एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 6 गति पर बलों का प्रभाव
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 6 गति पर बलों का प्रभाव समाधान – अभ्यास के प्रश्न उत्तर तथा अतिरिक्त प्रश्नों के हल विद्यार्थी यहाँ से मुफ्त में प्राप्त कर सकते हैं। एनसीईआरटी ने सत्र 2026-27 के लिए कक्षा 9 विज्ञान की नई पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” जारी की है, जिसका अध्याय 6 “गति पर बलों का प्रभाव” भौतिकी के सबसे महत्वपूर्ण विषयों में से एक है। इस अध्याय में विद्यार्थी बल की अवधारणा, संतुलित एवं असंतुलित बल, घर्षण बल, और सर आइजैक न्यूटन द्वारा प्रतिपादित गति के तीन नियमों — न्यूटन का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम), द्वितीय नियम (F = ma) और तृतीय नियम (क्रिया-प्रतिक्रिया का नियम) — के बारे में विस्तार से पढ़ते हैं। पाठ में क्रिकेट की गेंद पकड़ना, एयरबैग, रॉकेट प्रमोचन, नाव चलाना और वस्तुओं के निकाय जैसे व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से इन नियमों को सरलता से समझाया गया है। यह अध्याय कक्षा 9 की बोर्ड परीक्षा और आगामी उच्च कक्षाओं की भौतिकी की नींव के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 के त्वरित लिंक:
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कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 अभ्यास प्रश्न उत्तर
एनसीईआरटी कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 6 समाधान
1. एक क्षैतिज बल का उपयोग करके किसी मेज को फर्श पर नियत वेग से गति प्रदान की जाती है। फर्श द्वारा मेज पर लगाया गया घर्षण बल कितना है?
उत्तर देखेंमेज नियत वेग से चल रही है, इसलिए उसका त्वरण शून्य है।
न्यूटन के गति के प्रथम नियम के अनुसार, यदि किसी वस्तु का वेग नियत है तो उस पर लगने वाला परिणामी बल शून्य होता है।
अतः मेज पर आगे की दिशा में लगाया गया बल और फर्श द्वारा पीछे की दिशा में लगाया गया घर्षण बल परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत होंगे।
इसलिए घर्षण बल का परिमाण लगाए गए क्षैतिज बल के बराबर होगा और उसकी दिशा गति की दिशा के विपरीत होगी।
2. एक चिकनी घर्षण-रहित सतह पर गतिमान गेंद के लिए सही शब्द का चयन कर निम्नलिखित कथनों को सत्य कथन बनाइए –
(i) यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा/बढ़ेगा/घटेगा।
(ii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/बढ़ेगा/घटेगा।
(iii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण समान रहेगा/बढ़ेगा/घटेगा।
उत्तर देखें(i) यदि गेंद पर कोई परिणामी बल नहीं लगाया जाता है तो गेंद का वेग समान रहेगा।
कारण:
परिणामी बल शून्य होने पर त्वरण शून्य होता है। इसलिए गेंद नियत वेग से चलती रहेगी।
(ii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण बढ़ेगा।
कारण:
गति की दिशा में लगाया गया परिणामी बल उसी दिशा में त्वरण उत्पन्न करता है।
(iii) यदि गेंद पर उसकी गति की दिशा के विपरीत दिशा में परिणामी बल लगाया जाता है तो गेंद के वेग का परिमाण घटेगा।
कारण:
गति की विपरीत दिशा में लगाया गया परिणामी बल गेंद की चाल को कम करता है।
3. एक चिकनी क्षैतिज सतह पर विद्यमान दो गुटके P और Q चित्र 6.36 (क) और चित्र 6.36 (ख) में दर्शाए गए हैं। गुटके P पर 4 N और 5 N परिमाण के दो बल विपरीत दिशाओं में कार्य कर रहे हैं, जबकि गुटका Q नियत वेग से गतिमान है।

निम्नलिखित में से कौन-सा कथन सत्य है?
(i) P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है।
(ii) P पर परिणामी बल नहीं लगता है और Q पर परिणामी बल लगता है।
(iii) P और Q दोनों पर परिणामी बल लगता है।
(iv) न तो P और न ही Q पर परिणामी बल लगता है।
उत्तर देखेंसही विकल्प – (i)
गुटके P पर दाईं ओर 5 N और बाईं ओर 4 N का बल लग रहा है।
परिणामी बल
= 5 N − 4 N
= 1 N
इस परिणामी बल की दिशा दाईं ओर होगी।
अतः गुटके P पर 1 N का परिणामी बल कार्य कर रहा है।
गुटका Q नियत वेग से चल रहा है। नियत वेग का अर्थ है कि उसका त्वरण शून्य है। इसलिए उस पर लगने वाला परिणामी बल भी शून्य है।
अतः सही कथन है:
P पर परिणामी बल लगता है और Q पर परिणामी बल नहीं लगता है।
4. सर्प नौका दौड़ के अभ्यास के समय 100 नाविक एक नौका को एक साथ खे रहे हैं। इनमें से 95 नाविक नौका को आगे बढ़ाने के लिए पीछे की ओर चप्पू चलाते हैं। शेष 5 नाविक विपरीत दिशा में चप्पू चलाते हैं। यदि प्रत्येक नाविक 200 N का क्षैतिज बल लगाता है, तो बताइए सर्प नौका पर लगने वाला परिणामी बल कितना है? कर्षण बल, वायु घर्षण आदि की उपेक्षा कीजिए।
उत्तर देखेंआगे की दिशा में बल लगाने वाले नाविकों की संख्या = 95
एक नाविक द्वारा लगाया गया बल = 200 न्यूटन
आगे की दिशा में कुल बल
= 95 × 200
= 19000 N
विपरीत दिशा में बल लगाने वाले नाविकों की संख्या = 5
विपरीत दिशा में कुल बल
= 5 × 200
= 1000 N
परिणामी बल
= 19000 − 1000
= 18000 N
अतः, सर्प नौका पर 18000 न्यूटन का परिणामी बल आगे की दिशा में लगेगा।
5. जब किसी वस्तु पर परिणामी बल लगता है, तो हम देखते हैं कि वस्तु त्वरित होती है –
(i) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।
(ii) त्वरण बल की दिशा के विपरीत दिशा में और वस्तु के द्रव्यमान के समानुपाती होता है।
(iii) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
(iv) त्वरण बल की दिशा में और वस्तु पर लगने वाले बल के समानुपाती होता है।
उत्तर देखेंसही विकल्प – (iv)
त्वरण बल की दिशा में होता है और वस्तु पर लगने वाले परिणामी बल के समानुपाती होता है।
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार:
बल = द्रव्यमान × त्वरण
अतः किसी निश्चित द्रव्यमान वाली वस्तु पर जितना अधिक परिणामी बल लगाया जाएगा, उसमें उतना ही अधिक त्वरण उत्पन्न होगा।
6. एक सीधी रेखा के अनुदिश गतिमान चार वस्तुओं A, B, C और D के लिए स्थिति–समय ग्राफ (चित्र 6.37) में दर्शाए गए हैं। इनमें से किस पर एक परिणामी बल कार्य करता है –

(i) वस्तु A
(ii) वस्तु B
(iii) वस्तु C
(iv) वस्तु D
उत्तर देखें(iii) वस्तु C
स्थिति–समय आलेख की ढाल वस्तु के वेग को दर्शाती है।
वस्तु A का आलेख एक सीधी झुकी हुई रेखा है। इसकी ढाल नियत है, इसलिए इसका वेग नियत है और त्वरण शून्य है। अतः इस पर परिणामी बल शून्य है।
वस्तु B का आलेख क्षैतिज रेखा है। उसकी स्थिति समय के साथ नहीं बदलती, इसलिए वह विरामावस्था में है। उसका त्वरण शून्य है और परिणामी बल भी शून्य है।
वस्तु C का आलेख वक्र है और उसकी ढाल समय के साथ बढ़ रही है। इसका अर्थ है कि उसका वेग बदल रहा है और उसमें त्वरण उत्पन्न हो रहा है। अतः उस पर परिणामी बल कार्य कर रहा है।
वस्तु D का आलेख नीचे की ओर झुकी हुई सीधी रेखा है। इसकी ढाल नियत है, इसलिए वस्तु नियत वेग से विपरीत दिशा में चल रही है। इसका त्वरण शून्य है और इस पर परिणामी बल भी शून्य है।
अतः, केवल वस्तु C पर परिणामी बल कार्य करता है।
7. कोई नाविक किसी छोटी नौका से तट पर कूदता है (चित्र 6.38)। जैसे ही नाविक आगे की ओर कूदता है तो क्या नौका गति करेगी? यदि हाँ, तो किस दिशा में और क्यों?

उत्तर देखेंहाँ, नौका गति करेगी।
जब नाविक आगे की ओर कूदता है, तब वह नौका पर पीछे की ओर बल लगाता है। न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया होती है।
इसलिए नाविक के आगे की ओर कूदने की क्रिया के परिणामस्वरूप नौका पर पीछे की ओर प्रतिक्रिया बल लगता है और नौका नाविक की गति की विपरीत दिशा में चलने लगती है।
अतः नाविक के आगे की ओर कूदते ही नौका पीछे की ओर गति करती है।
8. ऊँची कूद प्रतियोगिता में खिलाड़ी सुरक्षित गिरें इसके लिए रेत या फोम के गद्दे की व्यवस्था की जाती है (चित्र 6.39)। इसके पीछे का कारण स्पष्ट कीजिए।

उत्तर देखेंजब खिलाड़ी ऊँचाई से नीचे गिरता है, तब उसका संवेग बदलकर शून्य हो जाता है।
रेत या फोम का गद्दा खिलाड़ी के रुकने का समय बढ़ा देता है। न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार:
परिणामी बल = संवेग में परिवर्तन ÷ समय
संवेग में परिवर्तन समान रहने पर यदि रुकने का समय बढ़ जाता है, तो खिलाड़ी पर लगने वाला परिणामी बल कम हो जाता है।
इसी कारण चोट लगने की संभावना बहुत कम हो जाती है और खिलाड़ी सुरक्षित रहता है।
अतः ऊँची कूद प्रतियोगिता में खिलाड़ियों की सुरक्षा के लिए रेत या फोम के गद्दे का उपयोग किया जाता है।
9. सब्जियों से भरी हुई एक ठेलागाड़ी किसी अन्य प्रत्येक दृष्टि से उसी के समान परंतु खाली ठेलागाड़ी से टकराती है। टकराव के समय –
(i) भरी हुई ठेलागाड़ी, खाली ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है।
(ii) खाली ठेलागाड़ी, भरी हुई ठेलागाड़ी पर अधिक परिमाण का बल लगाती है।
(iii) दोनों में से कोई भी ठेलागाड़ी दूसरी ठेलागाड़ी पर बल नहीं लगाती है।
(iv) भरी हुई ठेलागाड़ी और खाली ठेलागाड़ी दोनों एक-दूसरे पर समान परिमाण का बल लगाती हैं।
उत्तर देखेंसही विकल्प – (iv)
न्यूटन के गति के तृतीय नियम के अनुसार प्रत्येक क्रिया के बराबर परिमाण का तथा विपरीत दिशा में प्रतिक्रिया बल उत्पन्न होता है।
अतः टक्कर के समय भरी हुई और खाली दोनों ठेलागाड़ियाँ एक-दूसरे पर समान परिमाण का तथा विपरीत दिशा में बल लगाती हैं।
10. विभिन्न द्रव्यमानों वाली वस्तुओं पर लगाए गए किसी बल द्वारा उत्पन्न त्वरण के संगत त्वरण–द्रव्यमान ग्राफ चित्र 6.40 में दर्शाया गया है। इस स्थिति के लिए बल–द्रव्यमान ग्राफ आलेखित कीजिए।

उत्तर देखें
चित्र 6.40 से स्पष्ट है कि द्रव्यमान बढ़ने पर त्वरण उसी अनुपात में घट रहा है। इसका अर्थ है कि सभी वस्तुओं पर लगाया गया बल समान है।
न्यूटन के गति के द्वितीय नियम के अनुसार—
बल = द्रव्यमान × त्वरण
चित्र से—
द्रव्यमान = 1 किलोग्राम, त्वरण = 10 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
बल = 1 × 10 = 10 न्यूटन
द्रव्यमान = 2 किलोग्राम, त्वरण = 5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
बल = 2 × 5 = 10 न्यूटन
द्रव्यमान = 4 किलोग्राम, त्वरण = 2.5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
बल = 4 × 2.5 = 10 न्यूटन
अतः प्रत्येक द्रव्यमान के लिए बल का मान 10 न्यूटन है।
इसलिए बल–द्रव्यमान आलेख में द्रव्यमान अक्ष के समानांतर 10 न्यूटन पर एक क्षैतिज सरल रेखा प्राप्त होगी।
11. सरल रेखा में गतिमान 10 kg द्रव्यमान की किसी वस्तु को वेग–समय ग्राफ चित्र 6.41 में दर्शाया गया है। ग्राफ का उपयोग करके वस्तु पर लगने वाले बल का परिकलन कीजिए।

उत्तर देखेंदिया गया है:
द्रव्यमान = 10 किलोग्राम
आलेख से-
प्रारंभिक वेग = 10 मीटर प्रति सेकंड
8 सेकंड बाद वेग = 30 मीटर प्रति सेकंड
त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) ÷ समय
= (30 − 10) ÷ 8
= 20 ÷ 8
= 2.5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
अब, बल = द्रव्यमान × त्वरण
= 10 × 2.5
= 25 न्यूटन
अतः वस्तु पर लगने वाले बल का परिमाण 25 न्यूटन है।
12. 100 ms⁻¹ के वेग से गतिमान 50 g द्रव्यमान की कोई गोली एक स्थिर भारी लकड़ी के गुटके में प्रवेश करती है और 50 cm की दूरी तक भेदने के पश्चात रुक जाती है। गोली पर लगने वाले अवरोधक बल का आकलन कीजिए। मान लीजिए कि गुटके के भीतर गोली का त्वरण अचर है।
उत्तर देखेंदिया गया है:
गोली का प्रारंभिक वेग = 100 मीटर प्रति सेकंड
गोली का अंतिम वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
गोली का द्रव्यमान = 50 ग्राम
= 0.05 किलोग्राम
गोली द्वारा तय दूरी = 50 सेंटीमीटर
= 0.5 मीटर
गति के समीकरण के अनुसार:
अंतिम वेग का वर्ग
= प्रारंभिक वेग का वर्ग + 2 × त्वरण × दूरी
0² = 100² + 2 × त्वरण × 0.5
0 = 10000 + त्वरण
त्वरण = −10000 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
अब, बल = द्रव्यमान × त्वरण
= 0.05 × (−10000)
= −500 न्यूटन
ऋण चिह्न दर्शाता है कि बल गोली की गति की दिशा के विपरीत है।
अतः, गोली पर लगने वाले अवरोधक बल का परिमाण 500 न्यूटन है।
13. एक श्रेष्ठ फुटबॉलर ने फुटबॉल पर 108 km h⁻¹ के वेग से प्रहार करके उसको मिले क्षतिपूरक निशाने (penalty shot) को गोल में परिवर्तित कर दिया। उसके द्वारा लगाया गया अनुमानित बल 800 N था। फुटबॉल का द्रव्यमान 0.4 kg था। उसके पैर और गेंद के मध्य संपर्क समय की गणना कीजिए।
उत्तर देखेंदिया गया है:
फुटबॉल का प्रारंभिक वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
फुटबॉल का अंतिम वेग
= 108 किलोमीटर प्रति घंटा
मीटर प्रति सेकंड में बदलने पर:
अंतिम वेग = 108 × 5 ÷ 18
= 30 मीटर प्रति सेकंड
फुटबॉल का द्रव्यमान = 0.4 किलोग्राम
लगाया गया बल = 800 न्यूटन
संवेग में परिवर्तन
= द्रव्यमान × वेग में परिवर्तन
= 0.4 × (30 − 0)
= 12 किलोग्राम मीटर प्रति सेकंड
बल = संवेग में परिवर्तन ÷ संपर्क समय
संपर्क समय = संवेग में परिवर्तन ÷ बल
= 12 ÷ 800
= 0.015 सेकंड
अतः खिलाड़ी के पैर और फुटबॉल के मध्य संपर्क समय 0.015 सेकंड था।
14. 2 kg द्रव्यमान की एक वस्तु 10 ms⁻¹ के नियत वेग से गतिमान है। यह एक खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करती है जहाँ वस्तु पर घर्षण बल 7 N है। उसी समय वस्तु पर उसकी गति का विरोध करते हुए 3 N का एक अतिरिक्त नियत बल लगाया जाता है। खुरदरे क्षेत्र में प्रवेश करने के पश्चात वस्तु विरामावस्था में आने से पूर्व कितनी दूरी तय करती है?
उत्तर देखेंदिया गया है:
वस्तु का द्रव्यमान = 2 किलोग्राम
प्रारंभिक वेग = 10 मीटर प्रति सेकंड
अंतिम वेग = 0 मीटर प्रति सेकंड
घर्षण बल = 7 न्यूटन
अतिरिक्त विरोधी बल = 3 न्यूटन
कुल विरोधी बल
= 7 + 3
= 10 न्यूटन
त्वरण = परिणामी बल ÷ द्रव्यमान
= −10 ÷ 2
= −5 मीटर प्रति सेकंड वर्ग
अब गति के समीकरण से—
अंतिम वेग का वर्ग
= प्रारंभिक वेग का वर्ग + 2 × त्वरण × दूरी
⇒ 0² = 10² + 2 × (−5) × दूरी
⇒ 0 = 100 − 10 × दूरी
⇒ 10 × दूरी = 100
⇒ दूरी = 10 मीटर
अतः वस्तु विरामावस्था में आने से पूर्व 10 मीटर की दूरी तय करेगी।
15. कोई ट्रैक्टर m₁ द्रव्यमान के हैरो (जुताई उपकरण) को परिणामी बल F से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप हैरो में a₁ त्वरण उत्पन्न होता है। वही ट्रैक्टर m₂ द्रव्यमान की किसी ट्रॉली को F बल से खींचता है जिसके परिणामस्वरूप ट्रॉली में a₂ त्वरण उत्पन्न होता है। यदि ट्रैक्टर अब हैरो को ट्रॉली पर रखकर उसे उसी बल F से खींचता है, तो a₁ और a₂ के पदों में परिणामी त्वरण का व्यंजक प्राप्त कीजिए। घर्षण को नगण्य मान लीजिए।
उत्तर देखेंहैरो के लिए:
F = m₁ × a₁
अतः, m₁ = F ÷ a₁
ट्रॉली के लिए:
F = m₂ × a₂
अतः, m₂ = F ÷ a₂
जब हैरो को ट्रॉली पर रख दिया जाता है, तब कुल द्रव्यमान:
m = m₁ + m₂
= F ÷ a₁ + F ÷ a₂
= F × (a₁ + a₂) ÷ (a₁ × a₂)
मान लीजिए संयुक्त निकाय का त्वरण = a
तब, F = m × a
a = F ÷ m
= F ÷ [F × (a₁ + a₂) ÷ (a₁ × a₂)]
अतः, a = a₁ × a₂ ÷ (a₁ + a₂)
16. जब किसी दंड चुंबक के ध्रुव को चुंबकीय दिक्सूचक (magnetic compass) के निकट लाया जाता है, तो दंड चुंबक और दिक्सूचक सुई (जो स्वयं भी एक चुंबक है) एक-दूसरे पर चुंबकीय बल लगाते हैं। न्यूटन के गति के तृतीय नियमानुसार दोनों बल परिमाण में बराबर और दिशा में विपरीत होते हैं। तथापि दिक्सूचक सुई (compass needle) गति करती है जबकि दंड चुंबक गति नहीं करता है (चित्र 6.42)। ऐसा क्यों होता है? व्याख्या कीजिए।

उत्तर देखेंदंड चुंबक और दिक्सूचक सुई एक-दूसरे पर परिमाण में बराबर तथा दिशा में विपरीत चुंबकीय बल लगाते हैं। ये दोनों बल अलग-अलग वस्तुओं पर लगते हैं, इसलिए वे एक-दूसरे को निरस्त नहीं करते।
दिक्सूचक सुई एक धुरी पर स्वतंत्रतापूर्वक घूम सकती है। उसका द्रव्यमान कम होता है और उसके घूमने में बहुत कम घर्षण होता है। इसलिए चुंबकीय बल के प्रभाव से उसमें पर्याप्त त्वरण उत्पन्न होता है और वह घूम जाती है।
दूसरी ओर, दंड चुंबक सामान्यतः हाथ से पकड़ा हुआ या किसी सतह पर रखा होता है। हाथ अथवा सतह द्वारा लगाया गया बल चुंबकीय बल को संतुलित कर देता है। इसके अतिरिक्त दंड चुंबक का द्रव्यमान दिक्सूचक सुई की तुलना में अधिक होता है, इसलिए समान बल से उसमें बहुत कम त्वरण उत्पन्न होता है।
अतः दिक्सूचक सुई स्पष्ट रूप से घूमती है, जबकि दंड चुंबक की गति दिखाई नहीं देती।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 6 से परीक्षा के लिए प्रश्न उत्तर
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 पर आधारित अतिलघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. बल का SI मात्रक क्या है?
उत्तर देखेंबल का SI मात्रक न्यूटन (N) है। एक न्यूटन बल वह है जो 1 kg द्रव्यमान में 1 m s⁻² त्वरण उत्पन्न करता है।
2. संतुलित बल किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंजब किसी वस्तु पर लगे दो या अधिक बल परिमाण में बराबर परंतु दिशा में विपरीत हों, तो उन्हें संतुलित बल कहते हैं।
3. परिणामी बल क्या है?
उत्तर देखेंजब वस्तु पर लगे बल संतुलित नहीं होते, तब उत्पन्न होने वाले शून्य से भिन्न परिमाण के बल को परिणामी बल कहते हैं।
4. घर्षण बल किस दिशा में कार्य करता है?
उत्तर देखेंघर्षण बल सदैव वस्तु की गति की दिशा के विपरीत दिशा में कार्य करता है, जिससे वस्तु की गति धीमी होती है।
5. अभिलंब बल किसे कहते हैं?
उत्तर देखेंकिसी सतह द्वारा उस पर रखी वस्तु पर सतह के लंबवत ऊपर की ओर लगाया गया बल अभिलंब बल कहलाता है।
6. न्यूटन के प्रथम नियम को किस अन्य नाम से जाना जाता है?
उत्तर देखेंन्यूटन के प्रथम नियम को जड़त्व का नियम (Law of Inertia) भी कहा जाता है, जिसे गैलीलियो ने सबसे पहले सुझाया था।
7. न्यूटन के गति के द्वितीय नियम का सूत्र लिखिए।
उत्तर देखेंन्यूटन के द्वितीय नियम का सूत्र F = ma है, जहाँ F बल, m द्रव्यमान और a त्वरण को दर्शाता है।
8. संवेग की परिभाषा दीजिए।
उत्तर देखेंकिसी वस्तु का संवेग उसके द्रव्यमान और वेग के गुणनफल के रूप में परिभाषित किया जाता है; इसकी दिशा वेग की दिशा होती है।
9. न्यूटन के तृतीय नियम का कथन क्या है?
उत्तर देखेंजब कोई वस्तु किसी दूसरी वस्तु पर बल लगाती है, तो दूसरी वस्तु भी उसी समय पहली वस्तु पर बराबर विपरीत बल लगाती है।
10. गुरुत्वीय त्वरण (g) का मान क्या है?
उत्तर देखेंपृथ्वी की सतह के निकट गुरुत्वीय त्वरण का मान लगभग g = 9.8 m s⁻² होता है; अनुमानित गणनाओं में इसे 10 m s⁻² लिया जाता है।
11. क्रिकेट में क्षेत्ररक्षक गेंद पकड़ते समय हाथ पीछे क्यों खींचता है?
उत्तर देखेंहाथ पीछे खींचने से गेंद रुकने में लगने वाला समय बढ़ जाता है, जिससे त्वरण और गेंद द्वारा हाथ पर लगने वाला बल कम हो जाता है।
12. वाहनों में एयरबैग का उपयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर देखेंएयरबैग टक्कर के समय रुकने में लगने वाला समय बढ़ा देता है, जिससे त्वरण घटता है और यात्रियों को गंभीर चोट से बचाया जा सकता है।
13. कमानीदार तुला किस कार्य के लिए प्रयोग होती है?
उत्तर देखेंकमानीदार तुला का उपयोग किसी वस्तु का भार मापने के साथ-साथ सामान्य रूप से किसी भी बल का परिमाण मापने के लिए किया जाता है।
14. दैनिक जीवन में हम जिन न्यूनतम बलों का अनुभव करते हैं, वे किस कोटि के होते हैं?
उत्तर देखेंदैनिक जीवन में अनुभव किए जाने वाले न्यूनतम बल प्रायः मिलीन्यूटन (10⁻³ N) की कोटि के होते हैं, जैसे हल्का-सा स्पर्श।
15. रॉकेट ऊपर की ओर कैसे उठता है?
उत्तर देखेंरॉकेट इंजन गैस को तेज़ी से नीचे निष्कासित करता है, जिसके प्रतिक्रिया-स्वरूप रॉकेट पर ऊपर की ओर बराबर बल लगता है और वह उड़ान भरता है।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 पर आधारित लघुउत्तरीय प्रश्न उत्तर
लघु उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. नाविक के चप्पू चलाने पर डोंगी आगे क्यों बढ़ती है?
उत्तर देखेंजब नाविक चप्पू से जल को पीछे की ओर धकेलता है, तो न्यूटन के तृतीय नियमानुसार जल भी चप्पू और डोंगी पर बराबर और विपरीत दिशा में (आगे की ओर) बल लगाता है, जिससे डोंगी आगे की दिशा में गति करने लगती है।
2. साइकिल चलाते समय पैडल मारने पर साइकिल आगे कैसे बढ़ती है?
उत्तर देखेंपैडल मारने पर पहिए पृथ्वी की सतह को पीछे की ओर धकेलते हैं। न्यूटन के तृतीय नियम के अनुसार पृथ्वी की सतह पहियों पर विपरीत दिशा में (आगे की ओर) बल लगाती है, जिससे साइकिल आगे बढ़ती है।
3. दो अलग-अलग द्रव्यमान वाली वस्तुओं पर समान बल लगाने पर उनका त्वरण अलग क्यों होता है?
उत्तर देखेंन्यूटन के द्वितीय नियम के अनुसार त्वरण, वस्तु के द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है (a = F/m)। अतः समान बल होने पर भी कम द्रव्यमान वाली वस्तु में अधिक त्वरण तथा अधिक द्रव्यमान वाली वस्तु में कम त्वरण उत्पन्न होता है।
4. घर्षण बल किन कारकों पर निर्भर करता है? क्रियाकलाप के आधार पर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंघर्षण बल संपर्क में आने वाली सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है। क्रियाकलाप 6.1 और 6.2 से पता चलता है कि खुरदरी सतह (जैसे लकड़ी) पर घर्षण अधिक तथा चिकनी सतह (जैसे पॉलिशदार संगमरमर) पर घर्षण कम होता है, जिससे वस्तु अधिक दूरी तय करती है।
5. वस्तुओं के निकाय पर लगने वाले बल की गणना करने की सरल विधि क्या है?
उत्तर देखेंसरल विधि यह है कि परस्पर जुड़ी सभी वस्तुओं को एक ही निकाय मान लिया जाए। निकाय के भीतर के आंतरिक बलों (जैसे डोरी में तनाव) पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती, केवल बाह्य बल महत्वपूर्ण होते हैं, जिससे विश्लेषण सरल हो जाता है।
6. पृथ्वी और फल एक-दूसरे पर बराबर गुरुत्वाकर्षण बल लगाते हैं, फिर भी फल पृथ्वी की ओर गिरता है, पृथ्वी फल की ओर नहीं — क्यों?
उत्तर देखेंयद्यपि दोनों पर लगने वाला बल बराबर है, परंतु पृथ्वी का द्रव्यमान फल की तुलना में बहुत अधिक होने के कारण पृथ्वी में उत्पन्न त्वरण (a = F/m) नगण्य होता है, इसलिए पृथ्वी की गति हमारे संज्ञान में नहीं आती।
7. बंदूक से गोली चलाने पर बंदूक पीछे की ओर क्यों झटका खाती है?
उत्तर देखेंगोली चलने पर बंदूक गोली पर आगे की दिशा में बल लगाती है। न्यूटन के तृतीय नियमानुसार गोली भी बंदूक पर बराबर एवं विपरीत दिशा में बल लगाती है, जिससे बंदूक पीछे की ओर प्रतिक्षेपित होती है।
8. ऊँची कूद प्रतियोगिता में रेत या फोम के गद्दे का प्रयोग क्यों किया जाता है?
उत्तर देखेंरेत या फोम का गद्दा खिलाड़ी के गिरने पर रुकने का समय बढ़ा देता है, जिससे उत्पन्न त्वरण कम होता है। न्यूटन के द्वितीय नियम अनुसार कम त्वरण से खिलाड़ी पर लगने वाला बल भी कम होता है, जिससे चोट लगने की संभावना घट जाती है।
9. चलते या दौड़ते समय घर्षण बल किस प्रकार सहायक होता है?
उत्तर देखेंचलते समय पैर पृथ्वी की सतह को पीछे की ओर धकेलते हैं। घर्षण बल इसका विरोध करते हुए पैरों पर आगे की दिशा में कार्य करता है, जिससे व्यक्ति आगे की ओर गति करता है। इस स्थिति में घर्षण गति में सहायता करता है, विरोध नहीं करता।
10. नियत वेग से गतिमान वस्तु के लिए स्थिति-समय और वेग-समय ग्राफ की प्रकृति कैसी होगी?
उत्तर देखेंयदि वस्तु नियत वेग से गतिमान है और उस पर कोई परिणामी बल कार्य नहीं कर रहा, तो वेग-समय ग्राफ समय-अक्ष के समांतर एक सीधी रेखा होगी, जबकि स्थिति-समय ग्राफ एक झुकी हुई सीधी रेखा होगी।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 पर आधारित दीर्घउत्तरीय प्रश्न उत्तर
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न उत्तर
1. न्यूटन के गति के तीनों नियमों को उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंन्यूटन का प्रथम नियम (जड़त्व का नियम) बताता है कि कोई वस्तु विरामावस्था या नियत वेग की अवस्था में तब तक बनी रहती है जब तक उस पर कोई परिणामी बल कार्य न करे – जैसे मेज पर रखी किताब बिना बल के गति में नहीं आती। द्वितीय नियम (F = ma) बताता है कि त्वरण, बल के समानुपाती और द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती होता है – जैसे कम द्रव्यमान की गेंद को धकेलना सुगम होता है। तृतीय नियम बताता है कि हर क्रिया की बराबर और विपरीत प्रतिक्रिया होती है – जैसे तैराक पानी को पीछे धकेलता है तो पानी उसे आगे धकेलता है। ये तीनों नियम मिलकर वस्तुओं की गति की पूर्ण व्याख्या करते हैं।
2. क्रियाकलाप की सहायता से स्पष्ट कीजिए कि घर्षण बल भिन्न-भिन्न सतहों के लिए भिन्न-भिन्न होता है।
उत्तर देखेंक्रियाकलाप 6.1 में तानित रबड़ बैंड की सहायता से सिक्कों के ढेर को अलग-अलग सतहों (लकड़ी, पटलित मेज, संगमरमर) पर धकेला जाता है। देखा जाता है कि खुरदरी सतह (लकड़ी) पर सिक्कों का ढेर कम दूरी तय कर रुक जाता है, जबकि चिकनी सतह (संगमरमर) पर अधिक दूरी तय करता है। इसके पश्चात क्रियाकलाप 6.2 में कमानीदार तुला से गुटके को खींचकर घर्षण बल का प्रत्यक्ष मान लिया जाता है, जो विभिन्न सतहों पर भिन्न-भिन्न पाया जाता है, जिससे सिद्ध होता है कि घर्षण बल संपर्क सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है।
3. न्यूटन के गति के द्वितीय नियम की स्थापना कैसे की जाती है? क्रियाकलाप के आधार पर समझाइए।
उत्तर देखेंक्रियाकलाप 6.3 और 6.4 में एक गाड़ी को घिरनी और गिलास द्वारा नियत बल से खींचा जाता है, और वीडियो के माध्यम से समय-अंतराल मापा जाता है। जब गिलास का द्रव्यमान (अर्थात बल) बढ़ाया जाता है, तो पाया जाता है कि गाड़ी का त्वरण भी बढ़ जाता है – इससे सिद्ध होता है कि त्वरण, बल के समानुपाती है। जब गाड़ी का द्रव्यमान बढ़ाया जाता है (बल नियत रखते हुए), तो त्वरण घट जाता है – इससे सिद्ध होता है कि त्वरण, द्रव्यमान के व्युत्क्रमानुपाती है। इन दोनों संबंधों को मिलाकर सूत्र F = ma प्राप्त होता है, जो न्यूटन का द्वितीय नियम कहलाता है।
4. दैनिक जीवन में न्यूटन के तृतीय नियम के चार उदाहरण देकर स्पष्ट कीजिए।
उत्तर देखेंपहला उदाहरण – नारियल के पेड़ पर चढ़ते समय व्यक्ति के पैर तने को नीचे धकेलते हैं और तना व्यक्ति को ऊपर की ओर बराबर बल से धकेलता है। दूसरा – डोंगी चलाते समय चप्पू जल को पीछे धकेलता है और जल चप्पू व डोंगी को आगे धकेलता है। तीसरा – रॉकेट प्रमोचन में गैस नीचे की ओर निष्कासित होती है और रॉकेट पर ऊपर की ओर बराबर बल लगता है। चौथा – बंदूक से गोली चलाने पर गोली आगे बढ़ती है और बंदूक पीछे की ओर प्रतिक्षेपित होती है। इन सभी उदाहरणों में क्रिया-प्रतिक्रिया के बल बराबर परिमाण के परंतु अलग-अलग वस्तुओं पर विपरीत दिशा में कार्य करते हैं।
5. वस्तुओं के निकाय पर लगने वाले बलों का विश्लेषण उदाहरण सहित समझाइए।
उत्तर देखेंजब दो पेटिकाएँ (द्रव्यमान m₁ व m₂) एक डोरी द्वारा जुड़ी हों और घर्षण रहित सतह पर एक बल F से खींची जाएँ, तो दोनों पेटिकाओं और डोरी को एक ही निकाय मानकर विश्लेषण सरल हो जाता है। इस स्थिति में डोरी का तनाव आंतरिक बल होता है जिस पर विचार करने की आवश्यकता नहीं, केवल बाह्य बल F महत्वपूर्ण है। न्यूटन के द्वितीय नियम अनुसार निकाय का त्वरण a = F/(m₁+m₂) होगा, ठीक वैसे ही जैसे (m₁+m₂) द्रव्यमान की एक वस्तु त्वरित होती है। यह विधि जटिल वस्तुओं के निकायों (जैसे मानव शरीर की समग्र गति) के अध्ययन को भी सरल बनाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
क्या कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण का “गति पर बलों का प्रभाव” अध्याय सत्र 2026-27 में नया जोड़ा गया है या पुराने पाठ्यक्रम से लिया गया है?
यह अध्याय नई एनसीईआरटी पाठ्यपुस्तक “अन्वेषण” का हिस्सा है, जो सत्र 2026-27 से लागू की गई है। पुराने एनसीईआरटी विज्ञान में “बल तथा गति के नियम” नाम से यह अध्याय 9 के रूप में आता था। नई पुस्तक में इसे अध्याय 6 के रूप में पुनर्गठित किया गया है, जिसमें कई नए क्रियाकलाप, “जिज्ञासा-सूत्र” बॉक्स और अद्यतन उदाहरण जोड़े गए हैं, जबकि मूल वैज्ञानिक अवधारणाएं (न्यूटन के तीन नियम) पहले जैसी ही हैं।
कक्षा 9 विज्ञान अध्याय “गति पर बलों का प्रभाव” वार्षिक परीक्षा के लिए कितना महत्वपूर्ण है और इससे कितने अंकों के प्रश्न आते हैं?
यह अध्याय भौतिकी खंड का एक प्रमुख अध्याय है और परीक्षा में इससे सामान्यतः 8-10 अंकों के प्रश्न पूछे जाते हैं, जिसमें संख्यात्मक प्रश्न, न्यूटन के नियमों पर आधारित प्रश्न, ग्राफ-आधारित प्रश्न, और अवधारणा-आधारित लघु/दीर्घ उत्तरीय प्रश्न शामिल होते हैं। यह अध्याय कक्षा 11 की भौतिकी की नींव भी बनाता है, इसलिए इसे अच्छी तरह समझना दीर्घकालिक दृष्टि से भी लाभदायक है।
विद्यार्थियों को कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 पढ़ते समय सबसे ज्यादा कठिनाई किन विषयों में होती है?
विद्यार्थियों को आमतौर पर सबसे ज्यादा कठिनाई न्यूटन के द्वितीय नियम पर आधारित संख्यात्मक प्रश्नों (F = ma के प्रयोग), वस्तुओं के निकाय पर लगने वाले बलों की गणना, और वेग-समय ग्राफ से बल निकालने वाले प्रश्नों में होती है। इसके अलावा संवेग की अवधारणा और तृतीय नियम में “बराबर बल होने पर भी त्वरण अलग-अलग क्यों होता है” — यह समझना भी विद्यार्थियों के लिए चुनौतीपूर्ण रहता है। नियमित अभ्यास व उदाहरणों को हल करने से यह कठिनाई दूर हो जाती है।
क्या कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 के क्रियाकलाप परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण हैं?
हाँ, क्रियाकलाप 6.1 से 6.7 (जैसे घर्षण बल मापना, कमानीदार तुला से प्रयोग, गुब्बारे से रॉकेट सिद्धांत समझना) परीक्षा में अवधारणा-स्पष्टीकरण और “क्यों होता है” प्रकार के प्रश्नों के लिए आधार बनते हैं। बहुत से स्कूल इन क्रियाकलापों पर आधारित प्रैक्टिकल/प्रोजेक्ट कार्य भी देते हैं। इसलिए विद्यार्थियों को केवल परिणाम रटने के बजाय क्रियाकलाप की प्रक्रिया और उसके पीछे का तर्क समझना चाहिए।
अभिभावक अपने बच्चे को कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण पाठ 6 घर पर समझाने में कैसे मदद कर सकते हैं?
अभिभावक दैनिक जीवन के उदाहरणों जैसे साइकिल चलाना, कार का सीट-बेल्ट, गेंद फेंकना, या दरवाज़ा धकेलना आदि से बच्चों को बल और गति की अवधारणा समझा सकते हैं। घर में उपलब्ध सामग्री (रबड़ बैंड, सिक्के, स्प्रिंग तुला) से किताब में दिए क्रियाकलाप स्वयं करवाना अवधारणाओं को स्थायी रूप से समझने में बहुत सहायक होता है, जो केवल किताबी पढ़ाई से संभव नहीं होता।
कक्षा 9 विज्ञान अन्वेषण अध्याय 6 को पढ़ने के बाद अगली कक्षाओं (11वीं-12वीं) में कौन-से टॉपिक इससे जुड़े मिलेंगे?
यह अध्याय कक्षा 11 भौतिकी के “गति के नियम” पाठ की सीधी नींव है, जहाँ बल, संवेग, वृत्तीय गति में बल और घर्षण जैसी अवधारणाओं को अधिक गणितीय और गहराई से पढ़ाया जाता है। इसके अलावा यह इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं (जेईई) और मेडिकल प्रवेश परीक्षा (एनईईटी) के भौतिकी सेक्शन के लिए भी एक बुनियादी अध्याय माना जाता है, इसलिए कक्षा 9 में इसकी ठोस समझ बनाना आगे के लिए फायदेमंद है।
