एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 11.4

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 11.4 शंकु परिच्छेद के प्रश्नों के हल सीबीएसई और राजकीय बोर्ड सत्र 2022-2023 के लिए संशोधित रूप में यहाँ से प्राप्त करें। कक्षा 11 गणित के विद्यार्थी प्रश्नावली 11.4 के प्रश्नों को विडियो समाधान के माध्यम से सरल तरीके से सभी सवाल जवाब आसानी से समझ सकते हैं।

एनसीईआरटी समाधान कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 11.4

अतिपरवलय

एक अतिपरवलय, तल के उन सभी बिंदुओं का समुच्चय है जिनकी तल में दो स्थिर बिंदुओं से दूरी का अंतर अचर होता है।
दो स्थिर बिंदुओं को दीर्घवृत्त की नाभियाँ कहते हैं। नाभियों को मिलाने वाले रेखाखंड के मध्य बिंदु को अतिपरवलय का केंद्र कहते हैं। नाभियों से गुजरने वाली रेखा को अनुप्रस्थ अक्ष तथा केंद्र से गुजरने वाली रेखा और अनुप्रस्थ अक्ष पर लंबवत् रेखा को संयुग्मी अक्ष कहते हैं। अतिपरवलय, अनुप्रस्थ अक्ष को जिन बिंदुओं पर काटता है, उन्हें अतिपरवलय के शीर्ष कहते हैं।

अतिपरवलय की उत्केंद्रता

दीर्घवृत्त की तरह ही अनुपात e = c/a को अतिपरवलय की उत्केंद्रता कहते हैं। चूँकि c ≥ a, इसलिए उत्केंद्रता कभी भी एक से कम नहीं होती है। उत्केंद्रता के संबंध में, नाभियाँ केंद्र से ae की दूरी पर होती है।

अतिपरवलय का मानक समीकरण

अतिपरवलय का केंद्र मूल बिंदु पर और नाभियाँ x-अक्ष और y-अक्ष पर स्थित हों तो अतिपरवलय का समीकरण सरलतम होता है। अतिपरिवलय, जिसकी नाभियाँ x-अक्ष पर स्थित हैं का समीकरण व्युत्पन्न करेंगे।
मान लीजिए अतिपरवलय पर कोई बिंदु P (x, y) इस प्रकार है कि P की दूरस्थ बिंदु से O निकटस्थ बिंदु से दूरीयों का अंतर 2a है इसलिए, PF₁ – PF₂ = 2a
दूरी सूत्र से हम पाते हैं
√{(x + c)² + y²} – √{(x – c)² + y²} = 2a
या √{(x + c)² + y²} = 2a + √{(x – c)² + y²}
दोनों पक्षों का वर्ग करने पर, हम प्राप्त करते हैं,
(x + c)² + y² = 4a² + 4a√{(x – c)² + y²} + (x – c)² + y²
जिसे सरल करने पर मिलता है,
cx/a – a = √{(x – c)² + y²}
पुनः वर्ग करने व सरल करने पर हमें प्राप्त होता है,
x²/a² – y²/b² = 1
अतः अप्रतिपरवलय पर स्थित कोई बिंदु
x²/a² – y²/b² = 1
को संतुष्ट करता है।

टिप्पणी:
एक अतिपरवलय जिसमें a = b हो, समकोणीय अतिपरवलय कहलाता है।
अतिपरवलयों के मानक समीकरण के निरीक्षण से हमें निम्नलिखित निष्कर्ष प्राप्त होते हैंः
1. अतिपरवलय, दोनों निर्देशांक्षों के सापेक्ष सममित हैं क्योंकि यदि अतिपरवलय पर एक बिंदु (x, y) है तो बिंदु (- x, y), (x, – y) और (- x, – y) भी अतिपरवलय पर स्थित हैं।
2. अतिपरवलय की नाभियाँ सदैव अनुप्रस्थ अक्ष पर स्थित होती हैं। यह सदैव एक धनात्मक पद है जिसका हर अनुप्रस्थ अक्ष देता है। उदाहरणतः
x²/9 – y²/16 = 1, का अनुप्रस्थ अक्ष, x-अक्ष के अनुदिश है और इसकी लंबाई 6 है जबकि
y²/25 – x²/16 = 1, का अनुप्रस्थ अक्ष, y-अक्ष के अनुदिश है और इसकी लंबाई 10 है।

अतिपरवलय के नाभिलंब जीवा

अतिपरवलय की नाभियों से जाने वाली और अनुप्रस्थ अक्ष पर लंबवत् रेखाखंड जिसके अंत्य बिंदु अतिपरवलय पर हों, को अतिपरवलय की नाभिलंब जीवा कहते हैं।
दीर्घवृत्तों की भाँति, यह दर्शाना सरल है कि अतिपरवलय की नाभिलंब जीवा की लंबाई 2b²/a है।

कक्षा 11 गणित प्रश्नावली 11.4 शंकु परिच्छेद
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