एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 वीराङ्गना पन्नाधाया

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 वीराङ्गना पन्नाधाया के प्रश्न उत्तर और हिंदी अनुवाद विद्यार्थी सत्र 2026-27 के अनुसार यहाँ प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 7 की संस्कृत पाठ्यपुस्तक दीपकम् का द्वादश पाठ – ‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ राजस्थान की एक असाधारण वीरांगना की अविस्मरणीय और हृदयस्पर्शी कथा प्रस्तुत करता है। यह गद्यात्मक पाठ सोलहवीं शताब्दी के मेवाड़ राज्य की उस ऐतिहासिक घटना पर आधारित है, जब धाय माँ पन्नाधाया ने व्यक्तिहित से ऊपर राष्ट्रहित को रखते हुए अपने सगे पुत्र चन्दन का बलिदान देकर राजकुमार उदयसिंह की प्राणरक्षा की।

बनवीर के कुटिल षड्यंत्र से राजकुमार को बचाने का उनका यह निर्णय कल्पनातीत साहस और अटूट कर्तव्यनिष्ठा का अद्वितीय उदाहरण है। पन्नाधाया के इसी बलिदान की कोख से आगे चलकर महाराणा प्रताप जैसे पराक्रमी योद्धा का जन्म हुआ। दीपकम् का यह द्वादश अध्याय छात्रों को शौर्य, राष्ट्रभक्ति, विवेक और कर्तव्यनिष्ठा की गहरी प्रेरणा देता है, साथ ही लङ्-लकार (भूतकाल), सन्धि और क्तवतु प्रत्यय जैसे महत्त्वपूर्ण व्याकरण बिंदु भी सिखाता है।

एनसीईआरटी कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न उत्तर

वयम अभ्यासं कुर्मः

1. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानाम् एकपदेन उत्तरं लिखन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 1 के उत्तर का चित्र

2. अधः प्रदत्तानां प्रश्नानां पूर्णवाक्येन उत्तरं लिखन्तु –

(क) पन्नाधाया कस्य अद्वितीयम् उदाहरणम् अस्ति?
(ख) महाराणासङ्ग्रामसिंहस्य पुत्रौ कौ आस्ताम्?
(ग) दुष्टबुद्धिः बनवीरः किम् अचिन्तयत्?
(घ) बनवीरस्य कुतन्त्रं ज्ञात्वा पन्नाधाया किम् अकरोत्?
(ङ) आचन्द्रार्कं किं तिष्ठति?
(च) पन्नाधायायाः बलिदानं किं शिक्षयति?
उत्तर:
(क) पन्नाधाया त्यागस्य अद्वितीयम् उदाहरणम् अस्ति।
(ख) महाराणासङ्ग्रामसिंहस्य पुत्रौ विक्रमादित्यः उदयसिंहः च आस्ताम्।
(ग) दुष्टबुद्धिः बनवीरः अचिन्तयत् यत् अहम् एव एकः उत्तराधिकारी भवेम।
(घ) पन्नाधाया स्वपुत्रं चन्दनं उदयसिंहस्य शयनस्थाने शायितवती।
(ङ) पन्नाधायायाः त्यागः शौर्यं च आचन्द्रार्कं तिष्ठति।
(च) पन्नाधायायाः बलिदानं शौर्यं राष्ट्रभक्तिं कर्तव्यनिष्ठां च शिक्षयति।

3. उदाहरणानुसारम् उचितैः पदैः रिक्तस्थानानि पूरयन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. वाक्यानि पठित्वा उदाहरणानुसार वचनपरिवर्तनं कुर्वन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. उदाहरणानुसारं रेखाङ्कितानि पदानि आश्रित्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानां पदानां सन्धिं कुर्वन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. उदाहरणानुसारम् अधः प्रदत्तानि वाक्यानि वर्तमानकाले (लट्लकारे) परिवर्तयन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 12 के प्रश्न 7 क उत्तर का चित्र

FAQs – कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् पाठ 12: वीराङ्गना पन्नाधाया

‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ का हिंदी में अर्थ क्या है?

‘वीराङ्गना’ का अर्थ है वीर नारी और ‘पन्नाधाया’ का अर्थ है पन्ना नाम की धाय माँ। इस प्रकार शीर्षक का पूर्ण भावार्थ है — “वीर नारी पन्ना धाय”। यह शीर्षक अपने आप में पन्नाधाया के असाधारण साहस और अतुलनीय त्याग को पूरी तरह व्यक्त कर देता है।

द्वादश पाठ की कथा का संक्षिप्त सार क्या है?

मेवाड़ के महाराणा संग्रामसिंह के पश्चात दुष्टबुद्धि बनवीर ने छल से उनके पुत्र विक्रमादित्य को मारकर राज्य पर अधिकार कर लिया। तत्पश्चात वह उदयसिंह को भी मारने का षड्यंत्र रचने लगा। जब पन्नाधाया को इस कुटिल योजना का पता चला, तो उन्होंने उदयसिंह के स्थान पर अपने पुत्र चन्दन को सुला दिया। बनवीर ने चन्दन को ही उदयसिंह समझकर मार डाला, जबकि असली राजकुमार सुरक्षित बच गए।

पन्नाधाया के बलिदान का महाराणा प्रताप से क्या संबंध है?

पाठ में स्पष्ट कहा गया है – “यदि पन्नाधाया नाभविष्यत् तर्हि कुतो राणाप्रतापः” अर्थात यदि पन्नाधाया न होतीं तो महाराणा प्रताप का अस्तित्व भी संभव न होता। उदयसिंह के बचने के कारण ही कालान्तर में उनके पुत्र महाराणा प्रताप का जन्म हुआ, जो भारत के सबसे पराक्रमी और प्रसिद्ध योद्धाओं में से एक हैं।

दीपकम् के इस अध्याय में कौन-कौन से व्याकरण बिंदु सिखाए गए हैं?

‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ में लङ्-लकार (भूतकाल), क्तवतु प्रत्यय, वचन परिवर्तन, प्रश्ननिर्माण और स्वर सन्धि जैसे महत्त्वपूर्ण व्याकरण बिंदु सिखाए गए हैं। अभ्यास प्रश्नों में इन्हीं बिंदुओं पर आधारित विविध गतिविधियाँ दी गई हैं, जो छात्रों की व्याकरणिक समझ को सुदृढ़ करती हैं।

लङ्-लकार क्या होता है और इसका प्रयोग कहाँ होता है?

लङ्-लकार संस्कृत का भूतकालिक लकार है, जिसका प्रयोग बीती हुई घटनाओं के वर्णन में किया जाता है। जैसे — ‘बालकः पाठम् अपठत्’ अर्थात बालक ने पाठ पढ़ा। इस पाठ में पन्नाधाया की ऐतिहासिक कथा भूतकाल में होने के कारण सम्पूर्ण वर्णन लङ्-लकार में किया गया है।

क्तवतु प्रत्यय क्या होता है?

भूतकाल में लङ्-लकार के स्थान पर प्रायः क्तवतु प्रत्यय का प्रयोग किया जाता है। यह प्रत्यय पुल्लिंग में ‘वान्’ और स्त्रीलिंग में ‘वती’ के रूप में प्रयुक्त होता है। जैसे — ‘पन्नाधाया रक्षितवती’ (पन्नाधाया ने रक्षा की)। ‘योग्यताविस्तरः’ खंड में इसकी विस्तृत तालिका दी गई है।

परीक्षा की दृष्टि से ‘वीराङ्गना पन्नाधाया’ के कौन से प्रश्न महत्वपूर्ण हैं?

परीक्षा में पन्नाधाया का परिचय, बनवीर का षड्यंत्र, चन्दन के बलिदान की घटना, उदयसिंह और महाराणा प्रताप का संबंध तथा ‘यदि पन्नाधाया नाभविष्यत्…’ वाला कथन अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। व्याकरण में लङ्-लकार की रूपावली, वचन परिवर्तन और सन्धि से संबंधित प्रश्न भी परीक्षा में नियमित रूप से पूछे जाते हैं।

NCERT दीपकम् के द्वादश पाठ का पाठ्यक्रम में क्या उद्देश्य है?

सप्तम कक्षा की संस्कृत पुस्तक के इस पाठ का मुख्य उद्देश्य छात्रों को संस्कृत गद्य पठन के साथ-साथ भारतीय इतिहास की वीर नारियों से परिचित कराना है। साथ ही लङ्-लकार और क्तवतु प्रत्यय जैसे व्याकरण बिंदुओं की व्यावहारिक समझ विकसित करना भी इस अध्याय का प्रमुख शैक्षिक उद्देश्य है।

इस ऐतिहासिक कथा से छात्रों को क्या प्रेरणा मिलती है?

दीपकम् के इस प्रेरणादायक अध्याय से छात्रों को शौर्य, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, विवेक और बलिदान की गहरी सीख मिलती है। पन्नाधाया का यह संदेश कि ‘व्यक्तिहितं न, राष्ट्रहितम् एव श्रेष्ठम्’ छात्रों में स्वार्थ से ऊपर उठकर देश और समाज के लिए जीने की भावना जागृत करता है।

अभिभावक घर पर बच्चों को यह अध्याय याद करने में कैसे मदद कर सकते हैं?

अभिभावक बच्चों को पन्नाधाया की कथा हिंदी में सुनाकर, शब्दार्थ सूची का अभ्यास कराकर और लङ्-लकार की रूपावली को बार-बार लिखवाकर सहायता कर सकते हैं। पन्नाधाया और महाराणा प्रताप से संबंधित चित्र और कहानियाँ दिखाने से बच्चों की रुचि और ऐतिहासिक समझ दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।