एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः विद्यार्थी यहाँ से सत्र 2026-27 के लिए मुफ्त प्राप्त कर सकते हैं। कक्षा 7 संस्कृत की पाठ्यपुस्तक “दीपकम्” का आठवाँ पाठ “हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः” दस अत्यंत प्रेरणादायक संस्कृत सूक्तियों का संग्रह है, जो विभिन्न प्रतिष्ठित ग्रंथों यथा अथर्ववेद, पञ्चतन्त्र, नीतिशतकम्, कुमारसम्भवम् आदि से संकलित की गई हैं। इस पाठ की सूक्तियाँ जीवन के मूलभूत मूल्यों – मातृभूमि के प्रति सम्मान, शरीर की रक्षा, समय का सदुपयोग, परिश्रम का महत्त्व, चरित्र की श्रेष्ठता और सच्चे ज्ञान की परिभाषा – को अत्यंत सरल किन्तु गहन भाषा में व्यक्त करती हैं।

पाठ का शीर्षक ही इसका सार है – ऐसा वचन जो हितकारक भी हो और मनोहारी भी, वास्तव में दुर्लभ होता है। व्याकरण की दृष्टि से इस पाठ में षष्ठी विभक्ति तथा मकारलेखन के नियमों का सोदाहरण परिचय दिया गया है। तिवारी अकादमी पर इस पाठ का सरल हिंदी अनुवाद, प्रत्येक सूक्ति का पदच्छेद, अन्वय, भावार्थ तथा सभी अभ्यास प्रश्नों के उत्तर पूर्णतः निःशुल्क उपलब्ध हैं।

एनसीईआरटी कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न उत्तर

वयम अभ्यासं कुर्मः

1. अधोलिखितानि वाक्यानि पठित्वा ‘आम्’ अथवा ‘न’ इति वदन्तु लिखन्तु च –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 1 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 1 के उत्तर का चित्र

2. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि एकपदेन लिखन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 2 का चित्र

उत्तर:

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3. पाठस्य आधारेण अधोलिखितानां प्रश्नानाम् उत्तराणि पूर्णवाक्येन लिखन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 3 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 3 के उत्तर का चित्र

4. रेखाङ्कितपदानि आधृत्य प्रश्ननिर्माणं कुर्वन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 4 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 4 के उत्तर का चित्र

5. पाठस्य आधारेण उदाहरणानुसारं समुचितं मेलनं कुर्वन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 5 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 5 के उत्तर का चित्र

6. पाठात् अधोलिखितानां पदानां समानार्थकपदानि चित्वा लिखन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 6 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 6 के उत्तर का चित्र

7. उदाहरणानुसारम् अधोलिखितेषु वाक्येषु रेखाङ्कितपदानां विभक्तिं निर्दिशन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 7 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 7 के उत्तर का चित्र

8. यत्र अग्रे स्वरः अस्ति तत्र अनुस्वारस्य स्थाने ‘म’ लिखित्वा वाक्यानि पुनः लिखन्तु –

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 8 का चित्र

उत्तर:

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् अध्याय 8 के प्रश्न 8 के उत्तर का चित्र

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

कक्षा 7 संस्कृत दीपकम पाठ 8 में कितनी सूक्तियाँ हैं और ये किन ग्रंथों से ली गई हैं?

इस पाठ में कुल दस सूक्तियाँ हैं जो अथर्ववेद, पञ्चतन्त्र, नीतिशतकम्, कुमारसम्भवम्, उत्तररामचरितम् और किरातार्जुनीयम् जैसे प्रतिष्ठित संस्कृत ग्रंथों से संकलित की गई हैं।

क्या तिवारी अकादमी पर प्रत्येक सूक्ति का पदच्छेद, अन्वय और भावार्थ अलग-अलग समझाया गया है?

जी हाँ, इस पेज पर प्रत्येक सूक्ति का पदच्छेद, अन्वय और सरल हिंदी भावार्थ विस्तार से दिया गया है, जिससे विद्यार्थी प्रत्येक सूक्ति का अर्थ और उसके पीछे का गहरा संदेश आसानी से समझ सकें।

“हितं मनोहारि च दुर्लभं वचः” का क्या अर्थ है और यह पाठ का शीर्षक क्यों है?

इस सूक्ति का अर्थ है — ऐसा वचन जो हितकारक भी हो और मनोहारी भी, वास्तव में दुर्लभ होता है। यह पाठ का सार भी है और शीर्षक भी, क्योंकि यही संदेश इस पाठ की समस्त सूक्तियों में निहित है।

इस पाठ में षष्ठी विभक्ति और मकारलेखन का व्याकरण कहाँ समझाया गया है?

तिवारी अकादमी पर इस पाठ के व्याकरण खंड में षष्ठी विभक्ति के प्रयोग तथा मकारलेखन के नियम सोदाहरण और सरल हिंदी में समझाए गए हैं, जो परीक्षा की दृष्टि से अत्यंत उपयोगी हैं।

क्या कक्षा 7 संस्कृत पाठ 8 की सूक्तियाँ सत्र 2026-27 की परीक्षा में पूछी जा सकती हैं?

हाँ, इस पाठ की सूक्तियाँ परीक्षा में भावार्थ, अन्वय या अनुवाद के रूप में पूछी जा सकती हैं। तिवारी अकादमी पर सभी सूक्तियों की परीक्षा-उपयोगी व्याख्या उपलब्ध है।

क्या अभ्यास में दिए गए मेलन, समानार्थक पद और विभक्ति निर्देश जैसे प्रश्नों के उत्तर भी यहाँ मिलेंगे?

जी हाँ, इस पेज पर आम/न, एकपद, पूर्णवाक्य, मेलन, प्रश्ननिर्माण, समानार्थक पद और विभक्ति निर्देश सहित सभी प्रकार के अभ्यास प्रश्नों के उत्तर विस्तार से दिए गए हैं।

“शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” और “यस्तु क्रियावान पुरुषः स विद्वान्” जैसी सूक्तियों का भावार्थ क्या है?

“शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्” का भाव है कि स्वस्थ शरीर ही सभी कर्तव्यों का पहला साधन है। “यस्तु क्रियावान पुरुषः स विद्वान्” का भाव है कि जो व्यक्ति अर्जित ज्ञान को जीवन में आचरण में उतारता है, वही वास्तविक विद्वान है। दोनों सूक्तियों की विस्तृत व्याख्या तिवारी अकादमी पर उपलब्ध है।

क्या कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् के अन्य पाठों के समाधान भी तिवारी अकादमी पर उपलब्ध हैं?

हाँ, तिवारी अकादमी पर कक्षा 7 संस्कृत दीपकम् के सभी पाठों के समाधान उपलब्ध हैं, जिससे विद्यार्थी एक ही स्थान पर सम्पूर्ण पाठ्यक्रम का अध्ययन कर सकते हैं।