एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 11 सावित्री बाई फुले

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 11 एकादश: पाठ: सावित्री बाई फुले के प्रश्न उत्तर सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 8 संस्कृत का पाठ 11 महिलाओं के लिए शिक्षा की आजादी के लिए किए गए संघर्ष पर आधारित है। इस लेख में बताया गया है कि किस प्रकार सावित्री बाई फुले ने शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष किया था। पाठ को अच्छी तरह से समझने के लिए संस्कृत से हिंदी अनुवाद का प्रयोग लाभकारी होगा।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत एकादश: पाठ: सावित्री बाई फुले

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कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 11 सावित्री बाई फुले का हिंदी अनुवाद

संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
उपरि निर्मितं चित्रं पश्यत।ऊपर बने हुए चित्र को देखो।
इदं चित्रं कस्याश्चित्‌ पाठशालाया: वर्तते। यह चित्र किसी पाठशाला का है।
इयं सामान्या पाठशाला नास्ति। यह सामान्य विद्यालय नहीं है।
इयमस्ति महाराष्ट्रस्य प्रथमा कन्यापाठशाला।यह महाराष्ट्र की पहली कन्या पाठशाला है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
एका शिक्षिका गृहात्‌ पुस्तकानि आदाय चलति।एक अध्यापिका घर से पुस्तकें लेकर चलती है।
मार्गे कश्चित्‌ तस्या: उपरि धूलिं कश्चित्‌ च प्रस्तरखण्डान क्षिपति।मार्ग में कोई उसके ऊपर धूल और कोई पत्थर के टुकड़े फेंकता है।
परं सा स्वदृढनिश्चयात्‌ न विचलति। परन्तु वह अपने दृढ़ निश्चय से विचलित नहीं होती है।
स्वविद्यालये कन्याभि: सविनोदम्‌ आलपन्ती सा अध्यापने संलग्ना भवति।अपने विद्यालय में लड़कियों से हँसी मजाक के साथ बात करती हुई वह पढ़ाने में लगी होती है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तस्या: स्वकीयम्‌ अध्ययनमपि सहैव प्रचलति।उसका अपना अध्ययन भी साथ ही चलता है।
केयं महिला? अपि यूयमिमां महिलां जानीथ? कौन है यह महिला? क्या तुम सब इस महिला को जानते हो?
इयमेव महाराष्ट्रस्य प्रथमा महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले नामधेया।यह ही महाराष्ट्र की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले है।
जनवरी मासस्य तृतीये दिवसे १८३१ तमे ख्रिस्ताब्दे महाराष्ट्रस्य नायगांव-नाम्नि स्थाने सावित्री अजायत।3 जनवरी, सन् 1831 में महाराष्ट्र के नायगांव नामक स्थान पर सावित्री का जन्म हुआ।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
तस्या: माता लक्ष्मीबाई पिता च खण्डोजी इति अभिहितौ।उसकी माता लक्ष्मीबाई तथा पिता खंडोजी नामक हुए हैं।
नववर्षदेशीया सा ज्योतिबा-फुले-महोदयेन परिणीता।नौ वर्ष की अवस्था में वह ज्योतिबा फुले महोदय के साथ ब्याही गई।
सोऽपि तदानीं त्रयोदशवर्षकल्प: एव आसीत्‌। उस समय वह भी तेरह वर्ष का ही था।
यतोहि स: स्त्रीशिक्षाया: प्रबल: समर्थक: आसीत्‌ अत: सावित्र्या: मनसि स्थिता अध्ययनाभिलाषा उत्साहं प्राप्तवती। क्योंकि वह स्त्री शिक्षा का प्रबल समर्थक था अतः सावित्री के मन में स्थित पढ़ने की इच्छा को बल प्राप्त हुआ।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
इत: परं सा साग्रहम्‌ आङ्‌ग्लभाषाया अपि अध्ययनं कृतवती।इससे बढ़कर उसने आग्रहपूर्वक अंग्रेजी भाषा का भी अध्ययन किया।
1848 तमे ख्रिस्ताब्दे पुणेनगरे सावित्री ज्योतिबामहोदयेन सह कन्यानां कृते प्रदेशस्य प्रथमं विद्यालयम्‌ आरभत। 1848 ईस्वी सन् में पुणे नगर में सावित्री ने ज्योतिबा महोदय के साथ कन्याओं के लिए प्रदेश के प्रथम विद्यालय को आरम्भ किया।
तदानीं सा केवलं सप्तदशवर्षीया आसीत्‌।तब वह केवल सत्रह वर्ष की थी।
१८५१ तमे ख्रिस्ताब्दे अस्पृश्यत्वात्‌ तिरस्कृतस्य समुदायस्य बालिकानां कृते पृथव्‌तया तया अपर: विद्यालय: प्रारब्ध:।ईस्वी सन् 1851 में छुआछूत के कारण अपमानित समुदाय की बालिकाओं के लिए पृथक् उसके द्वारा दूसरा विद्यालय प्रारम्भ किया गया।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
सामाजिककुरीतीनां सावित्री मुखरं विरोधम्‌ अकरोत्‌।सावित्री ने सामाजिक कुरीतियों का प्रबल विरोध किया।
विधवानां शिरोमुण्डनस्य निराकरणाय सा साक्षात्‌ नापितै: मिलिता।विधवाओं के शिर को मूंडने की प्रथा को दूर करने के लिए वह साक्षात् नाई लोगों से मिली।
फलत: केचन नापिता: अस्यां रूढौ सहभागिताम्‌ अत्यजन्‌।फलस्वरूप कुछ नाइयों ने इस रिवाज़ में सहभागिता का त्याग कर दिया।
एकदा सावित्र्या मार्गे दृष्टं यत्‌ कूपं निकषा शीर्णवस्त्रावृता: तथाकथिता: निम्नजातीया: काश्चित्‌ नार्य: जलं पातुं याचन्ते स्म।एक बार सावित्री ने मार्ग में देखा कि कुएँ के पास फटे पुराने वस्त्रों में ढकी हुई तथाकथित नीच जाति की कुछ स्त्रियाँ जल पीने के लिए याचना कर रही थीं।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
उच्चवर्गीया: उपहासं कुर्वन्त्य: कूपात्‌ जलोद्‌धरणम्‌ अवारयन्‌। उच्च वर्ग वाले उनका मज़ाक उड़ाते हुए कुएँ से जल निकालने के लिए मना कर रहे थे।
सावित्री एतत्‌ अपमानं सोढुं नाशक्नोत्‌। सावित्री इस अपमान को सहन न कर सकी।
सा ता: स्त्रिय: निजक्षेत्रं नीतवती। तत्र तडागं दर्शयित्वा अकथयत्‌ च यत्‌ यथेष्टं जलं नयत।वह उन स्त्रियों को अपने घर ले गई और तालाब को दिखाकर उसने कहा कि (तुम) इच्छा के अनुसार जल ले जाओ।
सार्वजनिकोऽयं तडाग:।यह तालाब सार्वजनिक है।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
अस्मात्‌ जलग्रहणे नास्ति जातिबन्धनम्‌।इससे जल लेने में जाति का बन्धन नहीं है।
तया मनुष्याणां समानताया: स्वतन्त्रतायाश्च पक्ष: सर्वदा सर्वथा समर्थित:।उसने मनुष्यों की समानता और स्वतन्त्रता के पक्ष का सदा तथा पूर्ण रूप से समर्थन किया।
‘महिला सेवामण्डल’ ‘शिशुहत्याप्रतिबन्धकगृहम्‌’ इत्यादीनां संस्थानां स्थापनायां फुलेदम्पत्यो: अवदानं महत्त्वपूर्णम्‌।‘महिला सेवामण्डल’ व ‘शिशुहत्या प्रतिबन्ध गृह’ इत्यादि संस्थाओं की स्थापना में फुले दम्पति (पति-पत्नी) का योगदान महत्त्वपूर्ण है।
सत्यशोधकमण्डलस्य गतिविधिषु अपि सावित्री अतीव सक्रिया आसीत्‌।सत्य शोधक-मण्डल की गतिविधियों में भी सावित्री अत्यधिक सक्रिय थी।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
अस्य मण्डलस्य उद्देश्यम्‌ आसीत्‌ उत्पीडितानां समुदायानां स्वाधि कारान्‌ प्रति जागरणम्‌ इति।इस मण्डल का उद्देश्य था सताए गए समुदायों का अपने अधिकारों के प्रति जागरण।
सावित्री अनेका: संस्था: प्रशासनकौशलेन सञ्चालितवती। सावित्री ने अनेक संस्थाओं को प्रशासन कौशल के द्वारा चलाया।
दुर्भिक्षकाले प्लेग-काले च सा पीडितजनानाम्‌ अश्रान्तम्‌ अविरतं च सेवाम्‌ अकरोत्‌।अकाल के समय तथा प्लेग रोग के समय उसने पीड़ित लोगों की बिना थके निरन्तर सेवा की।
सहायता- सामग्री-व्यवस्थायै सर्वथा प्रयासम्‌ अकरोत्‌।सहायता-सामग्री की व्यवस्था के लिए उसने पूर्णरूपेण प्रयत्न किया।
संस्कृत वाक्यहिंदी अनुवाद
महारोगप्रसारकाले सेवारता सा स्वयम्‌ असाध्यरोगेण ग्रस्ता १८९७ तमे ख्रिस्ताब्दे दिवङ्गता।महारोग के प्रसार के समय सेवा में लगी हुई वह स्वयं असाध्य रोग से ग्रस्त होकर सन् 1897 में मृत्यु को प्राप्त हो गई।
साहित्यरचनया अपि सावित्री महीयते। साहित्य रचना के द्वारा भी सावित्री महान् है।
तस्या: काव्यसङ्कलनद्वयं वर्तते ‘काव्यफुले’ ‘सुबोधरत्नाकर’ चेति।उसके दो काव्यसंकलन हैं-‘काव्य फुले’ तथा ‘सुबोधरत्नाकर’।
भारतदेशे महिलोत्थानस्य गहनावबोधाय सावित्रीमहोदयाया: जीवनचरितम्‌ अवश्यम्‌ अध्येतव्यम्‌।भारतदेश में महिलाओं की उन्नति को गहराई से समझने के लिए सावित्री महोदया के जीवन चरित का अवश्य अध्ययन करना चाहिए।
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