एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड – हिंदी अनुवाद, प्रश्न उत्तर, शब्द-अर्थ और सारांश सत्र 2026-27 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कावेरी पुस्तक की पहली इकाई का गद्य पाठ हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड प्रसिद्ध लेखिका सुधा मूर्ति (पद्म विभूषण) की प्रेरणादायक कहानी है। यह कहानी एक बारह वर्षीय पोती और उसकी अनपढ़ दादी कृष्टक्का के बीच के सुंदर रिश्ते को दर्शाती है – जहाँ दादी पढ़ना सीखकर आत्मनिर्भर बनती हैं। इस इकाई की कविता भारत आवर लैंड सुब्रमण्यम भारती की रचना है जो भारत की सांस्कृतिक धरोहर का गुणगान करती है। इस पेज पर आपको मिलेगा:
एनसीईआरटी कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 2 समाधान
कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 – लेखिका परिचय
कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 लेखिका परिचय – सुधा मूर्ति
सुधा मूर्ति का जन्म 1950 में कर्नाटक के शिमोगा में हुआ। वे इनफोसिस फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष और प्रसिद्ध लेखिका हैं। उन्होंने इंजीनियरिंग की पढ़ाई की और टाटा इंजीनियरिंग में काम करने वाली पहली महिला इंजीनियर बनीं। उन्होंने कन्नड़ और अंग्रेजी में अनेक पुस्तकें लिखी हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्म श्री (2006) और पद्म भूषण (2023) से सम्मानित किया।
कवि परिचय — सुब्रमण्यम भारती: तमिल के महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी जिन्होंने अपनी कविताओं से राष्ट्रप्रेम की अलख जगाई।
कावेरी पाठ 1 का केंद्रीय भाव
- गद्य — हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड:
इस कहानी का केंद्रीय भाव है — शिक्षा से आत्मनिर्भरता। दादी कृष्टक्का कन्नड़ उपन्यास की कहानी सुनकर इतनी प्रेरित होती हैं कि वे स्वयं पढ़ना सीखने का संकल्प लेती हैं। यह कहानी हमें सिखाती है कि सीखने की कोई उम्र नहीं होती और दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है। - कविता — भारत आवर लैंड:
इस कविता का केंद्रीय भाव है — देशप्रेम और भारतीय धरोहर पर गर्व। कवि भारत को ज्ञान, संस्कृति और प्रकृति की भूमि बताते हुए आत्मविश्वास और राष्ट्रगौरव का संदेश देते हैं।
कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 कठिन शब्दों के अर्थ
कठिन शब्दों के अर्थ – हिंदी में
| अंग्रेजी शब्द | उच्चारण | हिंदी अर्थ |
|---|---|---|
| Ardent | आर्डेंट | उत्सुक, तीव्र इच्छा वाला |
| Protagonist | प्रोटैगनिस्ट | मुख्य पात्र |
| Convinced | कन्विंस्ड | आश्वस्त |
| Illiterate | इलिटरेट | अनपढ़ |
| Concentration | कॉन्सन्ट्रेशन | एकाग्रता |
| Episode | एपिसोड | किसी कहानी का अंश |
| Debate | डिबेट | बहस, चर्चा |
| Community | कम्युनिटी | समुदाय |
| Convincing | कन्विंसिंग | विश्वासयोग्य |
| Eagerly | ईगरली | उत्सुकता से |
कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 पाठ का सारांश
पाठ का सारांश – हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड (लेखिका: सुधा मूर्ति)
यह कहानी सुधा मूर्ति के बचपन की एक सच्ची और प्रेरणादायक घटना पर आधारित है। बारह वर्षीय सुधा उत्तरी कर्नाटक के एक गाँव में अपनी दादी कृष्टक्का के साथ रहती थीं। उस समय कन्नड़ की मशहूर लेखिका त्रिवेणी का उपन्यास ‘काशी यात्रे’ एक साप्ताहिक पत्रिका में धारावाहिक रूप में छप रहा था। दादी पढ़ना-लिखना नहीं जानती थीं, इसलिए सुधा हर बुधवार उन्हें वह कहानी पढ़कर सुनाती थीं। दादी बड़े ध्यान से सुनतीं और बाद में मंदिर में सहेलियों को पूरी कहानी कंठस्थ सुनातीं।
एक बार सुधा एक शादी में गई और एक सप्ताह के लिए रुक गईं। लौटने पर उन्होंने देखा कि दादी की आँखों में आँसू हैं — जो कि बहुत असाधारण था क्योंकि दादी बड़ी हिम्मतवाली थीं। रात को दादी ने बताया कि पत्रिका आई थी, पर वे उसे पढ़ नहीं सकीं। उन्हें पहली बार अपनी अनपढ़ता का दर्द महसूस हुआ। उन्होंने कहा — “धन होने से क्या फायदा जब मैं स्वतंत्र नहीं हूँ?
“दादी ने दशहरे के दिन सरस्वती पूजा तक कन्नड़ पढ़ना सीखने का दृढ़ संकल्प लिया। सुधा ने उन्हें हँसाया, पर दादी ने कहा — “अच्छे काम के लिए दृढ़ संकल्प हो तो कोई बाधा नहीं रोक सकती। सीखने की कोई उम्र नहीं होती।” सुधा उनकी पहली शिक्षिका बनीं। दादी बहुत मेहनती छात्रा निकलीं — पढ़तीं, लिखतीं, दोहरातीं।
दशहरे पर दादी ने सुधा को सूती कपड़ा उपहार दिया और फिर उनके पाँव छुए। यह देखकर सुधा चौंक गईं। दादी ने कहा — “मैं अपनी पोती के नहीं, अपनी शिक्षिका के पाँव छू रही हूँ।” इसके बाद सुधा ने भी अपनी पहली छात्रा के पाँव छुए और उन्हें ‘काशी यात्रे’ उपन्यास उपहार में दिया। दादी ने उसका शीर्षक खुद पढ़ा — यही उनकी परीक्षा थी जिसमें वे पास हो गईं।
मुख्य संदेश: सीखने की कोई उम्र नहीं होती। शिक्षा आत्मनिर्भरता देती है और शिक्षक चाहे कोई भी हो — उसका सम्मान करना चाहिए।
पाठ के मुख्य बिंदु
- कहानी कर्नाटक के एक गाँव में बारह वर्षीय पोती और उसकी दादी कृष्टक्का की है
- कन्नड़ की प्रसिद्ध लेखिका त्रिवेणी का उपन्यास ‘काशी यात्रे’ साप्ताहिक पत्रिका में धारावाहिक रूप में आता था
- दादी कन्नड़ पढ़ना नहीं जानती थीं, इसलिए पोती उन्हें हर बुधवार पढ़कर सुनाती थी
- एक बार पोती बाहर गई तो दादी कहानी का अगला भाग नहीं पढ़ सकीं – उन्हें बहुत दुख हुआ
- दादी ने संकल्प लिया कि वे स्वयं कन्नड़ पढ़ना सीखेंगी
- पोती ने दादी को तीन महीने में पढ़ना सिखाया
- जन्मदिन पर दादी ने पोती को साड़ी और आशीर्वाद दिया – बच्ची थी उनकी पहली शिक्षिका
पात्र परिचय
1. कृष्टक्का (दादी):
- अनपढ़ परंतु बुद्धिमान और जिज्ञासु महिला
- त्रिवेणी की कहानियों की दीवानी
- दृढ़ संकल्पी — 60 वर्ष की उम्र में पढ़ना सीखा
- विनम्र और कृतज्ञ स्वभाव — पोती को शिक्षिका मानकर प्रणाम किया
2. पोती (लेखिका):
- धैर्यवान और सहानुभूति रखने वाली
- दादी की इच्छा को समझकर उन्हें पढ़ाने का निर्णय लिया
- जिम्मेदार और स्नेही
कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 कविता का सारांश
कविता का सारांश – भारत आवर लैंड (कवि: सुब्रमण्यम भारती)
यह कविता महान तमिल कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रमण्यम भारती की रचना है जो भारत के प्रति उनके गहरे प्रेम और गर्व की अभिव्यक्ति है। कविता में कवि ने भारत की महानता के विभिन्न पक्षों को भावपूर्ण ढंग से उजागर किया है।
पहले पद में कवि कहते हैं — हिमालय हमारा है जिसके समान पृथ्वी पर कोई पर्वत नहीं। पवित्र गंगा हमारी है जिसकी कृपा की बराबरी कोई नदी नहीं कर सकती। पवित्र उपनिषद हमारे हैं जिनके समान कोई ग्रंथ नहीं। यह सुनहरी धरती अद्वितीय है — इसका गुणगान करो!
दूसरे पद में कवि बताते हैं कि यहाँ वीर योद्धा हुए हैं और महान ऋषि-मुनियों ने इस भूमि को पवित्र किया है। यहाँ सबसे दिव्य संगीत सुना गया है और सभी शुभ वस्तुएँ यहाँ पाई जाती हैं।
तीसरे पद में कवि कहते हैं कि यहाँ ब्रह्म-ज्ञान की जड़ें हैं और बुद्ध ने यहीं अपना धर्म प्रचारित किया। भारत अतिप्राचीन है — यह अद्वितीय है, इसकी प्रशंसा करो!
कविता बार-बार इस पंक्ति को दोहराती है — “She’s peerless, let’s praise her!” यह पुनरावृत्ति राष्ट्रप्रेम की भावना को और गहरा करती है। ABCB तुकबंदी और ओजस्वी भाषा कविता को अत्यंत प्रभावशाली बनाती है।
काव्य-सौंदर्य: मानवीकरण (भारत को ‘She’ कहना), उपमा, बिम्ब-योजना, और पुनरावृत्ति अलंकारों का सुंदर प्रयोग।केंद्रीय भाव: अपने देश की प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिक परंपरा, वीरता और ज्ञान की विरासत पर गर्व करो और उसकी रक्षा करो।
कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी अध्याय 1 हिंदी अनुवाद
पूर्ण हिंदी अनुवाद – कावेरी पाठ 1 – हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड
जब मैं लगभग बारह साल की लड़की थी, तब मैं उत्तर कर्नाटक के एक गाँव में अपने दादा-दादी के साथ रहती थी। उन दिनों परिवहन व्यवस्था बहुत अच्छी नहीं थी, इसलिए हमें सुबह का अखबार दोपहर में ही मिलता था। साप्ताहिक पत्रिका एक दिन देर से आती थी। हम सभी उस बस का बेसब्री से इंतजार करते थे जो अखबार, साप्ताहिक पत्रिकाएँ और डाक लेकर आती थी।
उस समय, त्रिवेणी कन्नड़ भाषा में एक बहुत लोकप्रिय लेखिका थीं। वे एक अद्भुत लेखिका थीं। उनकी शैली पढ़ने में आसान और बहुत विश्वसनीय थी। उनकी कहानियाँ आमतौर पर सामान्य लोगों के जीवन में जटिल मनोवैज्ञानिक समस्याओं से संबंधित होती थीं और हमेशा बहुत दिलचस्प होती थीं।
दुर्भाग्य से कन्नड़ साहित्य के लिए, उनकी बहुत कम उम्र में मृत्यु हो गई। आज भी, चालीस साल बाद, लोग उनके उपन्यासों की सराहना करते हैं।
उनका एक उपन्यास, जिसका नाम काशी यात्रे था, उस समय कन्नड़ साप्ताहिक कर्मवीर में धारावाहिक के रूप में प्रकाशित हो रहा था। यह एक वृद्ध महिला और उसकी काशी या वाराणसी जाने की तीव्र इच्छा की कहानी है। अधिकांश हिंदू मानते हैं कि काशी जाकर भगवान विश्वेश्वर की पूजा करना परम पुण्य है। इस वृद्ध महिला को भी यही विश्वास था, और उस उपन्यास में वहाँ जाने के उसके संघर्ष का वर्णन था। इस कहानी में एक युवा अनाथ लड़की भी थी जो प्रेम में पड़ जाती है लेकिन शादी के लिए पैसे नहीं थे। अंत में, वृद्ध महिला काशी गए बिना अपनी सारी बचत दे देती है। वह कहती है, ‘इस अनाथ लड़की की खुशी काशी में भगवान विश्वेश्वर की पूजा करने से ज़्यादा महत्वपूर्ण है।’
मेरी दादी, कृष्टक्का, कभी स्कूल नहीं गई थीं इसलिए वे पढ़ नहीं सकती थीं। हर बुधवार पत्रिका आती थी और मैं उन्हें इस कहानी का अगला भाग पढ़कर सुनाती थी। उस समय वे अपना सारा काम भूल जाती थीं और सबसे अधिक एकाग्रता के साथ सुनती थीं। बाद में, वे पूरा पाठ कंठस्थ दोहरा सकती थीं। मेरी दादी भी कभी काशी नहीं गई थीं, और उन्होंने खुद को उपन्यास की नायिका के साथ जोड़ लिया था। इसलिए किसी और की तुलना में, वह यह जानने में रुचि रखती थीं कि कहानी में आगे क्या होगा और मुझसे धारावाहिक पढ़कर सुनाने पर जोर देती थीं।
यह सुनने के बाद की काशी यात्रे में आगे क्या हुआ, वे मंदिर के आँगन में अपनी सहेलियों के पास जाती थीं जहाँ हम बच्चे भी छुपन-छुपाई खेलने के लिए इकट्ठा होते थे।
वे अपनी सहेलियों के साथ नवीनतम भाग पर चर्चा करती थीं। उस समय, मुझे कभी समझ नहीं आता था कि कहानी के बारे में इतनी बहस क्यों होती थी।
एक बार मैं अपने चचेरे भाई-बहनों के साथ पड़ोसी गाँव में एक शादी में गई। उन दिनों, शादी एक बड़ा उत्सव हुआ करता था। हम बच्चे भरपूर आनंद लेते थे। हम खाते और खेलते रहते, उस स्वतंत्रता का पूरा लुत्फ़ उठाते क्योंकि सभी बड़े व्यस्त रहते थे। मैं कुछ दिनों के लिए गई थी लेकिन एक हफ्ते तक वहीं रह गई।
जब मैं अपने गाँव वापस आई, तो मैंने अपनी दादी को आँसुओं में देखा। मैं चौंक गई, क्योंकि मैंने उन्हें सबसे कठिन परिस्थितियों में भी कभी रोते नहीं देखा था। क्या हुआ था? मैं चिंतित थी।
“अव्वा, सब ठीक है? आप ठीक हैं?”
मैं उन्हें अव्वा कहती थी, जिसका अर्थ उत्तर कर्नाटक में बोली जाने वाली कन्नड़ में ‘माँ’ होता है।
उन्होंने सिर हिलाया लेकिन कुछ नहीं बोलीं। मुझे समझ नहीं आया और मैं इसे भूल गई। रात को, खाने के बाद, हम घर की खुली छत पर सो रहे थे। यह एक गर्मी की रात थी और पूर्ण चंद्रमा था। अव्वा आकर मेरे पास बैठ गईं। उनके प्रेम भरे हाथ हाथों ने मेरे माथे को छुआ। मुझे लगा वे कुछ कहना चाहती हैं। मैंने उनसे पूछा, “क्या बात है?”
जब मैं एक युवा लड़की थी, तो मैंने अपनी माँ को खो दिया था। मेरी देखभाल करने और मार्गदर्शन देने वाला कोई नहीं था। मेरे पिता एक व्यस्त आदमी थे और उन्होंने दोबारा शादी कर ली। उन दिनों लोग लड़कियों के लिए शिक्षा को ज़रूरी नहीं मानते थे, इसलिए मैं कभी स्कूल नहीं गई। मेरी बहुत कम उम्र में शादी हो गई और बच्चे हुए। मैं बहुत व्यस्त हो गई। बाद में मेरे पोते-पोतियाँ हुए और मुझे हमेशा आप सबको खाना बनाने और खिलाने में बहुत खुशी मिली। कभी-कभी मुझे स्कूल न जाने का अफसोस होता था, इसलिए मैंने यह सुनिश्चित किया कि मेरे बच्चे और पोते-पोतियाँ अच्छी तरह पढ़ें…
भाग II
मुझे समझ नहीं आया कि मेरी बासठ साल की दादी मुझे, एक बारह साल की बच्ची को, आधी रात में अपनी जीवन कहानी क्यों सुना रही थीं। लेकिन मुझे पता था कि मैं उनसे बहुत प्यार करती हूँ और उनके मुझसे बात करने का कोई कारण जरूर होगा। मैंने उनका चेहरा देखा। वह दुखी था और उनकी आँखें आँसुओं से भरी थीं। वे एक सुंदर महिला थीं जो आमतौर पर हमेशा मुस्कुराती रहती थीं। आज भी, मैं उनके चेहरे पर चिंतित भाव नहीं भूल सकती। मैं आगे झुकी और उनका हाथ थाम लिया।
‘अव्वा, रोओ मत। क्या बात है? क्या मैं किसी तरह आपकी मदद कर सकती हूँ?’
हाँ, मुझे तुम्हारी मदद चाहिए। तुम जानती हो जब तुम नहीं थीं, कर्मवीर हमेशा की तरह आई। मैंने पत्रिका खोली। मैंने *काशी यात्रे* की कहानी के साथ जो चित्र था वह देखा और मैं कुछ भी नहीं समझ सकी जो लिखा था। कई बार मैंने पृष्ठों पर हाथ फेरा, यह चाहते हुए कि वे समझ सकें कि क्या लिखा है। लेकिन मुझे पता था यह संभव नहीं था। काश मैं इतनी पढ़ी-लिखी होती। मैं बेसब्री से तुम्हारे लौटने का इंतजार करती रही। मुझे लगा तुम जल्दी आओगी और मुझे पढ़कर सुनाओगी। मैंने तो यहाँ तक सोचा कि गाँव जाकर तुमसे पढ़वाने को कहूँगी। मैं यहाँ किसी से पूछ सकती थी लेकिन मुझे बहुत शर्म आ रही थी। मुझे बहुत निर्भर और असहाय महसूस हुआ। हम संपन्न हैं, लेकिन पैसे का क्या फायदा जब मैं आत्मनिर्भर नहीं हो सकती?
मुझे समझ नहीं आया क्या जवाब दूँ। अव्वा ने आगे कहा।
‘मैंने तय कर लिया है कि मैं कल से कन्नड़ वर्णमाला सीखना चाहती हूँ। मैं बहुत मेहनत करूँगी। मैं दशहरे में सरस्वती पूजा के दिन को अपनी अंतिम सीमा रखूँगी। उस दिन मुझे खुद से कोई भी उपन्यास पढ़ने में सक्षम होना चाहिए। मैं आत्मनिर्भर होना चाहती हूँ।’
मुझे उनके चेहरे पर दृढ़ संकल्प दिखा। फिर भी मैं उन पर हँस पड़ी।
अव्वा, बासठ साल की उम्र में आप वर्णमाला सीखना चाहती हैं? आपके सारे बाल सफेद हो गए हैं, आपके हाथ झुर्रीदार हैं, आप चश्मा पहनती हैं और रसोई में इतना काम करती हैं…
बचकाने ढंग से मैंने बूढ़ी महिला का मज़ाक उड़ाया। लेकिन वे बस मुस्कुराईं।
अच्छे काम के लिए अगर आप दृढ़ निश्चयी हैं, तो आप किसी भी बाधा को पार कर सकते हैं। मैं किसी से भी ज़्यादा मेहनत करूँगी लेकिन यह करके रहूँगी। सीखने के लिए कोई आयु सीमा नहीं होती।
अगले दिन से मैंने ट्यूशन शुरू की। अव्वा एक अद्भुत छात्रा थीं। उन्होंने जितना होमवर्क किया वह अद्भुत था। वे पढ़तीं, दोहरातीं, लिखतीं और याद करतीं। मैं उनकी एकमात्र शिक्षिका थी और वे मेरी पहली छात्रा थीं। मुझे तब थोड़ा सा भी अंदाजा नहीं था कि एक दिन मैं कंप्यूटर विज्ञान में शिक्षिका बनूँगी और सैकड़ों छात्रों को पढ़ाऊँगी।
दशहरा उत्सव हमेशा की तरह आया। चुपके से मैंने काशी यात्रे खरीदी जो तब तक उपन्यास के रूप में प्रकाशित हो चुकी थी। मेरी दादी ने मुझे पूजा स्थान पर बुलाया और मुझे एक स्टूल पर बैठाया। उन्होंने मुझे फ्रॉक के कपड़े का उपहार दिया। फिर उन्होंने कुछ असामान्य किया। वे झुकीं और उन्होंने मेरे पैर छुए। मैं हैरान और अचंभित रह गई। बड़े-बुजुर्ग कभी छोटों के पैर नहीं छूते। हम हमेशा भगवान, बड़ों और शिक्षकों के पैर छूते हैं। हम इसे सम्मान का प्रतीक मानते हैं। यह एक महान परंपरा है लेकिन आज इसका उल्टा हो गया था। यह सही नहीं था।
मैंने उनके नमस्कार का प्रत्युत्तर उनके पैर छूकर दिया और अपना उपहार अपनी पहली छात्रा को दिया। उन्होंने इसे खोला और तुरंत त्रिवेणी द्वारा लिखित काशी यात्रे और प्रकाशक का नाम पढ़ा। तब मुझे पता चला कि मेरी छात्रा ने शानदार अंकों के साथ पास कर लिया है।
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कक्षा 9 अंग्रेजी कावेरी कविता 1 हिंदी अनुवाद
भारत आवर लैंड – कविता की पंक्ति-दर-पंक्ति हिंदी में
शक्तिशाली हिमवंत हमारा है-
धरती पर कहीं इसके समान नहीं।
उदार गंगा हमारी है-
उसकी गरिमा से कौन सी नदी मेल खा सकती है?
पवित्र उपनिषद हमारे हैं-
उनके समान कौन से ग्रंथ हैं?
यह धूप सी चमकती सुनहरी भूमि हमारी है-
वह अद्वितीय है, आओ उसकी प्रशंसा करें!
यहाँ वीर योद्धा रहे हैं,
कई ऋषियों ने इस भूमि को पवित्र किया है।
यहाँ सबसे दिव्य संगीत सुना गया है,
और यहाँ सभी शुभ चीजें पाई जाती हैं।
यहाँ ब्रह्म-ज्ञान की जड़ें जमी हैं,
और यहाँ बुद्ध ने अपना धम्म प्रचारित किया।
भारत अत्यंत प्राचीन है,
वह अद्वितीय है, आओ उसकी प्रशंसा करें!
काव्य-अलंकार (काव्य-सौंदर्य):
| काव्य-अलंकार | हिंदी नाम | कविता में उदाहरण |
|---|---|---|
| Metaphor | रूपक | भारत को ज्ञान की भूमि कहना |
| Personification | मानवीकरण | प्रकृति को जीवित रूप देना |
| Alliteration | अनुप्रास | एक ही वर्ण की पुनरावृत्ति |
| Imagery | बिम्ब-योजना | दृश्य चित्रण |
कविता से मिलने वाली शिक्षाएँ:
- अपने देश की धरोहर पर गर्व करना चाहिए
- भारत की संस्कृति और ज्ञान की परंपरा अमूल्य है
- आत्मविश्वास ही सफलता की कुंजी है
कक्षा 9 कावेरी अध्याय 1 महत्वपूर्ण प्रश्न-उत्तर
अति लघु उत्तरीय प्रश्न (1-2 अंक):
- सुधा मूर्ति की दादी का नाम क्या था?
उत्तर:
कृष्टक्का। - कन्नड़ की कौन सी उपन्यास दादी को बहुत पसंद थी?
उत्तर:
त्रिवेणी का ‘काशी यात्रे’। - दादी को पढ़ना सिखाने में कितना समय लगा?
उत्तर:
लगभग तीन महीने। - भारत आवर लैंड कविता के कवि कौन हैं?
उत्तर:
सुब्रमण्यम भारती।
लघु उत्तरीय प्रश्न (3-4 अंक):
- दादी ने पढ़ना सीखने का निर्णय क्यों किया?
उत्तर:
जब पोती बाहर गई तो दादी अपनी प्रिय कहानी का अगला भाग नहीं पढ़ सकीं। इससे उन्हें बहुत दुख हुआ और उन्हें एहसास हुआ कि अनपढ़ होने से वे किसी पर निर्भर हैं। इसलिए उन्होंने स्वयं पढ़ना सीखने का दृढ़ संकल्प लिया। - जन्मदिन पर दादी ने पोती को क्या दिया और क्यों?
उत्तर:
दादी ने पोती को एक सुंदर साड़ी और अपना आशीर्वाद दिया। साथ ही उन्होंने पोती के पैर छुए क्योंकि वे उसे अपनी शिक्षिका मानती थीं। यह उनकी कृतज्ञता और विनम्रता का प्रतीक था।
दीर्घ उत्तरीय प्रश्न (5-6 अंक):
- हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड कहानी से आपको क्या शिक्षा मिलती है? विस्तार से लिखिए।
उत्तर:
इस कहानी से हमें अनेक महत्वपूर्ण शिक्षाएँ मिलती हैं। प्रथमतः, सीखने की कोई उम्र नहीं होती – दादी ने साठ वर्ष की उम्र में पढ़ना सीखा। द्वितीयतः, शिक्षा आत्मनिर्भरता देती है। तृतीयतः, पीढ़ियों के बीच प्रेम और सम्मान होना चाहिए। दादी ने पोती को शिक्षिका माना – यह बताता है कि ज्ञान देने वाला चाहे जो भी हो, उसका सम्मान करना चाहिए।
कक्षा 9 कावेरी अध्याय 1 परीक्षा उपयोगी अभ्यास प्रश्न
रिक्त स्थान भरो:
- सुधा मूर्ति की दादी का नाम __________ था।
- कन्नड़ की प्रसिद्ध लेखिका __________ थीं।
- दादी को पढ़ना सिखाने में __________ महीने लगे।
- भारत आवर लैंड कविता __________ ने लिखी।
सही/गलत बताओ:
- दादी स्कूल नहीं गई थीं। (सही/गलत) — सही
- पोती ने दादी को हिंदी पढ़ना सिखाया। (सही/गलत) — गलत
- दादी ने पोती को जन्मदिन पर साड़ी दी। (सही/गलत) — सही
कावेरी पाठ 1 से सम्बंधित लेखन कौशल
निबंध विषय:
- शिक्षा का महत्व
- सीखने की कोई उम्र नहीं होती
- बड़ों का सम्मान
पत्र लेखन:
अपनी दादी को पत्र लिखें जिसमें उन्हें पढ़ने के लिए प्रेरित करें।
संवाद लेखन:
पोती और दादी के बीच उस दिन का संवाद लिखें जब दादी ने पढ़ना सीखने का निर्णय लिया।
पाठ से मिलने वाली शिक्षाएँ
- सीखने की कोई उम्र नहीं होती
- शिक्षा से आत्मनिर्भरता आती है
- ज्ञान देने वाले का सदा सम्मान करना चाहिए
- दृढ़ संकल्प से कोई भी लक्ष्य पाया जा सकता है
- पीढ़ियों के बीच प्रेम और सेतु होना चाहिए
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड
हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड कावेरी की किस इकाई में है और इसे किसने लिखा है?
यह पाठ कावेरी पुस्तक की पहली इकाई में है। इसे प्रसिद्ध भारतीय लेखिका सुधा मूर्ति ने लिखा है। सुधा मूर्ति पद्म विभूषण से सम्मानित हैं और इनफोसिस फाउंडेशन की संस्थापक अध्यक्ष हैं। यह उनके बचपन की एक सच्ची घटना पर आधारित कहानी है।
कक्षा 9 इंग्लिश कावेरी अध्याय 1 कहानी में ‘काशी यात्रे’ का क्या महत्व है?
‘काशी यात्रे’ कन्नड़ की प्रसिद्ध लेखिका त्रिवेणी का उपन्यास है जो उस समय ‘कर्मवीर’ पत्रिका में धारावाहिक रूप में प्रकाशित हो रहा था। यह उपन्यास एक बूढ़ी महिला की काशी जाने की तीव्र इच्छा और एक अनाथ लड़की की प्रेम कहानी पर आधारित है। कहानी में दादी कृष्टक्का को इस उपन्यास से बहुत लगाव था क्योंकि वे खुद भी कभी काशी नहीं जा पाई थीं और उपन्यास की नायिका से स्वयं को जोड़ती थीं। यही उपन्यास दादी को पढ़ना सीखने की प्रेरणा का मुख्य कारण बना।
दादी ने अचानक पढ़ना सीखने का निर्णय क्यों लिया?
जब लेखिका एक शादी में गई और एक सप्ताह के लिए रुक गई, उस दौरान साप्ताहिक पत्रिका आई पर दादी उसे पढ़ नहीं सकीं। उन्हें ‘काशी यात्रे’ का अगला अंश पढ़ने के लिए किसी पर निर्भर रहना पड़ा। इसी पल उन्हें अपनी अनपढ़ता का गहरा दर्द महसूस हुआ। उन्होंने सोचा — “धन होने से क्या फायदा जब मैं स्वतंत्र नहीं हूँ?” यह अहसास ही उनके संकल्प का आधार बना। उन्होंने ठान लिया कि दशहरे की सरस्वती पूजा तक वे खुद से उपन्यास पढ़ने में सक्षम हो जाएंगी।
दादी ने पोती के पाँव क्यों छुए – क्या यह सही था?
भारतीय परंपरा में बड़े छोटों के पाँव नहीं छूते, इसलिए यह घटना असाधारण थी। पर दादी ने स्पष्ट किया — “मैं अपनी पोती के पाँव नहीं छू रही, अपनी शिक्षिका के पाँव छू रही हूँ।” हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि शिक्षक का सम्मान उम्र, लिंग और रिश्ते से ऊपर होता है। इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि दादी में अहंकार नहीं था — वे विनम्र थीं और सच्ची कृतज्ञता जानती थीं। यह पाठ का सबसे भावपूर्ण और यादगार दृश्य है।
कक्षा 9 इंग्लिश कावेरी अध्याय 1 से हमें जीवन में क्या सीख मिलती है?
इस पाठ से तीन सबसे महत्वपूर्ण सीखें मिलती हैं। पहली — सीखने की कोई उम्र नहीं होती, साठ वर्ष की दादी ने यह साबित किया। दूसरी — शिक्षा ही असली स्वतंत्रता है, क्योंकि धन होते हुए भी दादी अनपढ़ होने के कारण निर्भर थीं। तीसरी — शिक्षक का सम्मान हमेशा करना चाहिए चाहे वह छोटा हो या बड़ा। इसके अलावा यह पाठ पीढ़ियों के बीच प्रेम और दृढ़ संकल्प का भी सुंदर उदाहरण है।
क्या कक्षा 9 इंग्लिश कावेरी अध्याय 1 सीबीएसई और यूपी बोर्ड दोनों के लिए है?
हाँ, सत्र 2026-27 से यह पाठ एनसीईआरटी की नई पुस्तक कावेरी का हिस्सा है जो सीबीएसई, यूपी बोर्ड, मध्य प्रदेश बोर्ड, राजस्थान बोर्ड सहित सभी बोर्डों में लागू है जो एनसीईआरटी पुस्तकें पढ़ाते हैं।
भारत आवर लैंड किसने लिखी और इसमें क्या कहा गया है?
यह कविता तमिल के महान कवि और स्वतंत्रता सेनानी सुब्रमण्यम भारती ने लिखी है। इस कविता में भारत की महानता का गुणगान किया गया है। कवि ने हिमालय, गंगा और उपनिषदों को अद्वितीय बताया है। उन्होंने वीर योद्धाओं, ऋषि-मुनियों, बुद्ध के धर्म और ब्रह्म-ज्ञान का उल्लेख करते हुए कहा है कि यह स्वर्णिम भूमि बेजोड़ है और इसकी प्रशंसा करनी चाहिए।
कावेरी पाठ 1 भारत आवर लैंड में भारत की किन-किन विशेषताओं का उल्लेख है?
कविता में भारत की चार प्रमुख विशेषताएँ बताई गई हैं। पहली — प्राकृतिक महानता जैसे हिमालय और गंगा जिनकी बराबरी दुनिया में कहीं नहीं। दूसरी — आध्यात्मिक विरासत जैसे उपनिषद, ब्रह्म-ज्ञान और बुद्ध का धर्म। तीसरी — वीरता की परंपरा जैसे यहाँ के वीर योद्धा और महान ऋषि-मुनि। चौथी — सांस्कृतिक समृद्धि जैसे दिव्य संगीत और शुभ परंपराएँ।
कविता भारत आवर लैंड का केंद्रीय भाव क्या है और यह किस विषय से जुड़ी है?
इस कविता का केंद्रीय भाव राष्ट्रप्रेम और देशगौरव है। कवि चाहते हैं कि हर भारतीय अपनी धरती की महानता को पहचाने और उस पर गर्व करे। यह कविता हाउ आई टॉट माई ग्रैंडमदर टू रीड पाठ की थीम – अपनी जड़ों से जुड़ाव और विरासत का सम्मान – से भली-भाँति जुड़ती है।
