एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 12 क: रक्षति क: रक्षित:
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 12 द्वादश: पाठ: क: रक्षति क: रक्षित: के अभ्यास के प्रश्न उत्तर हिंदी मीडियम में सीबीएसई सत्र 2024-25 के लिए यहाँ से निशुल्क डाउनलोड किए जा सकते हैं। कक्षा 8 संस्कृत के पाठ 12 में पर्यावरण सुधार और स्वच्छता के बारे में बताया गया है। इस पाठ में संवाद के माध्यम से पर्यावरणीय विभिन्न सुधारों के बारे में विद्यार्थियों को अवगत कराया गया है। पाठ को समझने के लिए पाठ के हिंदी अनुवाद की भी मदद ली जा सकती है, जो तिवारी अकादमी पर निशुल्क उपलब्ध है।
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 12 क: रक्षति क: रक्षित: के उत्तर
एनसीईआरटी समाधान कक्षा 8 संस्कृत द्वादश: पाठ: क: रक्षति क: रक्षित:
कक्षा 8 संस्कृत अध्याय 12 क: रक्षति क: रक्षित: का हिंदी अनुवाद
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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(ग्रीष्मर्तौ सायंकाले विद्युदभावे प्रचण्डोष्मणा पीडित: वैभव: गृहात् निष्क्रामति) | (गर्मी की ऋतु में शाम को बिजली के अभाव में तीव्र गर्मी के द्वारा पीड़ित वैभव घर से बाहर निकलता है) |
वैभव: – अरे परमिन्दर्! अपि त्वमपि विद्युदभावेन पीडित: बहिरागत:? | वैभव – अरे परमिन्दर्! क्या तुम भी बिजली के अभाव से पीड़ित होकर बाहर आ गए हो? |
परमिन्दर् – आम् मित्र! एकत: प्रचण्डातपकाल: अन्यतश्च विद्युदभाव: परं बहिरागत्यापि पश्यामि यत् वायुवेग: तु सर्वथाऽवरुद्ध:। | परमिन्दर – हाँ, मित्र! एक तो तीव्र गर्मी का समय, दूसरे बिजली का अभाव। परन्तु बाहर आकर भी देखता हूँ कि वायु की गति पूर्णतः रुक गई है। |
सत्यमेवोक्तम् प्राणिति पवनेन जगत् सकलं, सृष्टिर्निखिला चैतन्यमयी। | सच ही कहा है पवन के द्वारा समस्त जगत् तथा चैतन्यपूर्ण यह समग्र सृष्टि जीवित है। |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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क्षणमपि न जीव्यतेऽनेन विना, सर्वातिशायिमूल्य: पवन:॥ | इसके बिना क्षणभर भी जीवित नहीं रहा जाता है। सबसे अधिक मूल्य वाली वायु है। |
विनय: – अरे मित्र! शरीरात् न केवलं स्वेदबिन्दव: अपितु स्वेदधारा: इव प्रस्रवन्ति स्मृतिपथमायाति शुक्लमहोदयै: रचित: श्लोक:। | विनय – अरे मित्र! शरीर से न केवल पसीने की बूँदें, अपितु पसीने की नदियाँ बह रही हैं। |
तप्तैर्वाताघातैरवितुं लोकान् नभसि मेघा:, आरक्षिविभागजना इव समये नैव दृश्यन्ते॥ | शुक्लमहोदय के द्वारा रचित श्लोक याद आ रहा है गर्म लू से संसार की रक्षा करने के लिए आकाश में बादल पुलिस विभाग के लोगों के समान समय पर दिखाई नहीं पड़ते हैं। |
परमिन्दर् – आम् अद्य तु वस्तुत: एव- निदाघतापतप्तस्य, याति तालु हि शुष्कताम्। | परमिन्दर् – हाँ! आज तो वास्तव में गर्मी के ताप से पीड़ित मनुष्य का तालु सूख जाता है। |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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पुंसो भयार्दितस्येव, स्वेदवज्जायते वपु:॥ | भयभीत मनुष्य का शरीर पसीने से तर हो जाता है। |
जोसेफ: – मित्राणि! यत्र-तत्र बहुभूमिकभवनानां, भूमिगतमार्गाणाम्, विशेषत: मैट्रोमार्गाणां, उपरिगामिसेतूनाम् इत्यादीनां निर्माणाय वृक्षा: कर्त्यन्ते तर्हि अन्यत् किमपेक्ष्यते अस्माभि:? | मित्र! जहाँ-तहाँ अत्यधिक पृथ्वी पर भवनों का, भूमिगत मार्गों का, विशेषरूप से मैट्रो के मार्गों का, ऊपर से गुजरने वाले पुलों का-इत्यादि के निर्माण के लिए वृक्ष काटे जाते हैं। अवश्य ही हमसे क्या अपेक्षा की जाती है? |
वयं तु विस्मृतवन्त: एव- एकेन शुष्कवृक्षेण दह्यमानेन वह्निना। | हम तो भूल ही गए अग्नि के द्वारा जलाए जाते हुए एक सूखे वृक्ष के द्वारा ही समग्र वन जला दिया जाता है, |
दह्यते तद्वनं सर्वं कुपुत्रेण कुलं यथा॥ | जिस प्रकार कुपुत्र के द्वारा कुल (नष्ट हो जाता है।) |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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परमिन्दर् – आम् एतदपि सर्वथा सत्यम्। आगच्छन्तु नदीतीरं गच्छाम:। | परमिन्दर् – हाँ, यह भी सत्य है! आओ, नदी के किनारे चलते हैं। वहाँ कुछ शान्ति प्राप्त कर सकेंगे। |
तत्र चेत् काञ्चित् शान्तिं प्राप्तुं शक्ष्येम (नदीतीरं गन्तुकामा: बाला: यत्र-तत्र अवकरभाण्डारं दृष्ट्वा वार्तालापं कुर्वन्ति) | वहाँ कुछ शान्ति प्राप्त कर सकेंगे। (नदी के किनारे जाने के इच्छुक बालक जहाँ-तहाँ गन्दगी के ढेर देखकर वार्तालाप करते हैं) |
जोसेफ: – पश्यन्तु मित्राणि यत्र-तत्र प्लास्टिकस्यूतानि अन्यत् चावकरं प्रक्षिप्तमस्ति। | जोसेफ – मित्र, देखो! जहाँ-तहाँ प्लास्टिक का थैला तथा अन्य कूड़ा फेंका हुआ है। |
कथ्यते यत् स्वच्छता स्वास्थ्यकरी परं वयं तु शिक्षिता: अपि अशिक्षित इवाचराम: अनेन प्रकारेण…. | कहा जाता है कि स्वच्छता स्वास्थ्यकर होती है, परन्तु हम शिक्षित होते हुए भी अनपढ़ों की तरह आचरण करते हैं, |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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वैभव: – गृहाणि तु अस्माभि: नित्यं स्वच्छानि क्रियन्ते परं किमर्थं स्वपर्यावरणस्य स्वच्छतां प्रति ध्यानं न दीयते | वैभव – इस प्रकार हम घरों को नित्य स्वच्छ करते हैं, परन्तु किसलिए अपने पर्यावरण की स्वच्छता की ओर ध्यान नहीं दिया जाता है। |
विनय: – पश्य-पश्य उपरित: इदानीमपि अवकर: मार्गे क्षिप्यते। | विनय – देखो, देखो। ऊपर से अब भी मार्ग में कूड़ा डाला जा रहा है। |
(आहूय) महोदये! कृपां कुरु मार्गे एतत् तु सर्वथा अशोभनं कृत्यम्। | (बुलाकर)-देवी! मार्ग में भ्रमण करने वालों पर कृपा करो। यह तो पूर्णतः अशोभन कार्य है। |
अस्मद्सदृशेभ्य: बालेभ्य: भवतीसदृशै: एवं संस्कारा देया:। | हमारे जैसे बच्चों को आप जैसी (महिलाओं) को संस्कार देना चाहिए। |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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रोजलिन् – आम् पुत्र! सर्वथा सत्यं वदसि। क्षम्यन्ताम्। इदानीमेवागच्छामि। | रोजलिन् – हाँ पुत्र! तुम पूर्णरूप से सच कहते हो। क्षमा कर देना। अब मैं जान गई हूँ। |
(रोजलिन् आगत्य बालै: साकं स्वक्षिप्तमवकरं मार्गे विकीर्णमन्यदवकरं चापि सङ् गृह्य अवकरकण्डोले पातयति) | (रोजलिन् ने आकर बालकों के साथ अपने द्वारा फेंके गए कूड़े को मार्ग तथा शेष कूड़े को कूड़ादान में डाल दिया।) |
बाला: – एवमेव जागरूकतया एव प्रधानमन्त्रिमहोदयानां स्वच्छताऽभियानमपि गतिं प्राप्स्यति। | बालक – इसी प्रकार जागरूकता से ही प्रधानमन्त्री महोदय का स्वच्छता अभियान भी गति प्राप्त करेगा। |
विनय: – पश्य पश्य तत्र धेनु: शाकफलानामावरणै: सह प्लास्टिकस्यूतमपि खादति। | विनय – देखो, देखो। वहाँ गाय सब्जी और फलों के छिलकों के साथ प्लास्टिक के थैले को भी खा रही है। जैसे तैसे-इसे हटाना चाहिए। |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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यथाकथञ्चित् निवारणीया एषा। | जैसे तैसे-इसे हटाना चाहिए। |
(मार्गे कदलीफलविक्रेतारं दृष्ट्वा बाला: कदलीफलानि क्रीत्वा धेनुमाह्वयन्ति भोजयन्ति च, मार्गात् प्लास्टिकस्यूतानि चापसार्य पिहिते अवकरकण्डोले क्षिपन्ति) | (मार्ग में केला बेचने वाले को देखकर बच्चे केले खरीदकर गाय को बुलाते हैं और खिलाते हैं। मार्ग से प्लास्टिक के थैलों को हटाकर ढके हुए कूड़ादान में डालते हैं।) |
परमिन्दर् – प्लास्टिकस्य मृत्तिकायां लयाभवात् अस्माकं पर्यावरणस्य कृते महती क्षति: भवति। | परमिन्दर – प्लास्टिक के मिट्टी में नष्ट न होने के कारण हमारे पर्यावरण की महान् हानि होती है। |
पूर्वं तु कार्पासेन, चर्मणा, लौहेन, लाक्षया, मृत्तिकया, काष्ठेन वा निर्मितानि वस्तूनि एव प्राप्यन्ते स्म। | पहले तो कपास से, चमड़े से, लोहा से, लाख से, मिट्टी से अथवा काठ से निर्मित वस्तुएँ ही प्राप्त होती थीं। |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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अधुना तत्स्थाने प्लास्टिकनिर्मितानि वस्तूनि एव प्राप्यन्ते | अब उसके स्थान पर प्लास्टिक निर्मित वस्तुएँ ही प्राप्त होती हैं। |
वैभव: – आम् घटिपट्टिका, अन्यानि बहुविधानि पात्राणि, कलमेत्यादीनि सर्वाणि तु प्लास्टिकनिर्मितानि भवन्ति। | वैभव – हाँ, घड़ी की पट्टियाँ, अन्य बहुत से पात्र, कलम इत्यादि सभी प्लास्टिक से निर्मित होती हैं। |
जोसेफ: – आम् अस्माभि: पित्रो: शिक्षकाणां सहयोगेन प्लास्टिकस्य विविधपक्षा: विचारणीया:। | जोसेफ – हाँ, हमारे माता-पिता तथा गुरु जी के सहयोग से प्लास्टिक के विविध पक्षों पर विचार करना चाहिए। |
पर्यावरणेन सह पशव: अपि रक्षणीया:। | पर्यावरण के साथ पशुओं की भी रक्षा करनी चाहिए। |
संस्कृत वाक्य | हिंदी अनुवाद |
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(एवमेवालपन्त: सर्वे नदीतीरं प्राप्ता:, नदीजले निमज्जिता: भवन्ति गायन्ति च) | (इस प्रकार वार्तालाप करते हुए सभी नदी के किनारे पहुँच गए और नदी के जल में स्नान किया तथा गाते हैं-) |
सुपर्यावरणेनास्ति जगत: सुस्थिति: सखे। जगति जायमानानां सम्भव: सम्भवो भुवि॥ | सुपर्यावरण के द्वारा ही जगत की सुन्दर स्थिति है। संसार में उत्पन्न होने वालों की उत्पत्ति पृथ्वी पर है। |
सर्वे – अतीवानन्दप्रदोऽयं जलविहार:। | सभी – जल में अति आनंद प्राप्त करते हैं। |