एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 9 तरलों के यांत्रिकी गुण

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 9 तरलों के यांत्रिकी गुण के अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर सीबीएसई सत्र 2023-24 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। कक्षा 11 में भौतिक विज्ञान के पाठ 9 के सवाल जवाब तथा अभ्यास के लिए बहुविकल्पीय वस्तुनिष्ठ प्रश्न (एमसीक्यू) भी दिए गए हैं।

कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 9 के लिए एनसीईआरटी समाधान

दाब और उसकी इकाइयाँ

किसी सतह के इकाई क्षेत्रफल पर लगने वाले अभिलम्ब बल को दाब कहते हैं। इसकी इकाई ‘न्यूटन प्रति वर्ग मीटर’ होती है। दाब की और भी कई प्रचलित इकाइयाँ हैं। दाब एक अदिश राशि है।
P = F/A
पास्कल का नियम या द्रव के दाब का संचरण नियम
इस नियम के अनुसार, जब किसी बंद पात्र में रखे द्रव के किसी एक भाग पर संतुलन अवस्था में दाब लगाया जाता है तो बिना क्षय हुए संपूर्ण द्रव का सभी दिशाओं में समान रूप से संचरित हो जाता है। इसे पास्कल का नियम कहते हैं। अथवा द्रव के दाब का संचरण नियम भी कहते हैं।

कक्षा 11 भौतिकी अध्याय 9 के बहुविकल्पीय प्रश्न उत्तर

Q1

किसी धारा रेखा के अनुदिश

[A]. किसी तरल कण का वेग नियत रहता है।
[B]. किसी दी गई स्थिति से गुजरने वाले सभी तरल कणों का वेग नियत होता है।
[C]. किसी दिए गए क्षण पर सभी तरल कणों का वेग नियत होता है।
[D]. किसी तरल कण की चाल नियत रहती है।
Q2

कोई आदर्श तरल, वृत्तीय अनुप्रस्थ काट के असमान पाइप से प्रवाहित होता है जिसके दो अनुभाग के व्यास 2.5 cm तथा 3.75 cm हैं। इन दो पाइपों से प्रवाहित तरल के वेगों का अनुपात है

[A]. 9: 4
[B]. 3: 2
[C]. √3: √2
[D]. √2: √3
Q3

स्पर्श कोण का मान जल-काँच, अंतरापृष्ठ पर 0⁰, ऐथिल अल्कोहल-काँच अंतरापृष्ठ पर 0⁰, मरकरी-काँच अंतरापृष्ठ पर 140⁰ और मिथाइल आयोडाइड-काँच अंतरापृष्ठ पर 30⁰ है। किसी द्रोणी में भरे इन चारों में से किसी एक द्रव में काँच की कोशिका को रखा गया। यह पाया जाता है कि मेनिस्कस उत्तल है। द्रोणी में भरा द्रव है

[A]. जल
[B]. ऐथिल अल्कोहल
[C]. मरकरी
[D]. मेथिल आयोडाइड
Q4

किसी पृष्ठीय अणु के लिए

[A]. इस पर लगने वाला नेट बल शून्य होता है।
[B]. इस पर नेट अधोमुखी बल लगता है।
[C]. भीतर के गुण की तुलना में कम स्थिैतिज ऊर्जा होती है।
[D]. भीतर के अणु की तुलना में कम ऊर्जा होती है।

गेज दाब और वायुमण्डलीय दाब का परिचय

गेज दाब वायुमण्डलीय दाब के सापेक्ष मापा जाता है। यह किसी निकाय पर लगने वाला कुल दाब तथा वायुमण्डलीय दाब में अन्तर को दर्शाता है।
निकाय पर लगने वाला कुल दाब = वायुमंडलीय दाब + गेज दाब
या गेज दाब = निकाय पर लगने वाला कुल दाब – वायुमंडलीय दाब
यदि किसी निकाय का दाब वायुमण्डलीय दाब से अधिक है तो गेज दाब का मान धनात्मक होगा तथा यदि निकाय का दाब वायुमण्डलीय दाब से कम है तो गेज दाब का मान ऋणात्मक होता है। गेज दाब को परम दाब तथा वायुमण्डलीय दाब के अन्तर के रूप में भी दर्शाया जाता है।
उदाहरण: वाहनों के टायरों में वायु-दाब मापने के लिए गेज दाब संकल्पना का ही प्रयोग किया जाता है तथा इसके लिए टायर प्रेशर गेज यंत्र का उपयोग किया जाता है।

कक्षा 11 भौतिक विज्ञान पाठ 9 एमसीक्यू के उत्तर

Q5

दाब अदिश राशि है क्योंकि

[A]. यह बल एवं क्षेत्रफल का अनुपात है तथा बल एवं क्षेत्रफल दोनों सदिश हैं।
[B]. यह बल एवं क्षेत्रफल के परिमाणों का अनुपात है।
[C]. यह क्षेत्रफल के अभिलंबवत् बल के बराबर है।
[D]. यह चयन किए गए क्षेत्र के साइज पर निर्भर नहीं करता।
Q6

कोई लकड़ी का गुटका, जिसके ऊपर कोई सिक्का रखा है, h पात्र में जल का स्तर है। दूरी l गुटके का वह भाग है जो जल में निमग्न है। कुछ समय पश्चात् सिक्का जल में गिर जाता है, तब

[A]. l+h घट जाता है
[B]. h घट जाता है
[C]. l बढ़ जाता है
[D]. h बढ़ जाता है
Q7

ताप बढ़ने पर

[A]. गैसों की श्यानता घटती है।
[B]. द्रवों की श्यानता बढ़ती है।
[C]. गैसों की श्यानता समान रहती है।
[D]. द्रवों की श्यानता घटती है।
Q8

धारारेखी प्रवाह संभवतः उन द्रवों में अधिक होता है

[A]. जिनका उच्च घनत्व हो।
[B]. जिनकी उच्च श्यानता हो।
[C]. जिनका समान घनत्व हो।
[D]. जिनकी निम्न श्यानता हो।

वायुमंडलीय दबाव की परिभाषा और मापन पद्धति

वायुमंडलीय दबाव पृथ्वी के वायुमंडल में किसी सतह की एक इकाई पर हवा के वजन द्वारा लगाया गया बल है। अधिकांश परिस्थितियों में वायुमंडलीय दबाव का लगभग सही अनुमान मापन बिंदु पर उसके ऊपर वाली हवा के वजन द्वारा लगाया जाता है।

वायुमण्डलीय दाब पृथ्वी की सतह से ऊँचाई बढ़ने पर कम होता जाता है। यह किसी भी स्थान पर वायु की ऊँचाई के सापेक्ष स्थिर एवं नियत नहीं रहता है बल्कि मौसम एवं ऋतुओं में परिवर्तन के साथ इसमें भी परिवर्तन होता है।
Pₐ = 𝜌gh
Pₐ = वायुमण्डलीय दाब
𝜌 = पारे का घनत्व
g = गुरुत्वाकर्षण के कारण त्वरण
h = नली में पारे के स्तंभ की ऊँचाई

कक्षा 11 भौतिक विज्ञान पाठ 9 के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

कोई हिमशैल अपने कुछ भाग को जलमग्न करते हुए तैरता है। यदि हिम का घनत्व ¬ 𝜌ᵢ = 0.917g cm⁻³ है, तो हिमशैल के आयतन का कितना भाग जलमग्न रहता है?

माना कि प्यावी हिमशैल का आयतन V है। इस हिमशैल का भार 𝜌ᵢVg होगा। यदि इसका निमज्जित अंश x हो, तो विस्थापित जल का आयतन xV होगा। तब इस पर आरोपित उत्प्लावक बल 𝜌wxVg होगा, 𝜌w जल का घनत्व है।
उत्प्लावन नियम अनुसार:
𝜌ᵢVg = 𝜌wxVg
∴ x = 𝜌ᵢ/𝜌w = 0.917

घनत्व ¬𝜌 का कोई घनाकार गुटका जल के पृष्ठ पर तैर रहा है। इसकी ऊँचाई L का x भाग जल में डूबा है। यह जल से भरा बर्तन ऐलिवेटर पर रखा है जो त्वरण a से उपरिमुखी त्वरित हो रहा है। गुटके का कितना भाग जलमग्न है?

माना कि जल का घनत्व 𝜌w है।
तब 𝜌aL³ + 𝜌L³g = 𝜌w xL³(g + a)
∴ x = 𝜌ᵢ/𝜌w
अतः गुटके का निमज्जित अंश त्वरण पर निर्भर नहीं करता है, चाहे यह गुरुत्व के अधीन हो या लिफ्ट में।

वृक्षों में रस (जो गर्मियों में मुख्यतः जल होता है) त्रिज्या r = 2.5×10⁻⁵ m की कोशिकाओं के किसी निकाय में ऊपर उठता है। रस का पृष्ठ तनाव T = 7.28×10⁻² Nm⁻¹ तथा स्पर्श कोण 0⁰ है। क्या सभी वृक्षों के शीर्ष तक जल की आपूर्ति के लिए केवल पृष्ठ तनाव उत्तरदायी हो सकता है?

रस जिस ऊँचाई तक ऊपर उठेगा वह है:
h = 2T cos0⁰/𝜌gr
= (2 × 7.28×10⁻²)/(10³ × 9.8 × 2.5×10⁻⁵)
≈ 0.6 m
यह वह अधिकतम ऊँचाई है जिस तक इस पृष्ठ तनाव के अधीन जल ऊपर उठ सकता है, क्योंकि अनेक वृक्षों की ऊँचाई इससे अधिक होती है केवल कोशिकत्व के प्रभाव से सभी वृक्षों में जल ऊपर तक चढ़ने की व्याख्या नहीं की जा सकती।

धारा रेखीय प्रवाह

जब तरल के प्रवाह में किसी एक बिंदु पर तरल के सभी कणों का वेग समान हो और एक ही मार्ग से होकर गुजरते हैं तो इस प्रकार के प्रवाह को धारा रेखीय प्रवाह कहते हैं।
टोरिसेली का नियम
यह प्रमेय तरल की गति में ऊर्जा संरक्षण के सिद्धान्त पर आधारित है। इस नियम के अनुसार, जब कोई अश्यान व असम्पीड्य तरल एक स्थान से दूसरे स्थान तक धारा रेखीय प्रवाह में प्रवाहित होता है तो मार्ग के प्रत्येक बिन्दु पर इसके एकांक आयतन की कुल ऊर्जा अर्थात् दाब ऊर्जा, गतिज ऊर्जा तथा स्थितिज ऊर्जा का योग नियत रहता है।

चाल का बहिर्वाह: टोरिसेली का नियम

इस प्रमेय के अनुसार “गुरुत्वाकर्षण बल के तहत किसी छिद्र से बह रहे द्रव का वेग V का मान द्रव की सतह से छिद्र तक की गहराई h तथा गुरुत्वीय त्वरण के दो गुना 2g के , दोनों के वर्गमूल के समानुपाती होता है।
v = √(2gh)

श्यानता का सिद्धान्त और श्यान बल का निर्धारण

जब किसी द्रव की विभिन्न परतें एक दूसरे पर फिसलती हैं या फिसलने का प्रयास करती हैं तो उनकी परतों के मध्य एक स्पर्श रेखीय घर्षण बल कार्य करता है तो परतों के आपस में फिसलने या गति का विरोध करता है तरल के इस बल को श्यान बल कहा जाता है और तरल के इस गुण को श्यानता कहते है।
η = Fl/vA

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