एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 संख्याओं का संसार

एनसीईआरटी कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 संख्याओं का संसार समाधान – प्रश्नावली 3.1 से 3.5 तक तथा अंतिम प्रश्नावली के प्रश्नों के हल सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त करें। एनसीईआरटी की नई पाठ्यपुस्तक गणित मंजरी (भाग 1) के अध्याय 3 “संख्याओं का संसार” में विद्यार्थियों को संख्या-पद्धति के संपूर्ण इतिहास और संरचना की एक रोमांचक यात्रा पर ले जाया गया है। यह अध्याय केवल सूत्र और नियम याद कराने तक सीमित नहीीं है, बल्कि यह बताता है कि संख्याओं का जन्म हज़ारों वर्ष पहले एकैकी-संगतता की अवधारणा से कैसे हुआ जैसे प्राचीन चरवाहे मिट्टी के घड़े में कंकड़ डालकर अपनी गायों की गिनती रखते थे। अध्याय में लेबोम्बो अस्थि और इशांगो अस्थि जैसे पुरातात्विक प्रमाणों से लेकर, ब्रह्मगुप्त द्वारा शून्य और ऋणात्मक संख्याओं की खोज, हिप्पासस द्वारा √2 की अपरिमेयता का प्रमाण और संगमग्राम के माधव की अनंत श्रेणियों तक गणित के इतिहास की समृद्ध विरासत को बड़े रोचक ढंग से प्रस्तुत किया गया है।
यह अध्याय सात मुख्य भागों में विभाजित है – 3.1 गणित का उदय, 3.2 शून्य की क्रांति, 3.3 पूर्णांक, 3.4 भिन्न और परिमेय संख्याएँ, 3.5 अपरिमेय संख्याएँ, 3.6 वास्तविक संख्याएँ (दशमलव और चक्रीय प्रतिरूप) और 3.7 निष्कर्ष। विद्यार्थी इसमें प्राकृत संख्याएँ (N), पूर्णांक (Z), परिमेय संख्याएँ (Q), अपरिमेय संख्याएँ (I) और वास्तविक संख्याएँ (R) के बीच के संबंधों को गहराई से समझते हैं, साथ ही संख्या रेखा पर परिमेय व अपरिमेय संख्याओं का निरूपण करना, सांत व आवर्ती दशमलव को p/q रूप में बदलना और √2 जैसी अपरिमेय संख्याओं की रचना करना भी सीखते हैं।

एनसीईआरटी कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.1 समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.1

1. बंदरगाह नगर लोथल में एक व्यापारी ताम्र शिलिकाओं को लेने के लिए मसालों की थैलियों का विनिमय करता है। वह मसाले के प्रत्येक 2 थैलियों से 15 ताम्र शिलिकाएँ लेता है। यदि वह बाजार में मसालों की 12 थैलियाँ लेकर जाता है तो वह उनके बदले कितनी ताम्र शिलिकाएँ बाजार से लेकर आएगा?

उत्तर:
दिया है:
मसालों की 2 थैलियों के बदले = 15 ताम्र शिलिकाएँ
∴ मसालों की 1 थैली के बदले = 15/2 ताम्र शिलिकाएँ
इसी प्रकार, मसालों की 12 थैलियों के बदले
= 12 × (15/2)
= 6 × 15
= 90
अतः, व्यापारी बाजार से 90 ताम्र शिलिकाएँ लेकर आएगा।

2. इशांगो अस्थि के एक स्तंभ पर संख्याओं का अनुक्रम- 11, 13, 17, 19 देखिए। इन संख्याओं में क्या समानता है? इस प्रतिरूप में उपयुक्त आगामी तीन संख्याओं को सूचीबद्ध कीजिए।

उत्तर:
संख्याएँ 11, 13, 17, 19 सभी अभाज्य संख्याएँ हैं (वे संख्याएँ जिनके केवल दो गुणनखंड होते हैं: 1 और स्वयं वह संख्या)।
19 के बाद अगली तीन अभाज्य संख्याएँ 23, 29, 31 हैं।
अतः, आगामी तीन संख्याएँ 23, 29, 31 हैं।

3. हमें ज्ञात है कि प्राकृत संख्याएँ योग के अंतर्गत संवृत होती हैं (किन्हीं दो प्राकृत संख्याओं का योग सदैव एक प्राकृत संख्या होती है)। क्या संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत होती हैं? अपने उत्तर को सिद्ध करने हेतु कुछ उदाहरण दीजिए।

उत्तर:
संवृत का अर्थ है कि परिणाम भी एक प्राकृत संख्या होनी चाहिए।
नहीं, प्राकृत संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत नहीं होती हैं।
उदाहरण:
(i) 5 – 3 = 2 (प्राकृत संख्या है)
(ii) 3 – 5 = –2 (प्राकृत संख्या नहीं है)
चूँकि घटाव करने पर कभी-कभी ऋणात्मक संख्या प्राप्त होती है, जो एक प्राकृत संख्या नहीं होती, अतः प्राकृत संख्याएँ घटाव के अंतर्गत संवृत नहीं होती हैं।

4. प्राचीन भारत के निवासी गणना करने के लिए अपनी अंगुलियों की संधियों का उपयोग करते थे, जो वर्तमान में भी प्रचलन में है। प्रत्येक अंगुली में तीन संधियाँ होती हैं और अंगूठे का उपयोग उन्हें गिनने के लिए किया जाता है। एक हाथ पर आप कितनी गिनती कर सकते हैं? यह प्राचीन आधार-12 गणन पद्धतियों से कैसे संबंधित है?

उत्तर:
अंगूठे को छोड़कर प्रत्येक अंगुली में 3 संधियाँ होती हैं।
प्रयोग की गई अंगुलियों की संख्या = 4 (अंगूठे को छोड़कर)
कुल संधियाँ = 4 × 3 = 12
अतः, एक हाथ पर हम 12 तक गिनती कर सकते हैं।
आधार-12 पद्धति से संबंध:
चूँकि एक हाथ पर गिनती 12 तक पहुँचती है, इसलिए यह स्वाभाविक रूप से प्राचीन काल में प्रयुक्त आधार-12 (द्वादशाधारी) गणन पद्धति की उत्पत्ति की ओर ले जाती है।
अतः:

  • कुल गिनती = 12
  • यही आधार-12 गणन पद्धति की उत्पत्ति को स्पष्ट करता है।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.2 समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.2

1. मध्याह्न के समय उच्च तुंगता वाले लद्दाख के मरुस्थल में तापमान 4°C अंकित किया गया है। मध्यरात्रि के समय इसके तापमान में 15°C की कमी हो जाती है। मध्यरात्रि का तापमान क्या है?

उत्तर:
प्रारंभिक तापमान = 4°C
तापमान में कमी = 15°C
मध्यरात्रि का तापमान = 4 − 15 = −11°C
अतः, मध्यरात्रि का तापमान −11°C है।

2. एक मसाला-व्यापारी ₹850 का ऋण लेता है। अगले दिन उसे ₹1200 का लाभ (धन) प्राप्त होता है। आने वाले सप्ताह में उसे ₹450 की हानि होती है। इस अनुक्रम को पूर्णांकों का उपयोग करते हुए समीकरण के रूप में लिखिए और उसके अंतिम लाभ-हानि की गणना कीजिए।

उत्तर:
ऋण = − ₹850
लाभ = + ₹1200
हानि = − ₹450
समीकरण: − ₹850 + ₹1200 − ₹450
चरणबद्ध गणना: = ₹350 − ₹450 = − ₹100
अतः, उसकी अंतिम वित्तीय स्थिति −₹100 है (अर्थात ₹100 की हानि)।

3. ब्रह्मगुप्त के नियमों का उपयोग करते हुए निम्नलिखित की गणना कीजिए –

(i) (−12) × 5
(ii) (−8) × (−7)
(iii) 0 − (−14)
(iv) (−20) ÷ 4
उत्तर:
ब्रह्मगुप्त के नियमों के अनुसार:
ऋण ऋणात्मक को दर्शाता है
धन/लाभ  धनात्मक को दर्शाता है
(i) (−12) × 5
ऋणात्मक × धनात्मक = ऋणात्मक [चूँकि ऋण × धन = ऋण]
अतः, (−12) × 5 = −60

(ii) (−8) × (−7)
ऋणात्मक × ऋणात्मक = धनात्मक [चूँकि ऋण × ऋण = धन]
अतः, (−8) × (−7) = 56

(iii) 0 − (−14)
ब्रह्मगुप्त के अनुसार, शून्य में से ऋण घटाने पर धन प्राप्त होता है।
ऋणात्मक संख्या को घटाना, धनात्मक संख्या को जोड़ने के समान है:
अतः, 0 − (−14) = 0 + 14 = 14

(iv) (−20) ÷ 4
ऋणात्मक ÷ धनात्मक = ऋणात्मक [चूँकि ऋण ÷ धन = ऋण]
अतः, (−20) ÷ 4 = −5

4. वास्तविक जीवन से संबंधित ऋणभार के एक उदाहरण का उपयोग करते हुए विस्तारपूर्वक बताइए कि किसी ऋणात्मक संख्या को घटाना, एक धनात्मक संख्या का योग करने के समान क्यों है (जैसे 10 − (−5) = 15)।

उत्तर:
मान लीजिए आपके पास ₹10 हैं।
ऋणात्मक संख्या ऋण को दर्शाती है।
अतः, −₹5 का अर्थ है कि आप पर ₹5 का ऋण है।
अब, 10 − (−5) का अर्थ है ₹5 के ऋण को हटाना।
यदि आपका ऋण समाप्त हो जाता है, तो आपका धन ₹5 से बढ़ जाता है।
अतः, 10 − (−5) = 10 + 5 = 15
इस प्रकार, किसी ऋणात्मक संख्या को घटाना, एक धनात्मक संख्या को जोड़ने के समान है।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.3 समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.3

1. सिद्ध कीजिए कि निम्नलिखित परिमेय संख्याएँ समतुल्य हैं –

(i) 2/3 और 4/6
(ii) 5/4 और 10/8
(iii) −3/5 और −6/10
(iv) 9/3 और 3
उत्तर:
(i) 2/3 और 4/6
पहली भिन्न: 2/3 = 2/3
दूसरी भिन्न: 4/6 = 2/3 (अंश और हर को 2 से भाग देने पर)
अतः, 2/3 और 4/6 समतुल्य हैं।

(ii) 5/4 और 10/8
पहली भिन्न: 5/4 = 5/4
दूसरी भिन्न: 10/8 = 5/4 (अंश और हर को 2 से भाग देने पर)
अतः, 5/4 और 10/8 समतुल्य हैं।

(iii) −3/5 और −6/10
पहली भिन्न: −3/5 = −3/5
दूसरी भिन्न: −6/10 = −3/5 (अंश और हर को 2 से भाग देने पर)
अतः, −3/5 और −6/10 समतुल्य हैं।

(iv) 9/3 और 3
पहली भिन्न: 9/3 = 3
अतः, 9/3 और 3 समतुल्य हैं।

2. योगफल ज्ञात कीजिए –

(i) 2/5 + 3/10
(ii) 7/12 + 5/8
(iii) −4/7 + 3/14
उत्तर:
(i) 2/5 + 3/10
5 और 10 का ल.स.प. (LCM) = 10
पहली संख्या को सरल करने पर: 2/5 = 4/10 [समान हर बनाने के लिए]
अब, योगफल
= 2/5 + 3/10
= 4/10 + 3/10
= 7/10
अतः, 2/5 + 3/10 का योगफल 7/10 है।

(ii) 7/12 + 5/8
12 और 8 का ल.स.प. (LCM) = 24
पहली संख्या को सरल करने पर: 7/12 = 14/24 [समान हर बनाने के लिए]
दूसरी संख्या को सरल करने पर: 5/8 = 15/24 [समान हर बनाने के लिए]
अब, योगफल
= 7/12 + 5/8
= 14/24 + 15/24
= 29/24
अतः, 7/12 + 5/8 का योगफल 29/24 है।

(iii) −4/7 + 3/14
7 और 14 का ल.स.प. (LCM) = 14
पहली संख्या को सरल करने पर: −4/7 = −8/14 [समान हर बनाने के लिए]
अतः, योगफल
= −4/7 + 3/14
= −8/14 + 3/14
= −5/14
अतः, −4/7 + 3/14 का योगफल −5/14 है।

3. अंतर ज्ञात कीजिए –

(i) 5/6 − 1/4
(ii) 11/8 − 3/4
(iii) −7/9 − (−2/3)
उत्तर:
6 और 4 का ल.स.प. (LCM) = 12
पहली संख्या को सरल करने पर: 5/6 = 10/12 [समान हर बनाने के लिए]
दूसरी संख्या को सरल करने पर: 1/4 = 3/12 [समान हर बनाने के लिए]
अतः, अंतर
= 5/6 − 1/4
= 10/12 − 3/12
= 7/12
अतः, अंतर 7/12 है।

(ii) 11/8 − 3/4
8 और 4 का ल.स.प. = 8
दूसरी संख्या को सरल करने पर: 3/4 = 6/8 [समान हर बनाने के लिए]
अतः, अंतर
= 11/8 − 3/4
= 11/8 − 6/8
= 5/8
अतः, अंतर 5/8 है।

(iii) −7/9 − (−2/3)
−7/9 − (−2/3) = −7/9 + 2/3
9 और 3 का ल.स.प. (LCM) = 9
दूसरी संख्या को सरल करने पर: 2/3 = 6/9 [समान हर बनाने के लिए]
अतः, अंतर
= −7/9 − (−2/3)
= −7/9 + 6/9
= −1/9
अतः, अंतर −1/9 है।

4. गुणनफल ज्ञात कीजिए –

(i) 2/3 × 3/10
(ii) 7/11 × 5/8
(iii) −4/7 × 5/14
उत्तर:
(i) 2/3 × 3/10
= (2 × 3)/(3 × 10)
= 6/30
= 1/5 [सरलीकरण के बाद]
अतः, गुणनफल 1/5 है।

(ii) 7/11 × 5/8
= (7 × 5)/(11 × 8)
= 35/88
अतः, गुणनफल 35/88 है।

(iii) −4/7 × 5/14
= (−4 × 5)/(7 × 14)
= −20/98
= −10/49 [सरलीकरण के बाद]
अतः, गुणनफल −10/49 है।

5. भागफल ज्ञात कीजिए –

(i) 2/3 ÷ 3/10
(ii) 7/11 ÷ 5/8
(iii) −4/7 ÷ 5/14
उत्तर:
(i) 2/3 ÷ 3/10
भिन्नों को भाग देने के लिए, व्युत्क्रम से गुणा करते हैं।
= 2/3 × 10/3
= (2 × 10)/(3 × 3)
= 20/9
अतः, भागफल 20/9 है।

(ii) 7/11 ÷ 5/8
= 7/11 × 8/5
= (7 × 8)/(11 × 5)
= 56/55
अतः, भागफल 56/55 है।

(iii) −4/7 ÷ 5/14
= −4/7 × 14/5
= (−4 × 14)/(7 × 5)
= −56/35
= −8/5 [सरलीकरण के बाद]
अतः, भागफल −8/5 है।

6. सिद्ध कीजिए कि (1/2 + 3/4) × 8/3 = 1/2 × 8/3 + 3/4 × 8/3

उत्तर:
LHS = (1/2 + 3/4) × 8/3
= (2/4 + 3/4) × 8/3 [पहले कोष्ठक के अंदर जोड़ते हैं: 1/2 = 2/4]
= (5/4) × 8/3 [चूँकि 2/4 + 3/4 = 5/4]
= 5/4 × 8/3
= (5 × 8)/(4 × 3)
= 40/12
= 10/3 [सरलीकरण के बाद]

RHS = 1/2 × 8/3 + 3/4 × 8/3
= (1 × 8)/(2 × 3) + (3 × 8)/(4 × 3)
= 8/6 + 24/12
= 4/3 + 6/3 [सरलीकरण के बाद: 8/6 = 4/3 और 24/12 = 6/3]
= 10/3

चूँकि LHS = RHS,
अतः, (1/2 + 3/4) × 8/3 = 1/2 × 8/3 + 3/4 × 8/3
इति सिद्धम्।

7. बंटन गुणधर्म का उपयोग करते हुए निम्नलिखित का सरलीकरण कीजिए – 7/9 (6/7 − 3/4)

उत्तर:
बंटन गुणधर्म  का उपयोग करते हुए:
7/9 (6/7 − 3/4)
= 7/9 × 6/7 − 7/9 × 3/4
= 6/9 − 21/36
= 2/3 − 7/12
= 8/12 − 7/12 [3 और 12 का ल.स.प. = 12 और 2/3 = 8/12]
= 1/12
अतः, 7/9 (6/7 − 3/4) का सरलीकृत मान 1/12 है।

8. परिमेय संख्या x को इस प्रकार ज्ञात कीजिए कि 5/6 (x + 3/5) = 5/6 x + 1/2

उत्तर:
दिया है: 5/6 (x + 3/5) = 5/6 x + 1/2
⇒ 5/6 x + (5/6 × 3/5) = 5/6 x + 1/2
⇒ 5/6 x + 15/30 = 5/6 x + 1/2
⇒ 15/30 = 1/2, जो कि एक सार्वत्रिक सत्य  है।
अतः, 5/6 (x + 3/5) = 5/6 x + 1/2 समीकरण x के प्रत्येक मान के लिए सत्य है।
इसलिए, x किसी भी परिमेय संख्या के बराबर हो सकता है।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.4 समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.4

1. एक ही संख्या रेखा पर 2/3, −5/4 और 1½ को निरूपित कीजिए।

उत्तर:
मिश्रित संख्या  को बदलने पर:
1½ = 3/2
अब संख्याओं की तुलना करने के लिए पहले उन्हें दशमलव में बदलते हैं:
−5/4 = −1.25
2/3 ≈ 0.67
3/2 = 1.5
संख्या रेखा पर:
−5/4, −2 और −1 के मध्य स्थित है
2/3, 0 और 1 के मध्य स्थित है
3/2, 1 और 2 के मध्य स्थित है
अतः, क्रम है:
−5/4 < 2/3 < 3/2
अतः, हम इन बिंदुओं को संख्या रेखा पर तदनुसार आसानी से अंकित कर सकते हैं।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.4 प्रश्न 1 का चित्र

2. अनिवार्य रूप से −1/2 और 1/4 के मध्य विद्यमान तीन भिन्न परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
दी गई संख्याएँ: −1/2 और 1/4
2 और 4 का लघुत्तम समापवर्त्य  = 4
−1/2 को उभयनिष्ठ हर में बदलने पर:
−1/2 = −2/4
अब दी गई संख्याएँ: −2/4 और 1/4
अतः, −2/4 और 1/4 के मध्य स्थित संख्याएँ हैं: −1/4, 0, 1/8
अतः, तीन परिमेय संख्याएँ −1/4, 0, 1/8 हैं।

3. व्यंजक (−1/4) + (5/12) का सरलीकरण कीजिए।

उत्तर:
4 और 12 का लघुत्तम समापवर्त्य. = 12
−1/4 को उभयनिष्ठ हर में बदलने पर:
−1/4 = −3/12
अतः,
= −3/12 + 5/12
= 2/12
= 1/6
अतः, (−1/4) + (5/12) का परिणाम 1/6 है।

4. एक दर्जी के पास 15¾ मीटर परिष्कृत रेशमी कपड़ा है। यदि एक कुर्ता बनाने के लिए 2¼ मीटर रेशमी कपड़े की आवश्यकता होती है तो दर्जी कुल कितने कुर्ते बना सकता है?

उत्तर:
मिश्रित भिन्नों को अनुचित भिन्नों में बदलने पर:
15¾ = 63/4
2¼ = 9/4
रेशमी कपड़े की कुल मात्रा = 15¾ मीटर
2¼ मीटर रेशम में कुर्तों की संख्या = 1
⇒ 1 मीटर रेशम में कुर्तों की संख्या = 1 ÷ 2¼
⇒ 15¾ मीटर रेशम में कुर्तों की संख्या = (1 ÷ 2¼) × 15¾
= (1 ÷ 9/4) × 63/4
= 4/9 × 63/4
= (4 × 63)/(9 × 4)
= 63/9 = 7
अतः, दर्जी 15¾ मीटर परिष्कृत रेशमी कपड़े से कुल 7 कुर्ते बना सकता है।

5. 3.1415 और 3.1416 के मध्य तीन परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
हम अधिक दशमलव स्थान जोड़ सकते हैं:
3.1415 < 3.14151 < 3.14152 < 3.14153 < 3.1416
अतः, तीन परिमेय संख्याएँ 3.14151, 3.14152, 3.14153 हैं।
नोट: हम किन्हीं भी दो परिमेय संख्याओं के मध्य अनंत परिमेय संख्याएँ ज्ञात कर सकते हैं।
उदाहरण के लिए:
3.141511, 3.141512, 3.141513, 3.141514, …
3.141521, 3.141522, 3.141523, 3.141524, …
3.141531, 3.141532, 3.141533, 3.141534, …
3.141541, 3.141542, 3.141543, 3.141544, …
3.141551, 3.141552, 3.141553, 3.141554, …
3.141561, 3.141562, 3.141563, 3.141564, …

6. क्या आप किन्हीं दो परिमेय संख्याओं के मध्य एक परिमेय संख्या ज्ञात करने की किसी अन्य विधि सोच सकते हैं?

उत्तर:
हाँ, इसके लिए अन्य विधियाँ मौजूद हैं:
1. औसत  निकालकर:
यदि a और b दो परिमेय संख्याएँ हैं, तो
(a + b)/2 इन दोनों के मध्य स्थित होती है।
2. उभयनिष्ठ हर बनाकर:
दोनों संख्याओं को समान हर में बदलकर, उनके मध्य स्थित किसी संख्या को चुना जा सकता है।
3. दशमलव प्रसार  द्वारा:
संख्याओं को दशमलव में बदलकर, उनके मध्य स्थित संख्याएँ चुनी जा सकती हैं।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.5 समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 प्रश्नावली 3.5

1. दीर्घ विभाजन किए बिना निम्नलिखित परिमेय संख्याओं में से यह निर्धारित कीजिए कि कौन-सी सांत दशमलव है और कौन-सी आवर्ती दशमलव है- 7/20, 4/15 और 13/250, तत्पश्चात स्पष्ट रूप से दीर्घ विभाजन करते हुए अपने उत्तरों की जाँच कीजिए और इन परिमेय संख्याओं को दशमलव में भी व्यक्त कीजिए।

उत्तर:
निम्नतम रूप में एक परिमेय संख्या p/q की सांत दशमलव होती है:
यदि q के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 और/या 5 हों।
यदि q में 2 या 5 के अतिरिक्त कोई अन्य अभाज्य गुणनखंड है, तो दशमलव आवर्ती होती है।
(i) 7/20
20 का अभाज्य गुणनखंडन:
20 = 2² × 5
चूँकि हर में केवल 2 और 5 ही अभाज्य गुणनखंड हैं, अतः 7/20 की सांत दशमलव है।
अब इसे दशमलव में बदलने पर:
7/20 = 0.35
अतः, 7/20 एक सांत दशमलव है।

(ii) 4/15
15 का अभाज्य गुणनखंडन:
15 = 3 × 5
चूँकि हर में 3 विद्यमान है, जो न तो 2 है और न ही 5, अतः 4/15 की आवर्ती दशमलव है।
अब इसे दशमलव में बदलने पर:
4/15 = 0.2666…
अतः, 4/15 एक आवर्ती दशमलव है।

(iii) 13/250
250 का अभाज्य गुणनखंडन:
250 = 2 × 5³
चूँकि हर में केवल 2 और 5 ही अभाज्य गुणनखंड हैं, अतः 13/250 की सांत दशमलव है।
अब इसे दशमलव में बदलने पर:
13/250 = 0.052
अतः, 13/250 एक सांत दशमलव है।

2. 1/13 के लिए दीर्घ विभाजन कीजिए। अंकों के आवर्ती खंड को पहचानिए। यदि आप 2/13 की गणना करते हैं तो क्या यह चक्रीय गुण को प्रदर्शित करता है? अब आप 3/13, 4/13 इत्यादि की गणना कीजिए। आपने क्या ध्यान किया?

उत्तर:
पहले 1/13 का दशमलव प्रसार लिखते हैं:
1/13 = 0.076923076923…
अतः, अंकों का आवर्ती खंड है: 076923
अब गणना करते हैं:
2/13 = 0.153846153846…
आवर्ती खंड: 153846
3/13 = 0.230769230769…
आवर्ती खंड: 230769
4/13 = 0.307692307692…
आवर्ती खंड: 307692
5/13 = 0.384615384615…
आवर्ती खंड: 384615
6/13 = 0.461538461538…
आवर्ती खंड: 461538
यहाँ हम देखते हैं कि:

  • प्रत्येक दशमलव आवर्ती है।
  • आवर्ती खंड एक-दूसरे के चक्रीय क्रम-परिवर्तन हैं।
  • अतः, हाँ, यह दशमलव प्रसार चक्रीय गुण को प्रदर्शित करता है।

3. निम्नलिखित संख्याओं को परिमेय या अपरिमेय के रूप में वर्गीकृत कीजिए –

(i) √81
(ii) √12
(iii) 0.33333 …
(iv) 0.123451234512345 …
(v) 1.01001000100001… (इस प्रतिरूप पर ध्यान दीजिए- क्या इसमें एकल खंड की पुनरावृत्ति हो रही है?)
(vi) 23.5601856122398747901 20
परिमेय संख्याओं की स्थिति में उनके स्पष्ट भिन्न रूप को ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
(i) √81
√81 = 9
चूँकि 9 को 9/1 के रूप में लिखा जा सकता है, अतः यह एक परिमेय संख्या है।
अतः, √81 परिमेय है।

(ii) √12
√12 = 2√3
चूँकि √3 अपरिमेय  है, अतः √12 भी अपरिमेय है।
अतः, √12 अपरिमेय है।

(iii) 0.33333…
0.33333… = 1/3
यह एक आवर्ती दशमलव है, अतः यह परिमेय है।
अतः, 0.33333… परिमेय है। स्पष्ट भिन्न रूप: 1/3

(iv) 0.123451234512345…
खंड 12345 निरंतर दोहराया जा रहा है।
एक आवर्ती दशमलव परिमेय होती है।
मान लीजिए x = 0.123451234512345…
तब, 100000x = 12345.123451234512345…
घटाने पर:
100000x − x = 12345
99999x = 12345
x = 12345/99999
x = 4115/33333
अतः, 0.123451234512345… परिमेय है। स्पष्ट भिन्न रूप: 4115/33333

(v) 1.01001000100001…
यह दशमलव न तो सांत है और न ही किसी निश्चित खंड की पुनरावृत्ति करता है।
1 के बीच शून्यों की संख्या निरंतर बदलती रहती है।
अतः, यह असांत और अनावर्ती है।
अतः, 1.01001000100001… अपरिमेय है।
(vi) 23.560185612239874790120
यह एक सांत दशमलव है।
प्रत्येक सांत दशमलव परिमेय होती है।
भिन्न रूप में बदलने पर:
23.560185612239874790120 = 23560185612239874790120/1000000000000000000000
अतः, 23.560185612239874790120 परिमेय है। स्पष्ट भिन्न रूप: 23560185612239874790120/1000000000000000000000

4. संख्या 0.9̄ (अर्थात 0.99999) एक परिमेय संख्या है। बीजगणित (मान लीजिए x = 0.9̄ है, 10 से गुणा कीजिए और घटाइए) का उपयोग करते हुए व्याख्या कीजिए कि 0.9 ठीक 1 के समान क्यों है?

उत्तर:
मान लीजिए x = 0.99999…
दोनों पक्षों को 10 से गुणा करने पर:
10x = 9.99999…
अब घटाने पर:
10x − x = 9.99999… − 0.99999…
9x = 9
x = 1
परंतु x = 0.99999…
अतः, 0.99999… = 1

5. हम देख चुके हैं कि 1/7 का आवर्ती खंड एक चक्रीय संख्या है। कुछ और संख्याओं (n) को ज्ञात करने का प्रयास कीजिए, जिनके प्रतिलोम (1/n) आवर्ती खंड के ऐसे दशमलव उत्पन्न करते हों, जो चक्रीय हैं।

उत्तर:
कुछ उदाहरण निम्नलिखित हैं:
1/7 = 0.142857142857142857…
1/17 = 0.058823529411764705882352941176470588235294117647…
1/19 = 0.052631578947368421052631578947368421052631578947368421…
इन प्रतिलोमों  से प्राप्त आवर्ती खंड चक्रीय व्यवहार को प्रदर्शित करते हैं।
अतः, ऐसी संख्याओं के उदाहरण हैं: 7, 17, 19, …
ये वे संख्याएँ हैं जिनके प्रतिलोम (1/n) चक्रीय आवर्ती दशमलव उत्पन्न करते हैं।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 अंतिम प्रश्नावली के समाधान

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 अंतिम प्रश्नावली

1. निम्नलिखित परिमेय संख्याओं को दीर्घ विभाजन की प्रक्रिया के माध्यम से सांत दशमलव या अनावर्ती और आवर्ती दशमलव (जो भी उपयुक्त हो) में रूपांतरित कीजिए –

(i) 3/50
(ii) 2/9
उत्तर:
(i) 3/50
3/50 = 0.06
अतः, 3/50 एक सांत दशमलव है।

(ii) 2/9
2/9 = 0.2222…
= 0.2̄
अतः, 2/9 एक असांत आवर्ती दशमलव है।

2. सिद्ध कीजिए कि √5 एक अपरिमेय संख्या है।

उत्तर:
हम विरोधाभास द्वारा प्रमाण का उपयोग करेंगे।
मान लीजिए कि √5 परिमेय है। तब इसे p/q के रूप में लिखा जा सकता है:
मान लीजिए √5 = p/q, जहाँ p और q पूर्णांक हैं, q ≠ 0, और p/q निम्नतम रूप में है (अर्थात p और q का 1 के अतिरिक्त कोई उभयनिष्ठ गुणनखंड नहीं है)।
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर, हमें प्राप्त होता है:
5 = p²/q²
अतः, p² = 5q²
इसका अर्थ है कि p², 5 से विभाज्य है।
अतः, p भी 5 से विभाज्य है।
तो मान लीजिए p = 5k, जहाँ k एक पूर्णांक है।
इसे p² = 5q² में रखने पर, हमें प्राप्त होता है:
(5k)² = 5q²
⇒ 25k² = 5q²
⇒ 5k² = q²
यह दर्शाता है कि q², 5 से विभाज्य है।
अतः, q भी 5 से विभाज्य है।
अतः, p और q दोनों 5 से विभाज्य हैं।
परंतु यह हमारी इस मान्यता का विरोधाभास करता है कि p/q निम्नतम रूप में था।
अतः, हमारी मान्यता गलत है।
इसलिए, √5 एक अपरिमेय संख्या है।

3. निम्नलिखित दशमलव संख्याओं को p/q के रूप में रूपांतरित कीजिए –

(i) 12.6
(ii) 0.0120
(iii) 3.052̄
(iv) 1.235̄
(v) 0.2̄3
(vi) 2.05̄
(vii) 2.125̄
(viii) 3.125̄
(ix) 2.1̄625̄
उत्तर:
(i) 12.6
12.6 = 126/10 = 63/5
अतः, 12.6 = 63/5

(ii) 0.0120
0.0120 = 120/10000 = 3/250
अतः, 0.0120 = 3/250

(iii) 3.05̄2̄
मान लीजिए x = 3.052525252…
तब, 10x = 30.52525252…
और 1000x = 3052.52525252…
घटाने पर: 1000x − 10x = 3052.52525252… − 30.52525252…
⇒ 990x = 3022
⇒ x = 3022/990
⇒ x = 1511/495
अतः, 3.05̄2̄ = 1511/495

(iv) 1.23̄5̄
मान लीजिए x = 1.2353535…
तब, 10x = 12.353535… …(1)
और 1000x = 1235.353535… …(2)
समीकरण (2) में से (1) घटाने पर:
1000x − 10x = 1235.353535… − 12.353535…
⇒ 990x = 1223
⇒ x = 1223/990
अतः, 1.23̄5̄ = 1223/990

(v) 0.2̄3̄
मान लीजिए x = 0.232323…
तब, 100x = 23.232323…
घटाने पर: 100x − x = 23.232323… − 0.232323…
⇒ 99x = 23
अतः, x = 23/99
अतः, 0.2̄3̄ = 23/99

(vi) 2.05̄
मान लीजिए x = 2.05555…
तब, 10x = 20.5555…
100x = 205.5555…
घटाने पर: 100x − 10x = 205.5555… − 20.5555…
⇒ 90x = 185
अतः, x = 185/90 = 37/18
अतः, 2.05̄ = 37/18

(vii) 2.125̄
मान लीजिए x = 2.125555…
तब, 100x = 212.5555…
1000x = 2125.5555…
घटाने पर: 1000x − 100x = 2125.5555… − 212.5555…
⇒ 900x = 1913
अतः, x = 1913/900
अतः, 2.125̄ = 1913/900

(viii) 3.125̄
मान लीजिए x = 3.125555…
तब, 100x = 312.5555…
तब, 1000x = 3125.5555…
घटाने पर: 1000x − 100x = 3125.5555… − 312.5555…
⇒ 900x = 2813
अतः, x = 2813/900
अतः, 3.125̄ = 2813/900

(ix) 2.1̄625̄
मान लीजिए x = 2.162516251625…
तब, 10000x = 21625.16251625…
घटाने पर: 10000x − x = 21625.16251625… − 2.16251625…
⇒ 9999x = 21623
अतः, x = 21623/9999
अतः, 2.1̄625̄ = 21623/9999

4. निम्नलिखित परिमेय संख्याओं को संख्या रेखा पर निरूपित कीजिए –

(i) 0.532
(ii) 1.15̄
उत्तर:
(i) 0.532
0.532, 0 और 1 के मध्य स्थित है।
अधिक स्पष्ट रूप से: 0.532 = 532/1000
अतः, हमें 0.53 और 0.54 के मध्य, 0.53 से थोड़ा आगे एक बिंदु अंकित करना है।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 अंतिम प्रश्नावली प्रश्न 4(i) का चित्र

(ii) 1.15̄
1.15̄ = 1.15555…
यह 1 और 2 के मध्य स्थित है।
अधिक स्पष्ट रूप से: 1.15 < 1.15555… < 1.16
अतः, हमें 1.15 और 1.16 के मध्य, 1.15 से थोड़ा आगे एक बिंदु अंकित करना है।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 अंतिम प्रश्नावली प्रश्न 4(ii) का चित्र

5. 3 और 4 के मध्य 6 परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
3 और 4 को उभयनिष्ठ हर के साथ लिखा जा सकता है:
3 = 21/7
4 = 28/7
अतः, 3 और 4 के मध्य छह परिमेय संख्याएँ हैं:
22/7, 23/7, 24/7, 25/7, 26/7, 27/7
अतः, अभीष्ट छह परिमेय संख्याएँ हैं:
22/7, 23/7, 24/7, 25/7, 26/7, 27/7

6. 2/5 और 3/5 के मध्य 5 परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
दोनों भिन्नों को एक बड़े उभयनिष्ठ हर के साथ लिखते हैं:
2/5 = 20/50
3/5 = 30/50
अतः, 20/50 और 30/50 के मध्य पाँच परिमेय संख्याएँ हैं:
21/50, 22/50, 23/50, 24/50, 25/50
अतः, अभीष्ट पाँच परिमेय संख्याएँ हैं:
21/50, 22/50, 23/50, 24/50, 25/50

7. 1/6 और 2/5 के मध्य 5 परिमेय संख्याएँ ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
पहले उभयनिष्ठ हर  लेते हैं:
1/6 = 5/30
2/5 = 12/30
अब 5/30 और 12/30 के मध्य भिन्नें हैं:
6/30, 7/30, 8/30, 9/30, 10/30
अतः, 1/6 और 2/5 के मध्य पाँच परिमेय संख्याएँ हैं:
6/30, 7/30, 8/30, 9/30, 10/30
इन्हें सरलतम रूप में इस प्रकार भी लिखा जा सकता है:
1/5, 7/30, 4/15, 3/10, 1/3

8. यदि x/3 + x/5 = 16/15 है तो परिमेय संख्या x ज्ञात कीजिए।

उत्तर:
दिया है: x/3 + x/5 = 16/15
x उभयनिष्ठ लेने पर, हमें प्राप्त होता है:
x(1/3 + 1/5) = 16/15
अब, 1/3 + 1/5 = 5/15 + 3/15 = 8/15
अतः, x × 8/15 = 16/15
अतः, x = (16/15) ÷ (8/15)
= (16/15) × (15/8)
= 16/8
= 2
अतः, परिमेय संख्या x = 2 है।

9. मान लीजिए a और b दो ऐसी शून्येतर परिमेय संख्याएँ हैं कि a + 1/b = 0 है। कोई संख्यात्मक मान निर्दिष्ट किए बिना निर्धारित कीजिए कि ab धनात्मक है या ऋणात्मक। अपने उत्तर को सत्यापित कीजिए।

उत्तर:
दिया है: a + 1/b = 0
अतः, a = −1/b
दोनों पक्षों को b से गुणा करने पर:
ab = −1
चूँकि ab = −1, जो ऋणात्मक है,
अतः, ab ऋणात्मक है।

10. एक परिमेय संख्या का सांत दशमलव प्रसार है व जिसका अंतिम शून्येतर अंक चौथे दशमलव स्थान पर है। प्रदर्शित कीजिए कि ऐसी संख्या को p/10⁴ के रूप में व्यक्त किया जा सकता है, जहाँ p एक पूर्णांक है जो 10 से अविभाज्य है। क्या यह आवश्यक है कि इस परिमेय संख्या का हर जब अपने सरलतम रूप में लिखा जाता है तो वह 2⁴ या 5⁴ से विभाज्य हो? कारण बताइए।

उत्तर:
यदि अंतिम शून्येतर अंक  चौथे दशमलव स्थान पर स्थित है, तो उस संख्या के ठीक 4 दशमलव स्थान होंगे।
अतः, इसे p/10⁴ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p एक पूर्णांक है।
साथ ही, चूँकि अंतिम शून्येतर अंक चौथे दशमलव स्थान पर है, अतः p, 10 से विभाज्य नहीं है। अन्यथा, दशमलव इससे पहले ही समाप्त हो जाती।
अतः, संख्या को p/10⁴ के रूप में लिखा जा सकता है, जहाँ p एक पूर्णांक है जो 10 से अविभाज्य है।
अब, 10⁴ = 2⁴ × 5⁴
जब भिन्न को निम्नतम रूप में घटाया जाता है, तो p और 10⁴ के मध्य कुछ उभयनिष्ठ गुणनखंड निरस्त हो सकते हैं।
अतः, यह आवश्यक नहीं है कि निम्नतम रूप में हर, 2⁴ या 5⁴ से विभाज्य हो।

उदाहरण: 0.1250 = 1250/10000 = 1/8
यहाँ, निम्नतम रूप में हर 8 = 2³ है, जो 2⁴ या 5⁴ से विभाज्य नहीं है।
अतः, यह आवश्यक नहीं है।

11. विभाजन किए बिना यह निर्धारित कीजिए कि 18/125 का दशमलव प्रसार सांत है या असांत। यदि यह सांत है तो दशमलव स्थानों की संख्या बताइए।

उत्तर:
दिया है: 18/125
हर है: 125 = 5³
चूँकि हर में केवल अभाज्य गुणनखंड 5 है, अतः दशमलव प्रसार सांत  है।
दशमलव स्थानों की संख्या ज्ञात करने के लिए, हर को 10 की घात  बनाते हैं:
125 × 8 = 1000
अतः, 18/125 = 144/1000 = 0.144
इस प्रकार, यह 3 दशमलव स्थानों पर समाप्त होता है।
अतः, 18/125 एक सांत दशमलव है जिसमें 3 दशमलव स्थान हैं।

12. अपने सरलतम रूप में एक परिमेय संख्या का हर 2³ × 5 है। इसके दशमलव प्रसार में कितने दशमलव स्थान होंगे? अपने उत्तर की व्याख्या कीजिए।

उत्तर:
दिया गया हर :
2³ × 5 = 8 × 5 = 40
एक परिमेय संख्या जिसका हर 2ᵐ × 5ⁿ के रूप में है, उसका दशमलव प्रसार सांत  होता है।
दशमलव स्थानों की संख्या, m और n में जो बड़ा हो, उसके बराबर होती है।
यहाँ: m = 3, n = 1
अतः, दशमलव स्थानों की संख्या = 3
उदाहरण: 1/40 = 0.025
अतः, दशमलव प्रसार में 3 दशमलव स्थान होंगे।

13. मान लीजिए a = 7/12 और b = 5/6 है। a और b दोनों को k₁/m और k₂/m के रूप में व्यक्त कीजिए, जहाँ k₁, k₂ और m पूर्णांक हैं और k₂ − k₁ > 6 है। समान हर m का उपयोग करते हुए a और b के मध्य स्थित ठीक पाँच भिन्न परिमेय संख्याएँ लिखिए, जिनके अंश पूर्णांक हों। स्पष्ट कीजिए कि इस विधि से दो परिमेय संख्याओं a और b के मध्य स्थित ऐसी n परिमेय संख्याओं को ज्ञात करने के लिए k₂ − k₁ > n + 1 प्रतिबंध क्यों आवश्यक है।

उत्तर:
दिया है:
a = 7/12
b = 5/6
पहले दोनों को समान हर  में व्यक्त करते हैं।
चूँकि, 5/6 = 10/12,
अतः, a = 7/12 और b = 10/12
यहाँ, k₂ − k₁ = 10 − 7 = 3, जो 6 से बड़ा नहीं है।
अतः, हम दोनों भिन्नों को 3 से गुणा करते हैं:
a = 7/12 = 21/36
b = 10/12 = 30/36

अब, k₁ = 21, k₂ = 30, m = 36
और k₂ − k₁ = 30 − 21 = 9 > 6
अतः, a और b के मध्य पाँच भिन्न परिमेय संख्याएँ हैं:
22/36, 23/36, 24/36, 25/36, 26/36
ये सभी 21/36 और 30/36 के ठीक मध्य स्थित हैं।
अतः, a और b के मध्य ठीक पाँच परिमेय संख्याएँ हैं:
22/36, 23/36, 24/36, 25/36, 26/36
प्रतिबंध k₂ − k₁ > n + 1 आवश्यक क्यों है?

यदि हमें k₁/m और k₂/m के मध्य n परिमेय संख्याएँ चाहिए, तो हमें k₁ और k₂ के ठीक मध्य कम से कम n पूर्णांकों की आवश्यकता है।
k₁ और k₂ के ठीक मध्य स्थित पूर्णांक हैं: k₁ + 1, k₁ + 2, …, k₂ − 1
इनकी संख्या है: (k₂ − k₁ − 1)
इनके मध्य n परिमेय संख्याएँ प्राप्त करने के लिए, हमारे पास होना चाहिए: k₂ − k₁ − 1 ≥ n
अतः, k₂ − k₁ ≥ n + 1

इस विधि में सुरक्षा के लिए, प्रतिबंध को k₂ − k₁ > n + 1 लिया जाता है।
इस प्रकार, यह सुनिश्चित करता है कि k₁ और k₂ के मध्य n भिन्न परिमेय संख्याएँ बनाने के लिए पर्याप्त पूर्णांक अंश उपलब्ध हों।

14. तीन परिमेय संख्याएँ x, y, z इस प्रकार हैं कि x + y + z = 0 और xy + yz + zx = 0 प्रतिबंध संतुष्ट होते हैं। प्रदर्शित कीजिए कि सभी परिमेय संख्याएँ x, y, z एक साथ आवश्यक रूप से शून्य ही होंगी।

उत्तर:
दिया है:
x + y + z = 0 …(1)
xy + yz + zx = 0 …(2)
हम निम्नलिखित सर्वसमिका का उपयोग करते हैं:
(x + y + z)² = x² + y² + z² + 2(xy + yz + zx)
समीकरण (1) से, (x + y + z)² = 0² = 0
समीकरण (2) से, xy + yz + zx = 0
अतः, 0 = x² + y² + z² + 2(0)
अतः, x² + y² + z² = 0

अब, x², y² और z² सभी अऋणात्मक परिमेय संख्याएँ  हैं।
तीन अऋणात्मक संख्याओं का योग 0 तभी होता है जब उनमें से प्रत्येक 0 हो।
अतः, x² = 0, y² = 0, z² = 0
अतः, x = 0, y = 0, z = 0
अतः, सभी परिमेय संख्याएँ x, y और z एक साथ आवश्यक रूप से शून्य ही होंगी।

15. प्रदर्शित कीजिए कि परिमेय संख्या (a+b)/2, परिमेय संख्याओं a और b के मध्य स्थित है।
उत्तर:
मान लीजिए a < b है।
हमें यह दर्शाना है कि:
a < (a + b)/2 < b
पहले, a और (a + b)/2 की तुलना करते हैं:
चूँकि a < b है,
दोनों पक्षों में a जोड़ने पर:
a + a < a + b
2a < a + b
दोनों पक्षों को 2 से भाग देने पर: a < (a + b)/2

अब, (a + b)/2 और b की तुलना करते हैं:
चूँकि a < b है,
दोनों पक्षों में b जोड़ने पर:
a + b < b + b
a + b < 2b
दोनों पक्षों को 2 से भाग देने पर:
(a + b)/2 < b
इस प्रकार, a < (a + b)/2 < b
अतः, परिमेय संख्या (a + b)/2, a और b के मध्य स्थित है।
नोट: यदि b < a है, तो इसी प्रकार हमें प्राप्त होता है:
b < (a + b)/2 < a
अतः, दोनों ही स्थितियों में, (a + b)/2, a और b के मध्य स्थित है।

16. चित्र 3.14 (जिसे वर्गमूल सर्पिल कहा जाता है) में प्रदर्शित सभी समकोण त्रिभुजों के कर्णों की लंबाई ज्ञात कीजिए।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 अंतिम प्रश्नावली प्रश्न 16 का चित्र

उत्तर:
वर्गमूल सर्पिल  में, प्रत्येक नया समकोण त्रिभुज इस प्रकार बनता है:
एक भुजा = 1 इकाई
दूसरी भुजा = पिछले त्रिभुज का कर्ण
पाइथागोरस प्रमेय का उपयोग करते हुए:
पहला त्रिभुज:
भुजाएँ = 1, 1
कर्ण = √(1² + 1²) = √2
दूसरा त्रिभुज:
भुजाएँ = √2, 1
कर्ण = √[(√2)² + 1²] = √3
तीसरा त्रिभुज:
भुजाएँ = √3, 1
कर्ण = √[(√3)² + 1²] = √4 = 2
चौथा त्रिभुज:
भुजाएँ = 2, 1
कर्ण = √(2² + 1²) = √5
पाँचवाँ त्रिभुज:
भुजाएँ = √5, 1
कर्ण = √6
छठा त्रिभुज:
कर्ण = √7
सातवाँ त्रिभुज:
कर्ण = √8 = 2√2
आठवाँ त्रिभुज:
कर्ण = √9 = 3
नौवाँ त्रिभुज:
कर्ण = √10
दसवाँ त्रिभुज:
कर्ण = √11
इस प्रकार, वर्गमूल सर्पिल में त्रिभुजों के कर्णों की लंबाइयाँ हैं:
√2, √3, √4, √5, √6, √7, √8, √9, √10, √11, …
अर्थात, √2, √3, 2, √5, √6, √7, 2√2, 3, √10, √11, …
अतः, सामान्यतः, कर्ण की लंबाइयाँ इस प्रतिरूप का अनुसरण करती हैं:
√2, √3, √4, √5, √6, … जितने भी त्रिभुज चित्र में बनाए गए हैं, उतने तक।

कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 3 अंतिम प्रश्नावली प्रश्न 16 के उत्तर का चित्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

“संख्याओं का संसार” अध्याय में सबसे अलग और नई बात क्या है, जो पुरानी एनसीईआरटी किताबों में नहीं थी?

इस अध्याय की सबसे अनोखी बात यह है कि यह विषय को शुद्ध गणितीय नियमों से नहीं, बल्कि गणित के इतिहास और मानवीय सभ्यता के विकास से जोड़कर पढ़ाता है। पुरानी किताबों में सीधे “परिमेय संख्या किसे कहते हैं” जैसी परिभाषा से शुरुआत होती थी, जबकि यहाँ बच्चों को पहले बताया जाता है कि हज़ारों साल पहले सरस्वती नदी के किनारे चरवाहे मिट्टी के घड़े में कंकड़ डालकर गिनती कैसे करते थे, अफ्रीका की लेबोम्बो और इशांगो अस्थियों पर उकेरे गए निशान क्या दर्शाते हैं, और भारत के ब्रह्मगुप्त ने शून्य को एक वास्तविक संख्या के रूप में कैसे स्थापित किया। यह ऐतिहासिक-सांस्कृतिक दृष्टिकोण बच्चों को गणित को केवल सूत्रों का समूह न मानकर एक मानवीय खोज-यात्रा के रूप में समझने में मदद करता है, जो एनसीएफ 2023 के नए दृष्टिकोण के अनुरूप है।

यदि कोई विद्यार्थी परिमेय और अपरिमेय संख्या में अंतर करने में भ्रमित हो जाता है – इसे आसान भाषा में कैसे समझाया जाए?

सबसे सरल तरीका है दशमलव प्रसार के आधार पर समझाना। परिमेय संख्या वह होती है जिसे p/q के रूप में लिखा जा सके (जहाँ q ≠ 0), और इसका दशमलव प्रसार या तो सांत (समाप्त होने वाला) होता है जैसे 3/8 = 0.375, या आवर्ती (बार-बार दोहराने वाला) होता है जैसे 5/11 = 0.454545…। वहीं अपरिमेय संख्या को कभी भी p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, और इसका दशमलव प्रसार न कभी समाप्त होता है और न ही किसी प्रतिरूप में दोहराता है, जैसे √2 = 1.4142135… या π = 3.1415926…। बच्चों को यह याद कराना उपयोगी रहता है कि “यदि दशमलव कहीं रुक जाए या दोहराए, तो संख्या परिमेय है; यदि वह अनंत काल तक बिना किसी नियम के चलती रहे, तो वह अपरिमेय है।”

√2 की अपरिमेयता सिद्ध करने वाला “विरोधाभास द्वारा उपपत्ति” वाला प्रमाण कक्षा में कैसे आसानी से पढ़ाया जाए?

यह प्रमाण शुरुआत में जटिल लग सकता है, इसलिए इसे चरणबद्ध कहानी की तरह पढ़ाना सबसे प्रभावी रहता है। सबसे पहले बच्चों से कहें कि “मान लो हमारी बात गलत है” — यानी मान लीजिए √2 एक परिमेय संख्या है और इसे सरलतम भिन्न p/q के रूप में लिखा जा सकता है। फिर दोनों पक्षों का वर्ग करके, चरण-दर-चरण यह दिखाया जाता है कि p और q दोनों ही सम संख्याएँ निकलती हैं, जो शुरुआती मान्यता (कि p/q सरलतम रूप में है) से सीधा विरोधाभास है। चूँकि तार्किक चरणों में कोई त्रुटि नहीं थी, इसलिए मूल कल्पना ही गलत सिद्ध होती है, यानी √2 को भिन्न रूप में व्यक्त नहीं किया जा सकता। श्यामपट्ट पर प्रत्येक चरण को क्रमांकित करके और चित्र 3.11 जैसे फ्लोचार्ट का उपयोग करके पढ़ाने से विद्यार्थी इसे आसानी से आत्मसात कर लेते हैं।

आवर्ती दशमलव (जैसे 0.6̄ या 0.45̄) को भिन्न (p/q) के रूप में बदलने का सबसे आसान तरीका क्या है, ताकि बच्चा घर पर अभ्यास कर सके?

घर पर अभ्यास कराने के लिए तीन आसान चरण याद कराए जा सकते हैं। पहला, संख्या को x मान लें (जैसे x = 0.6̄)। दूसरा, यदि आवर्ती खंड में एक अंक है तो दोनों तरफ 10 से गुणा करें, दो अंक हों तो 100 से, और इसी तरह आगे। तीसरा, नए समीकरण में से पुराने समीकरण को घटाकर आवर्ती भाग को समाप्त करें और फिर x का मान ज्ञात करें — जैसे 10x – x = 6.6̄ – 0.6̄ = 6 से 9x = 6 अर्थात x = 2/3। सामान्य आवर्ती दशमलव (जिसमें दशमलव बिंदु के ठीक बाद कुछ अनावर्ती अंक भी होते हैं, जैसे 0.16̄) के लिए बच्चों को पहले अनावर्ती अंकों को दशमलव बिंदु से पहले खिसकाना सिखाएँ, फिर वही घटाव विधि अपनाएँ। नियमित अभ्यास से यह प्रक्रिया बहुत स्वाभाविक लगने लगती है।

क्या इस अध्याय में पढ़ाई गई “चक्रीय संख्याओं” (जैसे 1/7 = 0.142857) की अवधारणा परीक्षा के लिहाज़ से महत्वपूर्ण है या यह सिर्फ रोचक जानकारी है?

चक्रीय संख्याओं की अवधारणा मुख्य रूप से विद्यार्थियों में गणित के प्रति जिज्ञासा और रुचि जगाने के लिए दी गई है, लेकिन यह पूरी तरह परीक्षा-रहित भी नहीं है। पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से दिखाया गया है कि 142857 को 1 से 6 तक किसी भी संख्या से गुणा करने पर वही अंक चक्रीय क्रम में स्थान बदलते रहते हैं, और अध्याय की अंतिम प्रश्नावली में प्रश्न संख्या 2 और तारांकित प्रश्न 5 में इसी अवधारणा पर आधारित प्रश्न दिए गए हैं (जैसे 1/13 के आवर्ती खंड की जाँच करना)। इसलिए विद्यार्थियों को इसे केवल रोचक तथ्य के रूप में न लेकर, दीर्घ विभाजन की प्रक्रिया से जोड़कर समझना चाहिए, क्योंकि परीक्षा में इस तरह के प्रतिरूप-आधारित प्रश्न पूछे जा सकते हैं।