ट होगा।
क्या यह अध्याय विद्यार्थियों के लिए कठिन माना जाता है और सूत्र याद रखने का सरल तरीका क्या है?
यह अध्याय शुरुआत में सूत्र-आधारित होने के कारण कठिन लग सकता है, विशेषकर तीन शुद्धगतिक समीकरण याद रखना। हालांकि विद्यार्थी यदि वेग-समय ग्राफ से इन समीकरणों की व्युत्पत्ति समझ लें, तो रटने की बजाय समझकर याद रखना आसान हो जाता है। नियमित अभ्यास प्रश्न हल करने से यह अध्याय सरल हो जाता है।
अध्याय में कौन-सा भाग सबसे अधिक महत्वपूर्ण है जिस पर विशेष ध्यान देना चाहिए?
वेग-समय ग्राफ से त्वरण व विस्थापन निकालना, तीन शुद्धगतिक समीकरणों का प्रयोग करके संख्यात्मक हल करना, और स्थिति-समय ग्राफ की व्याख्या करना – ये तीनों भाग परीक्षा में सबसे अधिक बार पूछे जाते हैं। साथ ही चलित दूरी व विस्थापन में अंतर पर आधारित वैचारिक प्रश्न भी नियमित रूप से आते हैं।
अभिभावक बच्चों को घर पर गति के सूत्र और ग्राफ समझने में कैसे मदद कर सकते हैं?
अभिभावक बच्चों के साथ कार या स्कूटर की यात्रा के दौरान चालमापी दिखाकर वास्तविक जीवन में चाल और वेग का अंतर समझा सकते हैं। साथ ही ग्राफ पेपर पर स्वयं डेटा लेकर स्थिति-समय ग्राफ बनवाना (जैसे पुस्तक की क्रियाकलाप 4.3) बच्चों को ग्राफ पढ़ने का व्यावहारिक अभ्यास कराता है।
क्या इस अध्याय के लिए एनसीईआरटी का हल और अतिरिक्त अभ्यास प्रश्न ऑनलाइन उपलब्ध हैं?
जी हाँ, एनसीईआरटी की आधिकारिक वेबसाइट पर “अन्वेषण” पुस्तक की पीडीएफ निःशुल्क उपलब्ध है, जिसमें सभी उदाहरण और अभ्यास प्रश्न दिए गए हैं। विद्यार्थियों को सुझाव है कि पहले पुस्तक में दिए गए हल किए गए उदाहरण (4.1 से 4.8) स्वयं दोबारा हल करें, उसके बाद ही अभ्यास प्रश्नों को हल करने का प्रयास करें ताकि सूत्रों की समझ मजबूत हो।
