कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 एनसीईआरटी समाधान – प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 के लिए एनसीईआरटी समाधान पाठ 16 प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन के अभ्यास के सभी प्रश्नों के उत्तर पाठ के बीच के पेजों में दिए गए सभी सवाल जवाब छात्र यहाँ से प्राप्त कर सकते हैं। वर्ग 10 विज्ञान पाठ 16 के सभी प्रश्न उत्तर शैक्षणिक सत्र 2021-2022 के अनुसार संशोधित किए गए हैं। छात्र यहाँ वेबसाइट के माध्यम से ऑनलाइन या ऑफलाइन पीडीऍफ़ के रूप में पढ़ सकते हैं मोबाइल का प्रयोग करने वाले विद्यार्थी कक्षा 10 विज्ञान ऑफलाइन समाधान ऐप से भी पढ़ सकते हैं। जो बिना इन्टरनेट के भी कार्य करता है।

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 के लिए एनसीईआरटी समाधान

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 के बहुविकल्पीय प्रश्न (MCQ) उत्तर

Q1

गंगा नदी में कॉलिफॉर्म जीवाणुओं के प्रचुर मात्रा में पाए जाने का प्रमुख कारण क्या है?

[A]. कपड़े धोना
[B]. जल में अधजली लाशों को प्रवाहित करना
[C]. भस्म को जल में प्रवाहित करना
[D]. इलेक्ट्रोप्लेटिंग उद्योगों से निकलने वाले बहि:स्रावों का प्रवाहित किया जाना
Q2

हमारे देश में, बड़े-बड़े वन क्षेत्रों को साफ कर दिया गया है और पौधों की केवल एक ही स्पीशीज की खेती की जाती है। यह पद्धति प्रोत्साहित करती है:

[A]. क्षेत्र की जैव-विविधता को
[B]. प्राकृतिक वन की वृद्धि को
[C]. क्षेत्र में एकलकृषि को
[D]. क्षेत्र में प्राकृतिक पारितंत्र के परिरक्षण को
Q3

‘चिपको आंदोलन’ से मिलने वाला महत्वपूर्ण संदेश कौन-सा है?

[A]. वन संरक्षण प्रयासों में समुदाय की उपेक्षा करना
[B]. विकास कार्यक्रमों के लिए वन के वृक्षों को काट डालना
[C]. वन संरक्षण प्रयासों में समुदाय को शामिल करना
[D]. सरकारी एजेंसियों को निर्विवाद रूप से यह अधिकार होता है कि वे वनों के वृक्षों को काटने के लिए आदेश दे सकें
Q4

गलत कथन चुनिए

[A]. आर्थिक विकास का संबंध पर्यावरण संरक्षण से है
[B]. दीर्घोपयोगी (संपोषित) विकास पणधारियों के दृष्टिकोणों का कोई ध्यान नहीं रखता
[C]. दीर्घोपयोगी विकास, दीर्घकालिक आयोजित और स्थायी विकास होता है
[D]. दीर्घोपयोगी विकास से वर्तमान पीढ़ी के लिए विकास और भावी पीढ़ियों के लिए संसाधनों के संरक्षण को प्रोत्साहन मिलता है

बड़े बाँधों के निर्माण में मुख्य समस्याएँ कौन-कौन सी हैं?

बड़े बाँधों के निर्माण में मुख्य समस्याएँ:

    • सामाजिक समस्याएँ: क्योंकि इससे बड़ी संख्या में किसान और आदिवासी विस्थापित होते हैं और इन्हें मुआवजा भी नहीं मिलता। विकास की विभिन्न परियोजनाओं में विस्थापित होने वाले अधिकतर व्यक्ति गरीब आदिवासी होते हैं जिन्हें इन परियोजनाओं से कोई लाभ नहीं होता तथा उन्हें अपनी भूमि एवं जंगलों से भी हाथ धोना पड़ता है जिसकी क्षतिपूर्ति भी समुचित नहीं होती।
    • आर्थिक समस्याएँ: क्योंकि इनमें जनता का बहुत अधिक धन लगता है और उस अनुपात में लाभ अपेक्षित नहीं है।
    • पर्यावरणीय समस्याएँ: क्योंकि उससे बड़े स्तर पर वनों का विनाश होता है तथा जैव विविधता की क्षति होती है।

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 के अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

वन विभाग ने अपनी नीति में बदलाव करके किस प्रकार मिदनापुर के कई हेक्टेयर वन क्षेत्र का संरक्षण किया?

वन विभाग ने मिदनापुर के अराबाड़ी वन क्षेत्र में एक योजना प्रारंभ की। यहाँ वन विभाग के एक दूरदर्शी अधिकारी ए.केबनर्जी ने ग्रामीणों को अपनी योजना में शामिल किया तथा उनके सहयोग से बुरी तरह से क्षतिग्रस्त साल के वन की 1272 हेक्टेयर क्षेत्र का संरक्षण किया। इसके बदले में निवासियों को क्षेत्र की देखभाल की ज़िम्मेदारी के लिए रोज़गार मिला साथ ही उन्हें वहाँ से उपज की 25 प्रतिशत के उपयोग का अधिकार भी मिला और बहुत कम मूल्य पर र्ईंधन के लिए लकड़ी और पशुओं को चराने की अनुमति भी दी गई। स्थानीय समुदाय की सहमति एवं सक्रिय भागीदारी से 1983 तक अराबाड़ी का सालवन समृद्ध हो गया तथा पहले बेकार कहे जाने वाले वन का मूल्य 12.5 करोड़ आँका गया।

पर्यावरणीय समस्याओं के प्रति जागरूकता किस प्रकार इसे कम करने में सहायक है?

संसाधनों के अविवेकपूर्ण दोहन (नि:शेषण) से उत्पन्न समस्याओं के विषय में जागरूकता हमारे समाज में अपेक्षाकृत एक नया आयाम है। जब यह जागरूकता बढ़ती है तो कुछ न कुछ कदम भी उठाए जाते हैं। आपने गंगा सफाई योजना इसका एक उदहारण है। कई करोड़ की यह योजना करीब 1985 में इसलिए प्रारंभ की गई क्योंकि गंगा के जल की गुणवत्ता बहुत कम हो गई थी। कोलिफार्म जीवाणु का एक वर्ग है जो मानव की आंत्र में पाया जाता है, जल में इसकी उपस्थिति जल का संदूषित होना दर्शाता है।

स्थानीय स्रोतों पर स्थानीय निवासियों का नियंत्रण किस प्रकार कम या समाप्त हो गया?

बड़ी परियोजनाओं जैसे कि विशाल बाँध तथा दूर तक जाने वाली बड़ी-बड़ी नहरों को क्रियान्वित करने के कारण सिंचाई के स्थानीय तरीके उपेक्षित होते गए तथा सरकार धीरे-धीरे इनका प्रबंधन एवं प्रशासन अपने हाथ में लेती चली गई जिससे जल के स्थानीय स्रोतों पर स्थानीय निवासियों का नियंत्रण समाप्त हो गया।

पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान के लिए क्या क्या नियम हैं?

पर्यावरणीय समस्याओं के समाधान अथवा परिवर्तन में आम आदमी अपने आपको असहाय पाता है लेकिन इनके लिए अनेक अंतर्राष्ट्रीय कानून एवं विनियमन हैं तथा हमारे देश में भी पर्यावरण संरक्षण हेतु अनेक कानून हैं। अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय संगठन भी पर्यावरण संरक्षण हेतु कार्य कर रहे हैं। ऐसे अनेक संगठन हैं जो पर्यावरण के प्रति जागरूकता फैलाने में लगे हैं। वे ऐसे क्रियाकलापों का भी प्रोत्साहन करते हैं जिससे हमारे पर्यावरण एवं प्राकृतिक संरक्षण को बढ़ावा मिलता है। अपने आसपास के क्षेत्र/शहर/कस्बे/गाँव में कार्य करने वाले संगठनों के बारे में जानकारी प्राप्त कीजिए।

गंगा में प्रदुषण का मुख्य कारण क्या है?

गंगा हिमालय में स्थित अपने उदगम गंगोत्री से बंगाल की खाड़ी में गंगा सागर तक 2500 km तक की यात्रा करती है। इसके किनारे स्थित उत्तर प्रदेश, बिहार तथा बंगाल के 100 से भी अधिक नगरों ने इसे एक नाले में बदल दिया है। इसका मुख्य कारण इन नगरों द्वारा उत्सर्जित कचरा एवं मल का इसमें प्रवाहित किया जाना है। इसके अतिरिक्त मानव के अन्य क्रियाकलाप हैंनहाना, कपड़े धोना, मृत व्यक्तियों की राख एवं शवों को बहाना। यही नहीं उद्योगों द्वारा उत्पादित रासायनिक उत्सर्जन ने गंगा का प्रदूषण-स्तर इतना बढ़ा दिया है कि इसके विषैले आदि अन्य कारण हैं। इससे जल में मछलियाँ मरने लगीं। नमामि गंगे कार्यक्रम जून 2014 में केंद्र सरकार द्वारा एक प्रमुख कार्यक्रम के रूप में अनुमोदित एक एकीकृत संरक्षण मिशन है। यह प्रदूषण संरक्षण और राष्ट्रीय नदी गंगा के कायाकल्प के प्रभावी न्यूनीकरण के दो उद्देश्यों को पूरा करने के लिए शुरू किया गया था। स्वच्छ गंगा के लिए राष्ट्रीय मिशन कार्यान्वयन विंग है, जिसे अक्तूबर 2016 में स्थापित किया गया था।

पाँच प्रकार के R के विषय में आप क्या जानते हैं?

पाँच प्रकार के R इस प्रकार हैं: Refuse (इनकार), Reduce (कम उपयोग), Reuse (पुन: उपयोग), Repurpose (पुन: प्रयोजन) और Recycle (पुन: चक्रण)।

    • इनकार: इसका अर्थ है कि जिन वस्तुओं की आपको आवश्यकता नहीं है, उन्हें लेने से इनकार करना। उन उत्पादों को खरीदने से इनकार करें जो आपको, आपके परिवार और पर्यावरण को नुकसान पहुँचा सकते हैं। प्लास्टिक के थैलों को लेने के लिए इनकार करें।
    • कम उपयोग: इसका अर्थ है कि आपको कम से कम वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए। आप बिजली के पंखे एवं बल्ब का स्विच बंद करके बिजली बचा सकते हैं। आप टपकने वाले नल की मरम्मत करके जल की बचत कर सकते हैं। आपको आहार व्यर्थ नहीं करना चाहिए। हम कुछ अन्य वस्तुओं के विषय में सोच सकते हैं, जिनका उपयोग कम किया जा सकता है।
    • पुन: उपयोग: यह पुन:चक्रण से भी अच्छा तरीका है क्योंकि पुन:चक्रण में कुछ ऊर्जा व्यय होती है। पुन: उपयोग के तरीके में आप किसी वस्तु का बार-बार उपयोग करते हैं। लिफाफों के फेंकने की अपेक्षा आप फिर से उपयोग में ला सकते हैं। विभिन्न खाद्य पदार्थों के साथ आई प्लास्टिक की बोतलें, डिब्बे इत्यादि का उपयोग में रसोईघर में वस्तुओं को रखने के लिए किया जा सकता हैं। अन्य बहुत-सी वस्तुएँ हैं जिन्हें हम पुन: उपयोग में ला सकते हैं।
    • पुन: प्रयोजन: इसका अर्थ यह है कि जब कोई वस्तु जिस उपयोग के लिए बनी है जब उस उपयोग में नहीं लाई जा सकती है तो उसे किसी अन्य उपयोगी कार्य के लिए प्रयोग करें। उदाहरण के लिए टूटे-फूटे चीनी मिट्‌टी के बर्तनों में पौधे उगाना।
    • पुन: चक्रण: इसका अर्थ है कि आपको प्लास्टिक, कागज़, काँच, धातु की वस्तुएँ तथा ऐसे ही पदार्थों का पुन:चक्रण करके उपयोगी वस्तुएँ बनानी चाहिए। जब तक अति आवश्यक न हो इनका नया उत्पादन/संश्लेषण विवेकपूर्ण नहीं है। इनके पुन: चक्रण के लिए पहले हमें अपद्रव्यों को अलग करना होगा जिससे कि पुन:चक्रण योग्य वस्तुएँ दूसरे कचरे के साथ भराव क्षेत्र में न फेंक दी जाएँ। हम अपने गाँव, कस्बे अथवा नगर में ऐसा कोई प्रबंध कर सकते हैं जिससे इन पदार्थों का पुन:चक्रण किया जा सके।

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 अभ्यास के लिए प्रश्न उत्तर

संपोषित विकास किसे कहते हैं?

संपोषित विकास की संकल्पना मनुष्य की वर्तमान आधारभूत आवश्यकताओं की पूर्ति एवं विकास को प्रोत्साहित तो करती ही है साथ ही साथ भावी संतति के लिए संसाधनों का संरक्षण भी करती है। आर्थिक विकास पर्यावरण संरक्षण से संबंधित है। अत: संपोषित विकास से जीवन के सभी आयाम में परिवर्तन निहित है। यह लोगों के ऊपर निर्भर है कि वे अपने चारों ओर के आर्थिक- सामाजिक एवं पर्यावरणीय स्थितियों के प्रति अपने दृष्टिकोण में परिवर्तन लाएँ तथा प्रत्येक व्यक्ति को प्रकृति के संसाधनों के वर्तमान उपयोग में परिवर्तन के लिए तैयार रहना होगा।

प्राकृतिक संसाधन हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?

उपयोग में आने वाली सड़कें एवं इमारतें ही नहीं बल्कि वे सारी वस्तुएँ जिनका हम उपयोग करते हैं जैसे भोजन, कपड़े, पुस्तकें, खिलौने, फर्नीचर, औज़ार तथा वाहन इत्यादि सभी हमें पृथ्वी पर उपलब्ध प्राकृतिक संसाधनों से प्राप्त होती हैं। हमें केवल एक ही वस्तु पृथ्वी के बाहर से प्राप्त होती है, वह है ऊर्जा जो हमें सूर्य से प्राप्त होती है। परंतु यह ऊर्जा भी हमें पृथ्वी पर उपस्थित जीवों (प्राकृतिक संसाधनों) के द्वारा प्रक्रमों से, तथा विभिन्न भौतिक एवं रासायनिक प्रक्रमों द्वारा ही प्राप्त होती है।

प्राकृतिक संसाधनों की सावधानीपूर्वक (विवेकपूर्ण ढंग से) उपयोग की क्यों आवश्यकता है?

प्राकृतिक संसाधन सीमित हैं और इन्हें पुनः बनाने में वर्षों का समय लग जाएगा। स्वास्थ्य-सेवाओं में सुधार के कारण हमारी जनसंख्या में तीव्र गति से वृद्धि हो रही है। जनसंख्या में वृद्धि के कारण सभी संसाधनों की माँग भी कई गुना तेजी से बढ़ी है। प्राकृतिक संसाधनों का प्रबंधन करते समय दीर्घकालिक दृष्टिकोण को ध्यान में रखना होगा कि ये अगली कई पीढ़ियों तक उपलब्ध हो सकें । हमें इस बात को भी सुनिश्चित करने की आवश्यकता है कि इनका वितरण सभी वर्गों में समान रूप से हो, न कि मात्र मुट्‌ठी भर अमीर और शक्तिशाली लोगों को इनका लाभ मिले। एक बात पर और ध्यान देने की आवश्यकता है कि जब हम इन संसाधनों का दोहन करते हैं तो हम पर्यावरण को क्षति पहुँचाते हैं। उदाहरण के लिए, खनन से प्रदूषण होता है क्योंकि धातु के निष्कर्षण के साथ-साथ बड़ी मात्रा में धातुमल भी निकलता है। अत: संपोषित प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन में अपशिष्टों के सुरक्षित निपटान की भी व्यवस्था होनी चाहिए।

भारतीय संस्कृति में प्रकृति संरक्षण व संपोषित विकास को किस प्रकार किया गया है?

भारतीय साहित्य जैसे उपनिषद व स्मृतियों में जंगलों के उपयोग व प्रबंधन तथा संपोषितता को एक अंतर्निहित विषय के रूप में ज़ोर दिया गया है। संपोषित विकास व प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण की वर्तमान वैश्विक चिंताएँ हमारे देश में प्राकृतिक संरक्षण की लंबी परंपरा व संस्कृति की तुलना में हाल ही की हैं। पूर्व ऐतिहासिक भारत में प्रकृति संरक्षण व संपोषित विकास के सिद्धांत की स्थिरता अपने सबसे अच्छे रूप में स्थापित की गई थी। हमारा प्राचीन साहित्य ऐसे उदाहरणों से भरा है जहाँ मूल्य और प्रकृति के प्रति मनुष्य की संवेदनशीलता की महिमा और सिद्धांत की स्थिरता अपने सबसे अच्छे रूप में स्थापित की गई थी।

वैदिक काल में प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा किस प्रकार की जाती थी?

वैदिक काल के दौरान जंगल वनस्पति के उत्पादक व साथ ही सुरक्षात्मक पहलू, दोनों पर बल दिया गया। वैदिक काल के अंत में कृषि एक प्रमुख आर्थिक गतिविधि के रूप में उभरी। यह वह समय था जब पवित्र जंगलों व गुप़ाओं, पवित्र गलियारों व विभिन्न प्रकार की जातीय-वानिकी प्रथाओं जैसी सांस्कृतिक परिदृश्य की अवधारणाएँ विकसित हुइर्ं। जो वैदिक काल के बाद भी लगातार चलती रहीं। साथ ही, व्यापक श्रेणी की जातीय-वानिकी प्रथाओं को परंपराओं, प्रथाओं व अनुष्ठानों के साथ एकीकृत करते हुए, प्राकृतिक संसाधनों की सुरक्षा की जाती रही।

जैव विविधता के नष्ट होने से पारिस्थितिक स्थायित्व किस प्रकार प्रभावित होता है?

वन ‘जैव विविधता के विशिष्ट स्थल’ को कहते हैं। जैव विविधता का एक आधार उस क्षेत्र में पाई जाने वाली विभिन्न स्पीशीज़ की संख्या है। परंतु, जीवों के विभिन्न स्वरूप (जीवाणु, कवक, फर्न, पुष्पी पादप, सूत्रकृमि, कीट, पक्षी, सरीसृप इत्यादि) भी महत्वपूर्ण हैं। वंशागत जैव विविधता को संरक्षित करने का प्रयास प्राकृतिक संरक्षण के मुख्य उद्देश्यों में से एक है। विविधता के नष्ट होने से पारिस्थितिक स्थायित्व भी नष्ट हो सकता है।

वनों के आस पास रहने वाले लोगों के लिए वन किस प्रकार उपयोगी है?

वन के अंदर एवं इसके निकट रहने वाले लोग अपनी अनेक आवश्यकताओं के लिए वन पर निर्भर रहते हैं। इन लोगों को र्इंधन के लिए जलाउ (लकड़ी) छोटी लकड़ियाँ एवं छाजन की काफी मात्रा में आवश्यकता होती है। बाँस का उपयोग झोपड़ी बनाने, भोजन एकत्र करने एवं भंडारण के लिए होता है। खेती के औज़ार, मछली पकड़ने एवं शिकार के औज़ार मुख्यत: लकड़ी के बने होते हैं इसके अतिरिक्त वन, मछली पकड़ने एवं शिकार-स्थल भी होते हैं। विभिन्न व्यक्ति फल, नट्‌स तथा औषधि एकत्र करने के साथ-साथ अपने पशुओं को वन में चराते हैं अथवा उनका चारा वनों से एकत्र करते हैं।

जल संभर प्रबंधन क्या है? इसके क्या लाभ हैं?

जल संभर प्रबंधन में मिट्‌टी एवं जल संरक्षण पर जोर दिया जाता है जिससे कि ‘जैव-मात्रा’ उत्पादन में वृद्धि हो सके। इसका प्रमुख उद्देश्य भूमि एवं जल के प्राथमिक स्रोतों का विकास, द्वितीयक संसाधन पौधों एवं जंतुओं का उत्पादन इस प्रकार करना जिससे पारिस्थितिक अंसतुलन पैदा न हो। जल संभर प्रबंधन न केवल जल संभर समुदाय का उत्पादन एवं आय बढ़ता है वरन्‌ सूखे एवं बाढ़ को भी शांत करता है तथा निचले बाँध एवं जलाशयों का सेवा काल भी बढ़ाता है। अनेक संगठन प्राचीनकालीन जल संरक्षण प्रणालियों के ऐसे सैकड़ों तरीके विकसित किए हैं जिनके द्वारा धरती पर पड़ने वाली प्रत्येक बूँद का संरक्षण किया जा सके। जैसे छोटे-छोटे गड्‌ढे खोदना, झीलों का निर्माण, साधारण जल संभर व्यवस्था की स्थापना, मिट्‌टी के छोटे बाँध बनाना, रेत तथा चूने के पत्थर के संग्रहक बनाना तथा घर की छतों से जल एकत्र करना। इससे भूजल स्तर बढ़ जाता है तथा नदी भी पुन: जीवित हो जाती है।

जल संभर प्रबंधन क्या है? इसके क्या लाभ हैं?

जल संभर प्रबंधन में मिट्‌टी एवं जल संरक्षण पर जोर दिया जाता है जिससे कि ‘जैव-मात्रा’ उत्पादन में वृद्धि हो सके। इसका प्रमुख उद्देश्य भूमि एवं जल के प्राथमिक स्रोतों का विकास, द्वितीयक संसाधन पौधों एवं जंतुओं का उत्पादन इस प्रकार करना जिससे पारिस्थितिक अंसतुलन पैदा न हो। जल संभर प्रबंधन न केवल जल संभर समुदाय का उत्पादन एवं आय बढ़ता है वरन्‌ सूखे एवं बाढ़ को भी शांत करता है तथा निचले बाँध एवं जलाशयों का सेवा काल भी बढ़ाता है। अनेक संगठन प्राचीनकालीन जल संरक्षण प्रणालियों के ऐसे सैकड़ों तरीके विकसित किए हैं जिनके द्वारा धरती पर पड़ने वाली प्रत्येक बूँद का संरक्षण किया जा सके। जैसे छोटे-छोटे गड्‌ढे खोदना, झीलों का निर्माण, साधारण जल संभर व्यवस्था की स्थापना, मिट्‌टी के छोटे बाँध बनाना, रेत तथा चूने के पत्थर के संग्रहक बनाना तथा घर की छतों से जल एकत्र करना। इससे भूजल स्तर बढ़ जाता है तथा नदी भी पुन: जीवित हो जाती है।

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 के महत्वपूर्ण प्रश्न उत्तर

कई क्षेत्रों में जैव विविधता बड़े स्तर पर क्यों नष्ट हो जाती है?

कुछ विशेष प्रकार के पेड़ों के रोपण से उद्योगों को लाभ मिलाता है जो वन विभाग के लिए भी राजस्व का मुख्य स्रोत हैं। वनों के बहुत बड़े क्षेत्र एक ही प्रकार के वृक्षों जैसे कि पाइन (चीड़), टीक अथवा यूक्लिप्टस के वनों में परिवर्तित हो गए। इन वृक्षों को उगाने के लिए सर्वप्रथम सारे क्षेत्र से अन्य सभी पौधों को हटा दिया जाता है जिससे क्षेत्र की जैव विविधता बड़े स्तर पर नष्ट हो जाती है। यही नहीं स्थानीय लोगों की विभिन्न आवश्यकताओं जैसे कि पशुओं के लिए चारा, औषधि हेतु वनस्पति, फल एवं नट इत्यादि की आपूर्ति वाले पेड़ों कोभी हटा दिया जाता है।

अमृता देवी विश्नोई पुरस्कार क्यों दिया जाता है?

सरकार का वन विभाग जिनके पास वनों का स्वामित्व है तथा वे वनों से प्राप्त संसाधनों का नियंत्रण करते हैं। भारत सरकार ने जीव संरक्षण हेतु अमृता देवी विश्नोई राष्ट्रीय पुरस्कार की व्यवस्था की है। यह पुरस्कार अमृता देवी विश्नोई की स्मृति में दिया जाता है जिन्होंने 1731 में राजस्थान के जोधपुर के पास खेजराली गाँव में ‘खेज़री वृक्षों’ को बचाने हेतु 363 लोगों के साथ अपने आपको बलिदान कर दिया था।
चिपको आंदोलन से आप क्या समझते हैं?

चिपको आंदोलन क्या है?

‘चिपको आंदोलन’ स्थानीय निवासियों को वनों से अलग करने की नीति का ही परिणाम है। यह आंदोलन
हिमालय की ऊँची पर्वतशृंखला में गढ़वाल के ‘रेनी’ नामक गाँव में एक घटना से 1970 के प्रारंभिक दशक में हुआ था। यह विवाद लकड़ी के ठेकेदार एवं स्थानीय लोगों के बीच प्रारंभ हुआ क्योंकि गाँव के समीप के वृक्ष काटने का अधिकार उसे दे दिया गया था। एक निश्चित दिन ठेकेदार के आदमी वृक्ष काटने के लिए आए जबकि वहाँ के निवासी पुरुष वहाँ नहीं थे। बिना किसी डर के वहाँ की महिलाएँ फौरन वहाँ पहुँच गर्इं तथा उन्होंने पेड़ों को अपनी बाँहों में भर कर (चिपक कर) ठेकेदार के आदमियों को वृक्ष काटने से रोका। अंतत: ठेकेदार को अपना काम बंद करना पड़ा। ‘चिपको आंदोलन’ बहुत तेज़ी से बहुत से समुदायों में फैल गया एवं जन संचार ने भी इसमें योगदान दिया तथा सरकार को यह सोचने पर मज़बूर कर दिया कि वन किसके हैं तथा वन संसाधनों के समुचित उपयोग के लिए प्राथमिकता तय करने के लिए पुनर्विचार पर मज़बूर कर दिया।

भारत में जल संग्रहण के कुछ उदाहरण दीजिए।

जल संग्रहण भारत में बहुत पुरानी संकल्पना है। राजस्थान में खादिन, बड़े पात्र एवं नाड़ी, महाराष्ट्र के बंधारस एवं ताल, मध्यप्रदेश एवं उत्तर प्रदेश में बंधिस, बिहार में अहार तथा पाइन, हिमाचल प्रदेश में कुल्ह, जम्मू के काँदी क्षेत्र में तालाब तथा तमिलनाडु में एरिस (ज्ंदा) केरल में सुरंगम, कर्नाटक में कट्‌टा इत्यादि।

बड़े समतल भूभाग में जल संग्रहण किस प्रकार किया जाता है?

बड़े समतल भूभाग में जल संग्रहण स्थल मुख्यत: अर्धचंद्राकार मिट्‌टी के गड्‌ढे अथवा निचले स्थान, वर्षा ऋतु में पूरी तरह भर जाने वाली नालियाँ/प्राकृतिक जल मार्ग पर बनाए गए ‘चेक डैम’ जो कंक्रीट अथवा छोटे कंकड़ पत्थरों द्वारा बनाए जाते हैं। इन छोटे बाँधों के अवरोध के कारण इनके पीछे मानसून का जल तालाबों में भर जाता है। केवल बड़े जलाशयों में जल पूरे वर्ष रहता है। परंतु छोटे जलाशयों में यह जल 6 महीने या उससे भी कम समय तक रहता है उसके बाद यह सूख जाते हैं।

जल के भौम जल के रूप में संरक्षण के क्या लाभ है?

जल के भौम जल के रूप में संरक्षण के कई लाभ हैं। यह जल वाष्प बन कर उड़ता नहीं, परंतु यह आस-पास में फैल जाता है, बड़े क्षेत्र में वनस्पति को नमी प्रदान करता है। इसके अतिरिक्त इससे मच्छरों के जनन की समस्या भी नहीं होती। भौम जल मानव एवं जंतुओं के अपशिष्ट से झीलों तालाबों में ठहरे पानी के विपरीत संदूषित होने से अपेक्षाकृत सुरक्षित रहता है।

हमें ऊर्जा के विकल्पी स्रोतों की खोज करने की आवश्यकता क्यों पड़ती हैं?

पेट्रोलियम एवं कोयला लाखों वर्ष पूर्व जीवों की जैव-मात्रा के अपघटन से प्राप्त होते हैं। अत: चाहे हम जितनी भी सावधानी से इनका उपयोग करें फिर भी यह स्रोत भविष्य में समाप्त हो जाएँगे। अत: तब हमें ऊर्जा के विकल्पी स्रोतों की खोज करने की आवश्यकता होगी। यह संसाधन यदि वर्तमान दर से प्रयोग में आते रहे तो ये कितने समय तक उपलब्ध रहेंगे, तो हमारे पेट्रोलियम के संसाधन लगभग अगले 40 वर्षों में तथा कोयला अगले 200 वर्षों तक उपलब्ध रह सकते हैं। अतः हमें अभी से ही ऊर्जा के नए विकल्पों के बारे में सोचना चाहिए।

हम ऊर्जा की खपत को किस प्रकार कम कर सकते हैं?

कुछ सरल विकल्पों से हमारे ऊर्जा की खपत में अंतर पड़ सकता है:
(i) बस में यात्रा, अपना वाहन प्रयोग में लाना अथवा पैदल/साइकिल से चलना।
(ii) अपने घरों में LED अथवा फ्लोरोसेंट ट्‌यूब का प्रयोग करना।
(iii) लिफ्ट का प्रयोग करना अथवा सीढ़ियों का उपयोग करना।
(iv) सर्दी में एक अतिरिक्त स्वेटर पहनना अथवा हीटर या सिगड़ी का प्रयोग करना।

कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 पेज 302 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 पेज 306 के प्रश्न उत्तर
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 अभ्यास के प्रश्न उत्तर
कक्षा 10 विज्ञान अध्याय 16 अभ्यास के सवाल जवाब