एनसीईआरटी समाधान कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 5 कितने?
कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 5 कितने? एनसीईआरटी समाधान – अभ्यास के हल, सभी प्रश्न उत्तर सत्र 2026-27 के लिए यहाँ से निशुल्क प्राप्त किए जा सकते हैं। वह पाठ है जहाँ विद्यार्थी पहली बार जोड़ (+) और घटाव (−) के प्रतीकों से मिलते हैं। पिछले पाठों में संख्याओं को पहचानना, लिखना और 0 से 20 तक गिनना सीखने के बाद अब विद्यार्थी यह समझते हैं कि दो समूहों को मिलाने पर कुल क्या बनता है और एक समूह में से कुछ हटाने पर कितना बचता है। यह पाठ इसलिए खास है क्योंकि यहाँ गणित सीधे ज़िंदगी से आता है – दादाजी के साथ पार्क की सैर, बस में एक-एक करके उतरते विद्यार्थी, मेंढकों का पानी में कूदना, गुब्बारों का उड़ जाना। हर उदाहरण ऐसा है जो विद्यार्थी ने कहीं न कहीं देखा या महसूस किया हो। यही कारण है कि जोड़ और घटाव की यह पहली मुलाकात उन्हें बोझिल नहीं, बल्कि स्वाभाविक लगती है।
एनसीईआरटी कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 5 समाधान (2026-27 के लिए)
कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 5 के सभी प्रश्नों के हल तथा उत्तर
कक्षा 1 आनंदमय गणित पाठ 5 एनसीईआरटी समाधान – हिंदी और अंग्रेजी में
कक्षा 1 आनंदमय गणित पाठ 5 में क्या-क्या आता है?
| विषय | कैसे सिखाया गया |
|---|---|
| जोड़ की समझ | दो समूहों को मिलाकर कुल निकालना – 4+2, 3+1, 5+3 |
| जोड़ के तरीके | उँगलियों से, मोतियों की लड़ी से, संख्या पट्टी पर कूदकर |
| शून्य जोड़ने पर | 4+0=4 : कुछ न जोड़ें तो संख्या वैसी ही रहती है |
| घटाव की समझ | “बस में बैठे बच्चे पाँच” कविता और चित्र कहानियों से |
| घटाव के तरीके | “बस में बैठे बच्चे पाँच” कविता और चित्र कहानियों से |
| जोड़-घटाव दोनों | एक ही संख्या के अलग-अलग जोड़ – जैसे 8=5+3=7+1=2+6 |
| शब्द प्रश्न | राघव-सरिता के शंख, मनीषा के केले, तितलियाँ उड़ना |
“दादाजी के साथ सैर” – जहाँ से शुरू होता है जोड़
यह पाठ एक पार्क के चित्र से शुरू होता है जहाँ विद्यार्थी, बुज़ुर्ग और परिवार के लोग एक साथ हैं। पहले कुछ लोग हैं, फिर और आते हैं — और विद्यार्थी स्वाभाविक रूप से पूछते हैं: “अब कुल कितने हो गए?” यही जोड़ का सबसे सहज परिचय है। साथ ही यह दृश्य विद्यार्थियों को दादा-दादी और बड़ों के साथ समय बिताने की अहमियत भी महसूस कराता है — गणित और संस्कार एक साथ।
कक्षा 1 आनंदमय गणित: जोड़ के तीन तरीके – एक सवाल, अलग-अलग रास्ते
इस पाठ की सबसे बड़ी खूबी यह है कि एक ही सवाल को तीन अलग तरीकों से सिखाया गया है:
उँगलियों से जोड़ना
- एक हाथ पर 4 उँगलियाँ और दूसरे पर 3 दिखाओ
- सब मिलाकर गिनो — 4+3=7
- सबसे सरल और हमेशा साथ रहने वाला तरीका
मोतियों की लड़ी से
- 3 मोतियों पर रंग भरो, फिर 4 और भरो
- रंगीन मोती गिनो — 3+4=7
- हाथों को सक्रिय रखता है और आँखों से देखने में मदद करता है
संख्या पट्टी पर कूदकर
- 4 पर खड़े हो जाओ, 2 कदम आगे कूदो — 5, 6
- उत्तर है 6 — यही “कूद और जोड़” है
- मानसिक गणित की नींव तैयार करता है
कक्षा 1 आनंदमय गणित: “बस में बैठे बच्चे पाँच” – घटाव की सबसे यादगार कविता
बस में पाँच विद्यार्थी हैं। हर स्टॉप पर एक उतरता है — पाँच, चार, तीन, दो, एक और फिर कोई नहीं। यह कविता घटाव को बिना किसी उलझन के सिखाती है।
इस कविता से विद्यार्थी जो सीखते हैं:
- 5−1=4, 4−1=3 — एक-एक घटाने की समझ
- “शेष बचे” का अर्थ — घटाव का मतलब
- अभिनय करते हुए पढ़ने से गणित याद रहता है
- घटाव हमेशा “हटाने” की क्रिया से जुड़ा है
कक्षा 1 आनंदमय गणित: जोड़ और घटाव एक साथ – “कितने छिपे हैं?”
इस पाठ में एक और रोचक गतिविधि है — 10 बिंदुओं का कार्ड बनाओ और कुछ छिपा लो। साथी से पूछो: कितने दिख रहे हैं? तो कितने छिपे होंगे? यह गतिविधि जोड़ और घटाव दोनों को एक साथ मज़बूत करती है। यदि 7 दिख रहे हैं तो 10 − 7 = 3 छिपे हैं — और यदि 3 छिपे हैं तो 3 + 7 = 10।
कक्षा 1 आनंदमय गणित: कोणार्क सूर्य मंदिर का चक्र – गणित का ऐतिहासिक रूप
इस पाठ में कोणार्क (ओडिशा) के प्रसिद्ध सूर्य मंदिर के रथ-चक्र का चित्र दिया गया है जिसमें 9 के जोड़ दिखाए गए हैं। यह इस बात का खूबसूरत उदाहरण है कि गणित केवल कक्षा में नहीं, बल्कि हमारी सभ्यता और विरासत में भी हमेशा से मौजूद रहा है। अभिभावक इस अवसर का उपयोग विद्यार्थियों को भारत के ऐतिहासिक स्थलों के बारे में बताने के लिए भी कर सकते हैं।
दैनिक जीवन में कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 5 का उपयोग
विद्यार्थी रोज़ाना कई ऐसी परिस्थितियों से गुज़रते हैं जहाँ जोड़-घटाव की समझ काम आती है:
- थाली में 3 रोटियाँ थीं और 2 और आईं — कुल कितनी?
- 7 गुब्बारे थे, 2 उड़ गए — कितने बचे?
- मेरे पास 4 कंचे और दोस्त के पास 5 — मिलाकर कितने?
- 9 केले थे, 3 खा लिए — कितने शेष?
- बस में 5 थे, एक-एक उतरते गए — अंत में कितने?
- बस्ते में अपनी और मित्र की पेंसिलें मिलाकर गिनना
विद्यार्थी कक्षा 1 आनंदमय गणित अध्याय 5 में कहाँ अटकते हैं?
- जोड़ और घटाव के चिह्न (+) और (−) को आपस में मिला देना
- “4+0” जैसे सवालों में शून्य को लेकर भ्रम — कुछ विद्यार्थी उत्तर 0 लिख देते हैं
- शब्द प्रश्नों में यह न समझ पाना कि जोड़ना है या घटाना
- संख्या पट्टी पर आगे और पीछे की दिशा उलट जाना
- घटाव में बड़ी संख्या में से छोटी घटाने की बजाय उलटा करना
मज़ेदार गतिविधियाँ जो घर पर की जा सकती हैं
- रसोई में जोड़ थाली में 3 रोटियाँ रखें, 2 और रखें — “अब कुल कितनी?” यही 3+2=5 है। रोज़मर्रा की चीज़ों से जोड़ सबसे जल्दी समझ आता है।
- बस वाला खेल 5 खिलौने या पत्थर एक कागज़ पर रखें। एक-एक हटाते जाएँ और हर बार पूछें — अब कितने बचे? “बस में बैठे बच्चे पाँच” कविता साथ में गाएँ।
- बिंदु छिपाओ खेल 10 बिंदुओं का कार्ड बनाएँ। कुछ बिंदु मुट्ठी में छिपाएँ और पूछें — बाहर कितने दिख रहे हैं? तो छिपे कितने होंगे? यह जोड़ और घटाव दोनों एक साथ सिखाता है।
- पासे से जोड़ दो पासे फेंकें और दोनों के अंक जोड़ें। जिसका जोड़ ज़्यादा वह जीता। यह सीधे इसी पाठ की “पासे द्वारा जोड़ें” गतिविधि पर आधारित है।
- बस्ते से जोड़ विद्यार्थी और मित्र दोनों अपनी पेंसिलें निकालें और गिनें — कुल कितनी? इसी पाठ की “आइए देखें, आपके बस्ते में क्या है?” गतिविधि घर पर भी आसानी से की जा सकती है।
जल्दी याद करें
| क्रिया | मतलब | उदाहरण |
|---|---|---|
| जोड़ (+) | मिलाना – कुल निकालना | 3 + 4 = 7 |
| घटाव (−) | हटाना – शेष निकालना | 7 − 3 = 4 |
| कुछ + शून्य | संख्या वैसी ही रहती है | 5 + 0 = 5 |
| संख्या पट्टी आगे | जोड़ होता है | 4 से 2 आगे = 6 |
| संख्या पट्टी पीछे | घटाव होता है | 9 से 3 पीछे = 6 |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
एनसीईआरटी कक्षा 1 आनंदमय गणित के पाठ 5 “कितने?” में क्या सिखाया गया है?
इस पाठ में विद्यार्थियों को जोड़ और घटाव दोनों की बुनियादी समझ दी जाती है। “दादाजी के साथ सैर” से जोड़ की शुरुआत होती है और “बस में बैठे बच्चे पाँच” कविता से घटाव की। उँगलियों, मोतियों की लड़ी, संख्या पट्टी और पासे जैसे अलग-अलग तरीकों से जोड़-घटाव का अभ्यास कराया जाता है। पाठ 4 में सीखी संख्याओं की समझ यहाँ आकर व्यावहारिक गणित में बदलती है।
जोड़ और घटाव में विद्यार्थी अक्सर भ्रमित क्यों होते हैं और इसे कक्षा 1 आनंदमय गणित के पाठ 5 की मदद से कैसे सुधारें?
यह भ्रम आमतौर पर तब होता है जब + और − के चिह्नों को रटाया जाता है लेकिन उनका असली अर्थ नहीं समझाया जाता। कक्षा 1 के विद्यार्थियों के लिए सबसे ज़रूरी है कि पहले ठोस वस्तुओं — जैसे बटन, पत्थर या खिलौने — से दिखाया जाए। जब दो समूह मिलाए जाते हैं तो वह जोड़ है और जब किसी समूह में से कुछ हटाया जाता है तो वह घटाव है। “कुल कितने हो गए?” यह जोड़ का संकेत है और “कितने शेष बचे?” यह घटाव का। एक बार यह भाषाई अंतर समझ आ जाए तो + और − के चिह्न अपने आप याद रहते हैं और विद्यार्थी शब्द प्रश्नों में भी सही क्रिया पहचानने लगता है।
“कूद और जोड़” तथा “कूद और घटाव” का क्या फायदा है?
संख्या पट्टी पर आगे कूदना जोड़ को और पीछे कूदना घटाव को दर्शाता है। यह तरीका विद्यार्थियों को यह महसूस कराता है कि जोड़ने पर संख्या बढ़ती है यानी हम आगे जाते हैं और घटाने पर घटती है यानी हम पीछे आते हैं। जब विद्यार्थी खुद संख्या पट्टी पर कूदकर या उँगली चलाकर जवाब निकालता है तो वह केवल याद नहीं करता बल्कि समझता है। यही दृश्य और भौतिक दृष्टिकोण मानसिक गणित की नींव रखती है। जो विद्यार्थी इस तरीके को अच्छे से समझ लेते हैं वे आगे की कक्षाओं में बड़ी संख्याओं का जोड़-घटाव भी बहुत आसानी से कर पाते हैं क्योंकि उनकी सोच केवल रटने पर नहीं बल्कि समझ पर टिकी होती है।
शिक्षक कक्षा 1 आनंदमय गणित के पाठ 5 की “बस में बैठे बच्चे पाँच” कविता को कक्षा में कैसे प्रभावशाली ढंग से पढ़ाएँ?
इस कविता को केवल पढ़ाने की बजाय कक्षा में अभिनय के साथ प्रस्तुत करना सबसे प्रभावशाली तरीका है। पाँच विद्यार्थी आगे आएँ और बस में बैठे होने का अभिनय करें। जैसे-जैसे कविता आगे बढ़े, एक-एक विद्यार्थी अपनी जगह पर वापस बैठता जाए और बाकी पूरी कक्षा कविता गाए। हर स्टॉप के बाद शिक्षक पूछें — “अब बस में कितने बचे?” इस तरह 5−1=4, 4−1=3 जैसे घटाव के सवाल बिना किसी दबाव के विद्यार्थियों के मन में उतर जाते हैं। कविता की लय और अभिनय मिलकर इस पाठ को इतना यादगार बना देते हैं कि विद्यार्थी घर जाकर भी इसे दोहराते हैं और घटाव की समझ पक्की होती रहती है।
कक्षा 1 आनंदमय गणित के पाठ 5 में विद्यार्थी को शब्द प्रश्न हल करने में कठिनाई हो तो क्या करें?
शब्द प्रश्नों में सबसे पहले यह पहचानना ज़रूरी है कि प्रश्न में जोड़ की बात है या घटाव की। इसके लिए विद्यार्थियों को कुछ संकेत शब्द सिखाएँ — “कुल”, “मिलाकर”, “और” जैसे शब्द जोड़ का संकेत देते हैं जबकि “बचे”, “शेष”, “हटाए”, “खा लिए”, “उड़ गए”, “टूट गया” जैसे शब्द घटाव का। प्रश्न को पढ़कर पहले वस्तुओं से उसे दिखाएँ — जैसे राघव के 4 शंख और सरिता के 5 शंख को असल में रखकर मिलाएँ। जब विद्यार्थी खुद करके देखता है तो प्रश्न का अर्थ स्वाभाविक रूप से समझ आता है। धीरे-धीरे वह केवल शब्द पढ़कर भी सही क्रिया पहचानने लगता है और शब्द प्रश्नों का डर भी खत्म हो जाता है।
घर पर जोड़-घटाव का अभ्यास कराने का सबसे आसान तरीका क्या है?
सबसे प्रभावशाली तरीका यह है कि गणित को घर की रोज़मर्रा की गतिविधियों से जोड़ा जाए। खाने की थाली में रोटियाँ रखते हुए जोड़ करवाएँ, सब्ज़ियाँ बाँटते वक्त घटाव, फलों की टोकरी से कुछ निकालकर पूछें – “अब कितने बचे?” इसके अलावा दो पासे फेंककर जोड़ निकालने का खेल, बस्ते से पेंसिलें निकालकर मित्र की पेंसिलों से मिलाकर गिनना और “बिंदु छिपाओ” जैसी गतिविधियाँ घर पर बहुत आसानी से की जा सकती हैं। जब गणित घर की दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है तो विद्यार्थी को अलग से पढ़ाई का बोझ नहीं लगता, आत्मविश्वास बढ़ता है और जोड़-घटाव की समझ भी धीरे-धीरे पक्की होती जाती है।































