एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 स्वयं को प्रवृत्त करना – निर्देशांकों का उपयोग
एनसीईआरटी कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 समाधान – स्वयं को प्रवृत्त करना – निर्देशांकों का उपयोग , विद्यार्थियों को निर्देशांक ज्यामिति की रोचक और अत्यंत महत्वपूर्ण दुनिया से परिचित कराता है। इस अध्याय में यह सिखाया गया है कि किस प्रकार केवल दो संख्याओं की सहायता से किसी भी बिंदु की सटीक स्थिति को द्विआयामी तल में दर्शाया जाता है।
गणित मंजरी अध्याय 1 में कार्तीय तल, क्षैतिज अक्ष, ऊर्ध्वाधर अक्ष, मूलबिंदु, चतुर्थांश तथा दो बिंदुओं के बीच की दूरी ज्ञात करने के सूत्र को सरल और व्यावहारिक उदाहरणों के माध्यम से समझाया गया है। इस अवधारणा की जड़ें भारत की प्राचीन गणितीय परंपरा में हैं – सिंधु-सरस्वती सभ्यता की सुनियोजित नगर-योजना से लेकर बौधायन, आर्यभट्ट और ब्रह्मगुप्त जैसे महान गणितज्ञों के अमूल्य योगदान तक। यदि आप कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 के सभी प्रश्नों के हल, महत्वपूर्ण सूत्र, अभ्यास प्रश्नावली और परीक्षा उपयोगी नोट्स हिंदी में प्राप्त करना चाहते हैं, तो आप बिल्कुल सही जगह पर हैं।
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 के त्वरित लिंक:
- कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 अंग्रेजी मीडियम में
- मोबाइल से पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए कक्षा 9 गणित ऑफलाइन ऐप
एनसीईआरटी कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 समाधान
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 प्रश्नावली 1.1 समाधान
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 प्रश्नावली 1.1
चित्र 1.3 में रियान का कमरा दिखाया गया है, इसके कोनों को बिंदुओं OABC द्वारा चिह्नित किया गया है। चित्र में x-अक्ष और y-अक्ष को चिह्नित किया गया है। बिंदु O मूलबिंदु है।

चित्र 1.3 के आधार पर निम्नलिखित प्रश्नों के उत्तर दीजिए –
(i) यदि D₁R₁ रियान के कमरे के द्वार को प्रदर्शित करता है तो यह द्वार कमरे की बाईं दीवार (y-अक्ष) से कितनी दूरी पर स्थित है? द्वार x-अक्ष से कितनी दूरी पर स्थित है?
उत्तर:
कमरे का द्वार x-अक्ष पर स्थित है, इसलिए x-अक्ष से इसकी दूरी = 0 इकाई है।
चित्र से,
D₁ = (8, 0) और R₁ = (11.5, 0)
अतः द्वार, y-अक्ष (बाईं दीवार) से 8 इकाई दूर स्थित है।
(ii) D₁ के निर्देशांक क्या हैं?
उत्तर:
D₁ के निर्देशांक (8, 0) हैं।
(iii) यदि R₁ बिंदु (11.5, 0) है तो द्वार की चौड़ाई क्या है? क्या आपको लगता है कि कमरे के द्वार के लिए यह चौड़ाई उपयुक्त है? यदि कोई व्यक्ति पहिएदार कुर्सी (व्हीलचेयर) पर बैठकर कमरे में प्रवेश करना चाहता है तो क्या वह सरलतापूर्वक ऐसा कर पाएगा?
उत्तर:
D₁ के निर्देशांक (8, 0) तथा R₁ के निर्देशांक (11.5, 0) हैं।
अतः द्वार की चौड़ाई
= D₁ और R₁ के बीच की दूरी
= 11.5 − 8
= 3.5 इकाई
- यदि 1 इकाई = 1 फुट माना जाए, तो 3.5 फुट ≈ 42 इंच होता है, जो कमरे के द्वार के लिए काफी आरामदायक चौड़ाई है।
- सामान्यतः घरों के द्वार 30–36 इंच चौड़े होते हैं, इसलिए यह उससे थोड़ा अधिक है, जो बेहतर माना जाता है।
व्हीलचेयर के लिए:
- एक व्हीलचेयर को लगभग 32 इंच (≈ 2.7 फुट) चौड़ाई की आवश्यकता होती है।
- चूँकि 3.5 फुट > 2.7 फुट है, इसलिए यह द्वार पर्याप्त चौड़ा है।
अतः हम कह सकते हैं कि हाँ – यह द्वार की चौड़ाई उपयुक्त है और व्हीलचेयर पर बैठा व्यक्ति बिना किसी कठिनाई के सरलतापूर्वक कमरे में प्रवेश कर सकेगा।
(iv) यदि B₁ (0, 1.5) और B₂ (0, 4) स्नानगृह के द्वार की सीमा के अंतिम बिंदुओं को प्रदर्शित करते हैं तो क्या स्नानगृह का द्वार कमरे के द्वार की तुलना में संकीर्ण है या अधिक चौड़ा है?
उत्तर:
B₁ के निर्देशांक (0, 1.5) तथा B₂ के निर्देशांक (0, 4) हैं।
अतः स्नानगृह के द्वार की चौड़ाई = B₁ और B₂ के बीच की दूरी
= 4 − 1.5
= 2.5 इकाई
चूँकि 2.5 < 3.5 है, इसलिए स्नानगृह का द्वार कमरे के द्वार की तुलना में संकीर्ण (कम चौड़ा) है।
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 प्रश्नावली 1.2 समाधान
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 प्रश्नावली 1.2
एक आलेख पत्रक पर x-अक्ष, y-अक्ष और मूलबिंदु O को अंकित कीजिए। x-अक्ष पर (–7, 0) से लेकर (13, 0) तक और y-अक्ष पर (0, –15) से लेकर (0, 12) तक बिंदुओं का अंकन कीजिए।
(1 से.मी. = 1 इकाई का पैमाना उपयोग कीजिए)। चित्र 1.5 का उपयोग करते हुए अगले पृष्ठ पर दिए गए प्रश्नों के उत्तर दीजिए—

1. रियान की आयताकार अध्ययन मेज को इस प्रकार रखिए कि उसके तीन पाये बिंदुओं (8, 9), (11, 9) और (11, 7) पर स्थित हों।

(i) मेज का चौथा पाया कहाँ होगा?
उत्तर:
दिए गए तीन बिंदु आयत के तीन कोने बनाते हैं:
A = (8, 9), B = (11, 9), C = (11, 7)
आयत को पूरा करने के लिए चौथे बिंदु का
x-निर्देशांक A के समान = 8
y-निर्देशांक C के समान = 7 होगा
अतः चौथा पैर बिंदु (8, 7) पर होगा।
(ii) क्या मेज के लिए यह एक सही स्थान है?
उत्तर:
हाँ, यह एक अच्छा स्थान है क्योंकि:
- मेज़ कमरे के अंदर व्यवस्थित रूप से रखी गई है।
- यह दरवाज़ों या रास्तों को अवरुद्ध नहीं करती।
- यह दीवार के पास है, जो पढ़ाई के लिए सुविधाजनक होता है।
(iii) मेज की चौड़ाई क्या है? इसकी लंबाई क्या है? क्या आप मेज की ऊँचाई बता सकते हैं?
उत्तर:
चौड़ाई:
(8, 9) और (11, 9) के बीच दूरी
= 11 − 8 = 3 इकाई
लंबाई:
(11, 9) और (11, 7) के बीच दूरी
= 9 − 7 = 2 इकाई
ऊँचाई:
मेज़ की ऊँचाई ज्ञात नहीं की जा सकती, क्योंकि चित्र केवल ऊपर से दृश्य (2D) दर्शाता है, इसमें ऊँचाई (3D) की जानकारी नहीं दी गई है।
2. यदि एक स्नानगृह के द्वार का कब्जा B₁ पर है और यह शयनकक्ष की ओर खुलता है तो क्या यह अलमारी से टकराएगा? यदि द्वार अपेक्षाकृत अधिक चौड़ी का बनाया जाए तो इस संदर्भ में क्या आप कुछ परिवर्तनों का सुझाव देंगे?
उत्तर:
चित्र 1.5 के अनुसार:
B₁ = (0, 1.5)
B₂ = (0, 4)
अतः स्नानगृह के द्वार की चौड़ाई = 4 − 1.5 = 2.5 इकाई
- यदि द्वार B₁ पर कब्जे (हिंज) के साथ शयनकक्ष की ओर खुलता है, तो यह B₁ से 2.5 इकाई त्रिज्या का एक चाप (आर्क) बनाएगा।
- अब अलमारी का निकटतम भाग लगभग इन बिंदुओं से शुरू होता है: W₁ = (3, 0), W₄ = (3, 2)
- बिंदु B₁ (0, 1.5) से अलमारी की दूरी x-दिशा में लगभग 3 इकाई है, जो द्वार की चौड़ाई 2.5 इकाई से अधिक है।
अतः, द्वार अलमारी से नहीं टकराएगा।
यदि द्वार और चौड़ा किया जाए तो सुझाव:
द्वार बहुत चौड़ा होने पर अलमारी से टकराने की संभावना हो सकती है।
ऐसे में:
- द्वार को स्नानगृह की ओर (अंदर) खुलने वाला बनाया जा सकता है, या
- अलमारी को थोड़ा दाईं ओर खिसकाया जा सकता है, या
- द्वार की चौड़ाई सीमित रखी जा सकती है।
इससे स्थान का उपयोग अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बना रहेगा।
3. रियान के स्नानगृह की ओर देखिए –
(i) स्नानगृह के चार कोनों O, F, R और P के निर्देशांक क्या हैं?
उत्तर:
चित्र 1.5 के अनुसार:
स्नानगृह के चारों कोनों O, F, R और P के निर्देशांक इस प्रकार हैं:
O = (0, 0)
F = (0, 9)
R = (-6, 9)
P = (-6, 0)
(ii) रियान के स्नानगृह में फव्वारा क्षेत्र का आकार क्या है? इसके चारों कोनों के निर्देशांक लिखिए।
उत्तर:
चित्र के अनुसार: रियान के स्नानगृह के चारों कोनों के निर्देशांक –
S = (-6, 5)
H = (-3, 5)
W = (-2, 9)
R = (-6, 9)
चूँकि एक जोड़ी विपरीत भुजाएँ समानांतर हैं, इसलिए SHWR एक समलंब चतुर्भुज है।
(iii) प्रक्षालन पात्र (वॉश बेसिन) के लिए 3 फुट × 2 फुट और प्रसाधन (शौचालय) के लिए 2 फुट × 3 फुट का स्थान चिह्नित कीजिए। इन स्थानों के कोनों के निर्देशांक लिखिए।
उत्तर:
प्रक्षालन पात्र का स्थान (3 फुट × 2 फुट):
स्नानगृह के निचले-बाएँ कोने में आयत के कोनों के निर्देशांक:
(-6, 0), (-3, 0), (-3, 2) और (-6, 2)
प्रसाधन का स्थान (2 फुट × 3 फुट):
प्रक्षालन पात्र के ऊपर एक आयत के कोनों के निर्देशांक:
(-6, 2), (-4, 2), (-4, 5) और (-6, 5)
प्रक्षालन पात्र के कोनों के निर्देशांक:
(-6, 0), (-3, 0), (-3, 2) और (-6, 2)
प्रसाधन के कोनों के निर्देशांक:
(-6, 2), (-4, 2), (-4, 5) और (-6, 5)
4. घर में अन्य कमरे –
(i) रियान कमरे के प्रवेशद्वार तक भोजनकक्ष से होकर जाता है जिसकी लंबाई 18 फुट और चौड़ाई 15 फुट है। भोजनकक्ष की लंबाई बिंदु P से लेकर बिंदु A तक है। भोजनकक्ष का रेखाचित्र खींचिए और इसके कोनों के निर्देशांकों को अंकित कीजिए।
उत्तर:
चित्र 1.5 के अनुसार:
P के निर्देशांक = (-6, 0)
A के निर्देशांक = (12, 0)
अतः PA की लंबाई = 12 − (−6) = 18 फुट, जो दी गई लंबाई के बराबर है।
यदि भोजनकक्ष की चौड़ाई 15 फुट है और वह PA के नीचे स्थित है, तो इसकी ऊपरी भुजा PA होगी और यह नीचे की ओर 15 इकाई तक फैलेगा।
इस प्रकार, भोजनकक्ष के चारों कोनों के निर्देशांक होंगे:
- P = (-6, 0)
- A = (12, 0)
- Q = (12, -15)
- S = (-6, -15)
अतः भोजनकक्ष के कोनों के निर्देशांक (-6, 0), (12, 0), (12, -15) और (-6, -15) हैं।
(ii) भोजनकक्ष के ठीक मध्य में एक 5 फुट × 3 फुट क्षेत्रफल की आयताकार भोजन-मेज (डाइनिंग टेबल) रखिए। मेज के पायों के निर्देशांकों को लिखिए।
उत्तर:
भोजनकक्ष का विस्तार:
x = -6 से 12 तक
y = 0 से -15 तक
भोजनकक्ष का केंद्र:
x-निर्देशांक = (-6 + 12)/2 = 3
y-निर्देशांक = (0 + (-15))/2 = -7.5
अब 5 फुट × 3 फुट की भोजन-मेज को केंद्र पर रखते हैं।
लंबाई (x-अक्ष के समानांतर) = 5 इकाई ⇒ आधी = 2.5
चौड़ाई (y-अक्ष के समानांतर) = 3 इकाई ⇒ आधी = 1.5
अतः, भोजन-मेज के चारों पैरों (कोनों) के निर्देशांक निम्नलिखित प्रकार से होंगे:
(0.5, -9), (5.5, -9), (5.5, -6), (0.5, -6)
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 अभ्यास के प्रश्नों के हल
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 अंतिम प्रश्नावली में दिए गए प्रश्नों के समाधान
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 अंतिम प्रश्नावली
1. दोनों अक्षों के प्रतिच्छेद बिंदु के x-निर्देशांक और y-निर्देशांक क्या होंगे?
उत्तर:
x-अक्ष और y-अक्ष मूलबिंदु पर एक-दूसरे को काटते हैं।
अतः:
- x-निर्देशांक = 0
- y-निर्देशांक = 0
इसलिए, प्रतिच्छेदन बिंदु (0, 0) है।
2. बिंदु W का x-निर्देशांक –5 है। क्या आप उस बिंदु H के निर्देशांकों को ज्ञात कर सकते हैं जो W से होकर जाती हुई y-अक्ष के सामानांतर रेखा पर स्थित हो? बिंदु H किन चतुर्थांशों में स्थित हो सकता है?
उत्तर:
यदि बिंदु W का x-निर्देशांक –5 है, तो W से होकर y-अक्ष के समानांतर जाने वाली किसी भी रेखा पर स्थित प्रत्येक बिंदु का x-निर्देशांक भी –5 ही होगा।
अतः H के निर्देशांक इस रूप में होंगे:
H = (–5, y), जहाँ y कोई भी वास्तविक संख्या हो सकता है।
अब y के मान के अनुसार:
- यदि y > 0, तो H द्वितीय (II) चतुर्थांश में होगा।
- यदि y < 0, तो H तृतीय (III) चतुर्थांश में होगा।
- यदि y = 0, तो H x-अक्ष पर होगा।
अतः H द्वितीय चतुर्थांश, तृतीय चतुर्थांश या x-अक्ष पर स्थित हो सकता है।
3. बिंदु R (3, 0), A(0, –2), M (–5, –2) तथा P (–5, 2) पर विचार कीजिए। यदि वे इसी क्रम में मिलाए गए हैं तो अनुमान लगाइए –
(i) RAMP की दो भुजाएँ जो परस्पर लंबवत हैं।
उत्तर:
आइए देखें:
AM बिंदु A(0, –2) से M(–5, –2) को जोड़ता है, इसलिए यह क्षैतिज रेखा है।
MP बिंदु M(–5, –2) से P(–5, 2) को जोड़ता है, इसलिए यह ऊर्ध्वाधर रेखा है।
एक क्षैतिज और एक ऊर्ध्वाधर रेखा आपस में लम्बवत होती हैं।
अतः: AM ⟂ MP
इसलिए लम्बवत भुजाएँ AM और MP हैं।
(ii) RAMP की वह भुजा जो किसी एक अक्ष के समानांतर है।
उत्तर:
AM भुजा x-अक्ष के समानांतर है क्योंकि A और M दोनों के y-निर्देशांक (–2) समान हैं।
MP भुजा y-अक्ष के समानांतर है क्योंकि M और P दोनों के x-निर्देशांक (–5) समान हैं।
अतः किसी एक अक्ष के समानांतर भुजा हैं:
AM (x-अक्ष के समानांतर) या MP (y-अक्ष के समानांतर)।
(iii) दो बिंदु जो एक अक्ष में एक-दूसरे के दर्पण प्रतिबिंब हैं। यह अक्ष कौन-सा होगा? अब बिंदुओं को अंकित कीजिए और अपने अनुमान को सत्यापित कीजिए।
उत्तर:
M(–5, –2) और P(–5, 2) की तुलना करने पर:
इन दोनों के x-निर्देशांक समान हैं।
इनके y-निर्देशांक समान परिमाण के हैं लेकिन चिन्ह विपरीत हैं।
अतः ये दोनों बिंदु x-अक्ष के सापेक्ष एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं।
इसलिए बिंदु M और P एक-दूसरे के प्रतिबिंब हैं।
यह प्रतिबिंब x-अक्ष के सापेक्ष है।

4. कार्तीय तल पर बिंदु Z (5, –6) का अंकन कीजिए। एक समकोण त्रिभुज IZN की रचना कीजिए और तीनों भुजाओं की लंबाइयाँ ज्ञात कीजिए।
टिप्पणी: आपके उत्तरों में अंतर हो सकता है
उत्तर:
बिंदु Z = (5, –6) है।
समकोण त्रिभुज बनाने के लिए हम लेते हैं:
I = (5, 0) (x-अक्ष पर)
N = (0, –6) (y-अक्ष पर)
क्या त्रिभुज IZN एक समकोण त्रिभुज है? आएये जांच करते हैं:
IZ ऊर्ध्वाधर है और
ZN क्षैतिज है
इसलिए त्रिभुज IZN में समकोण Z पर बनता है।
बिन्दुओं के निर्देशांक:
I = (5, 0)
Z = (5, –6)
N = (0, –6)
अब, भुजाओं की लंबाई ज्ञात करते हैं:
1. IZ:
बिंदुओ (5, 0) और (5, –6) के बीच की दूरी
= 0 – (–6) = 6 इकाई
2. ZN:
बिंदुओं (5, –6) और (0, –6) के बीच की दूरी
= 5 – 0 = 5 इकाई
3. IN:
दूरी सूत्र के प्रयोग से:
IN = √[(5 – 0)² + (0 – (–6))²]
= √(5² + 6²)
= √(25 + 36)
= √61 इकाई
अतः, एक संभव समकोण त्रिभुज निम्न बिंदुओं द्वारा बनता है:
I = (5, 0)
Z = (5, –6)
N = (0, –6)
भुजाओं की लंबाई:
IZ = 6 इकाई
ZN = 5 इकाई
IN = √61 इकाई

5. यदि ऋणात्मक संख्याएँ नहीं होतीं तो निर्देशांक पद्धति कैसी होती? क्या इस पद्धति से द्वि-विमीय तल में सभी बिंदुओं को अंकित किया जा सकता था?
उत्तर:
यदि हमारे पास ऋणात्मक संख्याएँ न होतीं, तो निर्देशांक केवल शून्य या धनात्मक ही हो सकते थे।
इसलिए:
- x-अक्ष पर हम केवल मूल बिंदु के दाईं ओर के बिंदुओं को ही दर्शा सकते।
- y-अक्ष पर हम केवल मूल बिंदु के ऊपर के बिंदुओं को ही दर्शा सकते।
इसका अर्थ है कि हम केवल निम्न स्थानों पर स्थित बिंदुओं का निर्धारण कर पाते:
प्रथम चतुर्थांश
- x-अक्ष का धनात्मक भाग
- y-अक्ष का धनात्मक भाग
- तथा मूल बिंदु
हम निम्न बिंदुओं का निर्धारण नहीं कर पाते:
- द्वितीय चतुर्थांश के बिंदु
- तृतीय चतुर्थांश के बिंदु
- चतुर्थ चतुर्थांश के बिंदु
- अक्षों के ऋणात्मक भागों के बिंदु
अतः, ऐसी निर्देशांक प्रणाली हमें द्वि-आयामी तल (2-D plane) के सभी बिंदुओं का स्थान निर्धारित करने की अनुमति नहीं देती।
6. क्या बिंदु M (–3, –4), A (0, 0) और G (6, 8) एक ही सरल रेखा पर हैं? बिंदुओं के अंकन के बिना और बिंदुओं को जोड़े बिना एक विधि बताइए, जिसके माध्यम से हम इसका परीक्षण कर सकें।
उत्तर:
बिंदुओं M (–3, –4), A (0, 0) और G (6, 8) के एक ही सीधी रेखा पर स्थित होने की जाँच, दूरी सूत्र का उपयोग करके कर सकते हैं: d = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]
MA = √[(0 + 3)² + (0 + 4)²]
= √(3² + 4²)
= √(9 + 16) = √25 = 5
AG = √[(6 − 0)² + (8 − 0)²]
= √(36 + 64)
= √100 = 10
MG = √[(6 + 3)² + (8 + 4)²]
= √(9² + 12²)
= √(81 + 144)
= √225 = 15
यहाँ: MA + AG = 5 + 10 = 15 = MG
चूँकि दो दूरियों का योग तीसरी दूरी के बराबर है, इसलिए बिंदु M, A और G एक ही सीधी रेखा पर स्थित हैं।
7. अपनी विधि (प्रश्न 6 से) का उपयोग करते हुए यह परीक्षण कीजिए कि क्या बिंदु R (–5, –1), B (–2, –5) और C (4, –12) एक ही सरल रेखा पर हैं। अब बिंदुओं के दोनों समूहों को अंकित कीजिए और अपने उत्तरों की जाँच कीजिए।
अब दोनों बिंदु-समूहों को आरेखित कीजिए और अपने उत्तरों की जाँच कीजिए।
उत्तर:
बिंदुओं R (–5, –1), B (–2, –5) और C (4, –12) के एक ही सीधी रेखा पर स्थित होने की जाँच दूरी सूत्र का उपयोग करके करने के लिए:: d = √[(x₂ − x₁)² + (y₂ − y₁)²]
RB = √[(–2 + 5)² + (–5 + 1)²]
= √(3² + (–4)²)
= √(9 + 16) = √25 = 5
BC = √[(4 + 2)² + (–12 + 5)²]
= √(6² + (–7)²)
= √(36 + 49) = √85
RC = √[(4 + 5)² + (–12 + 1)²]
= √(9² + (–11)²)
= √(81 + 121) = √202
यहाँ: RB + BC = 5 + √85 ≠ √202
चूँकि दो दूरियों का योग तीसरी दूरी के बराबर नहीं है, इसलिए बिंदु R, B और C एक ही सीधी रेखा पर स्थित नहीं हैं।

8. मूलबिंदु को एक शीर्ष के रूप में उपयोग करते हुए, निम्नलिखित के शीर्षों को अंकित कीजिए –
(i) एक समकोण समद्विबाहु त्रिभुज।
उत्तर:
त्रिभुज OAB के शीर्षों का एक संभावित समूह है:
O = (0, 0)
A = (4, 0)
B = (0, 4)
क्योंकि:
OA = 4 इकाई
OB = 4 इकाई
OA, OB पर लंबवत है
अतः त्रिभुज OAB एक समकोण समद्विबाहु त्रिभुज है।

(ii) एक ऐसा समद्विबाहु त्रिभुज जिसका एक शीर्ष तृतीय चतुर्थांश में और अन्य शीर्ष चतुर्थ चतुर्थांश में हो।
उत्तर:
शीर्षों का एक संभावित समूह है:
O = (0, 0), P = (–3, –4), Q = (3, –4)
व्याख्या:
P तृतीय चतुर्थांश में स्थित है।
Q चतुर्थ चतुर्थांश में स्थित है।
OP = OQ = 5 इकाई
अतः त्रिभुज OPQ एक समद्विबाहु त्रिभुज है।

9. दी गई सारणी, बिंदुओं S, M और T के निर्देशांकों को प्रदर्शित करती है। प्रत्येक स्थिति में बताइए कि क्या M, रेखाखंड ST का मध्यबिंदु है। अपने उत्तर को सत्यापित कीजिए।

जब M, ST का मध्यबिंदु हो तो क्या आप M, S और T के निर्देशांकों के मध्य किसी संबंध का पता लगा सकते हैं?
उत्तर:

दूरी सूत्र का उपयोग करके: d = √[(x₂−x₁)² + (y₂−y₁)²]
(i) पंक्ति 1: S(−3, 0), M(0, 0), T(3, 0)
SM = √[(0−(−3))² + (0−0)²] = √[9 + 0] = 3
MT = √[(3−0)² + (0−0)²] = √[9 + 0] = 3
SM = MT = 3
हाँ, M मध्यबिंदु है।
(ii) पंक्ति 2: S(2, 3), M(3, 4), T(4, 5)
SM = √[(3−2)² + (4−3)²] = √[1 + 1] = √2
MT = √[(4−3)² + (5−4)²] = √[1 + 1] = √2
SM = MT = √2
हाँ, M मध्यबिंदु है।
(iii) पंक्ति 3: S(0, 0), M(0, 5), T(0, −10)
SM = √[(0−0)² + (5−0)²] = √[0 + 25] = 5
MT = √[(0−0)² + (−10−5)²] = √[0 + 225] = 15
SM ≠ MT (5 ≠ 15)
नहीं, M मध्यबिंदु नहीं है।
(iv) पंक्ति 4: S(−8, 7), M(0, −2), T(6, −3)
SM = √[(0−(−8))² + (−2−7)²] = √[64 + 81] = √145
MT = √[(6−0)² + (−3−(−2))²] = √[36 + 1] = √37
SM ≠ MT (√145 ≠ √37)
नहीं, M मध्यबिंदु नहीं है।

10. आपने जो संबंध ज्ञात किया है, उसका उपयोग करते हुए B के निर्देशांक ज्ञात कीजिए, यदि M (–7, 1), A (3, –4) और B (x, y) के मध्यबिंदु के रूप में दिया गया है।
दिया गया है: M (–7, 1), A (3, –4) और B (x, y) का मध्यबिंदु है।
अतः, दूरी सूत्र की अवधारणा के अनुसार, बिंदु M, A और B से समान दूरी पर होगा।
दूरी सूत्र का उपयोग करते हुए:
AM = √[(–7 − 3)² + (1 − (–4))²]
= √[(–10)² + (5)²]
= √(100 + 25)
= √125
अब, MB = √[(x + 7)² + (y − 1)²]
चूँकि दूरी AM = दूरी MB
अतः, √[(x + 7)² + (y − 1)²] = √125
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर:
(x + 7)² + (y − 1)² = 125 …(1)
साथ ही, क्योंकि M मध्यबिंदु है, यह A और B के बीच स्थित होता है, इसलिए B के निर्देशांक ऐसे होंगे कि M, AB को दो बराबर भागों में विभाजित करता है। सममिति (या निर्देशांकों के संतुलन) के आधार पर:
x-निर्देशांक के लिए:
A से M तक दूरी = –7 − 3 = –10
तो M से B तक दूरी भी –10 होगी
x = –7 − 10 = –17
y-निर्देशांक के लिए:
A से M तक दूरी = 1 − (–4) = 5
तो M से B तक दूरी भी 5 होगी
y = 1 + 5 = 6
अतः, B के निर्देशांक = (–17, 6)
एक अन्य विधि:
दिया गया:
A = (3, –4)
B = (x, y)
M = (–7, 1)
हम मध्यबिंदु सूत्र का उपयोग करते हैं:
मध्यबिंदु M = ((x₁ + x₂)/2, (y₁ + y₂)/2)
अतः, (3 + x)/2 = –7
⇒ 3 + x = –14
⇒ x = –17
और (–4 + y)/2 = 1
⇒ –4 + y = 2
⇒ y = 6
अतः, B के निर्देशांक: B = (–17, 6)
11. मान लीजिए रेखाखंड AB के त्रिविभाजन बिंदु P और Q हैं, जहाँ P, A के निकट है, जबकि Q, B के निकट है।
किसी रेखाखंड के मध्यबिंदु के निर्देशांकों को ज्ञात करने के अपने ज्ञान का उपयोग करते हुए P और Q के निर्देशांकों को आप कैसे ज्ञात करेंगे? इस विधि को उपयोग कीजिए, जब बिंदु A (4, 7) और B (16, –2) हैं।
उत्तर:
रेखाखंड AB का त्रिभाजन करने पर, P और Q इस खंड को 3 बराबर भागों में विभाजित करते हैं।
दिया गया है: A (4, 7), B (16, –2)
मान लीजिए P (x₁, y₁) और Q (x₂, y₂) हैं।

यहाँ, P, A और Q का मध्यबिंदु है, इसलिए
x₁ = (4 + x₂)/2 …(1)
y₁ = (7 + y₂)/2 …(2)
और Q, P और B का मध्यबिंदु है, इसलिए
x₂ = (x₁ + 16)/2 …(3)
y₂ = (y₁ − 2)/2 …(4)
अब x-निर्देशांकों के लिए हल करते हैं:
(1) से: x₁ = (4 + x₂)/2
और (3) से: x₂ = (x₁ + 16)/2
(1) को (3) में रखने पर:
x₂ = ((4 + x₂)/2 + 16)/2
= (4 + x₂ + 32)/4
= (x₂ + 36)/4
अतः, 4x₂ = x₂ + 36
⇒ 3x₂ = 36
⇒ x₂ = 12
अब (1) से: x₁ = (4 + 12)/2 = 8
अब y-निर्देशांकों के लिए:
(2) से: y₁ = (7 + y₂)/2
और (4) से: y₂ = (y₁ − 2)/2
(2) को (4) में रखने पर:
y₂ = ((7 + y₂)/2 − 2)/2
= (7 + y₂ − 4)/4
= (y₂ + 3)/4
अतः, 4y₂ = y₂ + 3
⇒ 3y₂ = 3
⇒ y₂ = 1
अब (2) से: y₁ = (7 + 1)/2 = 4
अतः, P = (8, 4) और Q = (12, 1)।
12. (i) दिए गए बिंदुओं A (1, –8), B (–4, 7) और C (–7, –4) के लिए प्रदर्शित कीजिए कि वे एक वृत्त K पर स्थित हैं जिसका केंद्र मूलबिंदु O (0, 0) है। वृत्त K की त्रिज्या क्या होगी?
उत्तर:
दूरी OA:
= √(1² + (–8)²)
= √(1 + 64)
= √65
दूरी OB:
= √((–4)² + 7²)
= √(16 + 49)
= √65
दूरी OC:
= √((–7)² + (–4)²)
= √(49 + 16)
= √65
चूँकि तीनों बिंदु मूल बिंदु से समान दूरी पर हैं, इसलिए वे (0, 0) केंद्र वाले एक वृत्त पर स्थित हैं।
त्रिज्या = √65
अतः बिंदु A, B और C, केंद्र (0, 0) और त्रिज्या √65 वाले वृत्त K पर स्थित हैं।

12. (ii) दिए गए बिंदुओं D (–5, 6) और E (0, 9) के लिए जाँच कीजिए कि क्या वे वृत्त K के भीतर स्थित हैं, वृत्त पर स्थित हैं या वृत्त के बाहर स्थित हैं।
उत्तर:
दूरी OD:
= √((–5)² + 6²)
= √(25 + 36)
= √61
दूरी OE:
= √(0² + 9²)
= 9
त्रिज्या √65 ≈ 8.06 से तुलना करें:
√61 ≈ 7.81 < √65 → D वृत्त के भीतर स्थित है 9 > √65 → E वृत्त के बाहर स्थित है
अतः,
D वृत्त के भीतर है।
E वृत्त के बाहर है।
13. त्रिभुज ABC की भुजाओं के मध्यबिंदु D, E और F हैं। D, E और F के निर्देशांक क्रमशः (5, 1), (6, 5) और (0, 3) दिए गए हैं, A, B और C के निर्देशांक ज्ञात कीजिए।
उत्तर:
मान लीजिए त्रिभुज ABC के शीर्ष A(x₁, y₁), B(x₂, y₂) और C(x₃, y₃) हैं।
दिए गए मध्यबिंदु हैं: D(5, 1), E(6, 5), F(0, 3)।

D, BC का मध्यबिंदु है, अतः मध्यबिंदु सूत्र के अनुसार:
x₂ + x₃ = 10 …(1)
y₂ + y₃ = 2 …(2)
E, CA का मध्यबिंदु है, अतः:
x₃ + x₁ = 12 …(3)
y₃ + y₁ = 10 …(4)
F, AB का मध्यबिंदु है, अतः:
x₁ + x₂ = 0 …(5)
y₁ + y₂ = 6 …(6)
अब x-निर्देशांकों के लिए हल करते हैं, (5) से:
x₂ = –x₁
इसे (1) में रखने पर: –x₁ + x₃ = 10
⇒ x₃ = 10 + x₁ …(7)
अब (3) में रखने पर: (10 + x₁) + x₁ = 12
⇒ 2x₁ + 10 = 12
⇒ 2x₁ = 2
⇒ x₁ = 1
तब: x₂ = –1
⇒ x₃ = 10 + 1 = 11
अब y-निर्देशांकों के लिए, (6) से:
y₂ = 6 – y₁
इसे (2) में रखने पर: (6 – y₁) + y₃ = 2
⇒ y₃ = y₁ – 4 …(8)
अब (4) में रखने पर: (y₁ – 4) + y₁ = 10
⇒ 2y₁ – 4 = 10
⇒ 2y₁ = 14
⇒ y₁ = 7
तब: y₂ = 6 – 7 = –1
⇒ y₃ = 7 – 4 = 3
अतः बिंदुओं के निर्देशांक हैं:
A (1, 7), B (–1, –1) और C (11, 3)।
14. एक शहर की दो मुख्य सड़कें हैं जो एक-दूसरे को शहर के केंद्र पर प्रतिच्छेद करती हैं। ये दो सड़कें उत्तर-दक्षिण और पूर्व-पश्चिम दिशा के अनुदिश हैं।
शहर की अन्य सभी गलियाँ इन्हीं सड़कों के समानांतर हैं और एक-दूसरे से 200 मी. की दूरी पर स्थित हैं। प्रत्येक दिशा में 10 गलियाँ हैं।
(i) 1 से.मी. = 200 मी. पैमाने का उपयोग करते हुए, अपनी अभ्यास-पुस्तिका में शहर का एक प्रतिरूप बनाइए। सड़कों को एकल रेखाओं द्वारा प्रस्तुत कीजिए।
उत्तर:
शहर का प्रतिरूप बनाना:
चूँकि पैमाना 1 सेमी = 200 मीटर है,
इसलिए प्रत्येक दो गलियों के बीच की दूरी 200 मीटर है।
दिया गया है कि:
उत्तर–दक्षिण (N–S) दिशा में 10 गलियाँ हैं
पूर्व–पश्चिम (E–W) दिशा में 10 गलियाँ हैं
अतः, प्रतिरूप निम्नलिखित प्रकार से होगा:
10 ऊर्ध्वाधर समानांतर रेखाएँ (N–S गलियों के लिए)
10 क्षैतिज समानांतर रेखाएँ (E–W गलियों के लिए)
प्रत्येक लगातार रेखा के बीच 1 सेमी का अंतर होगा, जिससे एक वर्गाकार ग्रिड बनेगा।

(ii) प्रदर्श में गलियों के प्रतिच्छेदन हैं। प्रत्येक गली प्रतिच्छेदन दो गलियों द्वारा बना है जिसमें एक गली उत्तर-दक्षिण दिशा और दूसरी गली पूर्व-पश्चिम दिशा की ओर जा रही है। प्रत्येक गली प्रतिच्छेदन की व्याख्या निम्नलिखित रूप में की गई है –
यदि उत्तर-दक्षिण दिशा में जाने वाली दूसरी गली और पूर्व-पश्चिम दिशा में जाने वाली पाँचवीं गली किसी स्थान पर प्रतिच्छेद करती हैं तो हम इस गली प्रतिच्छेदन को (2, 5) कहेंगे। इस पद्धति का उपयोग करते हुए ज्ञात कीजिए –
(a) गलियों के कितने प्रतिच्छेदनों को (4, 3) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है?
(b) गलियों के कितने प्रतिच्छेदनों को (3, 4) के रूप में व्यक्त किया जा सकता है?
उत्तर:
एक चौराहे को इस प्रकार नाम दिया जाता है:
(पहली संख्या, दूसरी संख्या)
= (N–S गली संख्या, E–W गली संख्या)
अतः:
(4, 3) का अर्थ है 4वीं N–S गली और 3वीं E–W गली का चौराहा।
(3, 4) का अर्थ है 3वीं N–S गली और 4वीं E–W गली का चौराहा।
अब, एक N–S गली और एक E–W गली केवल एक ही बिंदु पर मिल सकती हैं।
अतः:
(a) केवल एक चौराहा (4, 3) बन सकता है।
(b) केवल एक ही चौराहा (3, 4) बन सकता है।

15. एक कंप्यूटर ग्राफिक्स (चित्रांकन) कार्यक्रम में एक आयताकार दृश्यपटल (स्क्रीन) पर छवियों को प्रदर्शित किया जाता है जिसकी निर्देशांक पद्धति का मूलबिंदु नीचे बाएँ कोने में है।
दृश्यपटल की चौड़ाई और ऊँचाई क्रमशः 800 पिक्सेल और 600 पिक्सेल है। 80 पिक्सेल त्रिज्या वाला एक वृत्ताकार प्रतीक (आइकन), बिंदु A (100, 150) को केंद्रित करके बनाया गया है। 100 पिक्सेल त्रिज्या वाला एक अन्य वृत्ताकार प्रतीक बिंदु B (250, 230) को केंद्रित करके बनाया गया है। पता लगाइए—
(i) क्या किसी भी वृत्त का कोई भाग दृश्यपटल (स्क्रीन) से बाहर स्थित है?
(ii) क्या दोनों वृत्त एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करते हैं?
उत्तर:
(i) नहीं। दोनों वृत्त पूरी तरह स्क्रीन के अंदर स्थित हैं।
(ii) हाँ। दोनों वृत्त एक-दूसरे को प्रतिच्छेद करते हैं, जैसा कि चित्र में दर्शाया गया है।

16. कार्तीय तल पर बिंदु A(2, 1), B(–1, 2), C(–2, –1) और D(1, –2) का अंकन कीजिए। क्या ABCD एक वर्ग है? क्या आप व्याख्या कर सकते हैं कि ऐसा क्यों है? इस वर्ग का क्षेत्रफल क्या है?
उत्तर:
हाँ, ABCD एक वर्ग है।

हम इसे भुजाओं और विकर्णों की लंबाई ज्ञात करके जाँच सकते हैं।
सभी भुजाओं की लंबाई ज्ञात करना:
AB = √[(–1 − 2)² + (2 − 1)²]
= √[(–3)² + 1²]
= √(9 + 1)
= √10
BC = √[(–2 − (–1))² + (–1 − 2)²]
= √[(–1)² + (–3)²]
= √(1 + 9)
= √10
CD = √[(1 − (–2))² + (–2 − (–1))²]
= √[3² + (–1)²]
= √(9 + 1)
= √10
DA = √[(2 − 1)² + (1 − (–2))²]
= √[1² + 3²]
= √(1 + 9)
= √10
यहाँ, चारों भुजाएँ समान हैं।
अब विकर्णों की लंबाई ज्ञात करना:
AC = √[(–2 − 2)² + (–1 − 1)²]
= √[(–4)² + (–2)²]
= √(16 + 4)
= √20
BD = √[(1 − (–1))² + (–2 − 2)²]
= √[2² + (–4)²]
= √(4 + 16)
= √20
इसप्रकार, विकर्ण भी समान हैं।
चूँकि सभी भुजाएँ समान हैं और विकर्ण भी समान हैं, इसलिए ABCD एक वर्ग है।
ABCD का क्षेत्रफल = (भुजा)²
= (√10)²
= 10 वर्ग इकाई।
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 – अक्सर पूंछे जाने वाले प्रश्न
क्या कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 कठिन है?
नहीं, गणित मंजरी कक्षा 9 का पहला अध्याय उन छात्रों के लिए बिल्कुल भी कठिन नहीं है जिन्होंने पहले की कक्षाओं में संख्या रेखा और पाइथागोरस प्रमेय पढ़ी है। इस अध्याय की खासियत यह है कि यह सीधे रेइआन और शालिनी की कहानी से शुरू होता है, जिससे निर्देशांक की अवधारणा बहुत सहज और रोचक तरीके से समझ में आती है।
जो भाग थोड़ा ध्यान माँगता है वह है — ऋणात्मक निर्देशांकों वाले बिंदुओं की दूरी निकालना और चतुर्थांशों के चिह्न नियम। लेकिन यदि प्रतिदिन 30 मिनट अभ्यास किया जाए और पाठ्यपुस्तक के उदाहरण ध्यान से पढ़े जाएँ, तो यह अध्याय सरलता से पूरा किया जा सकता है। कुल मिलाकर यह अध्याय समझने में आसान और पढ़ने में रोचक है।
गणित मंजरी कक्षा 9 पाठ 1 को एक दिन में कैसे पूरा करें?
यदि परीक्षा नजदीक है और गणित मंजरी अध्याय 1 एक ही दिन में पूरा करना है, तो इस योजना को अपनाएँ:
- पहला घंटा — धारा 1.1 और 1.2 पढ़ें। इतिहास का भाग तेजी से पढ़ें, रेइआन के कमरे के चित्र को ध्यान से समझें।
- दूसरा घंटा — धारा 1.3 पढ़ें। x-अक्ष, y-अक्ष, मूल बिंदु और चारों चतुर्थांशों के चिह्न नियम याद करें। ग्राफ पेपर पर 10 बिंदु स्वयं प्लॉट करें।
- तीसरा घंटा — धारा 1.4 पढ़ें। दूरी सूत्र को बौधायन–पाइथागोरस प्रमेय से समझें और कम से कम 5 प्रश्न हल करें।
- चौथा घंटा — अध्याय सारांश पढ़ें और अभ्यास प्रश्न 1 से 5 हल करें। तारांकित प्रश्न एक दिन की तैयारी में छोड़ दें।
इस क्रम से कक्षा 9 गणित मंजरी का पहला अध्याय एक दिन में अच्छी तरह तैयार किया जा सकता है।
परीक्षा की दृष्टि से गणित मंजरी क्लास 9 चैप्टर 1 के कौन-से बिंदु सबसे महत्वपूर्ण हैं?
परीक्षा में कक्षा 9 गणित मंजरी पाठ 1 से सबसे अधिक निम्नलिखित बिंदुओं पर प्रश्न पूछे जाते हैं:
- मूल बिंदु के निर्देशांक — यह सदैव (0, 0) होते हैं, यह हमेशा याद रखें।
- चारों चतुर्थांशों के चिह्न नियम — (+,+), (−,+), (−,−), (+,−) — यह सबसे अधिक पूछा जाने वाला विषय है।
- अक्षों पर स्थित बिंदुओं के निर्देशांक — x-अक्ष पर (x, 0) और y-अक्ष पर (0, y)।
- दूरी सूत्र — √[(x₂−x₁)² + (y₂−y₁)²] — इसे व्युत्पन्न करना और प्रयोग करना दोनों आने चाहिए।
- क्रमित युग्म की अवधारणा — (x, y) और (y, x) एक ही बिंदु नहीं हैं, जब तक x = y न हो।
- मध्य बिंदु सूत्र — यह तारांकित प्रश्नों में आता है परंतु परीक्षा में पूछा जा सकता है।
इन बिंदुओं को अच्छी तरह तैयार करने से गणित मंजरी अध्याय 1 में पूरे अंक प्राप्त किए जा सकते हैं।
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 को कितने कालांशों में पूरा करना चाहिए और पढ़ाने की सही योजना क्या हो?
गणित मंजरी कक्षा 9 का पहला अध्याय सामग्री की दृष्टि से समृद्ध है, इसलिए इसे कम से कम 10 से 12 कालांशों में पूरा करना उचित रहेगा। पाठ योजना इस प्रकार बनाई जा सकती है:
- कालांश 1-2 — भारतीय गणितीय इतिहास पर चर्चा और रेइआन के कमरे की कहानी। छात्रों से उनके अपने कमरे का नक्शा बनवाएँ।
- कालांश 3-5 — कार्तीय निर्देशांक प्रणाली, अक्ष, मूल बिंदु, चतुर्थांश और बिंदुओं का आलेखन। अभ्यास प्रश्नावली 1.1 और 1.2 कक्षा में हल कराएँ।
- कालांश 6-8 — दूरी सूत्र की व्युत्पत्ति, हल किए उदाहरण और अभ्यास प्रश्न।
- कालांश 9-10 — अध्यायांत अभ्यास के सामान्य प्रश्न।
- कालांश 11-12 — तारांकित प्रश्न, पुनरावृत्ति और मूल्यांकन।
कक्षा 9 गणित मंजरी पाठ 1 में “सोचो और विचार करो” बॉक्स को हर धारा के अंत में कक्षा चर्चा के रूप में शामिल करें।
गणित मंजरी क्लास 9 चैप्टर 1 के कमजोर छात्रों को कैसे पढ़ाएँ जो निर्देशांक की अवधारणा नहीं समझ पा रहे?
कक्षा 9 गणित मंजरी अध्याय 1 में निर्देशांक की अवधारणा न समझ पाने वाले कमजोर छात्रों के लिए ये उपाय अपनाएँ:
- ठोस उदाहरण से शुरुआत करें — कक्षा के फर्श को ग्राफ मानें। एक कोने को मूल बिंदु बनाएँ और छात्रों को शारीरिक रूप से चलकर बिंदु खोजने दें।
- रेआन की कहानी का उपयोग करें — पाठ्यपुस्तक की कहानी कमजोर छात्रों के लिए विशेष रूप से प्रभावी है क्योंकि यह निर्देशांक को छूकर महसूस करने जैसा अनुभव देती है।
- चिह्न नियम की लय बनाएँ — चतुर्थांशों के चिह्न नियम को लय या तुकबंदी में याद कराएँ।
- सरल संख्याओं से आरंभ करें — पहले केवल पहले चतुर्थांश के बिंदु प्लॉट कराएँ, फिर धीरे-धीरे ऋणात्मक निर्देशांक की ओर बढ़ें।
गणित मंजरी अध्याय 1 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें अवधारणा को जीवन से जोड़ा गया है, जो कमजोर छात्रों के लिए सबसे अधिक सहायक है।
गणित मंजरी कक्षा 9 पाठ 1 का मूल्यांकन किस प्रकार करें जो एनईपी 2020 के अनुरूप हो?
एनईपी 2020 के अनुसार कक्षा 9 गणित मंजरी चैप्टर 1 का मूल्यांकन केवल लिखित परीक्षा तक सीमित नहीं होना चाहिए। संतुलित मूल्यांकन के लिए निम्नलिखित विधियाँ अपनाएँ:
- रचनात्मक मूल्यांकन: “सोचो और विचार करो” बॉक्स के प्रश्नों पर मौखिक चर्चा और कक्षा भागीदारी को अंक दें।
- परियोजना कार्य: अध्यायांत प्रश्न 14 (नगर-ग्रिड डिज़ाइन) को समूह परियोजना के रूप में मूल्यांकित करें।
- व्यावहारिक कार्य: ग्राफ पेपर पर कमरे का नक्शा बनाकर निर्देशांक लिखने का कार्य पोर्टफोलियो में सम्मिलित करें।
- लिखित परीक्षा: सामान्य और उच्च कठिनाई स्तर के प्रश्नों का संतुलन रखें। गणित मंजरी अध्याय 1 के तारांकित प्रश्नों को उच्च कठिनाई स्तर में शामिल करें।
क्या गणित मंजरी कक्षा 9 अध्याय 1 परीक्षा में कठिन प्रश्न पूछे जाते हैं? छात्र कैसे तैयारी करें?
गणित मंजरी क्लास 9 चैप्टर 1 से परीक्षा में तीन स्तरों के प्रश्न पूछे जाते हैं:
- सरल प्रश्न — मूल बिंदु के निर्देशांक, चतुर्थांश पहचानना, अक्षों पर बिंदु। ये प्रश्न प्रत्येक छात्र को हल करने आने चाहिए।
- मध्यम प्रश्न — दो बिंदुओं के बीच की दूरी निकालना, बिंदुओं को आलेखित करना। इनके लिए दूरी सूत्र का नियमित अभ्यास आवश्यक है।
- कठिन प्रश्न — तारांकित प्रश्न जैसे मध्य बिंदु, संरेखता और वृत्त। ये केवल प्रतिभाशाली छात्रों के लिए हैं।
छात्रों की तैयारी के लिए — पहले पाठ्यपुस्तक के सभी हल किए उदाहरण समझाएँ, फिर अभ्यास प्रश्नावली 1.1 और 1.2 हल कराएँ, और अंत में अध्यायांत के सामान्य प्रश्न करें। कक्षा 9 गणित मंजरी पाठ 1 की यही सही तैयारी है।
मेरा बच्चा गणित मंजरी अध्याय 1 के सवाल हल करना नहीं जानता, घर पर उसकी मदद कैसे करूँ?
यदि आपका बच्चा कक्षा 9 गणित मंजरी चैप्टर 1 के प्रश्न हल करने में कठिनाई महसूस कर रहा है, तो घर पर ये सरल उपाय अपनाएँ:
- कमरे का नक्शा बनाएँ: घर के किसी कमरे को ग्राफ पेपर पर बनाएँ और फर्नीचर के कोनों को निर्देशांक बिंदुओं के रूप में चिह्नित करें। यह बिल्कुल वैसा ही है जैसा गणित मंजरी अध्याय 1 में शालिनी ने रेइआन के लिए किया।
- दूरी सूत्र को चरण-दर-चरण लिखवाएँ: बच्चे को सूत्र याद कराने के बजाय हर बार चरण-दर-चरण लिखकर हल करने की आदत डलवाएँ।
- प्रतिदिन 5 प्रश्न: रोज केवल 5 प्रश्न हल करवाएँ — धीरे-धीरे गति और आत्मविश्वास दोनों बढ़ेंगे।
- गलतियों पर ध्यान दें: गलत उत्तर पर नाराज न हों, बल्कि पूछें कि किस चरण में गलती हुई। यह गणित मंजरी कक्षा 9 पाठ 1 को पक्का करने का सबसे प्रभावी तरीका है।
गणित मंजरी क्लास 9 अध्याय 1 पढ़ने से मेरे बच्चे को भविष्य में क्या फायदा होगा?
कक्षा 9 गणित मंजरी का पहला अध्याय केवल परीक्षा तक सीमित नहीं है — यह बच्चे के भविष्य की नींव रखता है:
- कक्षा 10 और आगे — निर्देशांक ज्यामिति, रेखाओं के समीकरण और वृत्त — ये सभी विषय गणित मंजरी अध्याय 1 की नींव पर टिके हैं।
- प्रतियोगी परीक्षाएँ — NTSE, गणित ओलंपियाड और इंजीनियरिंग प्रवेश परीक्षाओं में निर्देशांक ज्यामिति से प्रश्न अवश्य आते हैं।
- व्यावसायिक जीवन — वास्तुकार, इंजीनियर, भूगोलवेत्ता, डेटा वैज्ञानिक और खेल विश्लेषक — ये सभी पेशे निर्देशांक प्रणाली का प्रतिदिन उपयोग करते हैं।
- भारतीय गणित पर गर्व — गणित मंजरी कक्षा 9 चैप्टर 1 में बौधायन, आर्यभट और ब्रह्मगुप्त के योगदान पढ़कर बच्चे में भारतीय विज्ञान परंपरा के प्रति गहरा सम्मान और जिज्ञासा विकसित होती है।
