कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 एनसीईआरटी समाधान – जीवों में विविधता

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 एनसीईआरटी समाधान पाठ 7 जीवों में विविधता अभ्यास के प्रश्न उत्तर तथा अध्याय के अंतर्गत विभिन्न पेजों पर दिए गए प्रश्नों के जवाब सीबीएसई सत्र 2021-2022 के लिए यहाँ उपलब्ध हैं। वर्ग 9 विज्ञान अध्याय 7 के प्रश्न उत्तर यहाँ विस्तार से सरल भाषा में दिए गए हैं। प्रत्येक जवाब को चित्रों के माध्यम से (यदि आवश्यकता हो तो) दर्शाया गया है। 9वीं कक्षा विज्ञान के सभी प्रश्नों के उत्तर कक्षा 9 विज्ञान ऐप से भी प्राप्त किए जा सकते हैं। शिक्षा से संबन्धित किसी भी परेशानी के लिए छात्र हमें बेहिचक संपर्क कर सकते हैं।

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 के लिए एनसीईआरटी समाधान

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 के बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) उत्तर

Q1

निम्नलिखित में से किसमें जल-संवहन के लिए विशिष्ट उतक पाए जाते हैं?

[A]. थैलोफाइटा
[B]. टेरिडोफाइटा
[C]. ब्रायोफाइटा
[D]. जिम्नोस्पर्म (अनावृतबीजी)
Q2

निम्नलिखित में से कौन बीज उत्पन्न करता है?

[A]. थैलोफाइटा
[B]. जिम्नोस्पर्म
[C]. टेरिडोफाइटा
[D]. ब्रायोफाइटा
Q3

कौन-सी यथार्थ मछली है?

[A]. जेलीफिश
[B]. स्टारफिश
[C]. सिल्वरफिश
[D]. डॉगफिश
Q4

निम्नलिखित में कौन-से प्राणी समुद्रों में पाए जाते हैं?

[A]. पॉरीफेरा
[B]. पिसीज (मत्स्य वर्ग)
[C]. एकाइनोडर्मेटा
[D]. मोलस्क

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 नोट्स

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 के मुख्य बिन्दु

    • 1. वर्गीकरण जीवों की विविधता को स्पष्ट करने में सहायक होता है।
    • 2. जीवों को पाँच जगत में वर्गीकृत करने के लिए निम्न विशेषताओं को ध्यान में रखा जाता है:
      (a) कोशिकीय संरचना- प्रोकैरियोटी अथवा यूकैरियोटी
      (b) जीव का शरीर एककोशिक अथवा बहुकोशिक है। बहुकोशिक जीवों की संरचना जटिल होती है।
      (c) कोशिका भित्ति की उपस्थिति तथा स्वपोषण की क्षमता।
    • 3. उपरोक्त आधार पर सभी जीवों को पाँच जगत में बाँटा गया है: मोनेरा, प्रोटिस्टा, कवक (फंजाई), प्लांटी और एनीमेलिया।
    • 4. जीवों का वर्गीकरण उनके विकास से संबंधित है।
    • 5. प्लांटी और एनिमेलिया को उनकी क्रमिक शारीरिक जटिलता के आधार पर वर्गीकृत किया गया है।
    • 6. पौधों को पाँच वर्गों में बाँटा गया है: शैवाल, ब्रायोफाइटा, टेरिडोफाइटा, जिम्नोस्पर्म और एंजियोस्पर्म।
    • 7. जंतुओं को दस फाइलम में बाँटा गया है: पोरीफेरा, सीलेंटरेटा, प्लेटीहेल्मिन्थीज़्, निमेटोडा, एनीलिडा, आर्थ्रोपोडा, मोलस्का, इकाइनोडर्मेटा, प्रोटोकॉर्डेटा और कॉर्डेटा।
    • 8. द्विपद-नामपद्धति जीवों की सही पहचान में सहायता करती है।
    • 9. द्विपद-नामपद्धति में पहला नाम जीन्स और दूसरा स्पीशीज़ का होता है।

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 के अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा एवं टेरिडोफाइटा, ‘क्रिप्टोगैम’ कहलाते हैं। जिम्नोस्पर्म एवं एंजियोस्पर्म, ‘फैनेरोगैम’ कहलाते हैं। चर्चा कीजिए, क्यों?

थैलोफाइटा, ब्रायोफाइटा एवं टैरिडोफाइटा ‘किप्टोगैम’ कहलाते हैं क्योंकि इन समूहों के जननांग आवृत अथवा छिपे हुए रहते हैं। इनमें बीज नहीं होते हैं। दूसरी ओर, ‘फैनेरोगैम’ (पुष्पोद्‌भिद) में जिम्नोस्पर्म एवं एंजियोस्पर्म आते हैं जिनमें स्पष्ट रूप से विभेदित जनन ऊतक एवं संग्रहित भोजन के साथ भ्रूण होते हैं। इनमें भ्रूण, बीज में विकसित होता है।

आपको जोंक, नेरीस, स्कोलोपेंड्रा, झींगा, एवं बिच्छू दिए गए हैं, और ये सभी सखंड देह संरचना वाले प्राणी हैं। क्या आप इन्हें एक समूह में वर्गीकृत करेंगे? यदि नहीं, तो उन महत्वपूर्ण लक्षणों को लिखिए जिनके आधार पर आप इन प्राणियों को विभिन्न समूहों में पृथक करेंगें।

प्रश्न में दिए गए सभी जीव एक समूह के अंतर्गत नहीं आते हैं। जोंक एवं नेरीस ऐनेलिडा संघ के अतंगर्त आते हैं क्योंकि इनका शरीर मेटामेरिक (खडं वाला) होता है अथार्त शरीर अदंर से सेप्टा (पट) के द्वारा खंडों में बँटा होता है। देह खंड सिर से लेकर पुच्छ तक एक के बाद एक पंक्तिबद्ध होते हैं। लेकिन स्कोलोपेंड्रा, झींगा एवं बिच्छू आर्थ्रोपोडा संघ में आते हैं क्योंकि इनमें संधित पाद एवं खुला परिसंचारी तंत्र होता है।

उड़न छिपकली तथा पक्षी के बीच अंतर बताइए।

उड़न छिपकली सरीसृप समूह में आती है तथा इसे असमतापी प्राणी के रूप में अभिलक्षित किया है। इसका शरीर शल्क से ढका हुआ तथा तीन कक्ष वाला हृदय होता है जबकि पक्षी/चिड़िया पक्षी के अंतर्गत आते हैं। ये समतापी होते हैं, शरीर परों से ढका होता है, अग्रपाद पंखों में रूपांतरित होते हैं तथा हृदय चार कक्ष वाला होता है।

आपको चना, गेहूँ, चावल, लौकी, मक्का और मटर के बीज दिए गए हैं। इन्हें एकबीजपत्री तथा द्विबीजपत्री में वर्गीकृत कीजिए।

चना – द्विबीजपत्री
गेहूँ – एकबीजपत्री
चावल – एकबीजपत्री
लौकी – द्विबीजपत्री
मक्का – एकबीजपत्री
मटर – द्विबीजपत्री

नम्नलिखित को उनके हृदय में उपस्थित प्रकोष्ठों की संख्या के आधार पर वर्गीकृत कीजिए: रोहू, स्कोलियोडोन, मेंढक, सैलामेंडर, उड़न छिपकली, नागराज, मगरमच्छ, शुतुरमुर्ग, कबूतर, चमगादड़, ह्वेल

रोहू, स्कोलियोडोन – 2 प्रकोष्ठ,
मेंढक, सैलामेंडर, उड़न छिपकली, नागराज – 3 कक्ष,
मगरमच्छ, शुतुरमुर्ग, कबूतर, चमगादड़, ह्वेल – 4 कक्ष

जीवों में विविधता से क्या तात्पर्य है?

जीवों में विविधता
संसार में जीवों की असंख्य प्रजातियाँ निवास करती हैं। हमारे चारों ओर की इस असीमित विभिन्नता को विकसित होने में लाखों वर्ष का समय लगा है। सबका अलग-अलग अध्ययन करना संभव नहीं हो सकता इसलिए जीवधारियों की समानता का अध्ययन करेंगे, जिससे हम उनको विभिन्न वर्गों में रख सकेंगे, फिर विभिन्न वर्गों व समूहों का अध्ययन करेंगे।
जीवों के वर्गीकरण का आधार
आजकल हम जीवों के वर्गीकरण के लिए कोशिका की प्रकृति से प्रारम्भ करके विभिन्न परस्पर-संबंधित अभिलक्षणों को दृष्टिगत रखते हैं।

    1. एक यूकैरियोटी कोशिका में केंद्रक समेत कुछ झिल्ली से घिरे कोशिकांग होते हैं जिसके कारण कोशिकीय क्रिया अलग-अलग कोशिकाओं में दक्षतापूर्वक होती रहती है। यही कारण है कि जिन कोशिकाओं में झिल्लीयुक्त कोशिकांग और केंद्रक नहीं होते हैं, उनकी जैव रासायनिक प्रक्रियाएँ भिन्न होती हैं। इसका असर कोशिकीय संरचना के सभी पहलुओं पर पड़ता है। इसके अतिरिक्त केंद्रकयुक्त कोशिकाओं में बहुकोशिक जीव के निर्माण की क्षमता होती है, क्योंकि वे किसी खास कार्यों के लिए विशिष्टीकृत हो सकते हैं। इसलिए केंद्रक वर्गीकरण का आधारभूत लक्षण हो सकता है।
    2. जो कोशिकाएँ एक साथ समूह बनाकर किसी जीव का निर्माण करती हैं, उनमें श्रम-विभाजन पाया जाता है। शारीरिक संरचना में सभी कोशिकाएँ एकसमान नहीं होती हैं बल्कि कोशिकाओं के समूह कुछ खास कार्यों के लिए विशिष्टीकृत हो जाते हैं। यही वजह है कि जीवों की शारीरिक संरचना में इतनी विभिन्नता होती है। इसी के परिणामस्वरूप, हम पाते हैं कि एक अमीबा और एक कृमि की शारीरिक बनावट में कितना अंतर है।
    3. स्वयं भोजन बनाने की क्षमता रखने वाले और बाहर से भोजन प्राप्त करने वाले जीवों की शारीरिक संरचना में आवश्यक भिन्नता पाई जाती है।
रिक्त स्थान भरिए

निम्नलिखित रिक्त स्थानों भरिए:

    • (a) कवक में ………. प्रकार की पोषण विधि पाई जाती है।
    • (b) कवक की कोशिका भित्ति ………. की बनी होती है।
    • (c) नील-हरित शैवाल तथा कवक का एक साथ पाया जाना ………. कहलाता है।
    • (d) काइटिन की रासायनिक प्रकृति …………….. है।
    • (e) …………….. में समान लक्षणों की अधिकतम संख्या के साथ सबसे कम जीवों की संख्या होती है।
    • (f) तना, मूल एवं पत्ती में स्पष्ट रूप से विभेदित न होने वाले पादपों को …………. में रखा गया है।
    • (g) …………………. को पादप जगत के जल-स्थलचर अर्थात उभयचर कहा गया है।

रिक्त स्थानों में भरे गए उत्तर:

    • (a) मृतजीवी
    • (b) काइटिन
    • (c) लाइकेन
    • (d) कार्बोहाइड्रेट
    • (e) जाति
    • (f) थैलोफाइटा
    • (g) ब्रोयाफाइट
वर्गीकरण और जैव विकास के बारे में आप क्या जानते हैं?

वर्गीकरण और जैव विकास
जैव विकास के अध्ययन से पता चलता है कि पहले उत्पन्न जीवों का शरीर बाद में उत्पन्न जीवों के शरीर से सरलतम है। अर्थात जीवों के शरीर में सरलता से जटिलता की तरफ विकास हुआ है। यही आधार वर्गीकरण का भी है। जीवों के शरीर के डिजाइन के आधार पर ही उनको विभिन्न वर्गों में रखा गया है।
वर्गीकरण समूहों की पदानुक्रमित संरचना
अर्न्सट हेकेल (1894), राबर्ट व्हिटेकर (1969), और कार्ल वोस (1977) नामक जैव वैज्ञानिकों ने सारे सजीवों को जगत नामक बड़े वर्गों में विभाजित करने का प्रयास किया है। विभिन्न स्तरों पर जीवों को उप समूहों में वर्गीकृत किया गया है। जैसे:

    • जगत (किंगडम) – फाइलम (जंतु) / डिवीज़न (पादप)
    • वर्ग (क्लास)
    • गण (ऑर्डर)
    • कुल (फैमिली)
    • वंश (जीनस)
    • जाति (स्पीशीज़)

इस प्रकार, वर्गीकरण के पदानुक्रम में जीवों को विभिन्न लक्षणों के आधार पर छोटे से छोटे समूहों में बाँटते हुए हम वर्गीकरण की आधारभूत इकाई तक पहुँचते हैं। वर्गीकरण की आधारभूत इकाई जाति (स्पीशीज़) है। अत: किन जीवों को हम एक जाति के जीव कहेंगे? एक ही जाति के जीवों में बाह्य रूप से काप़ ी समानता होती है तथा वे जनन कर सकते हैं।

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

अपने चारों ओर फैले जीव रूपों की विभिन्नता के तीन उदाहरण दें।

जीवों में तीन प्रकार विभिन्ता प्रायः देखी जाती हैं: आकार: कुछ जीव जैसे बैक्टीरिया अतिसूक्ष्म होते है तो दूसरी ओर ह्वेल जैसे जीव कई मीटर तक लम्बे होते हैं। जीवन काल: कुछ जीवों जैसे मच्छर का जीवन काल अति न्यून होता है जबकि कुछ पौधे सैकड़ों साल जिन्दा रहते है। रंग: कुछ जीव रंगहीन (पारदर्शी तक) होते है तो कुछ विभिन्न आकर्षक रंगों युक्त होते हैं।

जीवों के प्रारंभिक विभाजन के लिए किस मूल लक्षण को आधार बनाया गया?

जीवों के प्रारंभिक विभाजन के लिए उनके निवास स्थान को वर्गीकरण का आधार बनाया गया।

किस आधार पर जंतुओं और वनस्पतिओं को एक – दूसरे से भिन्न वर्ग में रखा जाता है?

निम्नलिखित आधारों पर जंतुओं और वनस्पतिओं को एक – दूसरे से भिन्न वर्ग में रखा जाता है:
कोशिकीय संगठन के आधार पर
कोशिका भित्ति के आधार पर
पोषण क्रिया के आधार पर

आदिम जीव किन्हें कहते हैं? ये तथाकथित उन्नत जीवों से किस प्रकार भिन्न हैं?

वो जीव समूह, जिनकी शारीरिक संरचना में प्राचीन काल से लेकर आज तक कोई खास परिवर्तन नहीं हुआ है, आदिम जीव अथवा निम्न जीव कहलाते हैं। ये जीव समूह, उच्च जीवों से कोशकीय संगठन तथा कार्यों में भिन्न होते हैं। उच्च जीवों का संगठन प्रायः जटिल होता है।

क्या उन्नत जीव और जटिल जीव एक होते हैं?

नहीं, क्योंकि विकास के दौरान जीवों में जटिलता की संभावना बनी रहती है। इसलिए पुराने जीवों को साधारण और नए जीवों को अपेक्षकृत जटिल कह सकते हैं।

मोनेरा अथवा प्रोटिस्टा जैसे जीवों के वर्गीकरण के मापदंड क्या हैं?

मोनेरा अथवा प्रोटिस्टा एक कोशिकीय जीव हैं। अतः इनके वर्गीकरण के लिए निम्नलिखित मापदंड होंगे: कोशिकीय संगठन कोशिका भित्ति केन्द्रक की उपस्थिति या अनुपस्थिति पोषण के प्रकार

वर्गीकरण के विभिन्न पदानुक्रमों में किस समूह में सर्वाधिक समान लक्षण वाले सबसे कम जीवों को और किस समूह में सबसे ज्यादा संख्या में जीवों को रखा जाएगा?

सर्वाधिक समान लक्षणों वालें सबसे कम संख्या वाले वर्ग को जाति (स्पसीज) कहते है क्योंकि वर्गीकरण में यह निम्नतम स्तर पर है। जबकि सर्वाधिक संख्या वालें समूह की जगत कहते है क्योंकि वर्गीकरण में यह उच्चतम स्तर पर है।

सरलतम पौधों को किस वर्ग में रखा गया है?

सरलतम पौधों को थैलोफाइटा (Algae) वर्ग में रखा गया है।

कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 पेज 91 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 पेज 93 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 पेज 96 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 पेज 105 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 अभ्यास के प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय 7 अभ्यास के सवाल जवाब