एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 एक यात्रा – परमाणु के भीतर
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 एक यात्रा – परमाणु के भीतर, समाधान, अभ्यास के प्रश्न उत्तर तथा परीक्षा के लिए प्रश्नों के हल यहाँ से निशुल्क प्राप्त करें। एनसीईआरटी की नई कक्षा 9 विज्ञान पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” (सत्र 2026-27) का अध्याय 8 “एक यात्रा: परमाणु के भीतर” रसायन विज्ञान के सबसे रोचक और मूलभूत विषय — परमाणु की संरचना पर आधारित है। इस अध्याय में विद्यार्थी आचार्य कणाद और डेमोक्रिटस के प्राचीन दार्शनिक विचारों से लेकर जॉन डाल्टन, जे. जे. टॉमसन, अर्नेस्ट रदरफोर्ड और नील्स बोर के वैज्ञानिक परमाणु मॉडलों तक की ऐतिहासिक यात्रा का अध्ययन करते हैं। स्वर्ण पर्णिका प्रयोग, इलेक्ट्रॉन-प्रोटॉन-न्यूट्रॉन जैसे अवपरमाणुक कणों की खोज, परमाणु क्रमांक, द्रव्यमान संख्या, संयोजकता तथा समस्थानिक व समभारिक जैसी महत्वपूर्ण अवधारणाओं को सरल भाषा में समझाया गया है। भारतीय वैज्ञानिकों होमी जहाँगीर भाभा के योगदान का उल्लेख भी इस अध्याय को विशेष बनाता है। यह अध्याय कक्षा 9 की बोर्ड परीक्षा और आगामी कक्षाओं में परमाणु संरचना, आवर्त सारणी तथा रासायनिक बंधन जैसे विषयों की ठोस नींव तैयार करता है।
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कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 8 अभ्यास प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 समाधान
1. अरनेस्ट रदरफोर्ड के स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग के संदर्भ में सही विकल्पों का चयन कीजिए और सही एवं गलत विकल्पों का कारण समझाइए।
(i) इस प्रयोग ने स्पष्ट रूप से नाभिक में न्यूट्रॉनों की उपस्थिति को दर्शाया।
(ii) इसके परिणामों ने प्लम पुडिंग मॉडल को गलत सिद्ध कर दिया और परमाणु के केंद्र में नाभिक होने की अवधारणा को जन्म दिया।
(iii) कुछ अल्फा कणों का अधिक विक्षेपण यह दर्शाता है कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और धन आवेश एक सूक्ष्म केंद्र में संकेंद्रित है।
(iv) जिस प्रकार अल्फा कण विक्षेपित हुए, उससे यह ज्ञात हुआ कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गति करते हैं।
उत्तर देखेंसही विकल्प – (ii) और (iii)
(i) गलत है।
कारण:
स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग से न्यूट्रॉनों की उपस्थिति सिद्ध नहीं हुई थी। न्यूट्रॉन की खोज बाद में जेम्स चैडविक ने की थी।
(ii) सही है।
कारण:
टॉमसन के मॉडल के अनुसार धन आवेश पूरे परमाणु में समान रूप से फैला होना चाहिए था। परंतु कुछ अल्फा कणों का बहुत अधिक विक्षेपण और कुछ का वापस लौटना इस मॉडल से समझाया नहीं जा सका। इससे यह निष्कर्ष निकला कि परमाणु के केंद्र में एक छोटा, सघन और धनावेशित नाभिक होता है।
(iii) सही है।
कारण:
कुछ अल्फा कण बड़े कोणों से विक्षेपित हुए या लौट आए। इससे स्पष्ट हुआ कि परमाणु का अधिकांश द्रव्यमान और संपूर्ण धन आवेश एक अत्यंत छोटे क्षेत्र, अर्थात नाभिक में संकेंद्रित है।
(iv) गलत है।
कारण:
अल्फा कणों के विक्षेपण से नाभिक की उपस्थिति और परमाणु के अधिकांश भाग के रिक्त होने का निष्कर्ष निकला। इलेक्ट्रॉनों का नाभिक के चारों ओर गति करना रदरफोर्ड द्वारा प्रस्तुत परमाणु मॉडल का भाग था, परंतु यह निष्कर्ष सीधे अल्फा कणों के विक्षेपण से सिद्ध नहीं हुआ था।
2. बोर के परमाणु मॉडल के अनुसार निम्नलिखित में से कौन-से कथन सही अथवा गलत हैं? प्रत्येक कथन के लिए एक कारण दीजिए।
(i) इलेक्ट्रॉन निश्चित कक्षाओं में गति करते हुए अपनी ऊर्जा का ह्रास करते हैं और धीरे-धीरे नाभिक में गिर जाते हैं।
(ii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कहीं भी विद्यमान हो सकते हैं और उनकी ऊर्जा निश्चित नहीं होती।
(iii) इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा की कक्षाओं में ऊर्जा ह्रास किए बिना चक्कर लगाते हैं।
(iv) नाभिक के चारों ओर गति करते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा स्तरों के मध्य भी पाए जा सकते हैं।
उत्तर देखें(i) गलत है।
कारण:
बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित स्थायी कक्षाओं में गति करते हुए ऊर्जा का ह्रास नहीं करते और नाभिक में नहीं गिरते।
(ii) गलत है।
कारण:
इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर किसी भी स्थान पर नहीं पाए जा सकते। वे केवल निश्चित ऊर्जा वाली अनुमत कक्षाओं में ही उपस्थित होते हैं।
(iii) सही है।
कारण:
बोर मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली स्थायी कक्षाओं में बिना ऊर्जा खोए नाभिक के चारों ओर गति करते हैं।
(iv) गलत है।
कारण:
इलेक्ट्रॉन दो ऊर्जा स्तरों के मध्य उपस्थित नहीं रह सकते। वे केवल निश्चित कक्षाओं में रह सकते हैं और ऊर्जा का अवशोषण या उत्सर्जन करके एक कक्षा से दूसरी कक्षा में जा सकते हैं।
3. तीन परमाणु कणों X, Y और Z के नाभिकों का संघटन नीचे दिया गया है –

निम्नलिखित के मध्य संबंध स्पष्ट कीजिए –
(i) Y एवं Z
(ii) Z एवं X
उत्तर देखें(i) Y एवं Z के मध्य संबंध:
Y और Z दोनों में प्रोटॉन की संख्या 17 है, परंतु न्यूट्रॉन की संख्या अलग-अलग है।
Y की द्रव्यमान संख्या
= 17 + 18
= 35
Z की द्रव्यमान संख्या
= 17 + 20
= 37
अतः Y और Z एक ही तत्व के समस्थानिक हैं।
(ii) Z एवं X के मध्य संबंध:
Z की द्रव्यमान संख्या
= 17 + 20
= 37
X की द्रव्यमान संख्या
= 18 + 19
= 37
दोनों की द्रव्यमान संख्या समान है, परंतु प्रोटॉन की संख्या भिन्न है।
अतः Z और Z समभारिक हैं।
4. रदरफोर्ड ने स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग में ऐसे कुछ अल्फा कण, जो पुनः लौट आए थे अथवा बड़े कोणों पर विक्षेपित हो गए थे, के आधार पर परमाणु के धनावेशित भाग की अवस्थिति और अभिलक्षणों के विषय में क्या निष्कर्ष निकाला?
उत्तर देखेंरदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का धनावेश पूरे परमाणु में समान रूप से वितरित नहीं होता।
परमाणु का संपूर्ण धन आवेश और अधिकांश द्रव्यमान उसके केंद्र में स्थित एक अत्यंत छोटे, सघन भाग में संकेंद्रित होता है। इस भाग को नाभिक कहा गया।
कुछ अल्फा कण बड़े कोणों से विक्षेपित हुए क्योंकि वे धनावेशित नाभिक के बहुत निकट पहुँचे और प्रबल प्रतिकर्षण बल का अनुभव किया।
बहुत कम अल्फा कण वापस लौट आए, जिससे यह भी स्पष्ट हुआ कि नाभिक अत्यंत छोटा, परंतु बहुत सघन और कठोर होता है।
अधिकांश अल्फा कण बिना विक्षेपित हुए निकल गए, इसलिए रदरफोर्ड ने यह भी निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।
5. निम्नलिखित कथनों की व्याख्या कीजिए और इन्हें सही कालक्रम में व्यवस्थित कीजिए जिससे यह ज्ञात हो सके कि समय के साथ परमाणु मॉडल कैसे विकसित हुए हैं।
(i) बोर के मॉडल ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित कक्षाओं में परिभ्रमण करते हैं और प्रत्येक कक्षा की एक निश्चित ऊर्जा होती है।
(ii) टॉमसन के मॉडल ने परमाणु को एक ‘प्लम पुडिंग’ के रूप में दर्शाया है जिसमें इलेक्ट्रॉन धनावेश के एक गोले में धँसे होते हैं।
(iii) रदरफोर्ड के मॉडल ने प्रस्तावित किया कि परमाणुओं में एक सघन केंद्रीय नाभिक होता है।
(iv) डाल्टन के मॉडल ने परमाणुओं को अविभाज्य कणों के रूप में वर्णित किया।
उत्तर देखेंसही कालक्रम:
(iv) डाल्टन का मॉडल
(ii) टॉमसन का मॉडल
(iii) रदरफोर्ड का मॉडल
(i) बोर का मॉडल
व्याख्या:
• डाल्टन ने परमाणु को पदार्थ का सबसे छोटा, अविभाज्य कण माना।
• टॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज के बाद बताया कि परमाणु धनावेशित गोला है, जिसमें ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन धँसे रहते हैं।
• रदरफोर्ड ने स्वर्ण-पर्णिका प्रयोग के आधार पर बताया कि परमाणु के केंद्र में एक छोटा, सघन तथा धनावेशित नाभिक होता है और परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त होता है।
• बोर ने बताया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में परिभ्रमण करते हैं तथा इन कक्षाओं में रहते हुए ऊर्जा का उत्सर्जन नहीं करते।
6. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर कक्षाओं में गति करते हैं। वे परमाणु से बाहर क्यों नहीं निकल जाते? कौन-सा बल उन्हें नाभिक की ओर आकर्षित रखता है, व्याख्या कीजिए?
उत्तर देखेंनाभिक में धनावेशित प्रोटॉन होते हैं, जबकि इलेक्ट्रॉन ऋणावेशित होते हैं।
विपरीत प्रकार के आवेशों के बीच वैद्युत आकर्षण बल कार्य करता है। यही बल इलेक्ट्रॉनों को नाभिक की ओर आकर्षित रखता है।
बोर के अनुसार इलेक्ट्रॉन निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में इसी आकर्षण बल के कारण परिभ्रमण करते हैं और सामान्य अवस्था में परमाणु से बाहर नहीं निकलते।
अतः इलेक्ट्रॉनों को नाभिक के चारों ओर बाँधे रखने वाला बल वैद्युत आकर्षण बल है।
7. नीचे दिए गए अभिकथन एवं कारण को पढ़िए और उनके संबंध में आगे दिए गए विकल्पों में से सही विकल्प का चयन कीजिए।
अभिकथन – अवपरमाणुक कणों की खोज ने परमाणु संरचना को समझने में सहायता की।
कारण – किसी परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉन की संख्या के समान होती है।
(i) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं और कारण अभिकथन की सही व्याख्या करता है।
(ii) अभिकथन और कारण दोनों सत्य हैं परंतु कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता है।
(iii) अभिकथन सत्य है परंतु कारण असत्य है।
(iv) अभिकथन असत्य है परंतु कारण सत्य है।
उत्तर देखेंसही विकल्प – (ii)
कारण:
अभिकथन सत्य है क्योंकि इलेक्ट्रॉन, प्रोटॉन और न्यूट्रॉन जैसे अवपरमाणुक कणों की खोज से परमाणु की संरचना को समझना संभव हुआ।
कारण भी सत्य है क्योंकि किसी उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या प्रोटॉन की संख्या के बराबर होती है।
किन्तु यह कारण अभिकथन की सही व्याख्या नहीं करता।
8. मैग्नीशियम अनेक जैविक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक है जिसमें मांसपेशियों का संकुचन भी सम्मिलित है। मैग्नीशियम के परमाणु की द्रव्यमान संख्या 24 और परमाणु क्रमांक 12 है तो उसमें – (i) प्रोटॉनों की संख्या (ii) न्यूट्रॉनों की संख्या (iii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या ज्ञात कीजिए। मैग्नीशियम परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था को भी चित्रात्मक रूप से दर्शाइए।
उत्तर देखेंदिया गया है:
द्रव्यमान संख्या = 24
परमाणु क्रमांक = 12
(i) प्रोटॉनों की संख्या
= परमाणु क्रमांक
= 12
(ii) न्यूट्रॉनों की संख्या
= द्रव्यमान संख्या − परमाणु क्रमांक
= 24 − 12
= 12
(iii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉन की संख्या
= 12
अतः
• प्रोटॉन की संख्या = 12
• न्यूट्रॉन की संख्या = 12
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 12
मैग्नीशियम में इलेक्ट्रॉनों की व्यवस्था—
प्रथम कक्षा — 2 इलेक्ट्रॉन
द्वितीय कक्षा — 8 इलेक्ट्रॉन
तृतीय कक्षा — 2 इलेक्ट्रॉन

9. चित्र 8.17 में दर्शाए गए तत्वों के लिए निम्नलिखित जानकारी ज्ञात कीजिए –
(i) तत्व का नाम
(ii) प्रतीक
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या
(v) तत्व की संयोजकता
(vi) प्रोटॉनों की संख्या
(vii) परमाणु क्रमांक

उत्तर देखें(क)
(i) तत्व का नाम — लिथियम
(ii) प्रतीक — लि
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 3
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 1
(v) तत्व की संयोजकता — 1
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 3
(vii) परमाणु क्रमांक — 3
(ख)
(i) तत्व का नाम — नाइट्रोजन
(ii) प्रतीक — एन
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 7
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 5
(v) तत्व की संयोजकता — 3
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 7
(vii) परमाणु क्रमांक — 7
(ग)
(i) तत्व का नाम — ऐलुमिनियम
(ii) प्रतीक — एएल
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 13
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 3
(v) तत्व की संयोजकता — 3
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 13
(vii) परमाणु क्रमांक — 13
(घ)
(i) तत्व का नाम — ऑक्सीजन
(ii) प्रतीक — ओ
(iii) इलेक्ट्रॉनों की कुल संख्या — 8
(iv) संयोजकता इलेक्ट्रॉनों की संख्या — 6
(v) तत्व की संयोजकता — 2
(vi) प्रोटॉनों की संख्या — 8
(vii) परमाणु क्रमांक — 8
10. रदरफोर्ड और बोर दोनों के प्रतिरूपों में इलेक्ट्रॉन नाभिक की परिक्रमा करते हैं, परंतु रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु के स्थायित्व को समझाने में असफल क्यों रहा जबकि बोर का मॉडल सफल रहा?
उत्तर देखेंरदरफोर्ड के मॉडल के अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं। परिक्रमा करते समय इलेक्ट्रॉन लगातार ऊर्जा का उत्सर्जन करते हैं। परिणामस्वरूप उनकी ऊर्जा घटती जाती है और अंततः वे नाभिक में गिर जाने चाहिए। यदि ऐसा होता, तो परमाणु अस्थिर हो जाता। इसलिए रदरफोर्ड का मॉडल परमाणु के स्थायित्व की व्याख्या नहीं कर सका।
बोर ने प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन केवल निश्चित ऊर्जा वाली कक्षाओं में ही परिभ्रमण करते हैं। इन कक्षाओं में रहते समय वे ऊर्जा का न तो उत्सर्जन करते हैं और न ही अवशोषण। इसलिए इलेक्ट्रॉन नाभिक में नहीं गिरते और परमाणु स्थिर बना रहता है। इसी कारण बोर का मॉडल परमाणु के स्थायित्व को सफलतापूर्वक समझा सका।
11. एक परमाणु ⁷⁰X में 31 इलेक्ट्रॉन हैं। बताइए कि इसके नाभिक में कितने न्यूट्रॉन हैं?
उत्तर देखेंदिया गया है:
द्रव्यमान संख्या = 70
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 31
उदासीन परमाणु में
प्रोटॉन की संख्या = इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 31
न्यूट्रॉन की संख्या
= द्रव्यमान संख्या − प्रोटॉन की संख्या
= 70 − 31
= 39
अतः नाभिक में न्यूट्रॉन की संख्या 39 है।
12. एक परमाणु में 79 प्रोटॉन हैं और उसकी द्रव्यमान संख्या 197 है। इसमें –
(i) न्यूट्रॉनों की संख्या
(ii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
की गणना कीजिए।
उत्तर देखेंदिया गया है:
प्रोटॉन की संख्या = 79
द्रव्यमान संख्या = 197
(i) न्यूट्रॉनों की संख्या
= द्रव्यमान संख्या − प्रोटॉन की संख्या
= 197 − 79
= 118
(ii) इलेक्ट्रॉनों की संख्या
उदासीन परमाणु में,
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = प्रोटॉन की संख्या
= 79
अतः
• न्यूट्रॉन की संख्या = 118
• इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 79
13. तालिका 8.5 को पूर्ण कीजिए।

उत्तर:

14. अमन अपने सहपाठियों के साथ परमाणु की संरचना पर चर्चा कर रहा था। चर्चा के समय उसे ज्ञात हुआ कि किसी तत्व X की द्रव्यमान संख्या 35 है और उसमें 18 न्यूट्रॉन हैं। इस जानकारी के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(i) तत्व X में कितने इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन हैं?
(ii) इसका परमाणु क्रमांक क्या है?
(iii) तत्व X की पहचान कीजिए।
(iv) इसका इलेक्ट्रॉनीय विन्यास लिखिए।
(v) इसमें कितने संयोजकता इलेक्ट्रॉन हैं?
(vi) यदि इसके नाभिक में दो न्यूट्रॉन और जोड़ दिए जाएँ तो इसकी द्रव्यमान संख्या क्या होगी?
(vii) X का नए परमाणु के साथ क्या संबंध होगा?
उत्तर देखेंदिया गया है:
द्रव्यमान संख्या = 35
न्यूट्रॉन की संख्या = 18
प्रोटॉन की संख्या
= 35 − 18
= 17
(i) इलेक्ट्रॉनों और प्रोटॉनों की संख्या
प्रोटॉन की संख्या = 17
उदासीन परमाणु में इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 17
(ii) परमाणु क्रमांक
= प्रोटॉन की संख्या
= 17
(iii) तत्व की पहचान
परमाणु क्रमांक 17 वाला तत्व क्लोरीन है।
(iv) इलेक्ट्रॉनीय विन्यास
2, 8, 7
(v) संयोजकता इलेक्ट्रॉन
= 7
(vi) यदि दो न्यूट्रॉन और जोड़ दिए जाएँ—
नई द्रव्यमान संख्या
= 35 + 2
= 37
(vii) संबंध
नया परमाणु और मूल परमाणु दोनों के प्रोटॉन की संख्या समान रहेगी, जबकि न्यूट्रॉन की संख्या भिन्न होगी।
अतः दोनों एक-दूसरे के समस्थानिक होंगे।
15. किसी परमाणु के नाभिक में 12 प्रोटॉन और 12 न्यूट्रॉन हैं। अब कल्पना कीजिए कि सभी इलेक्ट्रॉनों को किन्हीं काल्पनिक कणों से प्रतिस्थापित कर दिया जाता है, जिनका आवेश इलेक्ट्रॉनों के समान ही है परंतु वे 500 गुना अधिक भारी हैं। इस प्रतिस्थापन का परमाणु के निम्नलिखित गुणों पर क्या प्रभाव पड़ेगा?
(i) परमाणु क्रमांक
(ii) परमाणु द्रव्यमान
(iii) द्रव्यमान संख्या
(iv) समग्र आवेश
उत्तर देखेंदिया गया है:
प्रोटॉन की संख्या = 12
न्यूट्रॉन की संख्या = 12
इलेक्ट्रॉनों की संख्या = 12
काल्पनिक कणों का आवेश इलेक्ट्रॉन के समान ऋणात्मक है, परंतु उनका द्रव्यमान इलेक्ट्रॉन से 500 गुना अधिक है।
(i) परमाणु क्रमांक:
परमाणु क्रमांक केवल प्रोटॉन की संख्या पर निर्भर करता है।
प्रोटॉन की संख्या में कोई परिवर्तन नहीं हुआ है।
अतः परमाणु क्रमांक 12 ही रहेगा।
(ii) परमाणु द्रव्यमान:
काल्पनिक कण इलेक्ट्रॉनों से 500 गुना भारी हैं। इसलिए इलेक्ट्रॉनों के स्थान पर इन कणों के आने से परमाणु का कुल द्रव्यमान बढ़ जाएगा।
अतः परमाणु द्रव्यमान में वृद्धि होगी।
(iii) द्रव्यमान संख्या:
द्रव्यमान संख्या
= प्रोटॉन की संख्या + न्यूट्रॉन की संख्या
= 12 + 12
= 24
द्रव्यमान संख्या में इलेक्ट्रॉनों या काल्पनिक कणों के द्रव्यमान को सम्मिलित नहीं किया जाता।
अतः द्रव्यमान संख्या 24 ही रहेगी।
(iv) समग्र आवेश:
12 प्रोटॉन का कुल धनावेश = +12
12 काल्पनिक कणों का कुल ऋणावेश = −12
चूँकि काल्पनिक कणों का आवेश इलेक्ट्रॉनों के समान है, इसलिए कुल धनावेश और कुल ऋणावेश बराबर रहेंगे।
समग्र आवेश
= +12 − 12
= 0
अतः परमाणु विद्युत रूप से उदासीन रहेगा।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 से परीक्षा के लिए प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 8 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. परमाणु सिद्धांत किसने और कब प्रस्तुत किया?
उत्तर देखेंजॉन डाल्टन ने वर्ष 1808 में परमाणु सिद्धांत प्रस्तुत किया, जिसके अनुसार सभी द्रव्य अविभाज्य सूक्ष्म कणों (परमाणुओं) से बने हैं।
2. इलेक्ट्रॉन की खोज किसने की?
उत्तर देखेंजे. जे. टॉमसन ने वर्ष 1897 में कैथोड किरण प्रयोग द्वारा इलेक्ट्रॉन (ऋणावेशित सूक्ष्म कण) की खोज की।
3. प्रोटॉन की खोज किसने की?
उत्तर देखेंअर्नेस्ट रदरफोर्ड ने नाभिक में उपस्थित धनावेशित कणों की खोज की और उन्हें प्रोटॉन नाम दिया।
4. न्यूट्रॉन की खोज किसने की?
उत्तर देखेंजेम्स चैडविक ने वर्ष 1932 में उदासीन कण न्यूट्रॉन की खोज की, जिसका द्रव्यमान प्रोटॉन के लगभग बराबर है।
5. एक इलेक्ट्रॉन पर कितना आवेश होता है?
उत्तर देखेंएक इलेक्ट्रॉन पर (-1.602 × 10⁻¹⁹ C) आवेश होता है, जिसे परिपाटी व सुविधा हेतु -1 लिया जाता है।
6. किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या किस सूत्र से ज्ञात होती है?
उत्तर देखेंकिसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n² सूत्र से ज्ञात होती है, जहाँ n कोश की संख्या है।
7. अष्टक किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंयदि किसी परमाणु के बाह्यतम कोश में 8 इलेक्ट्रॉन हों तो इसे अष्टक कहा जाता है; ऐसे परमाणु सामान्यतः स्थायी होते हैं।
8. द्रव्यमान संख्या का सूत्र लिखिए।
उत्तर देखेंद्रव्यमान संख्या = प्रोटॉनों की संख्या + न्यूट्रॉनों की संख्या; इसे ‘A’ द्वारा दर्शाया जाता है।
9. परमाणु क्रमांक किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंकिसी तत्व के परमाणु के नाभिक में उपस्थित प्रोटॉनों की संख्या को उस तत्व का परमाणु क्रमांक कहते हैं, जिसे Z से दर्शाया जाता है।
10. हाइड्रोजन के तीन समस्थानिकों के नाम लिखिए।
उत्तर देखेंहाइड्रोजन के तीन समस्थानिक हैं – प्रोटियम (¹H), ड्यूटीरियम (²H), और ट्राइटियम (³H)।
11. परमाणु द्रव्यमान मापने के लिए किस मात्रक का उपयोग किया जाता है?
उत्तर देखेंपरमाणु द्रव्यमान मापने के लिए ‘एकीकृत परमाणु द्रव्यमान इकाई’ (u) का उपयोग किया जाता है।
12. कार्बन के तीन समस्थानिकों के नाम लिखिए।
उत्तर देखेंकार्बन के तीन समस्थानिक हैं – कार्बन-12 (¹²C), कार्बन-13 (¹³C), और कार्बन-14 (¹⁴C)।
13. भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की स्थापना किसने की?
उत्तर देखेंभारतीय भौतिक वैज्ञानिक होमी जहाँगीर भाभा ने भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) की स्थापना की।
14. यूरेनियम के किस समस्थानिक का उपयोग नाभिकीय संयंत्र में ईंधन के रूप में होता है?
उत्तर देखेंयूरेनियम के समस्थानिक ²³⁵U का उपयोग नाभिकीय परमाणु संयंत्र में विद्युत उत्पादन हेतु ईंधन के रूप में किया जाता है।
15. कार्बन डेटिंग में किस समस्थानिक का उपयोग होता है?
उत्तर देखेंकार्बन के समस्थानिक ¹⁴C का उपयोग पुरातत्व में प्राचीन जीवाश्मों व कलाकृतियों की आयु ज्ञात करने के लिए किया जाता है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 8 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. टॉमसन के परमाणु मॉडल की मुख्य विशेषताएँ बताइए।
उत्तर देखेंटॉमसन के अनुसार परमाणु धनात्मक आवेश का एक गोला होता है जिसमें इलेक्ट्रॉन समान रूप से वितरित रहते हैं, जैसे पुडिंग में प्लम्स धँसे होते हैं। इसी कारण इसे ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ कहा गया। यह परमाणु में धनावेश और ऋणावेश के संतुलन को दर्शाने वाला प्रथम सार्थक प्रयास था।
2. रदरफोर्ड मॉडल की सीमा क्या थी?
उत्तर देखेंरदरफोर्ड मॉडल यह नहीं समझा सका कि जब ऋणावेशित इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर त्वरित होता है, तो उसकी ऊर्जा में निरंतर ह्रास होकर उसे नाभिक में क्यों नहीं गिरना चाहिए। यदि ऐसा होता तो परमाणु अस्थायी होता, जबकि वास्तव में परमाणु स्थायी होते हैं। इसी सीमा को दूर करने के लिए बोर मॉडल प्रस्तावित हुआ।
3. नाभिक में प्रोटॉन एक-दूसरे को दूर क्यों नहीं धकेलते, जबकि वे समान आवेशित होते हैं?
उत्तर देखेंनाभिक के भीतर प्रत्येक प्रोटॉन दूसरे को प्रतिकर्षित करता है क्योंकि वे सभी धनावेशी होते हैं। परंतु उदासीन न्यूट्रॉन प्रोटॉनों के मध्य दूरी बढ़ाकर प्रतिकर्षण को कम करते हैं और नाभिकीय बल को प्रबल कर देते हैं, जिससे सभी कण नाभिक में दृढ़ता से बँधे रह सकते हैं।
4. हीलियम का द्रव्यमान हाइड्रोजन से चार गुना अधिक क्यों होता है, दोगुना नहीं?
उत्तर देखेंहीलियम में दो प्रोटॉन और दो न्यूट्रॉन होते हैं, जबकि हाइड्रोजन में केवल एक प्रोटॉन होता है। चूँकि परमाणु का द्रव्यमान मुख्यतः प्रोटॉनों और न्यूट्रॉनों के कारण होता है (इलेक्ट्रॉन का द्रव्यमान नगण्य है), इसलिए हीलियम का द्रव्यमान हाइड्रोजन से चार गुना अधिक होता है, दोगुना नहीं।
5. समस्थानिकों के रासायनिक गुण समान क्यों होते हैं जबकि भौतिक गुण भिन्न होते हैं?
उत्तर देखेंसमस्थानिकों में इलेक्ट्रॉनों की संख्या और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास समान होता है, और चूँकि रासायनिक गुण मुख्य रूप से संयोजकता इलेक्ट्रॉनों पर निर्भर करते हैं, इसलिए इनके रासायनिक गुण समान होते हैं। परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने से द्रव्यमान भिन्न होता है, जिससे क्वथनांक-गलनांक जैसे भौतिक गुण भिन्न होते हैं।
6. भारित औसत परमाणु द्रव्यमान क्या है और यह साधारण औसत से कैसे भिन्न है?
उत्तर देखेंभारित औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना प्रत्येक समस्थानिक के द्रव्यमान को उसकी प्राकृतिक प्रतिशत प्रचुरता से गुणा करके तथा दोनों मानों को जोड़कर की जाती है। यह साधारण औसत से भिन्न है क्योंकि साधारण औसत में समस्थानिकों की सापेक्ष मात्रा की उपेक्षा की जाती है, जबकि भारित औसत तत्व की वास्तविक प्रकृति को सही दर्शाता है (जैसे क्लोरीन का 35.5 u)।
7. बोर और बरी के इलेक्ट्रॉन वितरण नियम संक्षेप में बताइए।
उत्तर देखेंबोर-बरी नियम के अनुसार किसी कोश में इलेक्ट्रॉनों की अधिकतम संख्या 2n² सूत्र से दी जाती है, सबसे बाह्यतम कोश में अधिकतम 8 इलेक्ट्रॉन हो सकते हैं (प्रथम कोश में अधिकतम 2), तथा इलेक्ट्रॉन K, L, M, N क्रम में नाभिक के निकटतम कोश से आरंभ कर क्रमबद्ध रूप से भरे जाते हैं।
8. सोडियम और ऑक्सीजन की संयोजकता का निर्धारण इलेक्ट्रॉनिक विन्यास से कैसे होता है?
उत्तर देखेंसोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है; यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर अष्टक प्राप्त कर सकता है, अतः इसकी संयोजकता 1 है। ऑक्सीजन का विन्यास 2, 6 है; यह अष्टक पूर्ण करने के लिए दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करता है, अतः इसकी संयोजकता 2 है।
9. क्रमवीक्षण सुरंगन सूक्ष्मदर्शी (STM) और संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (TEM) का क्या उपयोग है?
उत्तर देखेंक्रमवीक्षण सुरंगन सूक्ष्मदर्शी (STM) पदार्थों की सतहों का परमाण्विक स्तर पर अध्ययन करने के लिए उपयोग होता है, जबकि संचरण इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी (TEM) यह दर्शाता है कि अति सूक्ष्म प्रतिदर्श के भीतर परमाणु किस प्रकार व्यवस्थित होते हैं। दोनों परमाणुओं की विस्तारित छवि बनाने में सहायक हैं।
10. कैल्सियम, पोटैशियम और आर्गन समभारिक क्यों कहलाते हैं?
उत्तर देखेंकैल्सियम (परमाणु क्रमांक 20), पोटैशियम (परमाणु क्रमांक 19) और आर्गन (परमाणु क्रमांक 18) में प्रोटॉनों की संख्या भिन्न होती है, परंतु इन सभी की द्रव्यमान संख्या 40 है। चूँकि इनके परमाणु क्रमांक भिन्न परंतु द्रव्यमान संख्या समान है, अतः ये समभारिक कहलाते हैं।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 8 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. स्वर्ण पर्णिका प्रयोग का वर्णन कीजिए और बताइए कि इसने रदरफोर्ड को परमाणु के नाभिकीय मॉडल तक कैसे पहुँचाया।
उत्तर देखेंवर्ष 1911 में गाइगर एवं मार्सडेन ने रदरफोर्ड के निर्देशन में स्वर्ण पर्णिका पर धनावेशित अल्फा कणों की संकीर्ण किरणपुंज की बौछार की। टॉमसन मॉडल के अनुसार धनावेश समान रूप से वितरित होने के कारण अल्फा कणों को बिना विक्षेपित हुए आर-पार निकल जाना चाहिए था। परंतु प्रयोग में देखा गया कि अधिकांश कण बिना विक्षेपित हुए सीधे निकल गए, जबकि कुछ कण बड़े कोणों पर विक्षेपित हुए और कुछ पुनः लौट आए। इस आश्चर्यजनक परिणाम से रदरफोर्ड ने निष्कर्ष निकाला कि परमाणु का अधिकांश भाग रिक्त है और उसका संपूर्ण धनावेश तथा अधिकांश द्रव्यमान एक अति सूक्ष्म, सघन केंद्र – नाभिक – में केंद्रित होता है, जिसके चारों ओर इलेक्ट्रॉन परिक्रमा करते हैं। इस प्रकार यह प्रयोग परमाणु के ग्रहीय मॉडल का आधार बना।
2. बोर के परमाणु मॉडल के मुख्य अभिगृहीत लिखिए और स्पष्ट कीजिए कि इसने परमाणु के स्थायित्व की समस्या को कैसे हल किया।
उत्तर देखेंनील्स बोर ने वर्ष 1913 में प्रस्तावित किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर यादृच्छिक रूप से गति नहीं करते, बल्कि निश्चित वृत्ताकार पथों (कोशों) में गति करते हैं जिन्हें K, L, M, N आदि नामों से दर्शाया जाता है। प्रत्येक कोश में इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा निश्चित होती है, और इन्हीं अनुमत कोशों में गति करते हुए इलेक्ट्रॉन ऊर्जा का क्षय नहीं करता। इलेक्ट्रॉन दो कोशों की ऊर्जा के अंतर के बराबर निश्चित मात्रा में ऊर्जा अवशोषित या उत्सर्जित करके ही एक कोश से दूसरे कोश में जा सकता है। बोर ने स्थायी कक्षाओं की अवधारणा को अभिगृहीत के रूप में प्रस्तुत करके यह स्पष्ट किया कि इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर गति करते हुए भी ऊर्जा नहीं खोता, जिससे परमाणु का स्थायित्व स्पष्ट रूप से समझाया जा सका।
3. संयोजकता की अवधारणा को इलेक्ट्रॉनिक विन्यास के आधार पर समझाइए और सोडियम, ऑक्सीजन तथा कार्बन के उदाहरण दीजिए।
उत्तर देखेंपरमाणु का बाह्यतम कोश जिसमें इलेक्ट्रॉन होते हैं, संयोजकता कोश कहलाता है, और इसमें उपस्थित इलेक्ट्रॉन संयोजकता इलेक्ट्रॉन कहलाते हैं। अष्टक (8 इलेक्ट्रॉन) पूर्ण करने हेतु त्यागे गए, ग्रहण किए गए, अथवा साझा किए गए इलेक्ट्रॉनों की संख्या को उस तत्व की संयोजकता कहते हैं। सोडियम का इलेक्ट्रॉनिक विन्यास 2, 8, 1 है – यह एक इलेक्ट्रॉन त्यागकर अष्टक प्राप्त करता है, अतः इसकी संयोजकता 1 है। ऑक्सीजन का विन्यास 2, 6 है – यह दो इलेक्ट्रॉन ग्रहण करके अष्टक पूर्ण करता है, अतः इसकी संयोजकता 2 है। कार्बन का विन्यास 2, 4 है – यह न तो चार इलेक्ट्रॉन त्याग सकता है और न ग्रहण कर सकता है, इसलिए यह अन्य परमाणुओं के साथ चार इलेक्ट्रॉनों की साझेदारी करके अष्टक पूर्ण करता है, अतः इसकी संयोजकता 4 है।
4. समस्थानिक और समभारिक में अंतर स्पष्ट करते हुए दोनों के दो-दो उदाहरण दीजिए तथा समस्थानिकों के व्यावहारिक उपयोग बताइए।
उत्तर देखेंसमस्थानिक एक ही तत्व के ऐसे परमाणु होते हैं जिनका परमाणु क्रमांक समान होता है परंतु न्यूट्रॉनों की संख्या भिन्न होने के कारण द्रव्यमान संख्याएँ भिन्न-भिन्न होती हैं जैसे हाइड्रोजन के प्रोटियम, ड्यूटीरियम, ट्राइटियम, तथा कार्बन के कार्बन-12, कार्बन-13, कार्बन-14। इसके विपरीत समभारिक भिन्न-भिन्न तत्वों के ऐसे परमाणु होते हैं जिनकी द्रव्यमान संख्या समान होती है परंतु परमाणु क्रमांक भिन्न होते हैं — जैसे कैल्सियम व आर्गन (दोनों की द्रव्यमान संख्या 40)। समस्थानिकों के महत्वपूर्ण उपयोग हैं – यूरेनियम-235 का उपयोग नाभिकीय संयंत्र में ईंधन के रूप में, कोबाल्ट-60 का उपयोग कैंसर के उपचार (रेडियोथेरेपी) में, आयोडीन-131 का उपयोग थायरॉइड कैंसर के उपचार में, और कार्बन-14 का उपयोग पुरातत्व में प्राचीन वस्तुओं की आयु निर्धारण में किया जाता है।
5. परमाणु मॉडलों के ऐतिहासिक विकास को डाल्टन से लेकर आधुनिक क्वांटम यांत्रिकीय मॉडल तक कालक्रमानुसार व्याख्या कीजिए।
उत्तर देखेंवर्ष 1808 में जॉन डाल्टन ने परमाणु को द्रव्य की सबसे छोटी अविभाज्य इकाई माना। वर्ष 1897 में जे. जे. टॉमसन ने इलेक्ट्रॉन की खोज कर ‘प्लम पुडिंग मॉडल’ प्रस्तावित किया, जिसमें इलेक्ट्रॉन धनावेशित गोले में धँसे होते हैं। वर्ष 1911 में अर्नेस्ट रदरफोर्ड ने स्वर्ण पर्णिका प्रयोग द्वारा नाभिक की खोज की और ‘ग्रहीय मॉडल’ प्रस्तुत किया, जिसमें इलेक्ट्रॉन धनावेशित नाभिक के चारों ओर परिक्रमा करते हैं, परंतु यह मॉडल परमाणु के स्थायित्व को नहीं समझा सका। वर्ष 1913 में नील्स बोर ने निश्चित ऊर्जा स्तरों (कोशों) की अवधारणा देकर इस समस्या को हल किया। तत्पश्चात प्रोटॉन (रदरफोर्ड, नाभिक में) और न्यूट्रॉन (जेम्स चैडविक, 1932) की खोज हुई। अंततः वैज्ञानिकों ने पाया कि बोर मॉडल भी पूर्णतः सही नहीं था, क्योंकि इलेक्ट्रॉन निश्चित पथ पर गति नहीं करते; अतः आधुनिक क्वांटम यांत्रिकीय मॉडल प्रस्तावित हुआ, जिसके अनुसार इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर ‘इलेक्ट्रॉन अभ्र’ के रूप में रहते हैं और उनकी यथार्थ स्थिति के बजाय केवल संभाव्यता क्षेत्र का अनुमान लगाया जा सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या “एक यात्रा: परमाणु के भीतर” अध्याय पुराने एनसीईआरटी के “परमाणु की संरचना” अध्याय जैसा ही है?
हाँ, यह अध्याय पुराने एनसीईआरटी विज्ञान (कक्षा 9) के “परमाणु की संरचना” अध्याय का ही पुनर्गठित रूप है, जो अब सत्र 2026-27 से नई पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” में अध्याय 8 के रूप में आता है। मूल वैज्ञानिक अवधारणाएं (परमाणु मॉडल, संयोजकता, समस्थानिक) वही हैं, परंतु नई पुस्तक में “भारत का वैज्ञानिक योगदान”, “आइए और आगे बढ़ें” जैसे नए रोचक खंड तथा अद्यतन उदाहरण जोड़े गए हैं।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 वार्षिक परीक्षा में कितना महत्वपूर्ण है और इससे किस प्रकार के प्रश्न आते हैं?
यह अध्याय रसायन विज्ञान खंड का एक अत्यंत महत्वपूर्ण अध्याय है और परीक्षा में इससे प्रतिवर्ष 8-10 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं। इसमें इलेक्ट्रॉनिक विन्यास बनाना, परमाणु क्रमांक व द्रव्यमान संख्या से प्रोटॉन-न्यूट्रॉन-इलेक्ट्रॉन की गणना, संयोजकता निकालना, तथा समस्थानिक-समभारिक पहचानने जैसे संख्यात्मक व अवधारणा-आधारित प्रश्न शामिल होते हैं। यह अध्याय कक्षा 11 की रसायन विज्ञान (परमाणु संरचना, आवर्त सारणी) की सीधी नींव भी है।
विद्यार्थियों को कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 में सबसे ज्यादा कठिनाई किन टॉपिक्स में होती है?
विद्यार्थियों को सामान्यतः विभिन्न परमाणु मॉडलों (टॉमसन, रदरफोर्ड, बोर) के बीच अंतर याद रखने, इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (2n² नियम) के आधार पर कोशों में इलेक्ट्रॉन भरने, संयोजकता निर्धारित करने, तथा समस्थानिक व समभारिक के बीच भ्रमित होने में कठिनाई होती है। भारित औसत परमाणु द्रव्यमान की गणना वाले संख्यात्मक प्रश्न भी चुनौतीपूर्ण माने जाते हैं। नियमित अभ्यास और तालिका 8.4 जैसी सारणियों को समझने से यह कठिनाई दूर हो जाती है।
क्या कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 पढ़ने के बाद विद्यार्थियों को कक्षा 10-11 में कौन-से टॉपिक आसान लगेंगे?
यह अध्याय कक्षा 10 के “आवर्त सारणी में तत्वों का वर्गीकरण” तथा कक्षा 11 के “परमाणु संरचना” जैसे अध्यायों की सीधी नींव है। संयोजकता और इलेक्ट्रॉनिक विन्यास की ठोस समझ रासायनिक बंधन समझने में भी बहुत सहायक होती है। इसके अतिरिक्त जेईई और एनईईटी जैसी प्रवेश परीक्षाओं में भी परमाणु संरचना एक बुनियादी और अनिवार्य विषय माना जाता है।
भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) का कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 8 में उल्लेख क्यों किया गया है और यह विद्यार्थियों के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “भारत का वैज्ञानिक योगदान” खंड के माध्यम से विद्यार्थियों में राष्ट्रीय वैज्ञानिक गौरव और प्रेरणा जगाने का प्रयास करती है। होमी जहाँगीर भाभा और भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र (BARC) का उल्लेख यह दर्शाता है कि भारत ने परमाणु ऊर्जा, न्यूट्रॉन-प्रकीर्णन प्रयोगों तथा औषधि व कृषि क्षेत्र में वैश्विक स्तर पर महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जो विद्यार्थियों को विज्ञान के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाने के लिए प्रेरित करता है।
