एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़

एनसीईआरटी कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़ – समाधान, प्रश्न-उत्तर, हिंदी अनुवाद, सारांश और कठिन शब्द-अर्थ सीबीएसई सत्र 2026-27 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कावेरी की पाँचवीं इकाई का गद्य पाठ द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़ पैरालम्पिक खिलाड़ी दीपा मलिक पर आधारित एक प्रेरणादायक साक्षात्कार-पाठ है। दीपा मलिक ने रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर के बावजूद पैरालम्पिक में भारत का प्रतिनिधित्व किया। इकाई की कविता नाइन गोल्ड मेडल्स डेविड रोथ की रचना है जो एक अविस्मरणीय दौड़ की कहानी सुनाती है जहाँ सभी प्रतिभागी मिलकर दौड़ पूरी करते हैं।
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एनसीईआरटी कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 समाधान

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 – दीपा मालिक परिचय

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 में – दीपा मलिक का परिचय

दीपा मलिक भारत की प्रसिद्ध पैरालम्पिक खिलाड़ी हैं। उनकी रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर था जिसके कारण उनके पैर काम नहीं करते। बावजूद इसके उन्होंने:

  • 2016 के रियो पैरालम्पिक में शॉटपुट में रजत पदक जीता
  • भारत की ओर से पैरालम्पिक में पदक जीतने वाली पहली महिला बनीं
  • अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री से सम्मानित हैं
  • उनका जीवन संदेश है – “विकलांगता सीमा नहीं, यह केवल एक चुनौती है”

कावेरी पाठ 5 का केंद्रीय भाव

  • गद्य – द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़:
    इस पाठ का केंद्रीय भाव है – दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को संभव बनाया जा सकता है। विकलांगता शरीर की है, मन की नहीं। दीपा मलिक का जीवन यह सिद्ध करता है कि यदि मन में ठान लो तो दुनिया की कोई बाधा रोक नहीं सकती।
  • कविता – नाइन गोल्ड मेडल्स:
    इस कविता का केंद्रीय भाव है – सहानुभूति और खेल-भावना। जब एक प्रतिभागी गिर जाता है तो बाकी आठ उसके पास लौट आते हैं और सब मिलकर दौड़ पूरी करते हैं – यह मानवता की सबसे सुंदर जीत है।

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 कठिन शब्दों के अर्थ

कठिन शब्दों के अर्थ

अंग्रेजी शब्दउच्चारणहिंदी अर्थ
Resilienceरेज़िलियन्सविपरीत परिस्थिति से उबरने की क्षमता
Paralympicsपैरालम्पिक्सविकलांग खिलाड़ियों की विश्व प्रतियोगिता
Exceptionalएक्सेप्शनलअसाधारण
Defyडिफाईचुनौती देना
Ovationओवेशनतालियों की गड़गड़ाहट
Contestantकॉन्टेस्टेंटप्रतिभागी
Beamingबीमिंगचमकता हुआ

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 पाठ का सारांश

पाठ का सारांश – द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़

यह एक प्रेरणादायक साक्षात्कार-पाठ है जो भारत की पैरालम्पिक खिलाड़ी दीपा मलिक के असाधारण जीवन और उपलब्धियों पर आधारित है। दीपा मलिक की रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर था जिसके कारण उनके तीन ऑपरेशन हुए और उनके शरीर में 183 टाँके लगे। कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता, फिर भी उन्होंने हार नहीं मानी।

उन्होंने तैराकी, मोटरबाइकिंग, कार रैलिंग और शॉटपुट जैसे खेलों में भाग लिया। 2016 के रियो पैरालम्पिक में उन्होंने शॉटपुट में रजत पदक जीता और पैरालम्पिक में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। वे अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री से भी सम्मानित हैं। साक्षात्कार में दीपा बताती हैं कि उनके लिए सबसे बड़ी चुनौती शारीरिक नहीं, मानसिक थी – लोगों की दया भरी नज़रें और समाज की सीमित सोच।

यह पाठ हमें बताता है कि विकलांगता शरीर की है, मन की नहीं। पैरालम्पिक के बारे में भी यहाँ जानकारी दी गई है — यह विश्व स्तरीय खेल प्रतियोगिता है जो दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित होती है और जिसमें खिलाड़ी असाधारण प्रतिभा और दृढ़ता का प्रदर्शन करते हैं।

मुख्य संदेश: दृढ़ इच्छाशक्ति से असंभव को भी संभव बनाया जा सकता है। सीमाएँ मन में होती हैं, शरीर में नहीं। हर व्यक्ति की अपनी असीमित संभावनाएँ हैं।

कक्षा 9 कावेरी कविता 5 के मुख्य बिंदु

  • दीपा मलिक की रीढ़ में ट्यूमर था – तीन ऑपरेशन और 183 टांके के बावजूद नहीं रुकीं
  • उन्होंने तैराकी, बाइकिंग, शॉटपुट में भाग लिया
  • 2016 रियो पैरालम्पिक में शॉटपुट में रजत पदक – भारत की पहली पैरालम्पिक पदक विजेता महिला
  • उनका संदेश – सीमाएँ मन में होती हैं, शरीर में नहीं

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 हिंदी अनुवाद

कक्षा 9 अंग्रेजी पाठ 5 पूर्ण हिंदी अनुवाद – द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़

क्या आपने कभी सोचा है कि क्या होता है जब अविश्वसनीय एथलीट बाधाओं को मात देते हैं और वैश्विक मंच पर अपने असाधारण कौशल का प्रदर्शन करते हैं? तो चलिए, पैरालंपिक खेलों की दुनिया में प्रवेश करते हैं, जो लोकोमोटर, संवेदी या बौद्धिक विकलांगता वाले एथलीटों के लचीलेपन और असाधारण प्रतिभा का एक रोमांचक उत्सव है। पैरालंपिक्स प्रतिस्पर्धा से आगे जाकर रूढ़िवादिता को दूर करने और संभावनाओं को पुनर्परिभाषित करने का काम करता है।

पैरालंपिक्स में भारत की शुरुआत 1968 से हुई, और पहला पदक 1972 में तैराकी में जीता गया। तब से, कई भारतीय पैरालंपियन ने हमारे देश के लिए अविश्वसनीय सम्मान लाया है। ऐसी ही एक पैरालंपियन, डॉ. दीपा मलिक, जो खेल रत्न, अर्जुन और पद्मश्री पुरस्कार पुरस्कार से सम्मानित हैं—ने अनगिनत महत्वाकांक्षी एथलीटों पर एक गहरी छाप छोड़ी है।

साक्षात्कारकर्ता: नमस्ते, मैम! यह मेरा सौभाग्य है कि मुझे पैरालंपिक्स की दुनिया में आप जैसी प्रसिद्ध हस्ती से मिलने का यह अवसर मिला।
डॉ. मलिक: नमस्ते! विश्वास कीजिए, मैं वास्तव में सम्मानित महसूस कर रही हूँ।

साक्षात्कारकर्ता: आपको अंतर्राष्ट्रीय पैरालंपिक समिति द्वारा विश्व की 10 सबसे प्रेरणादायक महिला पैरा-एथलीटों में शामिल किया गया है। आज आप जिस मुकाम पर हैं, वहाँ तक पहुँचने के लिए आपने बाधाओं का सामना कैसे किया?
डॉ. मलिक: मेरी उम्र 29 साल थी, जब एक भयानक त्रासदी ने मुझे घेर लिया और मुझे रीढ़ की हड्डी के ट्यूमर होने का पता चला। मेरी सर्जरी हुई, लेकिन दुर्भाग्य ने फिर से अपना क्रूर रूप दिखाया। डॉक्टरों ने घोषित किया कि मैं अपने जीवन के बाकी समय के लिए व्हीलचेयर तक सीमित रहूँगी, क्योंकि मैं कमर से नीचे लकवाग्रस्त हो गई थी। मेरे पास दो विकल्प थे — अपने जीवन को पछतावे में बर्बाद करना या इसे असीमित संभावनाओं की दुनिया में बदलना।

मुझे खेल पसंद है और मैं तैराक भी रही हूँ, इसलिए मैंने पैरा-एथलेटिक्स में जाने का फैसला किया। इस तरह मेरी पैरालंपिक्स यात्रा शुरू हुई। मेरा सफलता का क्षण 2016 के रियो पैरालंपिक खेलों में आया, जब मैंने शॉट-पुट स्पर्धा में रजत पदक जीता। पीछे मुड़कर देखने पर, मुझे लगता है कि यह व्यक्तिगत जीत का एक क्षण था लोगों की सोच बदलने की दिशा में एक बड़ा कदम था।

साक्षात्कारकर्ता: आप एक पथप्रदर्शक हैं — एथलेटिक्स में एशियाई खेलों का पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पैरा-एथलीट। आप किसी भी खेल में भारत की पहली महिला पैरालंपिक पदक विजेता भी हैं और इन ‘प्रथम’ उपलब्धियों की सूची कभी खत्म नहीं होती। आपको कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से भी नवाज़ा गया है। इन उपलब्धियों का आपके लिए क्या मायने है?
डॉ. मलिक: मैं सच में उन तमाम प्रशंसाओं और सम्मानों की सराहना करती हूँ जो मुझ पर बरसाए गए हैं। ये उपलब्धियाँ मेरे इस विश्वास का प्रमाण हैं कि शारीरिक सीमाएँ किसी व्यक्ति की क्षमता को तय नहीं करती हैं। इसके अलावा, मैं ‘विकलांगता से परे क्षमता’ की विचारधारा की समर्थक हूँ।

साक्षात्कारकर्ता: यह अविश्वसनीय है। क्या आप अपनी यात्रा में सामने आई चुनौतियों और उन्हें कैसे पार किया, इसके बारे में कुछ साझा कर सकती हैं?
डॉ. मलिक: मेरे लिए एक महत्वपूर्ण चुनौती सामाजिक धारणाएँ थीं। लोग अक्सर मेरी क्षमताओं को कम आँकते थे। इससे पार पाने के लिए न केवल शारीरिक शक्ति बल्कि मानसिक दृढ़ता की भी आवश्यकता थी। मैंने चुनौतियों को अपनी क्षमताओं को साबित करने के अवसरों के रूप में स्वीकार किया। मेरे परिवार के सहयोग और मेरे साहस ने मुझे बाधाओं को सफलता की सीढ़ियों में बदलने की शक्ति दी।

साक्षात्कारकर्ता: आपकी कहानी वास्तव में दृढ़ संकल्प की शक्ति का एक प्रमाण है। आप कैसे मानती हैं कि खेल और पैरालंपिक्स सामाजिक रूढ़िवादिता को चुनौती देने में योगदान दे सकते हैं? आपके जीवन में पैरालंपिक्स का क्या प्रभाव पड़ा है?
डॉ. मलिक: सच कहूँ तो, मुझे लगता है कि खेल, विशेष रूप से पैरालंपिक्स, में रूढ़िवादिता को चुनौती देने और विकलांगता के प्रति दृष्टिकोण बदलने की असाधारण क्षमता है। जब लोग पैरा-एथलीटों की शक्ति, कौशल और प्रतिस्पर्धी भावना को देखते हैं, तो यह पूर्वधारणाओं को तोड़ता है। पैरालंपिक्स ने मुझे जीवन का एक नया अवसर दिया है और और सीमाओं को पार करने में मेरी मदद की है।। इसने मुझे यह अहसास कराया है कि विकलांग व्यक्ति भी उतने ही सक्षम हो सकते हैं, जितने कि शारीरिक रूप से सक्षम व्यक्ति, बल्कि शायद उनसे भी अधिक।

साक्षात्कारकर्ता: पदकों से परे, आप समावेशिता और सुलभता के लिए एक मुखर आवाज बन गई हैं। आप विकलांगता के अधिकारों और समावेशिता की वकालत करने में अपनी भूमिका को कैसे देखती हैं?
डॉ. मलिक: वकालत मेरे मिशन का अभिन्न अंग है। मैं चुनौतियों का सामना कर रहे व्यक्तियों के मानसिक स्वास्थ्य को मजबूत करने और बाहरी खेलों व साहसिक गतिविधियों के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाने के कार्य में दृढ़ विश्वास रखती हूँ। मैं निम्न सामाजिक-आर्थिक वर्ग के लोगों की भी मदद करती हूँ और पैरा खिलाड़ियों को उपकरण प्रदान करती हूँ। मेरा मानना है कि युवा ही आने वाले कल की आवाज हैं। इसलिए, हम विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में विकलांगता खेल जागरूकता और वकालत सत्र आयोजित करते हैं। मेरा लक्ष्य एक ऐसे समाज बनाने में योगदान देना है जहाँ हर किसी को, उसकी शारीरिक क्षमता चाहे जो भी हो, सम्मान के साथ देखा जाए और सफल होने का समान अवसर दिया जाए।

साक्षात्कारकर्ता: अंत में, उन व्यक्तियों के लिए आपकी क्या सलाह है जो चुनौतियों या बाधाओं का सामना कर रहे हैं, विशेष रूप से वे जो दिव्यांग हैं और अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने की आकांक्षा रखते हैं?
डॉ. मलिक: मैं कहूँगी, हर असफलता आपकी शक्ति साबित करने का एक अवसर है। अपने आस-पास एक सहायक प्रणाली रखें, खुद पर विश्वास रखें, और अपनी यात्रा को दूसरों के लिए प्रेरणा बनने दें। याद रखें, अक्षमता कोई सीमा नहीं है; यह एक अनूठी शक्ति है जो बाहर आने का इंतजार कर रही है

साक्षात्कारकर्ता: अपने विचार साझा करने के लिए आपका धन्यवाद। आपकी कहानी निस्संदेह प्रेरणादायक है।
डॉ. मलिक: मुझे यहाँ बुलाने के लिए धन्यवाद! आपसे बात करके बहुत खुशी हुई।

कक्षा 9 कावेरी कविता 5 विस्तृत प्रश्न-उत्तर यहाँ पर देखें

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 कविता का सारांश

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी कविता 5 सारांश – नाइन गोल्ड मेडल्स (कवि: डेविड रोथ)

यह एक अत्यंत प्रेरणादायक कविता है जो एक पैरालम्पिक दौड़ की कहानी सुनाती है। कविता नौ प्रतिभागियों की एक 100 मीटर की दौड़ का वर्णन करती है।

दौड़ के पहले — मैदान में उत्साह है, सभी खिलाड़ी तैयार हैं। पिस्तौल चलती है और दौड़ शुरू होती है। सभी पूरी शक्ति से दौड़ते हैं। तभी सबसे युवा प्रतिभागी गिर जाता है। वह दर्द से कराहता है। दर्शक साँस रोककर देखते हैं।

इसके बाद जो होता है वह दिल को छू जाता है — एक-एक करके बाकी आठों प्रतिभागी रुक जाते हैं। वे वापस लौटते हैं। गिरे हुए साथी को उठाते हैं। सब मिलकर एक-दूसरे का हाथ थामकर एक साथ दौड़ पूरी करते हैं। सभी एक साथ अंतिम रेखा पार करते हैं।

दर्शक खड़े हो जाते हैं। तालियों की गड़गड़ाहट होती है। सभी नौ खिलाड़ियों को नौ स्वर्ण पदक दिए जाते हैं। अंत में कवि कहते हैं — “उनकी हाथ में हाथ और नौ चमकते चेहरों ने जो कहा, वह किसी शब्द से नहीं कहा जा सकता।”

केंद्रीय भाव: सच्ची जीत वह नहीं जो अकेले हासिल हो। मानवता की जीत तब होती है जब हम साथी को गिरते देखकर उसे उठाते हैं। सहानुभूति और एकता किसी भी पदक से बड़ी होती है।

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी कविता 5 हिंदी अनुवाद

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी कविता 5 नाइन गोल्ड मेडल्स (डेविड रोथ) – हिंदी अनुवाद

देश भर से एथलीट आए थे
स्वर्ण, रजत और कांस्य पदक के लिए दौड़ने
कई हफ्तों और महीनों का प्रशिक्षण
सब कुछ इन खेलों पर निर्भर था।

दर्शक पुराने मैदान के चारों ओर इकट्ठा हुए
सभी युवा महिलाओं और पुरुषों का हौसला बढ़ाने
दिन की अंतिम स्पर्धा नज़दीक आ रही थी
शुरुआत को लेकर उत्साह चरम पर थी।

ब्लॉक उन लोगों के लिए सभी कतार में थे जो उनका उपयोग करेंगे
सौ-गज की दौड़ का मुकाबला अब होने को था।
शुरुआती रेखा के पीछे नौ दृढ़ एथलीट थे
पिस्तौल की आवाज़ के लिए तैयार।

संकेत दिया गया, पिस्तौल चली
और उसी के साथ सभी धावक आगे की ओर लपके
लेकिन उनमें से सबसे छोटा, वह ठोकर खाकर लड़खड़ाया
और दौड़ने के बजाय सड़क पर गिर पड़ा।

उसके मुँह से हताशा और पीड़ा की एक चीख निकली,
उसके सपने और उसकी मेहनत धूल में मिल गई
लेकिन जितना निश्चित मैं यहाँ खड़े होकर यह कहानी सुना रहा हूँ,
उतना ही निश्चित वो भी है, जो इसके बाद हुआ।

आठों अन्य धावक अचानक रुक गए,
वे जो प्रतिस्पर्धा करने के लिए इतने लंबे समय से प्रशिक्षण ले रहे थे
एक-एक करके सभी मुड़े और उसकी मदद के लिए वापस गए
और उस युवा लड़के को उसके पैरों पर खड़ा किया।

फिर सभी नौ धावकों ने हाथ थामे और जारी रखा
सौ-गज की दौड़ अब चलने में बदल गई
और ऊपर लगा वो बैनर जिस पर लिखा था ‘स्पेशल ओलंपिक्स’,
इससे ज़्यादा सटीक और कुछ भी नहीं हो सकता था।

इस तरह दौड़ समाप्त हुई, नौ स्वर्ण पदकों के साथ
वे फिनिश लाइन पर हाथ थामे हुए आए
और दर्शकों की वो खड़े होकर दी गई तालियाँ और वे नौ मुस्कुराते चेहरे,
इन शब्दों से कहीं अधिक कह गए।

काव्य-अलंकार

काव्य-अलंकारहिंदी नामउदाहरण
Imageryबिम्ब-योजनादौड़ का जीवंत चित्रण
Symbolismप्रतीकवादनौ स्वर्ण पदक – मानवता की जीत
Ironyविरोधाभासदौड़ में सब जीते, कोई नहीं हारा

महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर

अति लघु उत्तरीय प्रश्न:

  • दीपा मलिक ने किस खेल में पैरालम्पिक पदक जीता?
    उत्तर:
    शॉटपुट में रजत पदक।
  • नाइन गोल्ड मेडल्स कविता के कवि कौन हैं?
    उत्तर:
    डेविड रोथ।
  • दौड़ में कितने प्रतिभागी थे?
    उत्तर:
    नौ।

लघु उत्तरीय प्रश्न:

  • नाइन गोल्ड मेडल्स में खिलाड़ियों ने क्या असाधारण किया?
    उत्तर:
    जब एक युवा प्रतिभागी दौड़ में गिर गया तो बाकी आठ प्रतिभागी रुक गए और पीछे लौटकर गिरे हुए प्रतिभागी का हाथ थामकर सब मिलकर एक साथ दौड़ पूरी की। सभी को स्वर्ण पदक दिए गए।

पाठ से मिलने वाली शिक्षाएँ

  • विकलांगता शरीर की है, मन की नहीं
  • दृढ़ इच्छाशक्ति से हर बाधा पार की जा सकती है
  • जीत से बड़ी है मानवता
  • साथी की मदद करना सबसे बड़ी खेल-भावना है

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी पाठ 5 – अक्सर पूंछे जाने वाले प्रश्न

दीपा मलिक कौन हैं और उन्होंने क्या उपलब्धि हासिल की?

दीपा मलिक भारत की प्रसिद्ध पैरालम्पिक खिलाड़ी हैं। उनकी रीढ़ की हड्डी में ट्यूमर था जिसके कारण उनके तीन ऑपरेशन हुए और उनके शरीर में 183 टाँके लगे। कमर के नीचे का हिस्सा काम नहीं करता पर उन्होंने तैराकी, मोटरबाइकिंग और शॉटपुट जैसे खेलों में भाग लिया। 2016 के रियो पैरालम्पिक में उन्होंने शॉटपुट में रजत पदक जीता और पैरालम्पिक में पदक जीतने वाली भारत की पहली महिला बनीं। वे अर्जुन पुरस्कार और पद्म श्री से भी सम्मानित हैं।

‘पैरालम्पिक’ क्या होता है और यह सामान्य ओलम्पिक से कैसे अलग है?

पैरालम्पिक दिव्यांग या विकलांग खिलाड़ियों के लिए आयोजित विश्व स्तरीय खेल प्रतियोगिता है। यह ओलम्पिक के बाद उसी शहर में आयोजित होती है। इसमें शारीरिक रूप से अक्षम खिलाड़ी अपनी-अपनी श्रेणियों में भाग लेते हैं। यह आयोजन यह सिद्ध करता है कि खेल की भावना शरीर की सीमाओं से नहीं बंधती। दीपा मलिक का उदाहरण इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है।

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 5 का शीर्षक ‘असीमित संभावनाओं की दुनिया’ क्यों उचित है?

यह शीर्षक दीपा मलिक के जीवन का सार है। जब समाज उन्हें ‘विकलांग’ कहकर सीमित करता था, उन्होंने हर बार अपनी सीमाओं को तोड़ा। शीर्षक यह बताता है कि यह दुनिया उनके लिए असीमित संभावनाओं से भरी थी – बस उन्हें देखने और उनका पीछा करने की ज़रूरत थी। यह पाठ हर उस व्यक्ति के लिए प्रेरणादायक है जो किसी कारणवश खुद को कमज़ोर समझता है।

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी पाठ 5 से विकलांगता के बारे में हमारी सोच कैसे बदलती है?

यह पाठ बताता है कि विकलांगता केवल शारीरिक है – मानसिक नहीं। दीपा मलिक का जीवन यह सिद्ध करता है कि सबसे बड़ी बाधा हमारे मन में होती है – दूसरों की सीमित सोच में और हमारे अपने डर में। इस पाठ को पढ़ने के बाद छात्र यह समझते हैं कि दिव्यांग व्यक्तियों के साथ दया नहीं बल्कि सम्मान और समान अवसर का व्यवहार होना चाहिए।

नाइन गोल्ड मेडल्स कविता की कहानी क्या है और इसे किसने लिखा?

यह कविता अमेरिकी गीतकार और कवि डेविड रोथ ने लिखी है। कविता एक पैरालम्पिक दौड़ की कहानी सुनाती है जिसमें नौ प्रतिभागी 100 मीटर दौड़ में भाग लेते हैं। जब एक युवा प्रतिभागी दौड़ के दौरान गिर जाता है तो बाकी आठ प्रतिभागी रुक जाते हैं, वापस लौटते हैं, गिरे हुए साथी को उठाते हैं और सब मिलकर एक-दूसरे का हाथ थामकर एक साथ दौड़ पूरी करते हैं। सभी नौ को स्वर्ण पदक दिए जाते हैं।

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी पाठ 5 कविता में ‘नौ स्वर्ण पदक’ किसका प्रतीक हैं?

ये नौ स्वर्ण पदक मानवता की जीत का प्रतीक हैं। सामान्यतः केवल एक ही व्यक्ति पहले नंबर पर आता है और उसे पदक मिलता है। पर इस कहानी में सभी को पदक मिला क्योंकि सभी ने मिलकर एक मानवीय कार्य किया। यह इस बात का प्रतीक है कि सहानुभूति, एकता और साथी की मदद करना किसी भी व्यक्तिगत जीत से बड़ा है।

कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी पाठ 5 की कविता ‘द वर्ल्ड ऑफ लिमिटलेस पॉसिबिलिटीज़’ की थीम से कैसे जुड़ती है?

दोनों पैरालम्पिक खेलों पर आधारित हैं और दोनों यह संदेश देते हैं कि दिव्यांग खिलाड़ी असाधारण साहस और मानवता का प्रतीक हैं। दीपा मलिक की कहानी व्यक्तिगत दृढ़ता की है और ‘नाइन गोल्ड मेडल्स’ सामूहिक सहानुभूति की। दोनों मिलकर यह संदेश देते हैं कि खेल में केवल जीत नहीं – भावना और मानवता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है।