एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 जनन – जीवन की निरंतरता

एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 जनन – जीवन की निरंतरता के समाधान – अभ्यास प्रश्न-उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नों के हल विद्यार्थी यहाँ से निशुल्क प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 9 विज्ञान (एनसीईआरटी अन्वेषण) की नई पाठ्यपुस्तक का अध्याय 11 “जनन: जीवन की निरंतरता” सत्र 2026-27 के लिए जारी किया गया है। इस अध्याय में विद्यार्थियों को अलैंगिक जनन (कर्तन, कलम बाँधना, परतन, मुकुलन, बीजाणु निर्माण, ऊतक संवर्धन), लैंगिक जनन (अर्धसूत्री विभाजन, पुष्पी पादपों में जनन, परागण, निषेचन), जंतुओं में जनन संबंधी विभिन्नताएँ तथा मानव जनन तंत्र (नर व मादा जनन तंत्र, गर्भावस्था, मासिक धर्म, गर्भनिरोधक विधियाँ) के बारे में विस्तार से पढ़ाया गया है। यह अध्याय विद्यार्थियों को समझाता है कि सजीव किस प्रकार अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करते हैं और कैसे यह प्रक्रिया पीढ़ी-दर-पीढ़ी जीवन की निरंतरता बनाए रखती है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 11 अभ्यास प्रश्न उत्तर

एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 समाधान

1. एक पुष्प के परागकोष को परिपक्व होने से पूर्व ही हटा दिया जाता है। इसके पश्चात उसी प्रजाति के दूसरे पौधे के परागकण उसके वर्तिकाग्र पर छिड़के जाते हैं और बीज बनते हैं। यहाँ कौन-सी प्रक्रिया सुनिश्चित होती है?

(i) स्व-परागण
(ii) पर-परागण
(iii) निषेचन
(iv) ऊतक संवर्धन
उत्तर देखें(ii) पर-परागण
कारण: परागकोष हटाने  से स्व-परागण नहीं हो सकता। दूसरे पौधे के परागकण वर्तिकाग्र पर डालने से पर-परागण सुनिश्चित होता है।

2. पौधों में लैंगिक जनन के निम्नलिखित चरणों को सही क्रम में व्यवस्थित कीजिए –

(i) वर्तिकाग्र पर पराग का अंकुरण
(ii) निषेचन
(iii) परागण
(iv) युग्मज का निर्माण
उत्तर देखेंसही क्रम: (iii) → (i) → (ii) → (iv)
• परागण : परागकण परागकोश से वर्तिकाग्र तक पहुँचते हैं (वायु, कीट, जल अथवा पक्षियों द्वारा)।
• वर्तिकाग्र पर परागकण का अंकुरण : परागकण किसी संगत वर्तिकाग्र पर पहुँचकर एक पराग नलिका उत्पन्न करता है जो वर्तिका से होते हुए नीचे की ओर बढ़ते हुए अंडाशय तक पहुँचती है।
• निषेचन : नर युग्मक (शुक्राणु कोशिका) पराग नलिका से होकर गुजरता है और बीजांड के अंदर स्थित अंडकोशिका (मादा युग्मक) के साथ युग्मित हो जाता है।
• युग्मनज का निर्माण : अंडाणु और शुक्राणु के संलयन से युग्मनज बनता है, जो बाद में भ्रूण (और अंततः बीज) में विकसित होता है।

3. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।

अभिकथन: निषेचन के पश्चात निर्मित युग्मज तत्काल गर्भाशय भित्ति से जुड़ जाता है।
कारण: गर्भाशय की भित्ति सदैव युग्मज को ग्रहण करने के लिए तैयार रहती है।
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण, अभिकथन की सही व्याख्या है।
(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं किंतु कारण, अभिकथन की सही व्याख्या नहीं है।
(iii) अभिकथन सत्य है, किंतु कारण असत्य है।
(iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।
उत्तर देखें(iv) अभिकथन असत्य है, किंतु कारण सत्य है।
व्याख्या: निषेचन के बाद युग्मज पहले कई बार विभाजित होकर भ्रूण बनता है। इसके बाद ही गर्भाशय की भित्ति में आरोपण  होता है, इसलिए युग्मज तत्काल नहीं जुड़ता। गर्भाशय की भित्ति उचित समय पर भ्रूण के आरोपण के लिए तैयार रहती है।

4. अलैंगिक जनन से उत्पन्न संततियाँ आनुवंशिक रूप से जनक के समान क्यों होती हैं?

उत्तर देखेंअलैंगिक जनन में केवल एक ही जनक भाग लेता है और नई संतति जनक कोशिका के समसूत्री विभाजन द्वारा उत्पन्न होती है, जिसमें गुणसूत्रों की संख्या और आनुवंशिक पदार्थ जनक के समान रहता है (कोई नया संयोजन नहीं होता, क्योंकि दो अलग जनकों के गुणसूत्रों का मिश्रण नहीं होता)। इसलिए संतति आनुवंशिक रूप से जनक की हूबहू प्रतिकृति (क्लोन) होती है।

5. गर्भावस्था के दौरान मासिक धर्म क्यों रुक जाता है? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखेंगर्भावस्था के दौरान अंडोत्सर्ग रुक जाता है (हार्मोनल परिवर्तनों के कारण), इसलिए कोई नया अंडाणु निषेचन के लिए उपलब्ध नहीं होता। साथ ही, गर्भाशय की भित्ति (आंतरिक आस्तर) विघटित नहीं होती बल्कि विकासशील भ्रूण/गर्भ को पोषण देने और उसे धारण करने के लिए मोटी और सुदृढ़ बनी रहती है। चूँकि रजोधर्म गर्भाशय आस्तर के निस्तारण से होता है, और यह आस्तर गर्भावस्था में बना रहना आवश्यक है, अतः मासिक धर्म रुक जाता है।

6. दिन के समय खिलने वाले पुष्पों की तुलना में रात में खिलने वाले पुष्प सफेद या हल्के रंग के क्यों होते हैं?

उत्तर देखेंरात में खिलने वाले पुष्प सफेद या हल्के रंग के होते हैं क्योंकि रात्रिकालीन परागणकारी (जैसे पतंगे, चमगादड़) मुख्यतः गंध और दृश्यता पर निर्भर करते हैं, दिन के उजाले पर नहीं। हल्के/सफेद रंग के पुष्प कम रोशनी (चांदनी या धुंधलके) में भी अधिक स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं और परागणकारियों को आसानी से आकर्षित कर पाते हैं, जबकि चटकीले रंग कम रोशनी में उतने प्रभावी नहीं होते।

7. लैंगिक रूप से उत्पन्न पौधों की तुलना में कायिक रूप से प्रवर्धित पौधे रोगों के प्रति अधिक संवेदनशील क्यों होते हैं?

उत्तर देखेंकायिक प्रवर्धन (वर्धी प्रजनन) से उत्पन्न पौधे आनुवंशिक रूप से समान (क्लोन) होते हैं क्योंकि वे केवल एक जनक से अलैंगिक रूप से उत्पन्न होते हैं। इनमें आनुवंशिक विविधता नहीं होती। यदि कोई रोगजनक (रोगाणु) एक पौधे को संक्रमित करने में सक्षम है, तो वह समान आनुवंशिक संरचना के कारण सभी पौधों को संक्रमित कर सकता है। इसके विपरीत, लैंगिक जनन से उत्पन्न पौधों में आनुवंशिक विविधता होती है, जिससे कुछ पौधे रोग-प्रतिरोधी हो सकते हैं और पूरी फसल नष्ट नहीं होती।

8. यदि किसी प्रकार के पौधों में सभी पुष्प केवल स्व-परागण करने में सक्षम हों, तो आगे आने वाली अनेक पीढ़ियों में आनुवंशिक विविधता पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखेंयदि सभी पुष्प केवल स्व-परागण करते हैं, तो संतति में जनकों के जीन का कोई नया संयोजन नहीं होगा — प्रत्येक पीढ़ी अपने जनक के समान आनुवंशिक पदार्थ को दोहराएगी। इससे अनेक पीढ़ियों में आनुवंशिक विविधता में कमी आएगी, जिससे पौधे बदलते पर्यावरण, नए रोगों या कीटों के प्रति कम अनुकूलनशील हो जाएँगे और जाति की उत्तरजीविता क्षमता घट सकती है।

9. एक कृषक बड़ी संख्या में आनुवंशिक रूप से एक जैसे पौधे शीघ्रता से उगाना चाहता है। इसके लिए उपयुक्त जनन विधियों का सुझाव दीजिए और समझाइए कि वे प्रभावी क्यों हैं?

उत्तर देखेंआनुवंशिक रूप से समान पौधे शीघ्रता से उगाने के लिए कायिक प्रवर्धन विधियाँ (कर्तन, कलम बाँधना, परतन, ऊतक संवर्धन) उपयुक्त हैं। ये प्रभावी हैं क्योंकि:
• ये अलैंगिक जनन पर आधारित हैं जिसमें केवल एक जनक होता है
• संतति जनक के समरूप (क्लोन) होती है, आनुवंशिक विविधता नहीं आती
• बीज बनने और अंकुरण की धीमी प्रक्रिया से बचा जा सकता है, जिससे पौधे तेजी से और कम समय में तैयार होते हैं
• वांछित गुणों वाली फसल की किस्म को यथावत बनाए रखा जा सकता है

10. सुरेश परागकणों के अंकुरण का अध्ययन करने के लिए विभिन्न शर्करा सांद्रता (0%, 2.5%, 5%, 7.5%, 10%) में परागकण लेकर स्लाइड तैयार करता है।

(i) इस व्यवस्थापन के उपयोग से किन विभिन्न परिकल्पनाओं की जाँच की जा सकती है?
(ii) इस व्यवस्थापन में कौन-से मानदंडों को समान रखा जाना चाहिए?
उत्तर देखें(i) इस व्यवस्थापन से यह जाँचा जा सकता है कि शर्करा सांद्रता का परागकणों के अंकुरण पर क्या प्रभाव पड़ता है — अर्थात कौन-सी सांद्रता परागकण अंकुरण के लिए सबसे अनुकूल है, और क्या अत्यधिक कम या अधिक सांद्रता अंकुरण को रोकती है।
(ii) समान रखे जाने वाले मानदंड: तापमान, परागकणों की मात्रा/संख्या, स्लाइड पर द्रव की मात्रा, अंकुरण के लिए दिया गया समय, आर्द्रता, प्रकाश की स्थिति और परागकणों का स्रोत (एक ही पौधे/प्रजाति से)।

11. नीचे दिए गए चित्र को देखिए और दिए गए संकेतों के आधार पर पता लगाइए कि इन पुष्पों में किस प्रकार का परागण हुआ होगा –

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 के प्रश्न 11 का चित्र

उत्तर:

पुष्पपरागण प्रकारकारण
टमाटरस्व-परागणपुंकेसर वर्तिकाग्र को ढक लेते हैं, जिससे परागकण स्वयं वर्तिकाग्र पर गिर जाते हैं
गेहूँस्व-परागणपुष्प परागण के पश्चात खुलते हैं अर्थात परागण खिलने से पहले ही हो चुका होता है
पपीतापर-परागणनर और मादा पुष्प अलग-अलग पेड़ों पर होते हैं, इसलिए स्व-परागण संभव नहीं, बाहरी माध्यम से परागकण स्थानांतरित होना आवश्यक है

12. उत्तरी भारत के निचले हिमालयी क्षेत्र में सेब एक महत्वपूर्ण नगदी फसल है जो कृषकों की आजीविका में महत्वपूर्ण योगदान करती है। जलवायु परिवर्तन और प्राकृतिक परागणकारियों की जनसंख्या में अत्यधिक गिरावट के कारण सेब की उपज निरंतर घट रही है। एक शोधकर्त्ता कृषक समूह ने दो अलग-अलग स्थानों स्थान ‘क’ और स्थान ‘ख’ पर परीक्षणार्थ सेब के दो उद्यान लगाए। स्थान ‘क’ के उद्यानों में इन्होंने सेब के पुष्पों का परागण प्राकृतिक परागणकारियों द्वारा होने दिया। स्थान ‘ख’ के उद्यानों में इन्होंने मधुमक्खी पालन की मिश्रित कृषि तकनीक अपनाई। सेब के उत्पादन के साथ-साथ कृषक ने शहद का भी उत्पादन किया। सेबों की उपज को चित्र 11.24 में दर्शाया गया है। इसे फल लगने (फलधारी शाखाओं की कुल संख्या के सापेक्ष फलों की संख्या) तथा फल गिरने (विकसित हो रहे फलों का समयपूर्व गिर जाना) के आधार पर सेब के उद्यानों के दो प्रकार के प्रायोगिक स्थलों के संदर्भ में दर्शाया गया है।

(i) शोधकर्त्ता कृषक समूह ने इस शोध कार्य के लिए किन परिकल्पनाओं पर विचार किया होगा?
(ii) प्रयोग में कौन-कौन से विभिन्न मानदंड हैं?
(iii) सेब की अधिक उपज के संदर्भ में परीक्षणार्थ लगाए गए दो उद्यानों ‘क’ और ‘ख’ के आँकड़ों की तुलना और विश्लेषण कीजिए।
(iv) अपने विश्लेषण के आधार पर इन आँकड़ों से आपने क्या निष्कर्ष निकाला?

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 के प्रश्न 12 का चित्र

उत्तर देखें(i) परिकल्पना: मधुमक्खी पालन (कीट-परागण में वृद्धि) सेब के परागण और फल उत्पादन (उपज) को प्राकृतिक परागण की तुलना में बढ़ाता है।
(ii) मानदंड: परागण विधि (प्राकृतिक बनाम मधुमक्खी सहायित), फल लगना (%), फल गिरना (%); अन्य समान रखे मानदंड — पौधों की किस्म, मिट्टी, जलवायु, सिंचाई, आयु आदि।
(iii) तुलना: स्थान ‘ख’ (मधुमक्खी कालोनी सहित) में फल लगने का प्रतिशत (~40%) स्थान ‘क’ (प्राकृतिक परागण, ~26%) की तुलना में अधिक है। इसके विपरीत, फल गिरने का प्रतिशत स्थान ‘ख’ में (~8%) स्थान ‘क’ (~35%) की तुलना में बहुत कम है।
(iv) निष्कर्ष: मधुमक्खी पालन के माध्यम से बेहतर/अधिक परागण होने से फल लगने की दर बढ़ती है और फल गिरने की दर घटती है, जिससे सेब की समग्र उपज में सुधार होता है। अतः मधुमक्खी पालन प्राकृतिक परागणकारियों की कमी की भरपाई कर सेब उत्पादन बढ़ाने में सहायक है।

13. एक विद्यार्थी का दावा है कि मानवों में अंडोत्सर्ग सदैव मासिक धर्म के 14वें दिन होता है। कथन की विवेचनात्मक रूप से जाँच कीजिए और बताइए कि दावा सही है या नहीं। अपने उत्तर के लिए कम-से-कम दो कारण दीजिए।

उत्तर देखेंदावा पूर्णतः सही नहीं है। कारण:
1. मासिक धर्म चक्र (रजोधर्म चक्र) की अवधि सभी महिलाओं में या हर चक्र में एक समान 28 दिन की नहीं होती — यह सामान्यतः 21 से 35 दिनों तक भिन्न हो सकती है। अतः अंडोत्सर्ग का दिन भी तदनुसार बदल जाएगा, हमेशा 14वें दिन नहीं होगा।
2. 14वाँ दिन केवल 28 दिन के आदर्श/प्रारूपिक चक्र पर आधारित एक अनुमानित मान है। तनाव, स्वास्थ्य, आयु और अन्य शारीरिक कारकों के कारण वास्तविक अंडोत्सर्ग का समय व्यक्ति-दर-व्यक्ति और चक्र-दर-चक्र अलग हो सकता है, इसलिए इसे एक निश्चित नियम के रूप में नहीं लिया जा सकता।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 से परीक्षा के लिए अतिरिक्त प्रश्न उत्तर

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 11 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न

1. जनन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजनन वह जैविक प्रक्रिया है जिसके द्वारा सजीव अपने जैसे नए जीव उत्पन्न करते हैं।

2. अलैंगिक जनन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंवह जनन जिसमें एक ही जनक जनक की यथार्थ प्रति जैसी संतति उत्पन्न करता है, अलैंगिक जनन कहलाता है।

3. कायिक प्रवर्धन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंपौधे के कायिक (वर्धनशील) भागों से नए पौधों के उत्पन्न होने की प्रक्रिया को कायिक प्रवर्धन कहते हैं।

4. मुकुलन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजनक काय पर विशिष्ट स्थल पर बार-बार कोशिका विभाजन से मुकुल बनने की प्रक्रिया को मुकुलन कहते हैं।

5. अर्धसूत्री विभाजन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंवह कोशिका विभाजन जिससे युग्मक बनते हैं तथा गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है, अर्धसूत्री विभाजन कहलाता है।

6. आवृतबीजी किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंपुष्पी पादप जिनमें पुष्प जनन अंग के रूप में कार्य करते हैं, आवृतबीजी कहलाते हैं।

7. परागण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंपरागकोश से पुष्प के वर्तिकाग्र तक परागकणों के स्थानांतरण को परागण कहते हैं।

8. स्व-परागण किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजब परागकणों का स्थानांतरण उसी पुष्प या उसी पौधे के अन्य पुष्प के वर्तिकाग्र पर होता है, उसे स्व-परागण कहते हैं।

9. निषेचन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंनर युग्मक और मादा युग्मक (अंडकोशिका) के युग्मन को निषेचन कहते हैं।

10. युग्मनज किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंनिषेचन के पश्चात बनने वाली निषेचित कोशिका को युग्मनज कहते हैं।

11. बाह्य निषेचन किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजब निषेचन शरीर के बाहर होता है, जैसे मछली और मेंढक में, उसे बाह्य निषेचन कहते हैं।

12. वृषण का क्या कार्य है?
उत्तर देखेंवृषण शुक्राणु और नर हार्मोन उत्पन्न करते हैं।

13. अंडोत्सर्ग किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंअंडाशय से परिपक्व अंडाणु के निकलने की प्रक्रिया को अंडोत्सर्ग कहते हैं।

14. रजोधर्म किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंनिषेचन न होने पर गर्भाशय के आस्तर के रक्त सहित बाहर निकलने की प्रक्रिया को रजोधर्म कहते हैं।

15. गर्भावस्था कितने त्रिमास में विभाजित होती है?
उत्तर देखेंमनुष्यों में गर्भावस्था लगभग नौ महीने की होती है, जिसे तीन त्रिमासों में विभाजित किया जाता है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 11 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर

लघु उत्तरीय प्रश्न

1. ब्रायोफिलम में कायिक प्रवर्धन किस प्रकार होता है?
उत्तर देखेंब्रायोफिलम की पत्तियों के किनारों पर छोटे-छोटे पादपक निकलते हैं। जब ये पादपक पत्ती से अलग होकर मिट्टी पर गिरते हैं तो अनुकूल परिस्थितियाँ मिलने पर स्वतंत्र रूप से नए पौधों में विकसित हो जाते हैं। यह अलैंगिक जनन का एक उदाहरण है।

2. यीस्ट में मुकुलन की प्रक्रिया समझाइए।
उत्तर देखेंयीस्ट की जनक कोशिका पर एक छोटा गोलाकार उभार (मुकुल) बनता है, जो धीरे-धीरे बढ़ता है। यह मुकुल वृद्धि करके जनक कोशिका से अलग होकर स्वतंत्र रूप से जीवित रहने लगता है। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर यीस्ट की जनक कोशिकाओं से निकलते छोटे गोलाकार मुकुल स्पष्ट दिखाई देते हैं।

3. कवक (फफूँद) बीजाणुओं के माध्यम से जनन कैसे करते हैं?
उत्तर देखेंकवक बीजाणु थैली जैसी संरचना या कवक तंतुओं की फूली हुई पुटिका पर बीजाणु बनाते हैं। ये बीजाणु हल्के, एककोशिकीय होते हैं और वायु-धाराओं से सरलता से फैलते हैं। नमी और पोषक तत्व मिलते ही ये शीघ्रता से नए कवक के रूप में अंकुरित हो जाते हैं।

4. स्व-परागण और पर-परागण में अंतर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंजब परागकणों का स्थानांतरण उसी पुष्प के वर्तिकाग्र या उसी पौधे के अन्य पुष्प पर होता है, तो उसे स्व-परागण कहते हैं। जब परागकण एक पौधे के पुष्प के परागकोश से किसी दूसरे पौधे के समान प्रजाति के पुष्प के वर्तिकाग्र पर स्थानांतरित होते हैं, तो उसे पर-परागण कहते हैं।

5. निषेचन के पश्चात बीजांड और अंडाशय का क्या होता है?
उत्तर देखेंनिषेचन के पश्चात बीजांडों को घेरे हुए अंडाशय बड़ा होकर फल में विकसित हो जाता है, जबकि उसके भीतर के बीजांड बीज में विकसित हो जाते हैं। बीजों का प्रकीर्णन वायु, जल और जंतुओं द्वारा होता है, जिससे नए पौधे विकसित होते हैं।

6. आंतरिक निषेचन बाह्य निषेचन से बेहतर क्यों माना जाता है?
उत्तर देखेंआंतरिक निषेचन (सरीसृप, पक्षी और स्तनधारियों में) मादा के शरीर के अंदर होता है, जिससे निषेचित अंडे या भ्रूण अधिक सुरक्षित रहते हैं। इसके विपरीत बाह्य निषेचन में कई अंडे जल-धाराओं द्वारा नष्ट हो जाते हैं या अन्य जंतुओं द्वारा खा लिए जाते हैं, इसलिए संतति की उत्तरजीविता कम होती है।

7. नर और मादा युग्मकों (शुक्राणु और अंडाणु) में क्या अंतर है?
उत्तर देखेंशुक्राणु आमाप में अति सूक्ष्म, संख्या में लाखों, सक्रिय रूप से गतिशील होते हैं और उनमें संग्रहीत पोषक तत्व नहीं होते। वहीं अंडाणु आमाप में बड़ा, संख्या में कम, अचल होता है और उसमें पोषक तत्व उपस्थित होते हैं। यह असमरूपता अधिकांश जंतुओं में देखी जाती है।

8. मानव में गर्भावस्था के तीन त्रिमासों में क्या-क्या परिवर्तन होते हैं?
उत्तर देखेंपहले त्रिमास में निषेचित अंडाणु भ्रूण में विकसित होता है और प्रमुख अंगों का निर्माण आरंभ होता है। दूसरे त्रिमास में गर्भ बड़ा और पुष्ट होता है तथा माँ उसके हिलने-डुलने का अनुभव करती है। तीसरे त्रिमास में शिशु तीव्र गति से बढ़ता है और गर्भाशय के बाहर के जीवन के लिए तैयार होता है।

9. मासिक धर्म के समय अपनाई जाने वाली स्वच्छता प्रथाएँ बताइए।
उत्तर देखेंमासिक धर्म संबंधी उत्पादों (सैनिटरी पैड, टैम्पन, मेंस्ट्रुअल कप) का उपयोग करना चाहिए, नियमित स्वच्छता का ध्यान रखना चाहिए, हाथ धोना चाहिए, प्रयुक्त उत्पादों का उचित निपटान करना चाहिए और उत्पादों को नियमित रूप से हर 4-6 घंटे में बदलना चाहिए।

10. जनन कोशिकाएँ (युग्मक) किस प्रक्रिया द्वारा बनती हैं और इसमें गुणसूत्रों की संख्या क्यों घटती है?
उत्तर देखेंयुग्मकों के निर्माण की प्रक्रिया को युग्मकजनन कहते हैं, जो वृषणों और अंडाशयों में अर्धसूत्री विभाजन द्वारा होती है। इसमें गुणसूत्रों की संख्या आधी हो जाती है ताकि निषेचन के समय शुक्राणु और अंडाणु के युग्मन से बने युग्मनज में गुणसूत्रों की संख्या जनकों के समान (46) बनी रहे।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 11 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर

दीर्घ उत्तरीय प्रश्न

1. पौधों में कायिक प्रवर्धन की विभिन्न विधियों (कर्तन, कलम बाँधना, परतन) को उदाहरण सहित समझाइए तथा बताइए कि ये कृषि में किस प्रकार उपयोगी हैं।
उत्तर देखेंकर्तन विधि में पौधे की टहनी को काटकर उसे मिट्टी में लगभग 45°-60° के कोण पर रोपित किया जाता है, जिससे नई जड़ें विकसित होकर नया पौधा बनता है, जैसे गुलाब या मनीप्लांट। कलम बाँधना में एक स्वस्थ बद्धमूल पौधे (जड़ वाला) पर किसी अन्य किस्म के पौधे के तने का टुकड़ा जोड़ा जाता है, जिससे दो किस्मों के गुणों वाला नया पौधा तैयार होता है। परतन में किसी लचीली टहनी के बीच के भाग को मिट्टी में दबाकर जड़ें विकसित की जाती हैं और बाद में उसे जनक पौधे से अलग कर दिया जाता है। इन विधियों से आनुवंशिक रूप से समान, उच्च उपज देने वाले पौधे बड़े पैमाने पर तैयार किए जा सकते हैं, जिससे कृषि एवं बागवानी में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

2. पुष्प के विभिन्न भागों का वर्णन करते हुए बताइए कि परागण और निषेचन की प्रक्रिया किस प्रकार फल और बीज निर्माण की ओर ले जाती है।
उत्तर देखेंएक संपूर्ण पुष्प में चार भाग होते हैं – बाह्यदल, दल, पुंकेसर (नर भाग, जिसमें तंतु और परागकोश होते हैं) और स्त्रीकेसर (मादा भाग, जिसके वर्तिकाग्र, वर्तिका और अंडाशय उपभाग होते हैं)। परागकोश से वर्तिकाग्र तक परागकणों के स्थानांतरण को परागण कहते हैं, जो स्व-परागण या पर-परागण के माध्यम से होता है। परागण के बाद परागकण वर्तिकाग्र पर अंकुरित होकर पराग नलिका बनाते हैं, जो वर्तिका से होते हुए अंडाशय में बीजांड तक पहुँचती है। वहाँ नर युग्मक अंडकोशिका के साथ युग्मित होकर युग्मनज बनाता है – इसे निषेचन कहते हैं। निषेचन के पश्चात बीजांड बीज में और अंडाशय फल में विकसित हो जाता है, जिससे नई पीढ़ी का निर्माण होता है।

3. नर जनन तंत्र और मादा जनन तंत्र के मुख्य अंगों तथा उनके कार्यों का वर्णन कीजिए।
उत्तर देखेंनर जनन तंत्र में वृषण होते हैं जो वृषणकोश नामक थैली में स्थित होते हैं और शुक्राणु तथा नर हार्मोन उत्पन्न करते हैं। शुक्राणु शुक्रवाहिनी से होकर मूत्रमार्ग में पहुँचते हैं, जबकि शुक्राशय और प्रोस्टेट ग्रंथियाँ शुक्राणुओं के पोषण के लिए तरल स्रावित करती हैं। मादा जनन तंत्र में एक जोड़ी अंडाशय होते हैं जो अंडाणु और मादा हार्मोन उत्पन्न करते हैं। डिंबवाहिनियाँ अंडाशय को गर्भाशय से जोड़ती हैं, जहाँ निषेचन की स्थिति में गर्भस्थ शिशु विकसित होता है। गर्भाशय ग्रीवा नामक संकरे मार्ग द्वारा गर्भाशय योनि में खुलता है, जहाँ से शुक्राणु प्रवेश करते हैं और शिशु का जन्म होता है।

4. रजोधर्म चक्र (मासिक धर्म चक्र) के विभिन्न चरणों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंरजोधर्म चक्र सामान्यतः 28 दिनों का होता है, जिसे चार मुख्य चरणों में बाँटा जा सकता है। पहले चरण (दिन 1-5) में रजोधर्म होता है, जिसमें गर्भाशय के आस्तर का निस्तारण होता है। दूसरे चरण (दिन 6-14) में गर्भाशय के आस्तर का क्रमिक रूप से पुनर्निर्माण होता है और अंडाशय में अंडाणु परिपक्व होने लगता है। तीसरे चरण (दिन 14) में अंडोत्सर्ग होता है, जब अंडाशय परिपक्व अंडाणु को निर्मुक्त करता है। चौथे चरण (दिन 15-28) में गर्भाशय आस्तर और मोटा तथा रक्त वाहिकाओं से समृद्ध हो जाता है; यदि निषेचन नहीं होता तो लगभग 28वें दिन यह विघटित होने लगता है और चक्र पुनः दोहराया जाता है।

5. जंतुओं में जनन संबंधी विभिन्नताओं को स्पष्ट करते हुए बताइए कि निषेचन विधि (बाह्य/आंतरिक) संतति की उत्तरजीविता को किस प्रकार प्रभावित करती है।
उत्तर देखेंजंतु लैंगिक जनन की विभिन्न विधियाँ प्रदर्शित करते हैं। मछली और मेंढक जैसे जल में रहने वाले जंतुओं में बाह्य निषेचन होता है, जिसमें मादा एक बार में हजारों अंडे देती है, परंतु कई अंडे जल-धाराओं द्वारा नष्ट हो जाते हैं या अन्य जंतुओं द्वारा खा लिए जाते हैं, इसलिए संतति की उत्तरजीविता कम होती है। इसके विपरीत सरीसृप, पक्षी और स्तनधारियों में आंतरिक निषेचन होता है, जिसमें कम अंडे उत्पन्न होते हैं (जैसे पक्षी में 1-15) परंतु निषेचित अंडे या भ्रूण माँ के शरीर के भीतर या पर्याप्त पीतक के साथ अधिक सुरक्षित रहते हैं, जिससे संतति की उत्तरजीविता मध्यम से उच्च होती है। इस प्रकार निषेचन विधि सीधे तौर पर संतति की जीवित रहने की संभावना को प्रभावित करती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 “जनन – जीवन की निरंतरता” पुराने एनसीईआरटी के “जनन के तरीके क्यों और कैसे” अध्याय जैसा ही है या इसमें बदलाव किए गए हैं?

यह अध्याय नई “अन्वेषण” पाठ्यपुस्तक (सत्र 2026-27) का हिस्सा है और यह पुराने एनसीईआरटी के अध्याय “जीव जनन कैसे करते हैं” पर आधारित है, परंतु इसे नए क्रियाकलाप-आधारित प्रारूप में पुनः लिखा गया है। इसमें मासिक धर्म स्वच्छता, प्रसव पश्चात अवसाद और भारतीय वैज्ञानिकों (सुभाष मुखोपाध्याय, पी. माहेश्वरी) के योगदान जैसे नए सामाजिक-वैज्ञानिक विषय जोड़े गए हैं, जिससे पाठ अधिक व्यावहारिक बना है। मूल जैविक अवधारणाएँ पुराने अध्याय जैसी ही हैं।

विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 कक्षा 9 विज्ञान में कौन-से क्रमांक पर है और पाठ्यपुस्तक के किस भाग में आता है?

यह “अध्याय 11” के रूप में कक्षा 9 की अन्वेषण पाठ्यपुस्तक में शामिल है, जो सत्र 2026-27 के लिए लागू एनसीईआरटी की नई पुस्तक श्रृंखला का भाग है। यह जीव विज्ञान खंड का अंतिम अध्याय है और इसमें कक्षा 7 व 8 के “जिज्ञासा” अध्यायों (यौवनारंभ, जनन तंत्र) का संदर्भ बार-बार दिया गया है, इसलिए इसे उन अध्यायों की निरंतरता के रूप में पढ़ना उपयोगी रहता है।

क्या कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 स्कूल परीक्षा या यूनिट टेस्ट की दृष्टि से महत्वपूर्ण है और इससे किस प्रकार के प्रश्न अधिक पूछे जाते हैं?

कक्षा 9 में यह जीव विज्ञान का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय माना जाता है क्योंकि यह कक्षा 10 में पढ़ाए जाने वाले “जनन” अध्याय की नींव बनाता है। स्कूल परीक्षाओं में इस अध्याय से आरेख-आधारित प्रश्न (पुष्प की संरचना, नर-मादा जनन तंत्र), अभिकथन-कारण प्रश्न, तालिका आधारित डेटा विश्लेषण प्रश्न (जैसे परागकण व बीज निर्माण के आँकड़े) और स्रोत-आधारित दीर्घ उत्तरीय प्रश्न पूछे जाने की संभावना अधिक रहती है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 में दिए गए संवेदनशील विषय (जैसे मानव जनन तंत्र, मासिक धर्म, गर्भनिरोधक) कक्षा में किस प्रकार पढ़ाए जाने चाहिए?

एनसीईआरटी ने इस अध्याय में मानव जनन, मासिक धर्म और गर्भनिरोधक विधियों को वैज्ञानिक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थियों में स्वास्थ्य साक्षरता बढ़ाना है, न कि केवल परीक्षा की तैयारी। विशेषज्ञ सुझाव देते हैं कि शिक्षक इन विषयों को खुले, तथ्यपरक और गैर-शर्मिंदगी वाले वातावरण में पढ़ाएँ, जैसा कि पाठ्यपुस्तक स्वयं “मासिक धर्म लज्जाजनक नहीं” जैसे कथनों के माध्यम से बढ़ावा देती है। अभिभावकों को भी इन विषयों पर बच्चों से खुलकर बात करने की सलाह दी जाती है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 में क्रियाकलाप 11.1 से 11.7 (जैसे कर्तन, कलम बाँधना, यीस्ट अवलोकन, फफूँद उगाना, पुष्प विच्छेदन) घर पर करना कितना सुरक्षित और व्यावहारिक है?

अधिकांश क्रियाकलाप (जैसे कर्तन, परतन, यीस्ट का अवलोकन) सरल घरेलू या विद्यालय-उद्यान सामग्री से किए जा सकते हैं और सुरक्षित हैं। परंतु फफूँद उगाने (क्रियाकलाप 11.3) और सूक्ष्मदर्शी से अवलोकन जैसी गतिविधियों को पाठ्यपुस्तक में स्पष्ट रूप से शिक्षक की देखरेख में विद्यालय में कराने की संस्तुति दी गई है, ताकि हानिकारक फफूँद के संपर्क या उपकरणों के गलत उपयोग से बचा जा सके।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 को अच्छे से समझने के लिए विद्यार्थियों को कौन-सी पूर्व कक्षाओं का ज्ञान होना जरूरी है?

पाठ्यपुस्तक में स्वयं संकेत दिया गया है कि विद्यार्थियों को कक्षा 6 (जिज्ञासा अध्याय 10 — निषेचन), कक्षा 7 (जिज्ञासा अध्याय 6 व 8 — जनन तंत्र और यौवनारंभ) तथा कक्षा 8 (जिज्ञासा अध्याय 2, 12, 13 — कवक, परागण, जनन) का पूर्व ज्ञान होना चाहिए। यह क्रमिक शिक्षण संरचना विद्यार्थियों को जटिल अवधारणाओं (जैसे अर्धसूत्री विभाजन) को आसानी से समझने में मदद करती है।

कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 11 में दिए गए वैज्ञानिकों (सुभाष मुखोपाध्याय, पी. माहेश्वरी) के योगदान के बारे में परीक्षा में क्या पूछा जा सकता है?

“वैज्ञानिक-परिचय” खंड में दी गई जानकारी परीक्षा में लघु उत्तरीय प्रश्नों के रूप में पूछी जा सकती है। डॉ. सुभाष मुखोपाध्याय ने 1978 में कोलकाता में भारत की प्रथम टेस्ट ट्यूब बेबी (कनुप्रिया अग्रवाल) के जन्म में अग्रणी भूमिका निभाई थी, जबकि पी. माहेश्वरी को ‘भारतीय भ्रूणविज्ञान के जनक’ के रूप में जाना जाता है और उन्होंने पुष्पी पादपों में पात्रे निषेचन तकनीक विकसित की थी। विद्यार्थियों को इनके नाम, कार्य और योगदान याद रखने चाहिए।