एनसीईआरटी समाधान कक्षा 5 ईवीएस अध्याय 1 कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 5 ईवीएस अध्याय 1 कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को पर्यावरण अध्ययन अभ्यास के प्रश्न उत्तर सवाल जवाब सत्र 2022-2023 के लिए यहाँ दिए गए हैं। कक्षा 5 पर्यावरण पाठ 1 के सभी प्रश्नों को पीडीएफ और विडियो के माध्यम से समझाया गया है।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 5 ईवीएस अध्याय 1

पाठ परिचय – कैसे पहचाना चींटी ने दोस्त को

प्रस्तुत पाठ में जीव-जंतुओं, पक्षियों और जानवरों के देखने, सूंघने और ध्वनी संकेतों को सुनने और जानने की शक्तियों के बारे में बताया गया है। चील, बाज़ और गिद्ध जैसे पक्षी मनुष्य की तुलना में चार गुना ज़्यादा दूर से देख पाते हैं। जो चीज़ हमें दो मीटर की दूरी से दिखाई पड़ती है, वही चीज़ ये पक्षी आठ मीटर की दूरी से देख लेते हैं। सुनने की शक्ति की बात की जाए तो कुत्तों की सुनने की शक्ति बहुत तेज़ होती है। सूंघने की शक्ति की बात की जाए तो चींटी और कुत्ते में सबसे तेज़ होती है। बहुत साल पहले वैज्ञानिक ने पता लगाया कि चीटियाँ चलते हुए ज़मीन पर कुछ ऐसा छोड़ती हैं, जिसे सूँघकर पीछे से आने वाली चीटियों को रास्ता मिल जाता है।

जानवरों द्वारा गंध की पहचान

कुछ नर कीड़े-मकोड़े, अपनी मादा कीड़े की गंघ से उसकी पहचान कर लेते हैं। मच्छर हमारे शरीर की गंघ ख़ासकर पैरों के तलवे की और शरीर की गर्मी से हमें ढूंढ लेता है। रेशम का कीड़ा अपनी मादा की गंध को कई किलोमीटर की दूरी से ही पहचान लेता हैं। सड़कों पर कुत्तों की भी अपनी जगह बाँटी हुई होती है, एक कुत्ता दूसरे कुत्ते के मल-मूत्र की गंघ से जान लेता है कि उसके इलाके में बाहर का कुत्ता आया था। कुत्तों की सूंघने की शक्ति का उपयोग पुलिस अपने सिखाए हुए कुत्तों से बम्ब, ड्रग्स और अन्य कुछ सामानों का पता लगाने के लिए करती है।

जानवरों की तरह मनुष्य को भी सूँघने की शक्ति मिली हुई है, कपड़े, रबड़, प्लास्टिक और अन्य खाने वाली चीजों के जलने की गंघ से पता चल जाता है। किसी खाने वाली वस्तु को सूँघने से उसके खराब होने का पता चलता है। इसी तरह अलग-अलग सुगंध से हम उस चीज़ को पहचान लेते हैं। अकसर हम किसी गंघ से तब ज़्यादा परेशान होते है, जब हमारा मन उसको गंदा मानता है। अगर हम मन बना लें तो वही गंघ उतना परेशान नहीं करती है।

दृश्य और श्रवण शक्ति का कमाल

पक्षियों के देखने की बात की जाएँ तो कई पक्षी अपनी गर्दन बहुत ज़्यादा हिलाते हैं, क्योंकि ज़्यादातर पक्षियों की आँखों की पुतली घूम नहीं सकती वे अपनी गर्दन घुमाकर ही आस-पास देखते हैं। उल्लू अपनी गर्दन को दोनों तरफ 180 के एंगल तक घुमा कर देख सकता है। मनुष्य को सभी रंग आराम से दिखाई देते है, पर सभी दिन में जागने वाले जीवों को उतने रंग दिखाई नहीं देते हैं। रात में जागने वाले जानवरों को तो हर चीज़ सफ़ेद और काली ही दिखाई देती हैं। बाघ अँधेरे में हम से छह गुना बेहतर देख सकता हैं। बाघ की मूँछे हवा में हुए कंपन को भाँप लेती है। और उसे शिकार की बिल्कुल सही स्थिति का पता चल जाता है।

हाथी के कान उसे हवा करने के साथ किसी भी आवाज़ को अच्छे से सुनने में मदद करते हैं। यदि हम कान के पीछे हाथ रख कर सुनते हैं तो हमें धीरे से बोले हुए स्वर भी आराम से सुन सकते हैं। मेज पर कान लगाकर बजाने पर हमें तेज़ आवाज़ सुनाई देती है। साँप भी कुछ ऐसे ही सुन पाता है। उसके बाह्य कान नहीं होते, पर ज़मीन में हुए कंपन को ही वह सुन पाता है।

संकेतात्मक भाषा का प्रयोग

जंगल में सभी जानवर अपने आस-पास मुसीबत आने पर एक खास आवाज़ निकालकर अपने साथियों को संदेश देते हैं। कुछ पक्षी अलग-अलग खतरों के लिए अलग-अलग आवाज़े निकालते हैं, जैसे: उड़कर आने वाले दुश्मन के लिए एक अलग तरह की आवाज़ और ज़मीन पर चलकर आने वाले के लिए दूसरी तरह की आवाज़ निकालते हैं। बाघ मौके के अनुसार अपनी आवाज़ बदलता रहता हैं। गुस्से में अलग आवाज़ और बाघिन को बुलाना हो,तो अलग आवाज़ निकालता है। मछलियाँ खतरे की चेतावनी एक दूसरे को बिजली-तरगों से देती हैं। डालफिन भी अलग-अलग तरह की आवाजें निकालती हैं, और एक-दूसरे की बात करती हैं, वैज्ञानिकों का यह मानना है कि कई जानवरों की अपनी पूरी भाषा है।

आपदा का पूर्वाभास

कुछ जानवर तूफ़ान और भूंकप आने से कुछ समय पहले अजीब हरकतें करने लगते हैं। जो लोग जंगल में रहते हैं, वे जानवरों के इस व्यवहार को समझते हैं। दिसंबर 2004 में आए सुनामी से कुछ समय पहले जानवरों के अजीब व्यवहार और उनके द्वारा दी गई चेतावनी भरी आवाज़ों को अंडमान की एक खास आदिवासी जाति समझ गई, और उन्होंने वह इलाका खाली कर दिया। इस प्रकार इस जाति के लोग सुनामी के कहर से अपनी जान बचा पाए।

जानवरों का सोने का समय

कुछ जानवरों के सोने के समय में भी बहुत अंतर होता है, स्लाथ बंदर भालू जैसे दिखते है और 17 घंटे पेड़ से उल्टे सिर लटककर मस्ती से सोते हैं। गाय पूरे दिन में दो घंटे सोती है।अजगर 21 घंटे सोता है। जिराफ़ केवल एक घंटे ही सोता है। बिल्ली 12 घंटे सोती हैं। सर्दियों के दिनों में छिपकली लंबी गहरी नींद में चली जाती हैं। लंबी भी इतनी कि कई महीनों तक फिर दिखाई नहीं देती।

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