एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 14 अहह आः च

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 14 अहह आः च पाठ्यपुस्तक रुचिरा के प्रथम भाग के सभी प्रश्न उत्तर सीबीएसई सत्र 2022-2023 के लिए संशोधित रूप में यहाँ से प्राप्त किए जा सकते हैं। किसी भी छात्र को पाठ पढ़कर समझने को कोई परेशानी न हो इसलिए पाठ का हिंदी रूपांतरण भी दिया गया है। एक एक पंक्ति को सरल शब्दों में हिंदी अनुवाद करके लिखा गया है। इसे पढ़कर छात्रों को पूरा पाठ आसानी से समझ आ जाता है और अध्याय आसानी से याद हो जाता है।

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कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 14 के लिए एनसीईआरटी समाधान

संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
अजीज: सरल: परिश्रमी च आसीत्‌। अजीज सरल स्वभाव वाला और मेहनती व्यक्ति था।
स: स्वामिन: एव सेवायां लीन: आसीत्‌।वह स्वामी की सेवा में ही लगा रहता था।
एकदा स: गृहं गन्तुम्‌ अवकाशं वाञ्छति।एक दिन वह घर जाने के लिए छुट्टी चाहता था।
स्वामी चतुर: आसीत्‌।स्वामी (मालिक) चालाक था।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
स: चिन्तयति-‘अजीज: इव न कोऽपि अन्य: कार्यकुशल:। वह सोचता है- अजीज जैसा कोई भी दूसरा कार्य कुशल नहीं है।
एष अवकाशस्य अपि वेतनं ग्रहीष्यति।’ यह छुट्टी का भी वेतन लेगा।’
एवं चिन्तयित्वा स्वामी कथयति-‘अहं तुभ्यम्‌ अवकाशस्य वेतनस्य च सर्वं धनं दास्यामि।’ यह सोचकर मालिक कहता है- “मैं तुम्हें छुट्टी और वेतन का सारा पैसा दूँगा।
परम्‌ एतदर्थं त्वं वस्तुद्वयम्‌ आनय-‘अहह!’ ‘आ:!’ च इति।परंतु तुम इसके बदले में, मेरे लिए दो वस्तु लाओ-‘अहह!’ और ‘आ’ बस यह।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
एतत्‌ श्रुत्वा अजीज: वस्तुद्वयम्‌ आनेतुं निर्गच्छति।यह सुनकर अजीज दोनों वस्तुएँ लाने के लिए निकलता है।
स: इतस्तत: परिभ्रमति।वह इधर-उधर घूमता है।
जनान्‌ पृच्छति। आकाशं पश्यति। लोगों पूछता, आकाश को देखता है।
धरां प्रार्थयति।पृथ्वी से प्रार्थना करता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
परं सफलतां नैव प्राप्नोति।किंतु सफलता प्राप्त नहीं करता।
चिन्तयति, परिश्रमस्य धनं स: नैव प्राप्स्यति। सोचता परिश्रम का धन वह नहीं पा सकेगा।
कुत्रचित्‌ एका वृद्धा मिलति।कहीं पर एक बुढ़िया मिलती है।
स: तां सर्वां व्यथां श्रावयति। वह उसे सारी व्यथा सुनाता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सा विचारयति-‘स्वामी अजीजाय धनं दातुं न इच्छति। वह सोचती है- “स्वामी अजीज को धन नहीं देना चाहता।
सा तं कथयति-‘अहं तुभ्यं वस्तुद्वयं ददामि।’ वह उसे कहती है-“मैं तुम्हें दो वस्तुएँ देती हूँ।
परं द्वयम्‌ एव बहुमूल्यकं वर्तते। किंतु दोनों ही कीमती (बहुमूल्य) हैं।”
प्रसन्न: स: स्वामिन: समीपे आगच्छति।वह प्रसन्न होकर मालिक के पास जाता है!
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
दृष्ट्‌वा स्वामी चकित: भवति। अजीज को देखकर स्वामी चकित होता है।
स्वामी शनै: शनै: पेटिकाम्‌ उद्‌घाटयति। स्वामी धीरे-धीरे पेटी खोलता है।
पेटिकायां लघुपात्रद्वयम्‌ आसीत्‌। पेटी में दो छोटे पात्र (बरतन) थे।
प्रथमं स: एकं लघुपात्रम्‌ उद्‌घाटयति।पहले वह एक छोटा पात्र खोलता है।
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
सहसा एका मधुमक्षिका निर्गच्छति। सहसा एक मधुमक्खी निकलती है
तस्य च हस्तं दशति। वह उसके हाथ को डसती है।
स्वामी उच्चै: वदति-‘अहह!।मालिक ज़ोर से बोल उठता है अहह (अरे।)।
द्वितीयं लघुपात्रम्‌ उद्‌घाटयति। दूसरा छोटा पात्र खोलता है
संस्कृत वाक्यहिन्दी अनुवाद
एका अन्या मक्षिका निर्गच्छति।एक दूसरी मक्खी निकलती है।
स: ललाटे दशति। वह मस्तक पर डसती है।
पीडित: स: अत्युच्चै: चीत्करोति-‘आ:’ इति।व्यथित (होकर) वह बहुत जोर चिल्लाता है-‘आ:।
अजीज: सफल: आसीत्‌। ऐसा सुनकर अजीज सफल हुआ।
स्वामी तस्मै अवकाशस्य वेतनस्य च पूर्णं धनं ददाति।स्वामी उसे उसके अवकाश और वेतन के पूरे पैसे देता है।
कक्षा 6 संस्कृत अध्याय 14 एनसीईआरटी समाधान
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